दिनांक 22 मार्च, 2021


अंक 729

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने "जल शक्ति अभियान- कैच द रेन का किया शुभारंभ

केन-बेतवा लिंक परियोजना, समृद्ध और खुशहाल बुंदेलखण्ड का निर्माण करेगी :मुख्यमंत्री श्री चौहान
केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए त्रि-पक्षीय अनुबंध पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किये हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हर्ष का विषय है कि कैच द रेन अभियान की शुरूआत पर केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए नया कदम उठाया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के सपने को साकार करने के लिए यह समझौता हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी विश्व जल दिवस पर 'जल शक्ति अभियान- कैच द रेन'' का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारंभ कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम में मंत्रालय, भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए केन्द्र सरकार, उत्तरप्रदेश तथा मध्यप्रदेश के बीच हुए त्रि-पक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किये।

नदियों को जोड़ने का सपना हुआ साकार

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और विशेषकर बुंदेलखण्ड के लिए एक सपने के साकार होने के समान है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई ने देश की नदियों को जोड़ने का एक दूरदर्शी सपना देखा। जिन नदी घाटियों में अधिक पानी है उन्हें यदि ऐसी नदी घाटियों में ले जाया जाये जहाँ पानी कम है, तो पानी व्यर्थ नहीं जायेगा और इसे सिंचाई तथा पेयजल के काम में लिया जा सकेगा। इस दूरदर्शी सपने को हमारे यश्स्वी और युगदृष्टा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने साकार करके दिखाया है। नदी जोड़ो परियोजना सहकारी संघवाद के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक है।

8 लाख 11 हजार हेक्टयर क्षेत्र में होगी सिंचाई

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस परियोजना से मध्यप्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र के नौ जिलों में 8 लाख 11 हजार हेक्टयर असिंचित क्षेत्र में सिंचाई का लाभ मिलेगा। लगभग 41 लाख लोगों को पेयजल की सुगम उपलब्धता होगी। इस परियोजना में पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती का योगदान विशेष उल्लेखनीय है। वर्ष 2017-18 के अनुमान के अनुसार परियोजना की लागत लगभग 35 हजार 111 करोड़ रूपये थी, जिसका वर्तमान मूल्य कहीं अधिक है। कुल लागत का 90 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। मात्र दस प्रतिशत राज्यों को व्यय करना है। यह परियोजना बुंदेलखण्ड में जन क्रांति लायेगी। बुंदेलखण्ड की धरती अत्यंत उपजाऊ है, जो जल के अभाव में सूखे का शिकार होती रही। यह पानी बुंदेलखण्ड की जनता की तकदीर और तस्वीर बदल देगा। यह परियोजना बुंदेलखण्ड की जीवन-रेखा बनेगी। छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिले के लोगों के जीवन स्तर में समृद्धि और खुशहाली लेकर आयेगी।

प्रधानमंत्री श्री मोदी का माना आभार

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार मानते हुए कहा कि उनके विजन और मिशन के परिणामस्वरूप ही परियोजना पूर्णता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत का आभार माना तथा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को अनुबंध के लिए बधाई दी।

नदियों को जोड़ने के 30 लिंक चिंहित

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि देश में नदियों को आपस में जोड़ने के 30 लिंक चिंहित किये गये हैं। इनमें सर्वप्रथम केन-बेतवा लिंक का क्रियान्वयन आरंभ हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कैच द रेन व्हेयर इट फाल्स एण्ड व्हेन इट फाल्स का मंत्र दिया है। इस मंत्र के पालन में जन-सहभागिता से देश में जल क्रांति का सूत्रपात होगा।

मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंस में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री के.के.सिंह, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मनोज श्रीवास्तव अपर मुख्य सचिव जल संसाधन श्री एस.एन. मिश्रा उपस्थित रहे।

सभी प्रदेशवासियों से अपील है कि "मास्क अवश्य लगाएँ " : मुख्यमंत्री श्री चौहान

लॉकडाउन लगाकर काम-धंधा प्रभावित नहीं करना है
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने छह नंबर मार्केट पहुँचकर दुकानदारों को मास्क लगाए

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। भोपाल एवं इंदौर में संक्रमण बढ़ने की गति सबसे तेज है। मेरी सभी प्रदेशवासियों से अपील है कि - 'वे मास्क अवश्य लगाएँ। अपने, अपनों तथा अपने देश एवं प्रदेश की सुरक्षा के लिए मास्क लगाना बहुत जरूरी है। अपनी सुरक्षा अपना मास्क है। जो मास्क नहीं लगाए, उसे रोकें, टोकें।'

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस बार हमें बिना लॉक डाउन लगाए कोरोना को हराना है। हम लॉक डाउन लगाकर लोगों के काम-धंधे, व्यापार-व्यवसाय को प्रभावित नहीं करना चाहते। यह तभी संभव है, जब हर व्यक्ति कोरोना से बचाव के लिए जागरूक हो। अनिवार्य रूप से मास्क लगाए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और अन्य सावधानियाँ बरते।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज सायं 6 नंबर मार्केट गए तथा वहाँ दुकानदारों को मास्क लगाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान हर्ष क्लॉथ सेन्टर, ज्योति किराना एवं जनरल स्टोर, हरि ओम स्वीट्स एवं नमकीन, मुकेश किराना स्टोर, हरीश प्रोटींस, जूस शॉप पर गए और दुकानदारों को न केवल मास्क लगाए अपितु उनसे अनुरोध किया कि वे अपनी दुकान पर आने वाले ग्राहकों को भी अनिवार्य रूप से मास्क लगवाएँ। उन्होंने दुकानदारों से कहा कि अपनी दुकान के सामने गोले बनवाएँ, जिससे सामान के लिए आने वाले ग्राहक निर्धारित दूरी पर खड़े होकर सामान ले सकें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 23 मार्च को वे स्वयं कुछ दुकानों पर जाकर गोले बनवाएंगे। इस दिन कोरोना के प्रति जागरूक करने के लिए सुबह 11 बजे एवं सायं 7 बजे सायरन बजेगा। इस दौरान जो जहाँ है, वहीं मास्क पहनने तथा कोरोना संबंधी सभी सावधानियाँ बरतने का संकल्प ले।

मेरी सुरक्षा-मेरा मास्क

जनता को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है जागरुकता अभियान: मुख्यमंत्री श्री चौहान
अभियान को सभी मिलकर सफल बनाएँ
मुख्यमंत्री ने की जिलों से बातचीत

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेशवासियों को हर स्थिति में फिर से फैल रहे कोरोना संक्रमण से बचाना है। इसके लिए जन-जागरूकता अभियान जरूरी है। ''मेरी सुरक्षा-मेरा मास्क'' पर पालन करते हुए हर व्यक्ति को अपनी सुरक्षा के लिए मास्क का उपयोग करना है। प्रदेश में जागरूकता अभियान शुरु किया जा रहा है। अधिकारी हों या जन-प्रतिनिधि या फिर आम नागरिक, सभी मिलकर इस अभियान को सफल बनाएँ। कोरोना का कहर गहरा हो इसके पहले हमें अपने सुरक्षात्मक प्रयास तेज करने होंगे। महाराष्ट्र से लगे हुए जिलों में सावधानी बढ़ानी होगी। रविवार को कुछ नगरों में लाक डाउन और कुछ जिलों में रात्रि 10 बजे बाजार बंद करने के निर्णय के बाद अब जागरूकता अभियान तेज करने का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में मंगलवार 23 मार्च को पूर्वान्ह 11 बजे और शाम 7 बजे सायरन बजने पर सभी लोग दो मिनिट कार्य रोक कर मास्क पहनें, अन्य लोगों को भी मास्क के उपयोग के लिए प्रेरित करें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए मास्क ही सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए। बीस व्यक्तियों से अधिक पॉजिटिव प्रकरण जिन जिलों में आ रहें है वहाँ कार्यक्रम या बैठक की अनुमति जिला क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा प्रदान करने का निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही मेलों और अन्य उत्सवों के संबंध में भी जिले की परिस्थिति अनुसार स्थानीय स्तर पर आवश्यक निर्णय लिया जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिलों में फेस मास्क की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। जहाँ जरूरी हो पर्याप्त संख्या में मास्क आपूर्ति के लिए जिला स्तर पर स्व-सहायता समूहों से मास्क बनवाएँ और उनका उपयोग सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय से वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा जिलों के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के सदस्यों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जिलों के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के सदस्यों से सुझाव भी प्राप्त किए। वीडियो कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण के जो मामले सामने आ रहे हैं, उनमें लगभग आधे प्रकरण दो बड़े नगरों इंदौर और भोपाल के हैं। इंदौर और भोपाल नगरों का प्रतिशत प्रदेश के कुल प्रकरणों का क्रमशः 27 और 25 है। वीडियो कॉन्फ्रेस में गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी और मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस भी उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि प्रदेश में वैक्सीनेशन का कार्य प्रगति पर है। तीन माह में टारगेट ग्रुप का वैक्सीनेशन पूरा हो जाएगा।

जन-जागरण अभियान जोर-शोर से चलाएँ

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जन-प्रतिनिधि और अधिकारी स्वयं मास्क लगाएँ और इसका फोटो "मेरा मास्क-मेरी सुरक्षा" स्लोगन के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करें। इस प्रचार अभियान का सकारात्मक परिणाम मिलेगा। हमें मध्यप्रदेश को लाक डाउन की ओर नहीं ले जाना है। प्रदेश में बहुत मुश्किल से अर्थ-व्यवस्था को पटरी पर लाने का कार्य हुआ है। छोटे कारोबारियों और रोज कमाने-खाने वालों को बढ़ते कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक हानि होती है। प्रदेश की जनता के हित में हम सभी को फेस मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा लोगों को सुबह 11 बजे और शाम 7 बजे मास्क लगाकर, मास्क लगाने की समझाइश दें। उन लोगों को रोकें-टोकें जिन्होंने मास्क नहीं लगाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-कल्याण के इस कार्य में सभी धर्मगुरु भी सहयोग करें और लोगों को मास्क लगाने की अपील करें। इसके अलावा सभी जन-प्रतिनिधि जैसे सांसद, विधायक अनिवार्य रूप से नागरिकों को मास्क लगाने के लिए प्रेरित करें। इस कार्य में सामाजिक संगठन भी सक्रिय हों। एन.एस.एस और एन.सी.सी. जैसे संगठनों के कार्यकर्ता भी जुटें। सभी मिलकर कोरोना से बचाव के अभियान को सफल बनाएँ। दुकानों के बाहर सर्किल बनाए जाएँ ताकि लोग परस्पर दूरी के साथ खड़े हों और दुकानदार से सामान खरीदते समय संक्रमण को टाला जा सके।

मेरी होली-मेरे घर

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कुछ सप्ताह यह अभियान निरंतर चले। हम सभी सतर्क रहें। मेले भी न लगाएँ। बीस से अधिक संख्या के आयोजन न हों। क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप ये व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना की रफ्तार थम जाए, इसके लिए सभी को जुटना होगा, तभी हम मध्यप्रदेश को सुरक्षित रखने में कामयाब होंगे। ''मेरी होली-मेरे घर'' के नारे को लागू करें। अन्य त्यौहार भी परिवार के स्तर पर ही मनाए जाएँ। सोशल डिस्टेंसिंग के पालन में लापरवाही नहीं होना चाहिए।

जिलों की भागीदारी

वीडियो काँन्फ्रेंस में रतलाम से क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा बताया गया कि राजस्थान और गुजरात सीमाओं के कारण सतर्कता बरती जा रही। अशोक नगर जिले के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा सुझाव दिया गया कि होली के अवसर पर होने वाला करीला मेला संक्रमण से बचाव की दृष्टि से स्थगित करना उचित रहेगा। निवाड़ी से बताया गया कि नजदीक ही उत्तरप्रदेश के नगर झाँसी में काफी संख्या संक्रमित लोग हैं, इसलिए सावधानी बरती जा रही है। वीडियो काँन्फ्रेंस में श्योपुर, विदिशा से भी भागीदारी हुई। इस अवसर पर अनेक जिलों से मुख्यमंत्री श्री चौहान को सरकार कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर बधाई भी दी गई।

जन-सहयोग से विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे

मुख्यमंत्री श्री चौहान को एक वर्ष का सक्रिय कार्यकाल पूर्ण होने पर प्रदेश भर से मिली बधाइयाँ
रैन अंधेरी बीतेगी, पतवार चलाते जायेंगे, मंजिल आयेगी,आयेगी: मुख्यमंत्री श्री चौहान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में जन सहयोग से विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे। नागरिकों की भागीदारी से मध्यप्रदेश विद्युत, सिंचाई, पेयजल, सड़क निर्माण, कृषि क्षेत्र में अनेक उपलब्धियाँ अर्जित कर विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ा है। अब विकास को अन्य नए आयाम भी प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मुख्यमंत्री के दायित्व के रूप में एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने के अवसर पर प्रदेश भर से मिली बधाइयों के उत्तर में कहा कि जब वर्ष 2003 के आखिरी महीने में मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और सुश्री उमा भारती के नेतृत्व में नई सरकार बनी थी, उसके पहले हमें बदहाल मध्यप्रदेश मिला था।

सड़क, पानी, बिजली से वंचित लोगों को दी सुविधाएँ

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि उस समय सड़कें बहुत खराब थीं। चारों और अंधेरा छाया रहता था। बीमारू मध्यप्रदेश को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले सड़कों के निर्माण की प्राथमिकता तय की गई। प्रदेश में दो लाख किलोमीटर की शानदार सड़कें बनवाई गईं। इसके पश्चात बेटियों के लिए वरदान सिद्ध हुई मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना को लागू किया गया। प्रदेश में लोगों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने पर ध्यान दिया गया। यही नहीं खेती के लिए दस घंटे विद्युत आपूर्ति का कार्य भी पूरा हुआ। वर्ष 2013 में इन कार्यों को पूर्ण कर संकल्प पूर्ति की गई। लोक सेवा गारंटी जैसे क्रांतिकारी कानून बनाए गए।

किसान कल्याण

कृषि हमारी अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ है और रोजगार देने का सबसे बड़ा साधन भी। मध्यप्रदेश ने एक या दो नहीं सात कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त किए। गत वर्ष कोरोना संकट के बाद भी देश में सर्वाधिक गेहूं उपार्जन का रिकॉर्ड मध्यप्रदेश ने बनाया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिंचाई क्षेत्र में पहले कुल रकबा सिर्फ सात लाख हेक्टेयर था। इसे बढ़ाकर 41 लाख किया गया। इसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य है। नर्मदा नदी को क्षिप्रा नदी से जोड़ा गया। गंभीर नदी से भी जोड़ा गया। अब हम नर्मदा जी को कालीसिंध और पार्वती से जोड़ रहे हैं। जो पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था उसे रोककर सिंचाई की समुचित व्यवस्था की गई। पेयजल के प्रबंध भी किए गए।

बुंदेलखण्ड की तस्वीर बदलेगी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज विश्व जल दिवस पर प्रधानमंत्री जी के समक्ष हुए त्रि-पक्षीय समझौते से केन और बेतवा को जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल हुई है। इससे मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल की तकदीर और तस्वीर बदल जाएगी। इस अंचल के 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बेहतर सिंचाई होगी। यही नहीं करीब 41 लाख लोगों को पर्याप्त पेयजल भी मिल सकेगा।

पर्यटन विकास

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन संभावनाओं का दोहन किया जाएगा। इसके फलस्वरूप भारत ही नहीं विश्व के देशों के सैलानी मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों पर आयेंगें। बफर में सफर और नाईट सफारी की शुरूआत की गई है। इससे पर्यटन बढ़ेगा जिससे युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार देने का लक्ष्य पूरा होगा

तीर्थ-दर्शन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के बुजुर्ग लोगों को देश के अनेक तीर्थ-स्थानों का भ्रमण करवाने के लिए राज्य सरकार ने व्यवस्था की। मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना का लाभ लेकर नागरिकों ने आत्मिक आनंद की अनुभूति की। मध्य प्रदेश की इस योजना को अन्य राज्यों ने भी अपनाया।

 आनंद विभाग के माध्यम से बेहतर जीवन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आनंद विभाग का गठन कर अल्पविराम जैसे कार्यक्रमों से जनता को जोड़ा गया। शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को आनंद संस्थान द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों से लाभान्वित किया गया। विद्यालयों, वृद्ध आश्रम और कारावासों में लोकरंजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। धन प्राप्ति और पद प्राप्ति से हटकर आनंद के महत्व का अनुभव करवाने के लिए आनंद विभाग की गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।

किसानों की प्रगति

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र का निरंतर विस्तार हुआ है। गेहूँ और धान के उपार्जन के रिकॉर्ड बनाए गए। अनेक पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त करने में हमारा प्रदेश सफल रहा है। किसानों को कोरोना संकट के समय प्रधानमंत्री स्व-निधि योजना का लाभ दिलवाया गया। छोटे और सीमांत किसानों को सालाना दस हजार की राशि प्राप्त होती है। मध्यप्रदेश में शून्य प्रतिशत पर ब्याज दिलवाने, फसल बीमा योजना का लाभ दिलवाने और किसानों को उनकी उपज कहीं भी विक्रय करने की सुविधा दी गई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनके उत्पादन को उपार्जित करने की व्यवस्था मजबूत की गई।

कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में जब कोरोना कहर बनकर आया तब उपचार की समुचित व्यवस्था नहीं थी। मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालते ही सबसे पहले इन व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया। ऑक्सीजन, औषधियों और अस्पतालों में बेड की पर्याप्त व्यवस्था की गई। लोगों को जागरूक करने के लिए फेस मास्क के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य हुआ है। जिस संक्रमण को नियंत्रित किया गया वह फिर से विस्तार न पा सके, इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

हरीतिमा विकास

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे गत माह से निरंतर प्रतिदिन एक पौधा लगा रहे हैं। इसके लिए अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं। प्रदेश में हरियाली का विस्तार हुआ है। आने वाली पीढ़ियों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराने की ठोस पहल की गई है। सभी नागरिक अपने दिवंगत प्रियजन की स्मृति में पौधा लगाएँ। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों के जन्म दिवस और विवाह वर्षगांठ के अवसर पर भी पौधे लगाकर हरीतिमा के विकास में सहयोग प्रदान करें।

यह रात अंधेरी बीतेगी मंजिल आएगी, आएगी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने के समय कोरोना का संक्रमण सर्वाधिक था। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मैंने इस संकल्प के साथ शपथ ली थी कि 'हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता और मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ, गीत नया गाता हूँ।' मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संबल, उनके प्रेम और आशीर्वाद और जन सहयोग के कारण कठिन परिस्थितियों में भी चुनौती का सामना किया जा सका। अभी भी जो कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आई है, वह निश्चित ही समाप्त होगी। अंधेरा छँटेगा, सूरज निकलेगा, यह रैन अंधेरी बीतेगी, पतवार चलाते जाएंगे, मंजिल आएगी, आएगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रबर का पौधा लगाया

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज स्मार्ट उद्यान में रबर का पौधा रोपण किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रतिदिन एक पौधा लगा रहे हैं। राजधानी के बाहर प्रवास पर रहने की स्थिति में भी वे पौधा लगाते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा जयंती से अब तक निरंतर प्रतिदिन एक पौधा रोपा है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मुख्यमंत्री निवास पर भी पीपल का पौधा लगाया।

ग्रीन एनर्जी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जायेगा: मुख्यमंत्री श्री चौहान

प्राकृतिक गैस नेटवर्क के लिए प्रदेश में होगा दो हजार करोड़ का निवेश

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जायेगा। प्रदूषण कम करने के लिए व्यावसायिक वाहनों में सीएनजी के उपयोग को बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान से मंत्रालय में भेंट के लिए आये मैर्सस थिंक गैस के संस्थापक तथा अध्यक्ष श्री संदीप त्रेहन से यह बात कही। यह समूह घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और मोटर वाहनों को प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराने के क्षेत्र में कार्यरत है। थिंक गैस की प्रदेश में रूपये दो हजार करोड़ रूपये के निवेश की योजना है। इस कम्पनी द्वारा भोपाल के औद्योगिक क्षेत्र बगरोदा में एलसीएनजी स्टेशन स्थापित किया गया है। कम्पनी भोपाल,राजगढ़ और शिवपुरी में सिटी गैस वितरण नेटवर्क की दिशा में कार्य कर रही है। विभिन्न संयंत्रों में डीजल-पैट्रोल के स्थान पर सीएनजी के उपयोग की संभावनों पर भी चर्चा हुई।

जन-जागरूकता के लिये हफ्ते भर रोज बजेगा सायरन

कोरोना संक्रमण की रोकथाम संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी

कोरोना संकट के प्रति आमजन को संवेदनशील बनाने और जागरूक करने के लिये आगामी एक सप्ताह तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे एवं सायंकाल 7 बजे शहरी क्षेत्रों में 2 मिनट के लिये सायरन बजाया जायेगा। अपर मुख्य सचिव, गृह डॉ. राजेश राजौरा ने बताया है कि कोविड की संख्या में विगत दिनों में हो रही बढ़ोत्तरी को दृष्टिगत रखते हुए 13, 16 और 19 मार्च के आदेश को यथावत प्रभावशील रखते हुए शासन ने आवश्यक अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किये हैं। जिन जिलों में साप्ताहिक पॉजिटिव प्रकरणों की संख्या प्रतिदिन औसत 20 से ज्यादा होने पर सभी त्यौहारों के कार्यक्रमों में भाग लेने वालों की संख्या को सीमित रखा जायेगा।

डॉ. राजौरा ने बताया है कि साप्ताहिक पॉजिटिव केसों की संख्या प्रतिदिन औसत 20 से ज्यादा होने पर सभी सामाजिक तथा धार्मिक त्यौहारों में जुलूस, गेर, मेले इत्यादि आयोजित नहीं होंगे। विवाह और अंतिम संस्कार जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में भी लोगों की संख्या को सीमित किया जायेगा। जिला कलेक्टर जहाँ उपयुक्त समझेंगे, वहाँ जन-सुनवाई के कार्यक्रम आगामी 30 अप्रैल, 2021 तक स्थगित कर सकेंगे। जिन जिलों में प्रतिदिन औसत पॉजिटिव केसेस की संख्या 20 से कम है, उन जिलों में क्रॉयसिस मैनेजमेंट कमेटी प्रतिबंध लगाने के संबंध में अपने स्तर पर निर्णय ले सकेगी।

डॉ. राजौरा ने बताया है कि कोविड संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए इस वर्ष अशोकनगर में करीला माता मेला का आयोजन नहीं होगा। महाराष्ट्र राज्य की सीमा पर वस्तुओं तथा सेवाओं के परिवहन को छोड़कर यात्रियों के आवागमन का नियमन आवश्यक रूप से किया जायेगा। महाराष्ट्र राज्य से आने-जाने वाली बसों के परिवहन बंद करने के आदेश का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराया जायेगा।

गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 23 मार्च को 11 बजे सायरन बजने के साथ ही जिला प्रशासन जन-प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों आदि के सहयोग से शहरों में पूर्व से चलाये जा रहे रोको-टोको अभियान अंतर्गत मास्क का नियमित एवं निरंतर उपयोग, सोशल डिस्टेंसिंग, हेण्ड-वाशिंग, सेनेटाइजिंग करने के लिये लोगों को सेन्सटाइज करने वाली गतिविधियों को संचालित करेंगे। रोको-टोको कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधियों के साथ ही अधिकारी-कर्मचारियों, धार्मिक गुरुओं, मीडिया, एनसीसी, एनएसएस, स्वयंसेवी संगठनों और स्व-सहायता समूहों को भी जोड़ा जायेगा। डॉ. राजौरा ने बताया है कि निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

भारतीय संस्कृति की प्रमाणिकता एवं गौरव को बढ़ाते हैं शोधकार्य : संस्कृति मंत्री सुश्री ठाकुर

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान का आयोजन
प्रो. गिरिराज कुमार को 2017-18 एवं प्रो. वी.एच. सोनवणे को 2016-17 का सम्मान

संस्कृति, पर्यटन एवं अध्यात्म मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश विपुल पुरातत्व संपदा से भरपूर है। पुरातत्व संपदा के क्षेत्र में किए गए शोध कार्यों से भारतीय संस्कृति की प्रमाणिकता एवं गौरव को बढ़़ावा मिलता है। मंत्री सुश्री ठाकुर राज्य पुरातत्व संग्रहालय भोपाल के सभागार में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख सचिव संस्कृति, पर्यटन एवं जनसम्पर्क श्री शिव शेखर शुक्ला द्वारा की गई। समारोह में अतिथियों द्वारा प्रो. गिरिराज कुमार को 2017-18 एवं प्रो. वी.एच. सोनवणे को 2016-17 के डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया।

मंत्री सुश्री ठाकुर ने पुरातत्व वेत्ता प्रोफेसर द्वय श्री गिरिराज कुमार एवं श्री सोनवणे को राष्ट्रीय सम्मान के लिए बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए उनके द्वारा किए गए शोधकार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों पुरातत्व वेत्ताओं के शोधकार्यों ने भारत की विपुल संपदा को प्रमाणिकता देकर विश्व में कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पुरातत्व संग्रहालयों को ऑडियो-वीडियो एवं वर्चुअल माध्यम से जनसामान्य के समक्ष आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाये तो लोग उनसे प्रेरणा लेकर अपनी पुरासम्पदा और संस्कृति पर गर्व कर सकेंगे।

प्रमुख सचिव संस्कृति, पर्यटन एवं जनसम्पर्क श्री शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश की पुरासम्पदा के क्षेत्र में अनूठी पहचान है। डॉ. वाकणकर का पुरासम्पदा की खोज के क्षेत्र में अमूल्य योगदान था। प्रदेश में पर्यटन एवं संस्कृति की असीम संभावनाएँ हैं, जिसका संरक्षण और संवर्द्धन लगातार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड हेरीटेज की साइट में प्रदेश के तीन स्थल खजुराहो, साँची एवं भीम बैठका शामिल हैं। जिसमें सतपुड़ा नेशनल पार्क एवं भेड़ाघाट को शामिल करने का प्रयास जारी है। प्रदेश में रॉक आर्ट कई स्थलों पर बिखरी पड़ी हुई है जिसकी खोज के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जायेगी। नई पीढ़ी को शोध कार्यों में प्रोफेसर द्वय के उत्कृष्ट कार्यों से प्रेरणा मिलेगी।

समारोह में राष्ट्रीय सम्मान से सम्मिलित किए गए प्रोफेसर द्वय श्री सोनवणे एवं श्री गिरिराज कुमार ने अपने अनुभव साझा किये। पुरातत्व अधिकारी डॉ. रमेश यादव ने आभार प्रदर्शन एवं पुरातत्ववेत्ता श्री आशुतोष उपरीत ने कार्यक्रम का संचालन किया।

ऑनलाइन माध्यम से करें बिजली बिल का भुगतान

वर्तमान में कोविड-19 के बढ़ते विस्तार को देखते हुए कंपनी के बिल भुगतान केन्द्र, ए.टी.पी. मशीन, एमपी ऑनलाइन के कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर यद्यपि चालू हैं फिर भी उपभोक्ता बिजली बिलां का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं।

ऑन लाइन भुगतान : कहां क्लिक करें

  • portal.mpcz.in पर क्लिक करें। ऑनलाइन बिल भुगतान के ऑपशन पर क्लिक करें।

  • View - Pay का बटन क्लिक करें।

  • बिजली बिल का अकाउंट आई.डी. टाइप करें।

  • अब उपभोक्ता का बिल कम्प्यूटर स्क्रीन पर होगा।

  • भुगतान के लिए चार विकल्पों में से किसी एक का चुनाव करें।

  • डेबिट कार्ड

  • क्रेडिट कार्ड

  • नेट बैंकिंग

  • कैश कार्ड

  • भुगतान के लिए आगे बढ़े और भुगतान करें।

  • भुगतान होने पर रसीद प्रिन्ट करें।

  • भुगतान पूर्णतया सुरक्षित है।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे बिजली बिलों का भुगतान करने के लिए ऑनलाइन भुगतान सुविधा का लाभ लें। उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के ऑनलाइन भुगतान की सुविधा कम्पनी की वेबसाइट portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) या 50 से अधिक बैंकों की इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से उपलब्ध है। इसके अलावा उपभोक्ता फोनपे, गूगल पे, एचडीएफसीपे एप, अमेजानपे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल एप के माध्यम से भी बिजली बिलों का भुगतान कर सकते हैं।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले ने निम्नदाब उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ऑनलाईन बिजली बिल का भुगतान कर अधिकतम 20 रूपये तक अपने बिल में छूट प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार उच्चदाब उपभोक्ता ऑनलाईन बिजली बिल का भुगतान कर अधिकतम एक हजार रूपये की छूट प्राप्त कर सकते हैं।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि यदि कोई उपभोक्ता ऑनलाईन बिजली बिल का भुगतान करता है तो उसके द्वारा कुल जमा किए गए बिल पर आधा प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट अधिकतम 20 रूपये तक होगी और न्यूनतम 5 रूपये होगी। इसी प्रकार जो उच्चदाब उपभोक्ता हैं यदि वे ऑनलाईन बिजली बिल का भुगतान करते हैं तो उनके द्वारा कुल जमा किए गए बिजली बिल पर आधा प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। यह छूट अधिकतम एक हजार तक हो सकती है।

जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने प्रधानमंत्री श्री मोदी सहित सभी का आभार व्यक्त किया

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की पहल पर देश में शुरू हुई नदी जोड़ो परियोजना को साकार करने के लिए केन बेतवा लिंक परियोजना के एम.ओ.यू साइन होने पर जल संसाधन, मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्य नाथ और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री शेखावत का आभार व्यक्त किया है।

मंत्री श्री सिलावट ने कहा है कि केन-बेतवा परियोजना मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड की जीवन रेखा बनेगी।  यह परियोजना क्षेत्र के लोगों की किस्मत बदल देगी और बुंदेलखंड के भविष्य को स्वर्णिम युग में ले जाएगी। इस परियोजना के पूर्ण होने पर 41 लाख से अधिक लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। आठ लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। इस परियोजना से प्रदेश के 6 जिले सीधे तौर पर  लाभान्वित होंगे।   

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल पर दोनों राज्यों में यह केन बेतवा पानी बंटवारे का ऐतिहासिक समझौता प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। बुंदेलखंड की जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, यह भागीरथी प्रयास हम सबके जीवन में एक नया उजाला लेकर आएगा।  

मंत्री श्री डंग ने रामागुण्डम में किया देश के सबसे बड़े सोलर फ्लोटिंग प्लांट का अवलोकन

विश्व का सबसे बड़ा 600 मेगावॉट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट 3 हजार करोड़ की लागत से मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में स्थापित होने जा रहा है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग ने सोमवार को तेलंगाना के रामागुण्डम में एनटीपीसी द्वारा स्थापित किये जा रहे देश के सबसे बड़े सोलर प्लांट का अवलोकन कर तकनीकी जानकारी ली। प्रमुख सचिव ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री संजय दुबे और ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री दीपक सक्सेना, नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन के सीजीएम श्री श्रीकुमारन और एग्जीक्युटिव डायरेक्टर श्री मोहित भार्गव सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

श्री डंग ने प्लांट की प्रथम 5 मेगावॉट इकाई के फ्लोटर, पानी पर लगाने के तरीके, उपकरण और टेक्नालॉजी की जानकारी ली। रामागुण्डम थर्मल पॉवर प्लांट जलाशय के 450 एकड़ जलक्षेत्र में 423 करोड़ रूपये की लागत से इस सोलर फ्लोटिंग प्लांट की स्थापना की जा रही है। श्री डंग ने कहा कि आज नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रामागुण्डम प्लांट का अवलोकन करने के अनुरूप से ओंकारेश्वर में स्थापित होने जा रहे प्लांट में आने वाली व्यावहारिक कठिनाईयों को दूर किया जा सकेगा और काम जल्दी पूरा होगा। श्री डंग ने कहा कि ओंकारेश्वर बांध के लगभग 2000 हेक्टेयर जल क्षेत्र में सोलर पेनल लगाकर बिजली कर उत्पादन होगा। जल क्षेत्र में स्थापना से जमीन की आवश्यकता नहीं होगी और पानी की सतह पर तैरने के कारण पेनल का तापमान भी नियंत्रित रहेगा। हरित ऊर्जा मिलने से कार्बन डाईऑक्साइड पर नियंत्रण होगा और जीवाश्म भण्डारों का दोहन भी रुकेगा।

रामागुण्डम पहुँचने पर मंत्री श्री डंग को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में साधिकार समिति गठित

राज्य शासन ने सतत् विकास लक्ष्य के क्रियान्वयन, अनुश्रवण और नीति निर्धारण के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य साधिकार समिति का गठन किया है।

राज्य साधिकारी समिति को राज्य में सतत् विकास लक्ष्य केक क्रियान्वयन के लिये रोड मेप का निर्धारण, लक्ष्य प्राप्ति हेतु रणनीति तैयार करना, विभागों को उचित दिशा निर्देश उपलब्ध कराना, कार्यों की समय-समय पर समीक्षा करना तथा अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित करने का दायित्व सौंपा गया है।

अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी साधिकार समिति के सदस्य सचिव होंगे।

समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त, वित्त, सामान्य प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, गृह, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, नगरीय विकास एवं आवास पर्यावरण, वन, लोक निर्माण, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, उच्च शिक्षा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सदस्य होंगे।

निर्माण कार्यों को समय-सीमा में पूरा करें : उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव

उच्च शिक्षा विभाग के निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि निर्माण एजेंसियों द्वारा विभागीय निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में अनिवार्य रूप से पूर्ण कराये जायें। जिन भवनों का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है उन्हें मार्च तक, 60 प्रतिशत निर्माण कार्य वाले भवनों को अप्रैल तक तथा 40 प्रतिशत निर्माण कार्य वाले भवनों को माह जून 2021 तक पूर्ण कराया जाए। मंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में विभागीय निर्माण कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

मंत्री डॉ. यादव द्वारा निर्देशित किया गया कि ऐसे महाविद्यालय जिनमें बाउंड्रीवाल नहीं है उनमें प्राथमिकता के तौर पर बाउंड्रीवाल निर्माण कराया जाए, साथ ही ऐसे महाविद्यालय जिनमें एप्रोच रोड का अभाव है उन महाविद्यालयों में अतिशीघ्र एप्रोच रोड का निर्माण कराया जाए। उज्जैन में ऑडिटोरियम हॉल, सभी अतिरिक्त संचालक कार्यालयों में नवीन भवन तथा पेयजल की स्थायी व्यवस्था के लिए विभाग के अधिकारियों व निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया गया। डॉ. यादव ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में भवन विहीन महाविद्यालयों के नवीन भवन निर्माण प्राथमिकता के तौर पर कराए जाएं। निर्माण कार्यों में अन्य विश्वविद्यालयों के साथ महर्षि पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय, उज्जैन को भी सम्मिलित किया जाए।

बैठक में परियोजना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) तथा राज्य मद से पोषित निर्माणाधीन भवनों, नवीनीकरण, अतिरिक्त अध्ययन कक्ष निर्माण, बाउंड्रीवाल, ऑडिटोरियम आदि निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।

बैठक में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन सहित पीडब्ल्यूडी अंतर्गत परियोजना क्रियान्वयन इकाई, भोपाल विकास प्राधिकरण, मध्यप्रदेश गृह अधोसंरचना मण्डल, राजधानी परियोजना प्रशासन आदि निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि अधिकारी सम्मिलित हुए।

पिछड़ा वर्ग के बालक एवं कन्याओं के लिये छात्रावास सुविधा

जबलपुर में 500 सीटर पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास का कार्य प्रगति पर

प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के बालक एवं कन्याओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के मकसद से छात्रावास संचालित किये जा रहे है। पिछड़ा वर्ग के बालकों के लिये प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास संचालित किये जा रहे है।

उज्जैन में पिछड़ा वर्ग के बालकों के लिये 100 सीटर क्षमता के बालक छात्रावास के भवन का निर्माण कार्य पूर्णत: की ओर है। विभाग द्वारा वर्ष 2021-22 में बालक छात्रावास के संचालन के लिये 5 करोड़ 70 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है।

पिछड़ा वर्ग की कन्याओं के लिये छात्रावास सुविधा

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश में पिछड़े वर्ग की कन्याओं को पढ़ाई के लिये आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के मकसद से प्रदेश के सभी जिलों में पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास भवनों की स्थापना की योजना है। उज्जैन में 100 सीटर क्षमता के कन्या छात्रावास निर्माण का कार्य पूर्णत: की ओर है। इसके साथ ही जबलपुर में 500 सीटर क्षमता के पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।

छात्र गृह योजना

पिछड़ा वर्ग के जिन छात्र-छात्राओं को विभागीय छात्रावासों में स्थान अभाव के कारण प्रवेश नहीं मिल पाता है, उनके लिये पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा छात्र गृह योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत 2 या 2 से अधिक विद्यार्थियों को किराये के भवन में रहने पर भवन के किराये की प्रतिपूर्ति विभाग द्वारा की जा रही है। विभाग द्वारा इस वर्ष छात्र गृह योजना में करीब 91 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। छात्र गृह योजना में विभाग द्वारा तहसील, जिला एवं संभाग स्तर के छात्र गृह के लिये किराये के भवन का मासिक किराया प्रति छात्र एक हजार रुपये निर्धारित किया गया है।

पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री श्री पटेल का दौरा कार्यक्रम

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री रामखेलावन पटेल 23 मार्च को सतना जिले के अमरपाटन पहुँचेंगे। राज्य मंत्री श्री पटेल अमरपाटन में स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

गर्मियों में नागरिकों को मिले पर्याप्त शुद्ध पेयजल : ऊर्जा मंत्री श्री तोमर

ऊर्जा  मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने  ग्वालियर में जलालपुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट  से जल सप्लाय का कार्य शीघ्र चालू कर दिया जाए। गर्मियों में एक भी  नागरिक को शुद्ध पेयजल के लिए परेशान नहीं होना चाहिये। 

    ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने  निरीक्षण के दौरान  वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यो की समीक्षा करते हुए पूछा कि इस प्लांट से हम शहर को कब तक पानी देने लगेंगे तथा इस प्लांट से किस-किस जगह पानी सप्लाय किया जाएगा। इस पर अधीक्षण यंत्री श्री आर.एल.एस. मौर्य ने  बताया कि 20 अप्रैल तक हम प्लांट से पानी सप्लाय कर टंकियों को भरने लगेंगे।  इस प्लांट से ग्वालियर विधानसभा  और मुरार विधानसभा में पानी दिया जाएगा।

      श्री तोमर ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करते हुए कहा कि गंदे पानी को साफ कर सिंचाई के लिए उपयोग किया जाय। जल का पुनः उपयोग जल संरक्षण के  हित में है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर सप्ताह ट्रीटमेंट प्लांट पर किये जा रहे कार्यो की समीक्षा रिपोर्ट मुझे दें।

नोवल कोरोना वायरस (COVID-19) मीडिया बुलेटिन

ई-हेल्थ केयर सॉल्यूशन से स्वास्थ्य कार्यक्रम क्रियान्वयन में आएगी तेजी

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी द्वारा कांउसलर्स को कम्प्यूटर टेब वितरित

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि ई-हेल्थ केयर सॉल्यूशन से स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाएँ देने में संचार तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में किशोरों के अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी तथ्यों को ध्यान में रखा गया है। प्रदेश के 13 जिलों के विकासखंड में कार्यरत 102 काउंसलर को कम्प्यूटर टेब वितरण कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी संबोधित कर रहे थे।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि वर्ष 2014 से प्रदेश के 13 जिलों में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में काउंसलर द्वारा डाटा की मेन्यूअली एंट्री की जाती थी। कम्प्यूटर टेब मिलने से डाटा की डिजिटली एंट्री होगी और संचार तकनीक के उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदान करने की गुणवत्ता में सुधार आएगा। स्वास्थ्य से संबंधी विभिन्न प्रकार की जानकारियों और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 'बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ' जैसे कार्यक्रमों की जानकारी किशोरों को दी जा सकेगी। काउंसलर्स कम्प्यूटर टेब लेख के माध्यम से ऑडियो तथा वीडियो प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर जागरूकता का प्रचार-प्रसार अधिक से अधिक कर सकेंगे।

कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य विभाग के साथ अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के द्वारा किया गया। काउंसलर्स की स्टेट लेवल केपेसिटी बिल्डिंग पर वर्कशॉप भी आयोजित की गई। एडिशनल डायरेक्टर स्वास्थ्य डॉ. वीणा सिन्हा और अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के प्रोग्राम मेनेजर पब्लिक हेल्थ श्री राजकमल शर्मा और अन्य अतिथि इस अवसर पर मौजूद थे।

मनरेगा में 10 दिनों में मजदूरों के बैंक खाते में जमा हुई 700 करोड़ की धनराशि

वर्ष 2020-21 में 6300 करोड़ से अधिक मजदूरी

राज्य में वर्ष 2020-21 में महात्मा गाँधी नरेगा के तहत 6300 करोड़ रूपये से अधिक की मजदूरी का भुगतान 1.33 करोड़ मनरेगा मजदूरों के बैंक खाते में सीधे किया गया है। राज्य में योजना प्रारंभ होने के उपरान्त मजदूरी में वितरित हुई यह सर्वाधित राशि है।

श्री मनोज श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने बताया कि कोविड काल के दौरान बड़ी संख्या में गाँव लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य की मांग पर भारत सरकार द्वारा 3 लेबर बजट एवं मजदूरी की राशि में वृद्धि करते हुए 2400 करोड़ रूपये से अधिक की अतिरिक्त राशि राज्य को उपलब्ध कराई गई। भारत सरकार द्वारा इस वर्ष राज्य को मनरेगा मजदूरी मद में 6300 करोड़ रूपये से अधिक क राशि उपलब्ध कराई गई, जिसका भुगतान मजदूरों के बैंक खाते में किया गया है। मनरेगा के तहत कोविड काल के दौरान 6 लाख 50 हजार से अधिक परिसम्पत्तियों का सृजन किया गया है। इन कार्यो का पूर्णता प्रमाण-पत्र भी जारी किया गया है।

यह उल्लेखनीय है कि मात्र विगत 10 दिनों में ही मजदूरों के बैंक खाते में 700 करोड़ रूपये की राशि जमा हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में प्राप्त होने वाली अभूतपूर्व राशि है।

मेपकॉस्ट के विज्ञान भवन में

36वीं म.प्र. युवा वैज्ञानिक कांग्रेस का उदघाटन आज
पन्द्रह विषयों में पढ़े जायेंगे 160 रिसर्च पेपर्स

मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् द्वारा 36वीं म.प्र. युवा वैज्ञानिक कांग्रेस का 23 मार्च मंगलवार को अपरान्ह साढ़े 12 बजे नेहरू नगर स्थित विज्ञान भवन के डॉ. जगदीशचन्द्र बसु सभागृह में उदघाटन सत्र होगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा की अध्यक्षता में होने वाले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री श्री मोहन यादव, होंगे। 

 इस अवसर पर परिषद् के महानिदेशक डॉ.अनिल कोठारी, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार पाण्डेय एवं विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव श्री प्रवीण रामदास उपस्थित रहेंगे।

प्रदेश की युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को रिसर्च के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस बार 23 से 26 मार्च के दौरान मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक कांग्रेस का रियल और ऑनलाइन मोड पर आयोजन किया जायेगा। उदघाटन सत्र के बाद 15 विषयों में आयोजित समानान्तर सत्रों में 160 रिसर्च पेपर्स का प्रेजेंटेशन दिया जायेगा। चार-दिवसीय आयोजन में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शोध संस्थानों में कार्यरत रिसर्च स्कॉलर्स द्वारा रिसर्च पेपर पढ़े जायेंगे। जिन पन्द्रह विषयों में रिसर्च पेपर प्रस्तुत किये जायेंगे, उनमें एग्रीकल्चर साइंस, केमिकल साइंस, सिविल इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइंस एंड सूचना प्रौद्योगिकी, पृथ्वी तथा वायुमंडल विज्ञान, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यावरण विज्ञान, लाइफ साइंसेज, गणित विज्ञान, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, न्यू बायोलॉजी, फार्मास्युटिकल साइंसेज, फिजिकल साइंसेज, प्लांट साइंसेज एवं वेटरनरी साइंसेज सम्मिलित हैं। इसका लाइव प्रसारण यू-ट्यूब पर भी देखा जा सकता है।युवा वैज्ञानिक कांग्रेस की मेजबानी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन करेगा। 

मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र ‍में स्थापित कर रहा है नित नये आयाम
प्रद्युम्न सिंह तोमर

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के दूरदर्शी और संकल्पवान नेतृत्व में मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र ‍में नित नये आयाम स्थापित कर रहा है। प्रदेश में विद्युत क्षेत्र के विकास और विस्तार के लिए सभी आवश्यक और सुविचारित कदमों का उठाया जाना इन आयामों को छूने के पीछे है। परिणाम भी सामने है और वह यह कि 31 दिसंबर, 2020 की स्थिति में प्रदेश की उपलब्ध विद्युत क्षमता 21 हजार 361 मेगावॉट हो जाना। इसी दिन प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक 15 हजार 425 मेगावॉट शीर्ष मांग की पूर्ति भी सफलतापूर्वक की गई है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में उपलब्ध विद्युत क्षमता में 1 हजार 426 मेगावाट वृद्धि का लक्ष्य है। प्रदेश में पारेषण हानियाँ भी अब मात्र 2.59 प्रतिशत रह गई हैं, जो पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6006 करोड़ यूनिट विद्युत प्रदाय किया गया, जो पिछले वर्ष से 9 प्रतिशत अधिक है।

प्रदेश में विद्युत व्यवस्था प्रणाली की मजबूती के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में कई उल्लेखनीय कार्य किए गए। इनमें उपलब्ध विद्युत क्षमता में 394 मेगावाट की वृद्धि, 14 नये अति उच्च दाब उप केन्द्रों की स्थापना, एक हजार 72 सर्किट किलोमीटर अति उच्च दाब और एक हजार 645 किलोमीटर उच्च दाब लाइनों का निर्माण, 11 नये 33/11 किलोवाट उप केन्द्रों की स्थापना एवं 2005 वितरण ट्रांसफार्मरों की स्थापना के कार्य प्रमुख हैं। इससे इस अवधि में उपभोक्ताओं की संख्या में एक लाख 90 हजार की वृद्धि हुई है।

'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' रोडमैप में भविष्य की विद्युत माँग की सुचारू आपूर्ति के लिए पारेषण प्रणाली के विस्तार कार्यक्रम में 4000 करोड़ रुपये की लागत के ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर एवं टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धात्मक निविदाओं के जरिए अति उच्च दाब उप केन्द्रों एवं उससे संबंधित लाइनों का निर्माण शामिल किये गये हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर में 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। जून 2021 तक अधिकांश काम पूरा कर लिया जाएगा। टैरिफ आधारित 2000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के जरिए पहली परियोजना का कार्य प्रगतिरत है, जिसे वर्ष 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।

लॉकडाउन में उपभोक्ताओं को विद्युत देयकों में राहत

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान नेलॉकडाउन अवधि में बिजली उपभोक्ताओं की तकलीफ को महसूस कर उनके हित में अनेक निर्णय लिये। इन निर्णयों से उपभोक्ताओं को 1000 करोड़ से अधिक की राहत मिली।ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता, जो संबल योजना के हितग्राही हैं एवं जिनके माह अप्रैल, 2020 में देयक की राशि 100 रूपये तक थी, से मई, जून एवं जुलाई इन तीन माहों में सिर्फ 50 रूपये प्रतिमाह की राशि का ही भुगतान लिया गया।

प्रदेश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता, जिनके माह अप्रैल, 2020 में देयक की राशि 100 रूपये तक थी, उनके मई, जून एवं जुलाई, 2020 में देयक राशि 100 रूपये से 400 रूपये तक आने पर उनसे इन तीन माहों में मात्र 100 रूपये प्रतिमाह की राशि का भुगतान लिया गया। प्रदेश के ऐसे घरेलू उपभोक्ता, जिनकी माह अप्रैल, 2020 में देयक राशि रूपये 100 से अधिक परन्तु रूपये 400 या उससे कम थी, उनके मई, जून एवं जुलाई, 2020 में देयक राशि 400 रूपये से अधिक आने पर उनसे इन तीन माहों में देयक की आधी राशि का ही भुगतान लिया गया। शेष आधी राशि का भुगतान आस्थगित किया गया है।

प्रदेश के निम्न दाब गैर घरेलू एवं निम्न दाब औद्योगिक उपभोक्ताओं तथा उच्च दाब टैरिफ एचव्ही-3 उपभोक्ताओं से माह अप्रैल, मई एवं जून 2020 के विद्युत देयकों में स्थायी प्रभार की वसूली को आस्थगित कर यह राशि माह अक्टूबर, 2020 से मार्च, 2021 के विद्युत देयकों के नियमित भुगतान के साथ, छः समान किश्तों में बिना ब्याज के ली जाने की सुविधा दी गई है।

प्रदेश के उच्च दाब सहित सभी उपभोक्ताओं द्वारा लॉकडाउन के चलते अप्रैल एवं मई माह में देय विद्युत बिलों का भुगतान सामान्य नियत तिथि तक करने पर एक प्रतिशत की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी गई। इसमें निम्न दाब उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन राशि अधिकतम रूपये दस हजार मात्र तथा उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम रूपये एक लाख मात्र निर्धारित की गई।

उपभोक्ताओं को अपनी संविदा मांग में कमी करने की सुविधा भी दी गई। इसका लाभ लेने पर उनके नियत प्रभार और न्यूनतम प्रभार में कमी आई।

उपभोक्ता हितैषी अन्य निर्णय

मुख्यमंत्री श्री चौहान के इस एक साला कार्यकाल में विद्युत उपभोक्ताओं को राहत देने का सिलसिला यहीं नहीं रुका। एक किलोवाट तक के भार वाले घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अगस्त, 2020 तक की बकाया राशि को आस्थगित कर सिर्फ चालू माह के देयक ही जारी किए जा रहे हैं। सभी पात्र घरेलू उपभोक्ताओं से भी उनकी पहली 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर मात्र 100 रुपये लिए जा रहे हैं। अनुसूचित जाति/जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 30 यूनिट तक की मासिक खपत पर सिर्फ 25 रूपये ही देने होते हैं। अंतर राशि का भार राज्य शासन वहन कर रहा है। इससे प्रति माह लगभग एक करोड़ घरेलू उपभोक्ता लाभांवित हो रहे हैं।

वर्तमान रबी सीजन में कृषि उपभोक्ताओं को दिन के समय अधिक बिजली देने के लिए फ्लेक्सी प्लान लागू किया गया है। कृषि कार्य के लिए लगभग 22 लाख कृषि उपभोक्ता को फ्लैट दरों पर बिजली दी जा रही है। एक हेक्टेयर तक की भूमि एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के 8 लाख कृषि उपभोक्ता को मुफ्त बिजली दी जा रही है।

उपभोक्ताओं से हर स्तर पर सीधे संवाद

विद्युत शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया में जन-भागीदारी सुनिश्चित की गयी है। उपभोक्ताओं से हर स्तर पर सीधे संवाद की व्यवस्था की गई है। विद्युत प्रदाय की शिकायतों के जल्द हल के लिए केन्द्रीयकृत कॉल सेंटरों को सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2020-21 में प्राप्त सभी साढ़े 21 लाख से ज्यादा शिकायतों को हल किया गया है।

करीब 3 लाख 80 हजार उपभोक्ताओं से शिकायतों के हल का संपर्क में औसत संतुष्टि प्रतिशत 98.39 पाया गया है। गलत देयकों से संबंधित 33 हजार से अधिक शिकायतों को शिविर लगाकर मौके पर ही दूर किया गया है।

ऊर्जा क्षेत्र की योजनाएँ

किसानों को शीघ्र स्थाई सिंचाई पंप कनेक्शन दिये जाने के लिये लागू स्वयं का ट्रांसफार्मर योजना में किसान अपने खर्च से, निर्धारित मापदंड अनुसार 73 हजार 257 ट्रांसफार्मर स्थापित कर चुके हैं। शहरी क्षेत्र में मीटरीकरण, वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण तथा आई.टी. कार्यों की 50 परियोजनाओं के सभी कार्य पूर्ण हो गये हैं।

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में भी फीडर विभक्तिकरण, मीटरीकरण, वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण तथा ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यों की सभी 50 परियोजनाओं के कार्य पूरे हो गये हैं।

विद्युत सेवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्र में दक्षता मोबाइल एप से प्रतिमाह 41 लाख 34 हजार उपभोक्ताओं की फोटो मीटर रीडिंग की जा रही है। कम्पनी ने एन.जी.बी. नाम से नया बिलिंग सिस्टम तैयार किया है, जिसकी प्रोसेसिंग स्पीड काफी तेज है तथा जिसे ऑपरेट करना भी आसान है।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्न दाब उपभोक्ताओं द्वारा स्वयं की गई मीटर रीडिंग के आधार पर बिलिंग की कार्यवाही की गई है। सभी उपभोक्ता सुविधाओं को एक ही प्लेटफार्म से उपलब्ध कराने के लिए WhatsApp chatbot का विकास किया गया है। कंपनी कार्यक्षेत्र में बिजली चोरी एवं बिजली के अनाधिकृत उपयोग को पकड़ने एवं रोकने के लिए मोबाइल ऐप उपयोग किया जा रहा है। संकल्प एप्लीकेशन में मौजूदा एलटी उपभोक्ताओं के लिए नये सर्विस कनेक्शन के साथ भार परिवर्तन, नाम एवं टैरिफ श्रेणी में परिवर्तन जैसी नई सुविधाएँ जोड़ी गई हैं।

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्ता के घर पहुँच कर बिल भुगतान की सुविधा जा रही है। फोटो मीटर रीडिंग सॉफ्टवेयर से एलटी उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग ली जा रही है।सॉफ्टवेयर तैयार कर सब-स्टेशन/डीटीआर एवं एलटी लाइन के परीक्षण एवं संधारण की गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जा रही है।

प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजनाएँ

अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई में प्रस्तावित 18660 मेगावाट सुपरक्रिटिकल इकाई की अनुमानित लागत 4665 करोड़ 87 लाख है। इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी में प्रस्तावित 1x660 मेगावाट सुपरक्रिटिकल इकाई की अनुमानित लागत 4616 करोड़ 36 लाख है। इसे वित्तीय वर्ष 2027-28 में प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है।

पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की प्रमुख उपलब्धियाँ

इस वित्त वर्ष में दिसंबर, 2020 तक 1428 स्किट कि.मी. पारेषण लाइनों का निर्माण तथा अति उच्च दाब उप केंद्रों में 3272 एम.व्ही.ए. की क्षमता वृद्धि की गई है। इससे अब प्रदेश में पारेषण लाइन 38 हजार 678 सर्किट कि.मी. तथा अति उच्च दाब उप केंद्रों की क्षमता 68 हजार 443 एम. व्ही. ए. हो गई है।

स्काडा सिस्टम

प्रदेश की पारेषण प्रणाली के संचालन एवं संघारण में उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए पृथक स्व-चालित नियंत्रण प्रणाली जबलपुर, भोपाल एवं इंदौर में स्थापित कर सभी उच्च दाब उपकेन्द्रों से संबद्ध किया जा चुका है।

इंसुलेटेड एलीवेटेड वर्क प्लेटफार्म सिस्टम

प्रदेश में इंसुलेटेड वर्क प्लेटफार्म एवं स्काफोल्डिंग सिस्टम द्वारा अति उच्च दाब लाइनों का संधारण किया जा रहा है। इमरजेंसी रिस्टोरेशन सिस्टम में पारेषण लाइनों के टावरों के आंधी/तूफान अथवा किसी अन्य कारण से धराशाई/क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में कंपनी द्वारा क्षतिग्रस्त टावर के स्थान पर नये टावर लगाने का कार्य किया जाता है।

गैस इन्सुलेटेड सब स्टेशन

प्रदेश की बढ़ती हुई विद्युत मांग को पूरा करने के लिये नवीन उपकेन्द्रों की स्थापना में शहरी क्षेत्र में उचित भूमि की उपलब्धता की समस्या के निराकरण के लिए गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन एक सशक्त विकल्प के रूप में स्थापित हो रहे हैं।

मल्टी सर्किट मल्टी वोल्टेज मोनोपोल स्ट्रक्चर

सघन आबादी वाले क्षेत्रों में पारेषण क्षेत्र में अधिकाधिक मार्गाधिकार सुनिश्चित करने हेतु टावर के आधार क्षेत्र को कम करने के लिए ठोस सँकरे आधार वाले मल्टी सर्किट मल्टी वोल्टेज मोनोपोल स्ट्रक्चर का उपयोग किया जा रहा है।

कोरोना काल में दुग्ध पालकों के लिये अतिरिक्त आय बनी संबल
प्रेमसिंह पटेल

कोरोना काल में जहाँ पूरे विश्व में आर्थिक संकट छा गया वहीं मध्यप्रदेश के किसानों को दूध विक्रय से अतिरिक्त आमदनी हुई। लॉकडाउन अवधि में राज्य दुग्ध संघ द्वारा 2 करोड़ 54 लाख लीटर अतिरिक्त दूध किसानों से खरीदा गया। दुग्ध उत्पादकों को इसके लिये 94 करोड़ रूपये की राशि का अतिरिक्त भुगतान किया गया। प्रदेश में 7 हजार 193 दुग्ध सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। इनके माध्यम से वर्ष 2020-21 में करीब 9 लाख किलोलीटर दूध संकलित किया गया। दुग्ध उत्पादकों को उस समय बहुत राहत मिली जब निजी संयंत्रों द्वारा दुग्ध क्रय बंद कर दिया गया लेकिन राज्य शासन के दुग्ध संघों ने दूध का संकलन जारी रखा। दूध की आपूर्ति करने वाले किसानों को इस वित्त वर्ष 2020-21 में 902 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया।

भारतीय संस्कृति में सदियों से पशुपालन ने अर्थ-व्यवस्था और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर भूमिहीन, छोटे किसानों और महिलाओं में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। कोरोना के बावजूद पशुपालन विभाग ने अपनी गतिविधियाँ जारी रखते हुए पशुपालकों की सुविधा का हरसंभव ध्यान रखा। आलोच्य अवधि में फरवरी तक प्रदेश में एक करोड़ 42 लाख से ज्यादा पशुओं का उपचार और करीब 4 करोड़ 52 पशुओं का टीकाकरण किया गया। इसी तरह लगभग 30 लाख पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, 2 लाख से ज्यादा का प्राकृतिक गर्भाधान, प्राकृतिक गर्भाधान से साढ़े 4 लाख से ज्यादा वत्सोपादन एवं सवा 7 लाख से ज्यादा बधियाकरण किया गया।

गत वर्ष पशुधन संजीवनी योजना में कॉल सेंटर पर 3 लाख 21 हजार 776 कॉल मिले, जिसके विरूद्ध 2 लाख 51 हजार 880 पशुओं का उपचार किया गया। प्रदेश के सभी विकासखंडो में लागू इस योजना में टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने पर चलित पशु चिकित्सा इकाई के माध्यम से पशुओं का उपचार किया जाता है।

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सभी गाय-भैंस वंशीय पशुओं को एफ.एम.डी. और ब्रुसेल्ला रोग का टीका लगाया जाता है। कार्यक्रम में लक्षित पशुओं को यूआईडी टैग लगाया जा रहा है। पहले चरण में ढाई करोड़ से ज्यादा गाय-भैंस वंशीय पशुओं को एफ.एम.डी. का टीका लगाया गया है। प्रदेश में कार्यक्रम का पहला चरण पूरा हो गया है।

राज्य शासन द्वारा बेसहारा गौ-वंश के संरक्षण के लिये 1004 गौ-शालाएँ स्वीकृत की गईं थीं। इनमें से 963 गौ-शालाएँ पूर्ण होकर 905 गौ-शालाओं का संचालन प्रारंभ हो चुका है। इसके अलावा इस वित्त वर्ष में स्वीकृत 2365 गौ-शालाओं में से 1808 गौ-शालाएँ निर्माणाधीन हैं। प्रदेश में साढ़े 8 लाख से ज्यादा निराश्रित गौ-वंश हैं। अशासकीय संस्थाओं द्वारा 627 गौ-शालाओं में एक लाख 66 हजार निराश्रित गौ-वंश का पालन किया जा रहा है।

आगर-मालवा जिले की सुसनेर तहसील के गाँव सालरिया में 462.63 हेक्टेयर क्षेत्र में गौ-अभयारण्य अनुसंधान एवं उत्पादन केन्द्र स्थापित है। केन्द्र में लगभग 4 हजार 900 वृद्ध, बेसहारा और बीमार गौ-वंश की सेवा की जा रही है। अभयारण्य में गौ-काष्ठ, वर्मी कम्पोस्ट खाद, गौ-मूत्र फिनायल आदि भी बनाया जा रहा है।

हितग्राही मूलक योजनाओं में 514 मुर्रा सांड, 119 गौ-सांड, 6827 कुक्कुट इकाई, 2950 कड़कनाथ के लिये अनुदान राशि दी गई। आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना में अब तक 6800 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा चुका है। इस वर्ष प्रदेश में 23 हजार 794 अंडा उत्पादन हुआ। प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 543 ग्राम प्रतिदिन रही, जो राष्ट्रीय औसत 352 ग्राम से अधिक है।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन में पशु प्रजनन प्रक्षेत्र रतौना (सागर) में गोकुल ग्राम की स्थापना की गई, जिसका लोकार्पण 30 दिसंबर 2020 को किया गया। संस्थान में थारपारकर, साहीवाल आदि देशी गायों की नस्लों का संरक्षण और संवर्धन किया जायेगा। मिशन में मैत्री की स्थापना के लिये मध्यप्रदेश में 5 वर्षों में 12 हजार 149 भौतिक और 98.40 करोड़ का वित्तीय लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2020-21 में 1100 मैत्री के प्रशिक्षण के लिये 8 करोड़ 90 लाख रूपये की राशि विमुक्त की गई।

भोपाल के केन्द्रीय वीर्य संस्थान में सेक्स सॉरटेड सीमन उत्पादन प्रयोगशाला के लिये 47.50 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की गई। यह देश की तीसरी प्रयोगशाला है। यहाँ साहीवाल, गिर, थारपारकर गाय और मुर्रा जाफराबादी आदि भैंस नस्लों से 90 प्रतिशत बछिया और सीमित मात्रा में बछड़ों का उत्पादन किया जायेगा। इससे उन्नत किस्म की दुधारू गाय, भैंस अधिक मात्रा में मिलेंगी।

दुग्ध उत्पादक किसानों को अच्छी आमदनी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भी अनेक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। सेंधवा में साढ़े 4 करोड़ की लागत से 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता का नवीन दुग्ध संयंत्र स्थापित किया गया है। इंदौर में 4 करोड़ की लागत से आइस्क्रीम संयंत्र तथा बटर चिपलेट मशीन, खंडवा में 25 हजार लीटर, सागर में एक लाख लीटर क्षमता के दुग्ध संयंत्रों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। जबलपुर में लगभग 10 करोड़ की लागत से 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के ऑटोमेटिक पनीर निर्माण संयंत्र का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है। वहीं दूध और दुग्ध उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये भोपाल में अत्याधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

पहली बार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से डेयरी संयंत्रों के लिये उपयुक्त दूध एवं दुग्ध पदार्थ तक्नीशियन का नया ट्रेड शुरू किया गया है। कोरोना काल में उपयोगिता के मद्देनजर गोल्डन मिल्क (हल्दी दूध) भी शुरू किया गया। प्रदेश में स्मार्ट सिटी की अवधारणा के अनुरूप मिल्क पार्लर को नये तरीके से डिजाइन किया गया है।

एशिया और विश्व की बड़ी सौर परियोजनाएँ हैं मध्यप्रदेश में
हरदीप सिंह डंग

अब सभी यह जानते हैं और मानते भी हैं कि परंपरागत विद्युत उत्पादन पर्यावरण के लिये नुकसानदायक होने के साथ जिन जीवाश्म ईंधन भण्डारों को बनने में लाखों साल लग जाते हैं, निरंतर दोहन से उनके भी समाप्त होने का खतरा उत्पन्न होता जा रहा है। ऐसे में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा बेहतर विकल्प के रूप में सामने आई है। मध्यप्रदेश देश का बड़ा सौर ऊर्जा केन्द्र बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले डेढ़ दशक में तेज छलांग लगायी है। प्रदेश में एशिया की सबसे बड़ी 750 मेगावाट और 4000 करोड़ लागत की रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना से उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं विश्व की सबसे बड़ी 600 मेगावाट की ओंकारेश्वर सोलर फ्लोटिंग परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है। इसके वर्ष 2023 तक पूरा होने की संभावना है। विश्व में अधिकांश विकास विद्युत पर आश्रित है।

नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन 30 मेगावाट से बढ़कर 5 हजार 44 मेगावाट पहुँचा

प्रदेश में विद्युत की खपत और आपूर्ति में नवकरणीय ऊर्जा की लगभग 24 प्रतिशत भागीदारी है। वर्ष 2004 तक इन परियोजनाओं की क्षमता मात्र 30 मेगावाट थी, जो जनवरी 2021 की स्थिति में 5 हजार 44 मेगावाट पहुँच चुकी है। सौर ऊर्जा से 2381 मेगावाट, पवन ऊर्जा से 2444, बायोमास से 120 और लघु जल विद्युत ऊर्जा से 99 मेगावाट विद्युत का उत्पादन हो रहा है।

रीवा ने आज वाकई इतिहास रच दिया है। सफेद बाघ के नाम से जाने जाना वाला रीवा अब सोलर प्लांट के नाम से भी जाना जाएगा। यहाँ खेतों में लगे हजारों पैनल ऐसा अहसास दिलाते हैं, मानो खेतों में पैनल की फसल लहलहा रही हो या गहरे समंदर का नीला पानी हो। इस अभूतपूर्व कार्य के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, क्षेत्र की जनता सहित पूरी टीम बधाई की पात्र है।

- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी (10 जुलाई 2020 रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना लोकार्पण के समय)

एशिया की सबसे बड़ी परियोजना है रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना

एशिया की सबसे बड़ी सौर परियोजना मध्यप्रदेश के रीवा जिले की गुढ़ तहसील के ग्राम बरसेता पहाड़, बदवार, रामनगर पहाड़, ईटार पहाड़ की असिचिंत भूमि पर स्थापित है। दुनिया की सबसे सुनियोजित तरीके से स्थापित परियोजना को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 10 जुलाई 2020 को राष्ट्र को समर्पित किया। परियोजना से अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की कम्पनियों की सहभागिता से सबसे कम टैरिफ रिकार्ड रूपये 2.97 प्रति यूनिट (बिना अनुदान के) प्राप्त हुई है। उत्पादित बिजली का 76 प्रतिशत अंश प्रदेश की पावर मैनेजमेंट कम्पनी और शेष 24 प्रतिशत दिल्ली मेट्रो को जा रहा है। सस्ती बिजली मिलने से दिल्ली मेट्रो को 793 करोड़ रूपये की बचत हो रही है। इसी तरह प्रदेश को भी 1600 करोड़ रूपये की बचत होगी। परियोजना की स्थापना से पहली बार ग्रीन एनर्जी फण्ड प्राप्त करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। परियोजना से प्रदेश की बिजली पर आत्म-निर्भरता बढ़ने के साथ मध्यप्रदेश का विश्व स्तर पर महत्व भी बढ़ा है।

प्रदेश में बन रहे हैं देश के बड़े सौर ऊर्जा पार्क

प्रदेश में बड़े सौर ऊर्जा पार्क बनाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक देश में एक लाख मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य को पूरा करने में मध्यप्रदेश बड़ी भागीदारी निभाएगा। आगामी सौर परियोजनाओं के माध्यम से 10 हजार मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादित होगी। प्रदेश का सबसे बड़ा 1500 मेगावाट का सौर ऊर्जा पार्क शाजापुर, आगर और नीमच जिलों में 6 हजार करोड़ रूपये से स्थापित किया जाएगा। सोलर पार्क से मार्च 2022 तक उत्पादन संभावित है। उत्पादित विद्युत को मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कम्पनी को दिया जाएगा। इसका सीधा लाभ प्रदेश की प्रगति को मिलेगा। इसके अतिरिक्त छतरपुर जिले में 950 और मुरैना जिले में 1400 मेगावाट के सौर ऊर्जा पार्क स्थापित होंगे। इस तरह आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के तहत नीमच, शाजापुर, आगर, मुरैना, छतरपुर और सागर जिलों में 18 हजार करोड़ रूपये से लगभग 4500 मेगावाट के सोलर पार्कों का विकास किया जाएगा।

विश्व की सबसे बड़ी सोलर फ्लोटिंग परियोजना ओंकारेश्वर में

सोलर पार्क

क्षमता
मेगावाट

स्थापना
लक्ष्य

आगर-शाजापुर-नीमच सोलर पार्क

1500

दिसम्बर,2022

ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पार्क

600

जुलाई, 2023

छतरपुर सोलर पार्क

950

जुलाई, 2023

मुरैना सोलर पार्क

1400

अक्टूबर, 2023

सोलर पम्प योजना

संख्या

स्थापना लक्ष्य

सोलर पंप

45000 नग

जुलाई, 2023

तीन हजार करोड़ रूपये से विश्व के सबसे बड़े 600 मेगावाट के ओंकारेश्वर सोलर फ्लोटिंग प्लांट जल्दी ही शुरू होगा। परियोजना के लिये लगभग 2 हजार हेक्टेयर जल क्षेत्र चिन्हांकित कर लिया गया है। वर्ल्ड बैंक द्वारा इसका सर्वे कार्य किया जा रहा है। इसे 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।

सोलर रूफटॉप परियोजनाओं से 41 मेगावाट के कार्य

प्रदेश में सोलर रूफटॉप परियोजनाएँ काफी महत्वपूर्ण हैं। अब-तक 41 मेगावाट के 3 हजार 642 कार्य विभिन्न स्तरों पर कार्यशील हैं। प्रदेश के पुलिस विभाग के भवनों, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, जेल, तकनीकी संस्थान आदि शासकीय भवनों की छतों पर रूफटॉप परियोजनाऍं स्थापित की जा रही हैं। इस वर्ष 2021-22 में 40 मेगावाट क्षमता के सौर रूफटॉप संयंत्रों को बड़े शासकीय भवनों में स्थापित किया जाना है। मध्यप्रदेश के सोलर रूफटॉप कार्यक्रम में कई नवाचार किये गये, जिन्हें राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना के साथ इनका अनुसरण भी किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कुसुम-'अ' योजना से किसानों को होगी अतिरिक्त आमदनी

यह किसानों की आर्थिक उन्नति वाली योजना है। किसान अपनी कम उपजाऊ या बंजर जमीन पर सोलर संयंत्र की स्थापना कर राज्य शासन को न केवल बिजली बेच सकेंगे बल्कि खुद भी भरपूर इस्तेमाल कर सकेंगे। परियोजना में प्रदेश के 357 किसानों ने अपनी 2 हजार 961 एकड़ भूमि पर 600 मेगावाट क्षमता की सोलर परियोजनाएँ लगाने की सहमति दी है। विकासकों के चयन के लिये निविदा जारी कर दी गई है। वर्ष 2021-22 के लिये 100 मेगावाट का लक्ष्य रखा गया है।

प्रधानमंत्री कुसुम-'स' योजना, 25 हजार पम्पों को सोलराइज करने का लक्ष्य

योजना में खेती के लिये किसानों के यहाँ स्थापित ग्रिड कनेक्टेड सिंचाई पम्पों को सोलराइज करने का काम किया जा रहा है। इसमें कृषि फीडर को सोलराइज कर किसानों को सिंचाई के लिये नि:शुल्क बिजली उपलब्ध कराने के साथ अतिरिक्त आय का अवसर भी मिलेगा। खेत में उचित क्षमता का सोलर पावर पैक स्थापित कर पम्प को ऊर्जित किया जायेगा। किसान को अतिरिक्त उत्पादित होने वाली बिजली का लाभ अतिरिक्त आय के रूप में मिलेगा। वर्ष 2021-22 में 25 हजार ग्रिड कनेक्टेड सोलर पम्पों को सोलराइज करने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना में 23,500 किसानों का पंजीयन

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर प्रदेश में लागू की गई मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना से किसानों को बहुत फायदा हुआ है। दूर-दराज इलाकों में भी किसान सोलर पम्प की सहायता से भरपूर सिंचाई कर फसलें ले रहे हैं। फसलें वर्षा आश्रित न रहने से गाँव से पलायन भी रूका है। वर्तमान वर्ष में अब-तक 6 हजार 871 सोलर पम्प स्थापित किये जा चुके हैं और लगभग 23 हजार 500 किसानों ने सोलर पम्प स्थापना के लिये पंजीयन कराया है। राज्य शासन का जुलाई 2023 तक 45 हजार सोलर पम्प स्थापना का लक्ष्य है।