मुख्यमंत्री श्री चौहान एनसीसी केडेट्स को पारितोषिक वितरित करेंगे
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में प्रतिनिधित्व करने वाले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के एनसीसी केडेट्स को पारितोषिक वितरित करेंगे। समारोह मुख्यमंत्री निवास पर 4 फरवरी को प्रात: 11 बजे होगा। समारोह में एनसीसी के मेजर जनरल श्री संजय शर्मा, अपर महानिदेशक एनसीसी मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान एनसीसी की ई-पत्रिका का विमोचन भी करेंगे।
|
प्रदेश हित में लिया जाए केंद्रीय बजट के प्रावधानों का फायदा : मुख्यमंत्री श्री चौहान
तीन वर्ष में बदलना है प्रदेश की तस्वीर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कैबिनेट बैठक में की मंत्रियों से चर्चा
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आने वाले तीन वर्ष में मध्यप्रदेश की तस्वीर बदलना है, अत: आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप पर अमल करते हुए विकास के लिए निरंतर प्रयत्न किये जायें। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक शुरू होने के पहले मंत्रि-मंडल के सदस्यों से बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केंद्रीय बजट के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में डीएफआई (वित्तीय विकास संस्थान) के गठन की घोषणा की गई है। इससे दीर्घ-कालीन ऋण की व्यवस्था संभव होगी। राज्यों को राशि प्राप्त हो सकेगी। यह नई व्यवस्था मध्यप्रदेश के लिए हितकारी सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में जनता के कल्याण के लिए केंद्रीय बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किये गये हैं। मंत्री अपने विभाग से संबंधित जन-कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए अधिक से अधिक राशि प्राप्त करने का प्रयास करें। इसके लिए केंद्रीय मंत्रियों से नई दिल्ली जाकर कर भेंट भी करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को अवगत करवाया कि आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लिए केंद्रीय बजट क्रांतिकारी है। बजट प्रावधानों का बेहतर उपयोग करें। इसके लिए मंत्री और विभाग स्तर पर प्रयास किये जायें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पूंजीगत कार्यों के लिए किए गए प्रावधानों, कुपोषण दूर करने के लिए नए मिशन की शुरुआत, स्वस्थ भारत के लिए अधिक राशि का प्रावधान, 10 लाख से अधिक आबादी के नगरों के विकास के लिए प्रावधान, जल-जीवन मिशन, शहरी स्वच्छता मिशन आदि का लाभ उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि उज्जवला योजना में प्रदेश के लिये अधिक से अधिक कनेक्शन प्राप्त करने के प्रयास किये जायें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि केन्द्रीय बजट से अनेक क्षेत्रों में विकास के अवसर खुलेंगे। इस बजट में विभिन्न कार्यों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। सोलर पंप स्थापित करने के लिए सहायता, पर्यटन और पुरातत्व के क्षेत्र में नवीन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए राशि, सात नए टैक्सटाइल पार्क प्रारंभ करने की योजना का भी लाभ लिया जाए। इसी तरह रेल परियोजनाओं, मनरेगा आजीविका मिशन, नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत प्रदेश के लिए अधिक राशि प्राप्त करने के प्रयास किये जायें। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य को पूरा करने में मददगार बनेगा केंद्रीय बजट मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तुत आम बजट क्रांतिकारी और आत्म-निर्भर भारत के निर्माण का बजट है। केंद्रीय बजट में समाज के हर वर्ग के कल्याण का पूरा ध्यान रखा गया है। कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में बिगड़ी अर्थ-व्यवस्था को संभालने के लिए इस बजट में हर क्षेत्र के लिए अवसरों के नए द्वार खुले हैं। यह बजट संकट और आपदा को समाधान एवं अवसर में बदलने वाला बजट है। छ: आधार स्तंभ करेंगे कल्याण केंद्रीय बजट को 6 मुख्य भागों में बाँटा गया है। ये बजट के आधार स्तम्भ हैं। इनमें स्वास्थ्य, भौतिक और वित्तीय पूंजीगत अधोसंरचना, आकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास, नवप्रवर्तन अनुसंधान और विकास, मानव पूंजी में नवजीवन का संचार करना शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए निर्धारित लक्ष्य केंद्रीय बजट में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बजट के आधार स्तंभ मध्य प्रदेश का कल्याण करेंगे। मध्यप्रदेश के आत्म-निर्भर रोड मैप के स्तंभों के समान ही, शिक्षा, स्वास्थ्य अधोसंरचना, अर्थ-व्यवस्था, रोजगार, सुशासन इत्यादि सभी महत्वपूर्ण सेक्टर केंद्रीय बजट में शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि केंद्रीय बजट में 'मिनिमम गवर्मेंट मैक्सिमम गवर्नेंस' की बात कही गई है, जिसे मध्य प्रदेश के आत्म-निर्भर रोडमैप में सुशासन नाम दिया गया है। इस तरह आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के प्रमुख स्तंभ, केंद्रीय बजट के आधार स्तंभों से साम्य रखते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी फ्लेगशिप परियोजनाओं के लिए बजट प्रावधानों की स्थिति देखें और ऐसी कार्य-योजना बनायें ताकि मध्यप्रदेश में इन योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी क्षमता से हो सके। केन्द्रीय बजट की विशेषताएँ और मध्यप्रदेश -
प्रधानमंत्री आत्म-निर्भर स्वस्थ भारत योजना के लिए 64 हजार करोड़ रूपए से अधिक की योजना प्रारंभ। -
कोरोना वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रूपए से अधिक का प्रावधान। -
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गत वर्ष के बजट से 137 प्रतिशत अधिक राशि, लगभग 2 लाख 23 हजार 846 करोड़ का प्रावधान। -
भारत सरकार द्वारा नये पोषण मिशन की शुरूआत की जा रही है। -
पूंजीगत कार्यों के लिये लगभग 5 लाख 50 हजार करोड़ का प्रावधान कर बजट में साढ़े 34 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे मध्यप्रदेश में अधोसंरचना के बड़े पूंजीगत कार्य कराने में लाभ मिलेगा। -
भारत माला योजना में 8 हजार करोड़ रूपए। इससे अटल प्रोगेस-वे का क्रियान्वयन फास्ट ट्रेक में होगा। -
शहरी इलाकों के लिए भी जल जीवन मिशन प्रारंभ। -
पाँच वर्ष के लिए लगभग 01 लाख 41 हजार करोड़ की लागत से शहरी स्वच्छ भारत मिशन-2 प्रारंभ होगा। -
बीस हजार करोड़ रूपये की अंशपूंजी से नया वित्तीय विकास संस्थान का गठन किये जाने से पूंजीगत योजनाओं के लिये दीर्घकालीन ऋणों की व्यवस्था हो सकेगी। -
राज्यों को सकल घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत तक उधार की सीमा बढ़ाई गई। इसके अतिरिक्त 0.5 प्रतिशत अतिरिक्त उधार का भी प्रावधान किया गया है। इससे मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2021-22 में लगभग 13 हजार करोड़ रूपये से अधिक के अतिरिक्त पूंजीगत कार्य प्रारंभ किये जा सकेंगे। -
उज्जवला योजना के अंतर्गत 01 करोड़ नये कनेक्शन दिये जायेंगे। इससे मध्यप्रदेश में भी लगभग 8 लाख नये कनेक्शन हितग्राहियों को दिये जा सकेंगे। -
देश में 35 सौ करोड़ रूपये की लागत से डिजिटल जनगणना का कार्य कराया जायेगा। -
आजादी की 75वीं सालगिरह पर 75 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को आयकर रिटर्न भरने से छूट प्रदान की गयी है। -
देश के जनजातीय क्षेत्रों में 750 नये एकलव्य स्कूल खुलेंगे। सरकार द्वारा एकलव्य स्कूल की लागत 20 करोड़ रूपये प्रति स्कूल से बढ़ाकर अब 38 करोड़ रूपये प्रति स्कूल कर दी गयी है। -
भारत में मेगा टेक्सटाइल पार्क योजना लांच की जायेगी और अगले 3 वर्षों में 7 नए टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे। -
डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की 3 नयी योजनाएँ क्रियान्वित की जायेंगी, जिनमें से एक मध्यप्रदेश के इटारसी से आँध्रप्रदेश के विजयवाड़ा तक विकसित होगी।
|
मंत्रि-परिषद की बैठक
इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेन्स परियोजनाओं के क्रियान्वयन को बढ़ावा देने का निर्णय
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कार्यसुविधा की दृष्टि से मैप आई.टी. का विघटन कर मैप आई.टी. की समस्त आस्तियों एवं देयताओं (एम.पी.एस.ई.डी.सी.) को हस्तांरित करने का निर्णय लिया गया। एम.पी.एस.ई.डी.सी.द्वारा ई-गवर्नेन्स/सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाओं का क्रियान्वयन, अधोसंरचनाओं का विकास एवं प्रदेश में आई.टी. निवेश को आकर्षित करने के लिए और अधिक कुशलता एवं दक्षता के साथ प्रदेश में दायित्वों का निर्वहन किया जायेगा। मैप आई.टी. की परियोजनाओं के साथ ही स्वीकृत पदों को भी एम.पी.एस.ई.डी.सी. को हस्तांतरित किया जायेगा। निर्माण अनुबंधों में परफार्मेंस गारंटी 3 प्रतिशत की गयी मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के द्वारा जारी आदेश के अनुसार लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आदेश जारी होने की दिनांक से 31 दिसम्बर .2021 तक निष्पादित होने वाले सभी निर्माण के अनुबंधों में परफार्मेंस गारंटी की राशि 5 प्रतिशत से घटा कर 3 प्रतिशत के मान से प्राप्त करने की स्वीकृति दी। इस निधि की प्राप्ति/वापसी की प्रक्रिया पूर्व अनुसार यथावत रहेगी। पूर्व के निष्पादित अनुबंधों में कोई राशि वापस नहीं की जाएगी एवं 31 दिसम्बर 2021 के पश्चात इस आदेश के फलस्वरूप लाभान्वित होने वाले अनुबंधों से कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली जाएगी। प्रदेश के अन्य विभागों के नए अनुबंधों के निष्पादन मे इस छूट/राहत को यथास्वरूप लागू करने के लिए विभाग को 31.12.2021 तक अधिकृत किया गया है। इस निर्णय से प्रदेश में निर्माण कार्यो के लिए निजी क्षेत्र के पास अधिक राशि उपलब्ध होगी, जिससे कार्यों में गति आएगी। लोक निर्माण विभाग में इस निर्णय से 150 करोड़ रूपए की वित्तीय तरलता निजी क्षेत्र को उपलब्ध होने की संभावना है। शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर निर्णय का अनुमोदन मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2019-20 के लिये सहकारी बैंकों से संबद्व प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा कृषकों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि कृषि ऋण दिये जाने की योजना की शर्ते एवं डयू डेट वृद्वि के संबंध में समय-समय पर समन्वय में मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये आदेशों एवं तदनुसार की गयी कार्यवाही का अनुमोदन किया। 15 करोड़ ऋण राशि देने का निर्णय मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में दुग्ध संघों की कार्यशील पूंजी की समस्या को दूर करने के लिए एमपीसीडीएफ को म.प्र. मूल्य स्थिरीकरण कोष से 15 करोड़ रूपये की राशि का ऋण उपलब्ध करने का निर्णय लिया। इस पर दुग्ध संघों/एमपीसीडीएफ द्वारा 3.5 प्रतिशत वार्षिक दर पर ब्याज देय अनुसार ब्याज सहित संपूर्ण ऋण राशि 31 मार्च 2021 तक म.प्र. मूल्य स्थिरीकरण कोष को वापिस की जाएगी।
|
विद्युत मांग और उपलब्धता का ऑकलन करने ऊर्जा विभाग और टेरी के बीच एमओयू
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की उपस्थिति में ऊर्जा विभाग एवं द एजर्नी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट (टेरी), जो कि एक नॉन-प्रॉफिट अनुसंधान संस्थान है, के बीच एमओयू किया गया है। एमओयू में प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री संजय दुबे और डायरेक्टर टेरी श्री ए.के. सक्सेना ने हस्ताक्षर किये। एमओयू के तहत टेरी द्वारा बिना किसी परामर्श शुल्क के मध्यप्रदेश की विद्युत मांग एवं उपलब्धता का ऑकलन कर भविष्य के लिए रूपरेखा तैयार की जायेगी। इस अध्ययन के अंतर्गत टेरी द्वारा पारंपरिक तथा नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों की उपलब्धता के अनुसार विभिन्न परिदृश्यों का विकास किया जायेगा, जिससे सबसे कम लागत पर विद्युत आपूर्ति की जा सके। टेरी द्वारा अनिश्चित प्रकृति की नवकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने के लिए योजना तैयार की जायेगी। राज्य में विद्युत आधिक्य की स्थिति है तथापि विद्युत की शीर्ष मांग की पूर्ति एक चुनौती रहेगी। टेरी द्वारा अपने अध्ययन में शीर्ष मांग की पूर्ति के लिए विभिन्न विकल्प दिए जायेंगे। इससे भविष्य में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा लागत में कमी आयेगी। यह राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी होगा।
|
होम-स्टे योजनाओं ने पर्यटकों को लुभाया
प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने की प्रभावी पहल
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग ने स्थानीय और विदेशी पर्यटकों को प्रदेश में नया अनुभव प्रदान करने और सतत पर्यटन (सस्टेनेबल टूरिज्म) की दिशा में पहल की है। विशेष रूप से विभाग की होम-स्टे योजनाएँ पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही हैं। विभाग द्वारा पर्यटकों को भारतीय संस्कृति, परम्परा एवं खान-पान आदि के अनुभव प्रदान करने की दिशा में पहल की गई है। पर्यटकों को ठहरने के लिये स्वच्छ एवं किफायती स्थान उपलब्ध कराने तथा प्रदेश में अतिथि कक्षों की संख्या में वृद्धि भी की जा रही है। | होम स्टे पोर्टल का उद्घाटन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2 फरवरी को होम-स्टे पोर्टल का उदघाटन किया। इस मौके पर प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड श्री शिवशेखर शुक्ला, अपर प्रबंध संचालक सुश्री सोनिया मीना तथा प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन निगम श्री एस. विश्वनाथन भी मौजूद थे। | पर्यटन विभाग द्वारा होम-स्टे योजनाओं को सरल बनाकर इनसे व्यापक रूप से हितधारकों को जोड़ने के कदम उठाये गये हैं। इन योजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों, पर्यटन स्थलों के निजी क्षेत्र के हितधारक तेजी से बढ़ते हुए पर्यटन व्यवसाय से जुड़ेंगे। वे यहाँ की संस्कृति, परिवेश एवं स्थानीय परम्पराओं का अनुभव प्रदान करेंगे। साथ ही वे आय के वैकल्पिक स्रोतों को भी सृजित कर सकेंगे। होम-स्टे संबंधी योजनाओं के जरिये स्थानीय हितधारकों के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिसमें गृहणियाँ, स्थानीय युवा, टूर-ट्रेवल्स, गाइड, नेचुरलिस्ट, हेरिटेज सम्पत्तियाँ, पारम्परिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय व्यवसाई, ग्रामीण स्व-सहायता समूह, पंजीकृत पर्यटन सोसायटी, स्थानीय कला एवं हस्तकला के कारीगर, स्थानीय खान-पान के विशेषज्ञ तथा उन्नत तकनीक का उपयोग करने वाले कृषक सम्मिलित हैं। पर्यटन विभाग द्वारा पंजीकृत इकाइयों को उनके प्रचार-प्रसार के लिये निश्चित अतिथि आवास पूर्ण करने और इकाई में उपलब्ध सुविधाओं को बढ़ाने के लिये वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। पंजीकृत इकाइयों को डिजिटल मार्केटिंग, प्राइसिंग और प्रमोशन के लिये तकनीकी सहायता, इकाई में कार्यरत मानव संसाधन की क्षमता वृद्धि तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ट्रेवल मार्ट और कार्यशालाओं में सहभागिता करने के अवसर प्रदान किये जा रहे हैं। पर्यटन विभाग ने इच्छुक हितधारकों को जोड़ने के लिये पर्यटन स्थल तथा जिला स्तर पर जिला पुरातत्व एवं पर्यटन परिषद के सहयोग से व्यापक प्रचार-प्रसार शुरू किया है। सोशल मीडिया सहित प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी होम-स्टे योजना और पंजीकृत इकाइयों का प्रमोशन किया जा रहा है। पर्यटन विभाग फिलहाल इच्छुक व्यक्तियों से इकाइयों के पंजीकरण के लिये ऑफलाइन आवेदन प्राप्त कर रहा है। भविष्य में आवेदकों की बढ़ती संख्या एवं पंजीकरण को आसान बनाने के लिये ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। इसके लिये होम-स्टे पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से इच्छुक व्यक्ति स्वयं या एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से आवेदन कर सकेगा। ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन के अतिरिक्त प्रदेश में स्थित पंजीकृत इकाइयों की बुकिंग, उपलब्ध होम-स्टे की जानकारी, सभी योजनाओं एवं पंजीयन से पहले और बाद में पूछे जाने वाले प्रश्नों की जानकारी उपलब्ध रहेगी।
|
नोवल कोरोना वायरस (COVID-19) मीडिया बुलेटिन
|
राज्य मंत्री श्री परमार ने की सभी शिक्षकों से नई शिक्षा नीति ड्राफ्ट को अध्ययन करने की अपील
स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री इन्दर सिंह परमार ने शिक्षकों से अपील की है कि वे नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट का अध्ययन करें। अपने जिलों में संगोष्ठी आयोजित कर चर्चा करें। नई शिक्षा नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन को अपने सुझाव भिजवाएं। मंत्री श्री परमार अध्यापक संविदा शिक्षक महासंघ के प्रांतीय अधिवेशन के समापन मौके पर शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री परमार इस अधिवेशन में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव के साथ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को समाज के सामने लाया जाएगा। समाज को उसकी स्थानीय भाषा में समझाकर इसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाएगा। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारत की सामाजिक परंपरा में शिक्षक असाधारण कार्य करते हैं। शिक्षक राष्ट्र निर्माता है। ब्रिटिश शिक्षा पद्धति ने भारत के समृद्ध इतिहास को कभी दिखाया ही नहीं। भारत राष्ट्रगुरु है, उसने दुनिया को ज्ञान का प्रकाश दिया है। हमें अपनी स्थानीय भाषा, मूल्यों और परंपराओं पर गर्व है। उन्होंने सभी शिक्षकों से 'आत्म-निर्भर भारत' के निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा शिक्षक ही ' आत्म-निर्भर भारत आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' का मार्ग प्रशस्त करेंगे। अधिवेशन में अध्यापक संविदा शिक्षक महासंघ और भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद थे।
|
सर्व संसाधन सम्पन्न शालाएँ - आत्म-निर्भर-मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण पहल
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश 'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री इन्दर सिंह परमार ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति के अनुसार सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं' की स्थापना के लिए कार्ययोजना बनाई है। इस कार्ययोजना के तहत राज्य में 9200 शालाओं को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने वाली विश्व स्तर की 'सर्व संसाधन सम्पन्न शाला' के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रथम चरण में वर्ष 2023 तक प्रदेश भर में 350 अत्याधुनिक भौतिक अधोसंरचना, विशिष्ट चयन प्रक्रिया से चयनित स्टाफ, उच्चतम तकनीक, गुणवत्ता उन्नयन और परिवहन सुविधा युक्त शालाओं का विकास किया जाएगा। वर्तमान में मध्यप्रदेश में बहुत सी ऐसी शालाएँ हैं जहाँ 60 से भी कम बच्चे पढ़ते हैं। ऐसी शालाओं के बच्चों को सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये, शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन और मध्यप्रदेश के स्कूलों को देश के अग्रणी स्कूलों के समकक्ष लाने के लिए यह महत्वकांक्षी योजना प्रारंभ की जा रही है। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि प्रदेश के सभी छात्रों को 15 किलोमीटर के भीतर कम से कम एक उच्च गुणवत्ता वाली 'सर्व संसाधन सम्पन्न शाला' उपलब्ध हो। बच्चों को सुगमता पूर्वक शालाओं तक पहुँचाने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। शालाओं में केजी से लेकर कक्षा 12वीं तक की कक्षाएँ संचालित की जाएंगी। सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं में अत्याधुनिक भौतिक अधोसंरचना, शत प्रतिशत शिक्षक और सपोर्ट, सर्व सुविधा युक्त प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय के साथ स्मार्ट क्लासेस और डिजिटल लर्निंग के माध्यम से स्कूली बच्चों को शिक्षित किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के अनुसार आर्थिक, सामाजिक रुप से कमजोर वर्ग के छात्रों, विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रत्येक शाला में यथासंभव एक इंग्लिश मीडियम का सेक्शन भी संचालित किया जाएगा। इन स्कूलों में माता-पिता की सक्रिय भागीदारी होगी, उन्हें सह - शिक्षक के रूप में सक्रिय किया जाएगा। सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं के लिए शाला का चयन स्थानीय जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के अनुमोदन उपरांत किया जा रहा है। प्रति जन शिक्षा केंद्र लगभग 3 शालाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है ताकि भौगोलिक रूप से संपूर्ण राज्य को कवर किया जा सके। जिलों में अधिक नामांकन और बुनियादी अधोसंरचना उपलब्धता वाली शालाओं को वरीयता दी जा रही है। इस तरह कुल चयनित 9200 शालाओं में चरणबद्ध तरीके से जिला स्तर पर 52, विकासखंड स्तर पर 261, संकुल स्तर पर 3200 और ग्रामीण स्तर पर 5687 शालाओं का विकास किया जाएगा। सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं के संचालन से स्कूली छात्रों के बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से बोर्ड परीक्षा परिणाम अच्छे आएंगे। कक्षा 12वीं के बाद होने वाली अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगिता परीक्षाओं में मध्यप्रदेश के बच्चे सफलता हासिल करेंगे। शिक्षा विभाग ने हमेशा ही स्कूली बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए नए नवाचारों को अपनाया है और स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रयास निरंतर जारी हैं। 'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों के उज्जवल भविष्य और सफल जीवन के लिए दृढ़ संकल्पित और प्रतिबद्ध है। निश्चित ही नई शिक्षा नीति से पोषित ये भावी पीढ़ी 'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' से लेकर 'आत्म-निर्भर भारत' को विश्व पटल पर गढ़ने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी।
|
जल जीवन की 39 जलप्रदाय योजनाओं से 64.51 लाख ग्रामीण आबादी होगी लाभान्वित 6091 ग्रामों में 13.36 लाख नल कनेक्शन
जल जीवन मिशन के अन्तर्गत जल निगम 39 जलप्रदाय योजनाओं के निर्माण का कार्य कर रहा है, जिसमें 6091 ग्राम शामिल हैं। इन योजनाओं में 13 लाख 36 हजार 366 नल कनेक्शन का प्रावधान है, जिससे 64 लाख 51 हजार 393 ग्रामीण आबादी को लाभ मिलेगा। इन योजनाओं की कुल लागत 2661.64 करोड़ है। परियोजना क्रियान्वयन इकाई भोपाल, इन्दौर, ग्वालियर, जबलपुर, राजगढ़, निवाड़ी, पन्ना, दमोह, सिवनी, शहड़ोल तथा सतना के अन्तर्गत ग्रामीण आबादी के लिए तैयार हो रही इन 39 जलप्रदाय योजनाओं में विदिशा जिले के 105 ग्राम, रायसेन के 81 ग्राम, सीहोर के 41 ग्राम, खण्डवा के 28 ग्राम, धार के 60 ग्राम, उज्जैन के 22 ग्राम, रतलाम के 14 ग्राम, मुरैना के 22 दतिया के 85 ग्राम, शिवपुरी के 32 ग्राम, जबलपुर के 193 ग्राम, नरसिंहपुर के 50 ग्राम,सिवनी के 783 ग्राम, उमरिया के 113 ग्राम, कटनी के 128 ग्राम, राजगढ़ के 1294 ग्राम, टीकमगढ़ के 226 ग्राम, पन्ना के 276 ग्राम, छतरपुर के 240 ग्राम, दमोह के 702 ग्राम, सागर के 232 ग्राम, सीधी के 31 ग्राम, अनूपपुर के 74 ग्राम, शहड़ोल के 155 ग्राम, सतना के 1019 ग्राम तथा रीवा जिले के 109 ग्राम शामिल हैं। राज्य सरकार पूरी तत्परता और गम्भीरता के साथ यह प्रयास कर रही है कि शहरों की भाँति ग्रामीण आबादी को भी उनकी उपयोगिता के अनुसार घर पर ही नल कनेक्शन के जरिये जल की प्राप्ति हो। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन से प्रदेश में इस कार्य को और गति मिली है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग तथा जल निगम प्रत्येक जिले के हर ग्राम और परिवार तक नल कनेक्शन के माध्यम से जल पहॅुंचाने की कार्यवाही कर रहा है। जहाँ जलस्त्रोत हैं वहाँ उन्हीं के उपयोग से और जहाँ नहीं हैं वहाँ जलस्त्रोत का निर्माण कर जल प्रदाय योजनायें बनायी जा रहीं हैं।
|
मंत्री श्री सखलेचा ने 9 अस्थायी कर्मियों को दिए स्थायीकरण के आदेश
विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने 9 अस्थायी कर्मियों को मंगलवार को स्थायीकरण के आदेश सौपे। उल्लेखनीय है कि सामान्य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार यह आदेश दिए गये है।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के अंतर्गत प्रो.टी.एस.मूर्ति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र, औबेदुल्लागंज में 9 अस्थायी श्रमिक 2016 से पूर्व से कार्यरत थे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री एवं अध्यक्ष कार्यकारी समिति मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के अनुमोदनानुसार स्थायीकर्मी घोषित करने के आदेश जारी किये गये। लाभान्वित कर्मियों में सर्वश्री शरद यादव, ब्रजमोहन यादव, मनोज प्रजापति, अभय सिंह, संतोष जोशी, चैखेलाल नंदवंशी, राजकुमार चौधरी, बाबूलाल मांझी एवं श्री भगवान दास के नाम शामिल हैं।
|
किसानों ने किया कृषि मंत्री का अभिनंदन
चना, मसूर, सरसों की खरीदी गेहूँ के साथ होने पर किसान हैं प्रसन्न
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल द्वारा किसानों के हित में चना, मसूर, सरसों की खरीदी गेहूँ के साथ करने संबंधी लिये गये निर्णय पर प्रदेश के किसानों में हर्ष व्याप्त है। मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधि-मण्डल ने श्री दर्शन सिंह चौधरी के नेतृत्व में कृषि मंत्री से भेंट कर किसानों के हित में लिये गये फैसले पर प्रसन्नता जताते हुए अभिनंदन किया। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रतिबद्ध है। खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिये सभी आवश्यक फैसले लिये जायेंगे, जिससे किसान लाभान्वित हो सकें। श्री चौधरी ने सरकार और कृषि मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में निरंतर फैसले ले रही है। इससे बगैर माँग के ही किसानों की समस्याओं का स्वत: निराकरण हो रहा है।
|
कोरोना योद्धाओं का योगदान अविस्मरणीय - मंत्री डॉ. मिश्रा
गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कोरोना काल में किये गये कार्यों के लिये कोरोना योद्धाओं के योगदान को अविस्मरणीय निरूपित किया है। उन्होंने कहा है कि कोरोना योद्धाओं को फरवरी माह में कोरोना मैडल प्रदान कर सम्मानित किया जायेगा। डॉ. मिश्रा ने कहा कि कोरोना महामारी के उस दौर में जब आम व्यक्ति घरों से बाहर नहीं निकल रहा था, उस समय पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौसम की मार की परवाह किये बगैर सड़कों पर खड़े होकर अपना कर्त्तव्य निर्वहन कर रहे थे। इसी प्रकार महामारी की भयावहता के कारण जब परिजन कोरोना पीड़ितों से मिलने के लिये भी तैयार नहीं थे, उस दौर में स्वास्थ्य विभाग के योद्धाओं ने कोरोना मरीजों का उपचार कर मानवता की बेमिसाल तस्वीर प्रस्तुत की है। ऐसे योद्धा हम सबके लिये वंदनीय और अभिनंदनीय हैं।
|
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सारंग ने केन्द्रीय बजट में लोक स्वास्थ्य के प्रावधानों पर चर्चा की
केन्द्रीय बजट पर ली विभागीय बैठक
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग ने आज विभागीय अधिकारियों के साथ केन्द्रीय बजट 2021-22 में लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा की। चर्चा में स्वास्थ्य के क्षेत्र में आगामी वर्ष का रोडमैप तैयार करने पर भी मंथन हुआ। मंत्रालय में आयोजित विभागीय बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री मो. सुलेमान, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री निशांत वरवड़े एवं उप सचिव श्री सोमेश मिश्रा उपस्थित थे। चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग की अध्यक्षता में चिकित्सा शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के साथ केन्द्रीय बजट 2021-22 में लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रमुख प्रावधानों के संबंध में चर्चा एवं मंथन उपरांत आगामी वर्ष का रोडमैप तैयार करने के लिये चर्चा की गयी। बैठक में कोविड-19 वैक्सीनेशन के संबंध में प्रदेश के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में टीकाकरण के प्रथम चरण में हेल्थ केयर वर्कर के टीकाकरण को सफलतापूर्वक संपादित करने के बाद वर्तमान में फ्रंट लाइन वर्कर के टीकाकरण के क्रियान्वयन किये जा रहे टीकाकरण सेशन की समीक्षा की गयी। द्वितीय चरण में प्रदेश के आम नागरिकों के टीकाकरण कार्यक्रम के लिये नागरिकों द्वारा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किये जाने के बाद टीकाकरण किये जाने और नागरिकों द्वारा स्वास्थ्य केन्द्रों पर डायरेक्ट वॉक इन पहुँचने पर टीकाकरण करने संबंधी व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये। प्रधानमंत्री आत्म-निर्भर भारत योजना में प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन तृतीयक देखभाल स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमताओं को विकसित किये जाने की चर्चा भी की गयी। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र (एनसीडीसी) के क्षेत्रीय केन्द्र भोपाल में स्थापित किये जाने के मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा और भोपाल जिला कलेक्टर के साथ चर्चा उपरांत 10 एकड़ आवश्यक भूमि का स्थान चिन्हित किया गया। उक्त केन्द्र के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ एण्ड एपीडिमियोलॉजी को स्थापित किये जाने के संबंध में चर्चा की गयी। स्थापित किये जाने वाले केन्द्र को गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के साथ शिक्षण-प्रशिक्षण के लिये संबद्ध किये जाने का निर्णय भी लिया गया। बैठक में बताया गया कि केन्द्रीय बजट में 602 जिलों और 12 केन्द्रीय संस्थानों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान के अंतर्गत हमीदिया अस्पताल में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्थापित करने का निर्णय लिया गया। भविष्य में चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में क्रिटिकल केयर मेडिसिन पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया जायेगा। बजट में किये प्रावधान अनुसार प्रदेश में बॉयोकेफ्रटी लेबल-3 की लैब स्थापित किये जाने के लिये तत्काल प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को स्वीकृति के लिये प्रेषित किये जाने का निर्णय भी लिया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के साउथ ईस्ट एशिया रीजनल ऑफिस के शोध प्लेटफार्म वन हेल्थ को प्रदेश में स्थापित किये जाने की पहल का निर्णय लिया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के वन हेल्थ शोध प्लेटफार्म का मुख्य उद्देश्य लोक स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रभावी नीति, कार्यक्रम एवं कानून को तैयार कर क्रियान्वित करना है। वन हेल्थ अपरोच के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा, पशुजन्य रोग (जानवरों से मनुष्य में फैलने वाली बीमारियों जैसे फ्लू, रेबीज, रिफ्रट वैली फीवर आदि) की रोकथाम की नीति निर्धारित करने और एंटी बॉयोटिक प्रतिरोध का मुकाबला करने के लिये प्रभावी कार्यक्रम निर्धारित करना है। मध्यप्रदेश का चिकित्सा शिक्षा विभाग वन हेल्थ रिसर्च प्लेटफार्म की स्थापना के लिये राष्ट्रीय संस्थान को प्रदेश में स्थापित करने की पहल करेगा। बैठक में बताया गया कि बजट-2021 में स्वास्थ्य संस्थानों की मानक मान्यता संस्थानों से मान्यता किये जाने की पहल को प्रदेश के समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध चिकित्सालयों को एनएबीएच (NABH) एवं अस्पतालों में संचालित लेबोरेट्री को एनएबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त करने की कार्यवाही की जायेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा इस दिशा में पूर्व में ही पहल की जा चुकी है। विभाग द्वारा अस्पतालों में मानक मान्यता के लिये विस्तृत गैप एनालिसिस किया जायेगा।
|
जीवन जीने की उत्तम कला ही विज्ञान है - मंत्री श्री सखलेचा
राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान केंद्र का शुभारंभ
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और सूक्ष्म,लघु, मध्यम उद्यम मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा है कि तन, मन और विचार के समन्वय करने का सबसे अच्छा तरीका विज्ञान है, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के समन्वय के कारण ही दुनिया छोटी होती जा रही है और हम कहीं भी बैठकर दुनिया को देख पा रहे हैं उन्होंने कहा कि असल में जीवन जीने की उत्तम कला ही विज्ञान है। मंत्री श्री सखलेचा मंगलवार को स्वयंसेवी संस्था साइंस सेंटर मध्य प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद नई दिल्ली भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल के सहयोग से सेम ग्लोबल विश्वविद्यालय भोपाल मे राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के राज्य स्तरीय आयोजन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। मंत्री श्री सखलेचा ने कहा कि प्रदेश के 52 जिलों से आए जिला समन्वयकों से अपेक्षा है कि वे बच्चों को इस प्रकार विकसित करेंगे कि वह अपनी रुचि के साथ पीस ऑफ माइंड से आगे बढ़ सके। विशिष्ट अतिथि डॉक्टर अनिल कोठारी ने कहा कि विगत दिनों कोविड-19 के दौरान पारंपरिक विज्ञान के कारण हमें बहुत मदद मिली। इस समय हमें एहसास हुआ कि कहीं ना कहीं हमने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़कर आज खामियाजा भुगता है। कुलपति सेम ग्लोबल विश्वविद्यालय सुश्री प्रीति सलूजा ने कहा कि समूह 62 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश में विश्व स्तरीय गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने हेतु की गई है। इस वर्ष बाल वैज्ञानिकों ने सतत जीवन के लिए विज्ञान विषय पर परियोजना तैयार की है। अकादमिक समन्वयक के समन्वय से मूल्यांकन किया जा रहा है। प्रदेश से सर्वश्रेष्ठ 30 परियोजनाओं का चयन राष्ट्रीय आयोजन के लिए किया जायेगा। यह आयोजन 4 फरवरी 2021 तक चलेगा।
|
मध्यप्रदेश में अनोखा नवाचार, पवन ऊर्जा संयंत्रों में सौर ऊर्जा भी बनेगी
मंत्री श्री डंग ने की नवकरणीय ऊर्जा नीति प्रारूप की समीक्षा
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग ने बताया कि प्रदेश में जल्दी ही पवन ऊर्जा संयंत्र स्थलों पर सोलर ऊर्जा पैनल्स भी लगाए जायेंगे। इससे दिन में सौर ऊर्जा और रात में पवन ऊर्जा मिलेगी, जो मध्यप्रदेश को आत्म-निर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मंत्री श्री डंग ने यह बात नवकरणीय ऊर्जा नीति के प्रारूप की समीक्षा करते हुए कही। श्री डंग ने कहा कि इस संबंध में एक हाइब्रिड पॉलिसी तैयार की जा रही हैं। प्रमुख सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री संजय दुबे, प्रबंध संचालक ऊर्जा विकास निगम श्री दीपक सक्सेना सहित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। देश में इस साल सबसे अधिक सोलर पार्क स्वीकृति मध्यप्रदेश के लिये मंत्री श्री डंग ने बताया कि देश में इस वर्ष सबसे अधिक सोलर पार्क मध्यप्रदेश के लिये स्वीकृत हुए हैं। देश में इस वर्ष स्वीकृत 18 हजार मेगावॉट के सोलर पार्कों में से 5 हजार मेगावॉट के सोलर पार्क अकेले मध्यप्रदेश के लिये स्वीकृत हुए हैं। इनमें 1500 मेगावॉट का आगर-शाजापुर-नीमच सोलर पार्क, 600 मेगावॉट का ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पार्क, 950 मेगावॉट का छतरपुर सोलर पार्क और 1400 मेगावॉट का मुरैना सोलर पार्क शामिल है। यह सभी पार्क 2022-23 में पूर्ण हो जायेंगे। रीवा-2, छतरपुर, मुरैना, सागर और रतलाम सोलर पार्क के लिये ज़मीन चिन्हित कर ली गयी है। सभी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में विभिन्न स्तरों पर काम जारी है। नवकरणीय ऊर्जा नीति आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश पर केन्द्रित होगी। श्री डंग ने नवकरणीय ऊर्जा नीति के उद्देश्य, आत्म-निर्भर भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश का नवकरणीय ऊर्जा में अग्रणी योगदान, रोजगार अवसरों का सृजन, नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन में प्रदेश को आत्म-निर्भर बनाने के साथ देश में राज्य को प्रमुख नवकरणीय ऊर्जा निर्यातक के रूप में स्थापित करना, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और विभिन्न परियोजनाओं को प्रोत्साहन आदि की समीक्षा की।
|
आगर-मालवा में प्रस्तावित सोलर प्लांट स्थल का निरीक्षण करेंगे मंत्री श्री डंग
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री हरदीपसिंह डंग 3 फरवरी को शाजापुर जिले के मोमन बड़ोदिया और आगर-मालवा में प्रस्तावित सोलर प्लांट स्थलों का निरीक्षण करेंगे। श्री डंग निरीक्षण के बाद दोनों ही जिलों में नवकरणीय ऊर्जा विभाग की गतिविधियों की समीक्षा भी करेंगे। इसके बाद श्री डंग मंदसौर जिले के सुवासरा के लिये रवाना हो जायेंगे।
|
बाँस की खेती से किसान हो रहे हैं समृद्ध
निमाड़ इलाके की पहचान नीम के पेड़, मिर्च और कपास की प्रचलित फसलों से होती आई हैं, पर इस क्षेत्र को बॉस के माध्यम से नई पहचान दिलाने का बीड़ा खरगोन जिले के ग्राम मेनगाँव के विजय पाटीदार ने न केवल उठाया है, बल्कि वे इसमें कामयाब भी रहे हैं। इन्होंने अपने क्षेत्र में दो साल पहले कटंग बाँस के 4 हजार पौधे लगाकर इसकी पूरी मशक्कत के साथ देखभाल की। इसका परिणाम यह निकला कि इन्होंने सब्जी के खेती में पौधा सहारा देने के लिए काम आने वाले 75 हजार रूपये के बाँस के डंडो का उत्पादन कर लिया है। विजय पाटीदार को बाँस के पौधे लगाने की प्रेरणा इस बात से मिली कि परम्परागत फसलों में काफी मेहनत के बावजूद कई बार घाटा सहन करना पड़ता था। इसलिए वे लगातार इस खोज में लगे रहते थे कि ऐसी कौन-सी फसल पर काम करें, जहाँ कम मेहनत और कम रिस्क में ज्यादा लाभ मिले। इनकी यह खोज बाँस की फसल पर आकर पूरी हुई। मध्यप्रदेश राज्य बाँस मिशन बाँस के पौधे लगाने पर तीन साल में प्रति पौधा 120 रूपये का अनुदान देता है। इससे किसान की लागत बेहद कम हो जाती है। इसकी खासियत यह भी है कि इस फसल पर कोई बीमारी या कीड़ा नहीं लगता, जिससे महँगी दवा और रासायनिक खाद के उपयोग से मुक्ति मिल जाती है। चार साल में 40 लाख रूपये की मिलती है फसल बाँस लगाने के चौथे साल से प्रति भिर्रा न्यूनतम 10 बाँस तकरीबन 40 फीट लम्बे प्राप्त हो सकते हैं। इस तरह 40 हजार पौधों से 40 हजार बाँस उपलब्ध हो जाते हैं। प्रति बाँस 100 रूपये के मान से बिक्री होने पर लगभग 40 लाख की फसल मिलेगी। इन बाँसो को खरीददार स्वयं खेत तक आकर ले जाया करते हैं। बाँस की फसल से चौथे साल में प्रति एकड़ एक हजार क्विंटल बाँस की सूखी पत्ती प्राप्त होती है। इस पत्ती को जमीन में गाड़कर उच्च गुणवत्ता की कम्पोस्ट खाद भी बनाई जाती है, जिसका उपयोग सब्जी और अन्य तरह की खेती में भी कर सकते है। बाँस की कतारो में अन्य फसलों का भी उत्पादन बाँस की कतारों के बीच में मिर्च, शिमला मिर्च, अदरक और लहसुन की फसल उगाई जा सकती है। बाँस की कतारों में होने से इन फसलों में पानी कम लगता है और गर्मी में विपरीत प्रभाव से बच जाने की वजह से अच्छा उत्पादन होता है। विजय पाटीदार ने इन प्रयोगों को आजमाया भी है। उन्होंने बताया कि बाँस के पौधो की कतारों में इन्टरक्रापिंग का भी प्रयोग किया है। बाँस की फसल-सोने पर सुहागा बाँस की फसल से किसानों को 'सोने पर सुहागा' होने जैसी बात है। इस तरह के क्षेत्र में शीतलता प्रदान करने के साथ ही कार्बन डाईऑक्साईड के तीव्रता को सोखकर बड़ी मात्रा में मानव जीवन को ऑक्सीजन भी प्रदान करता है अर्थात जलवायु परिवर्तन की संख्या से निजात दिलाने में बाँस की फसल पूरी तरह कारगर है। तीन पीढ़ी के लिए पेंशन की जुगाड़ विजय पाटीदार का कहना है कि कटंग बाँस की उम्र 100 से 110 साल होती है। चौथे साल के बाद अच्छा कटंग बाँस प्राप्त होने लगता है तथा कटाई होने के बाद भी प्रति वर्ष बाँस मिलता रहता है। इस तरह इससे होने वाले आर्थिक लाभ से तीन पीढ़ी तक पेंशन का जुगाड़ हो सकता है। किसानों को दिया संदेश विजय पाटीदार ने अपने अनुभव साझा कर क्षेत्रीय किसानों को सलाह दी है कि अपने खेत के 10 प्रतिशत हिस्से में बाँस की फसल को जरूर लगाएँ। इससे कम रिस्क में लगातार अधिक मुनाफा मिलेगा। (सफलता की कहानी)
|
राज्य मंत्री श्री परमार के निर्देशन में स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में शिथिलीकरण
स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री इन्दर सिंह परमार ने दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। श्री परमार ने बताया कि शिक्षा विभाग के दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों ने यदि केंद्र सरकार की सी.टी.ई.टी. परीक्षा या मध्य प्रदेश सरकार की शिक्षक पात्रता परीक्षा (2011-12) या अन्य राज्य सरकार द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की हो। उस पात्रता परीक्षा की वैधता अवधि को संज्ञान में लिए बगैर, प्राथमिक शिक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा। श्री परमार ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए नियमों में शिथिलीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से संभागों और जिलों में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा सकेगा। श्री परमार ने बताया कि एक अन्य निर्णय में निर्धारित योग्यता रखने वाले दिवंगत अध्यापक संवर्ग एवं नियमित शासकीय शिक्षक और कर्मचारियों के आश्रितों को, प्रयोगशाला शिक्षक के रिक्त पदों पर भी नियमों के अंतर्गत अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि प्रयोगशाला शिक्षक का वेतनमान तथा प्राथमिक शिक्षक का वेतनमान 5200- 20200 +2400 ग्रेड पे समान है। प्रयोगशाला शिक्षक के पद पर शिक्षक पात्रता परीक्षा का बंधन नहीं है।
|
मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदर्शनी-2021
कलाकृतियाँ जमा करने की अंतिम तिथि 10 फरवरी
उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल द्वारा मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदर्शनी-2021 का आयोजन किया जा रहा है। अकादमी द्वारा मध्यप्रदेश के ख्यातिलब्ध कलाकारों के नाम से स्थापित रूपंकर एवं ललित कलाओं के दस पुरस्कारों के लिए कलाकृतियाँ आमंत्रित की गई हैं। प्रत्येक पुरस्कार की राशि 51 हजार रूपये होगी। कलाकृतियों के साथ प्रदशनी में प्रवेश शुल्क दो सौ रूपये नगद जमा करना होंगे। कलाकृतियाँ जमा करने की अंतिम तिथि 10 फरवरी 2021 निर्धारित की गई है। प्रदर्शनी में तीन कलाकृतियाँ मान्य की जायेगी तथा इसमें 25 से 55 वर्ष तक की आयु के कलाकार भाग ले सकेंगे। जनवरी 2019 के बाद सृजित कलाकारों की मौलिक कलाकृतियाँ मान्य की जायेंगी। कला प्रदर्शनी की विवरणिका शा. ललित कला महाविद्यालय, जबलपुर, धार, खण्डवा, इन्दौर, ग्वालियर, कालिदास अकादमी कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं। कलाकृतियाँ उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी रवीन्द्रनाथ ठाकुर मार्ग, बाणगंगा चौराहा, भोपाल एवं ललित कला अकादमी, जबलपुर, ग्वालियर, इन्दौर में 10 फरवरी 2021 को 5 बजे तक जमा होंगी। इसके पश्चात् प्राप्त होने वाली कलाकृतियाँ स्वीकार नहीं की जायेंगी। अकादमी की वेबसाइट www.kalaacademymp.com/ या http://www.facebook.com/ kalamitrabpl/ एवं अन्य माध्यम से डाउनलोड आवेदन विवरणिका की फोटो प्रतियाँ(ए4 साइज)भी प्रवेश-पत्र के रूप में स्वीकार की जायेगी।
|
समय-सीमा में करें अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण की कार्यवाही
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री सिंह ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा
अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण के संबंध में जरूरी कार्यवाही समय-सीमा में करें। नवगठित 29 नगरीय निकायों में राष्ट्रीय शहरी अजीविका मिशन को लागू करने का प्रस्ताव जल्द भेजें। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने यह निर्देश मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिये। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्री ओ.पी.एस. भदौरिया, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री नीतेश व्यास और श्री मनीष सिंह तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। पोर्टल के माध्यम से होगी आश्रय स्थलों की मॉनीटरिंग मंत्री श्री सिंह ने कहा कि दीनदयाल रसोई केन्द्रों के संचालन में श्रम और सामाजिक न्याय विभाग को भी जोड़ा जाय। इनकी संख्या भी बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि रात्रि कालीन आश्रयों को सुव्यवस्थित करें। यहाँ नियमित साफ-सफाई हो। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री निकुंज श्रीवास्तव ने बताया कि दीनदयाल रसोई केन्द्रों ओर रात्रि कालीन आश्रयों की सतत मानीटरिंग के लिए पोर्टल तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में 51 जिला मुख्यालयों और एक लाख से अधिक आबादी वाले नगरीय निकायों में 119 आश्रय स्थल संचालित है। श्री सिंह ने कहा कि पी.एम. स्वनिधि योजना में लक्ष्य के अनुरूप कार्यवाही करें। अभी तक 2 लाख 40 हजार पथ-विक्रेताओं को ऋण वितरित हो चुका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अभिशासन और नगरीय प्रबंध संचालन का नाम पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री सुंदरलाल पटवा के नाम से होगा। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने कहा कि भवन अनुज्ञा नियमों में सुधार की आवश्यकता है। इस संबंध में अन्य राज्यों के नगर निगमों की प्रणाली का अध्ययन कर इसमें सुधार प्रस्तावित करें। नागरिकों को सरलता से सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये आई.टी. का उपयोग करें। उन्होंने कहा सीवेज और पेयजल लाइन के कारण खोदी गई सड़कों की मरम्मत गुणवत्तापूर्ण तरीके से जल्द करवायें। बैठक में बताया गया कि अभी तक 450 कि.मीं सड़कों की मरम्मत करवाई जा चुकी है। शेष कार्य भी फरवरी माह का अंत तक पूरा करा लिया जाएगा। श्री सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अपूर्ण कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिये। सीएमओ की करें कार्यशाला श्री सिंह ने कहा कि मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला कर योजनाओं के क्रियान्वयन के तरीकों के बारे में बताया जाये। बेस्ट प्रेक्टिसेस को दिखाया जाये। एक जिले में एक निकाय को मॉडल के रूप में विकसित करें। केन्द्रीय बजट में स्वच्छता, जल-जीवन मिशन और ट्रांसपोर्ट के लिये किये गये प्रावधानों के समुचित उपयोग के लिये समय पर प्रोजेक्ट बनायें। इस कार्य के लिये डेडीकेटेड अधिकारियों की टीम गठित करें। निर्धारित समय पर हो मेट्रो रेल का काम नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री सिंह ने कहा कि भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल का कार्य निर्धारित समय पर हो। उन्होंने कहा कि इंदौर मेट्रो में आ रही समस्याओं का त्वरित निराकरण करें। अगस्त-2023 में मेट्रो रेल का प्रथम चरण पूरा हो जाना चाहिये। श्री सिंह ने मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि जो एलआईजी नहीं बिक रहे हैं, उनके लिये नई नीति बनायें। उन्होंने नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय के कार्यों एवं अन्य योजनाओं की भी समीक्षा की। श्री सिंह ने कहा कि आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लिये जो लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं, उन्हें समय-सीमा में पूरा करें। बैठक में बताया गया कि सभी नव-गठित नगरीय निकायों में प्रधानमंत्री आवास योजना लागू होगी।
|
गैस पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनी सड़क पुनर्निर्माण के लिए देगी बैंक गारंटी
लोक निर्माण मंत्री श्री भार्गव की उपस्थिति में हुआ एम.ओ.यू.
घरेलू गैस पाइप लाइन बिछाने से पूर्व संबंधित एजेन्सी को रोड के पुनर्निर्माण के लिए बैंक गारंटी जमा करनी होगी। इससे संबंधित एम.ओ.यू. लोक निर्माण मंत्री श्री गोपाल भार्गव की उपस्थिति में सड़क विकास निगम और थिंक गैस सिंगापुर के मध्य मंत्रालय में हस्ताक्षर किया गया। 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' की थ्योरी पर आधारित इस एम.ओ.यू. के बाद निर्माण एजेंसी को विभाग से एन.ओ.सी. के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना होगा। इस तरह का यह प्रथम एम.ओ.यू. है, जिस पर हस्ताक्षर किए गये हैं। सड़क विकास निगम विभागीय एन.ओ.सी. जारी कराने में समन्वय का काम करेगा। लोक निर्माण मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश के तीन जिलों भोपाल, सीहोर एवं राजगढ़ में घरेलू गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य सिंगापुर की थिंक गैस लिमिटेड को दिया है। उन्होंने कहा कि शहरी और बाहरी क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने के लिए गैस एजेंसियों द्वारा अनेक स्थानों पर सड़क काटने का काम किया जाता है, इसके लिए उन्हें जिले और क्षेत्रवार विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना होते हैं। परिणाम स्वरूप प्रोजेक्ट और उपभोक्ताओं को सुविधा मिलने में देरी होती है। प्रक्रिया के सरलीकरण के लिए गैस एजेंसी के साथ तीनों जिलों का एक साथ एम.ओ.यू. साइन हो जाने से, गैस एजेंसी एक साथ राशि की बैंक गारंटी लोक निर्माण विभाग को प्रदान करेगी, विभाग गैस कम्पनी को तुरंत काम करने का एन.ओ.सी. जारी करेगा। एजेंसी रोड़ का कटाव करने गुणवत्ता पूर्ण ढंग से उसका पुनर्निर्माण करेगी, ऐसा न करने पर लोक निर्माण गैस एजेंसी की बैंक गारंटी को जब्त कर काम पूर्ण करायेगा। एम.ओ.यू. के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक-आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग श्री फैज अहमद किदवई उपस्थित थे। सड़क विकास निगम के सी.ई.ओ. श्री शशांक मिश्रा तथा थिंक गैस के प्रेसिडेंट (पावर) श्री भरत सक्सैना ने हस्ताक्षर किये।
|
विनोद मिल के श्रमिकों को 97 करोड़ का किया जाएगा भुगतान-राजस्व मंत्री श्री राजपूत
मिल की 18.018 हेक्टेयर भूमि की होगी नीलामी
राजस्व एवं परिवहन मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि उज्जैन स्थित विनोद मिल के श्रमिकों को उनके 97 करोड़ रुपये के लंबित स्वत्वों का भुगतान किया जायेगा। मंत्री श्री राजपूत इस संबंध में पूर्व में मंत्री-मण्डल द्वारा लिए गए निर्णय के संबंध में कार्रवाई के लिए अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि 97 करोड़ की यह राशि मिल की जमीन की नीलामी से प्राप्त होने वाली धनराशि से ली जायेगी। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि विनोद मिल के श्रमिकों के स्वत्वों के भुगतान के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए निर्णय के अनुसार मिल की 18.018 हेक्टेयर भूमि का आधिपत्य राज्य शासन को सौंपा गया है। प्रथम चरण में इस भूमि में से 4 से 6 हेक्टेयर भूमि की नीलामी की जायेगी, जिसमें भूखण्ड की गाइड-लाइन मूल्य को रिजर्व प्राइज के रूप में रखा जाएगा। इस भूमि का उपयोग मिश्रित में परिवर्तित कराकर उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा भूमि के विकास का ले-आउट तैयार कर किया जाएगा। मालनपुर में सैनिक स्कूल के लिए भूमि आवंटन राजस्व मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि मालनपुर जिला भिण्ड में सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए रक्षा मंत्रालय से भूमि आवंटन का प्रस्ताव राज्य शासन को प्राप्त हुआ था। स्कूल के लिए नि:शुल्क 49 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई थी। सैनिक स्कूल के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के आधिपत्य की 20.952 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग को हस्तांतरित की गई। उन्होंने बताया कि सैनिक स्कूल की स्थापना की अधोसरंचना पर होने वाला व्यय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा किया जाएगा! इस पर लगभग 70 से 100 करोड की राशि के व्यय होने का अनुमान है। सैनिक स्कूल के नियमित संचालन के लिए राज्य शासन व्यय करेगा, जो लगभग 3 करोड 50 लाख वार्षिक होने का अनुमान है। इसके बाद राज्य नजूल भूमि निर्वर्तन समिति द्वारा नियमानुसार बाजार मूल्य के 100 प्रतिशत प्रीमियम तथा पुनर्निर्धारण नियम-2018 के अंतर्गत विहित दर से दोगुना दर पर वार्षिक भू-भाटक निर्धारित कर आवंटित किए जाने का निर्णय लिया गया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भूमि के नि:शुल्क आवंटन के अनुरोध पर प्रस्ताव नजूल भूमि निर्वर्तन समिति को विचार के लिए प्रस्तुत किया गया है। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व श्री मनीष रस्तोगी, अपर सचिव राजस्व सुश्री जी.व्ही. रश्मि एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
|
बड़े तालाब के संरक्षण के लिये मिलकर करेंगे प्रयास : नगरीय विकास मंत्री श्री सिंह
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने वर्ल्ड वेटलैंड-डे पर कहा है कि हम सब संकल्प लें कि भोपाल की धरोहर बड़े तालाब के संरक्षण के लिये सभी मिलकर प्रयास करेंगे। श्री सिंह ने कहा कि तालाब के केचमेंट एरिया में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके लिये आगामी मास्टर प्लान में भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
|
परियोजना में ठेकेदारों को बिना काम के भुगतान होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी- मंत्री श्री सिलावट
सिंचाई परियोजना के हितग्राहियों से संवाद करेंगे मंत्री जल-संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न
जल-संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि विभाग अंतर्गत निर्माणाधीन नहर, तालाब और बांधों का निरीक्षण अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री अनिवार्य रूप से करें। किसी भी परियोजना में तकनीकी, प्रशासकीय स्वीकृति और डिजायन मंजूर होने के बाद ही कार्य शुरू किया जाये। बिना काम शुरू हुए किसी भी ठेकेदार को यदि भुगतान किया जाता है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की जायेगी। मंत्री श्री सिलावट आज मंत्रालय में अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा कर रहे थे। मंत्री श्री सिलावट ने कहा की जलसंसाधन विभाग का मुख्य कार्य किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाना है। किसानों की आय को दोगुना करने में विभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। समय पर फसलों को पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से किसानों को बेहतर उपज मिलेगी। इसके लिए सभी हितग्राही किसानों के साथ वे स्वयं संवाद करेंगे। सिंचाई परियोजना का फीडबैक भी लेंगे। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री एस एन मिश्रा, ईएनसी श्री डावर, अधीक्षण और कार्यपालन यंत्री भी उपस्थित थे। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि केन्द्रीय बजट के बाद विभाग की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। बजट के अनुसार कार्य-योजना बनाकर लंबित योजनाओं के निराकरण की कार्रवाई करें, जिससे वित्त विभाग से राशि प्राप्त की जा सके। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि सभी अधिकारी फील्ड में जाकर निरीक्षण कर किये कार्य की डायरी का संधारण भी करें। बाँध और नहरों के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण और समय पर कार्य पूरा हो, इसके लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण निरन्तर जारी रखा जाये। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी कार्य क्षमता के अनुसार काम करें और सिंचाई योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को दिलवायें। पानी की उपलब्धता और उसके वितरण की व्यवस्था सुदृढ़ करते हुए सिंचाई का रकबा भी बढ़ाया जाये। विभाग के बाँध और तालाब में जल संवर्धन की क्षमता बढ़ाने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये। इसके लिये गर्मी के मौसम में किसानों को मिट्टी निकलने की भी अनुमति दी जाये, जिससे किसानों के खेतो में उपजाऊ मिट्टी डाली जा सके और उपज में भी वृद्धि हो सके। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए सर्वे कार्य शुरू कराया जाए, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को योजना का लाभ दिया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 89 आदिवासी ब्लॉक में वन क्षेत्रों में वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर योजना बनाए, आदिवासी क्षेत्रों में भी सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
|
आज जल-संरक्षण नहीं हुआ, तो अगला विश्व-युद्ध पानी के लिये होगा
पर्यावरण मंत्री श्री डंग ने विश्व वेटलैण्ड दिवस पर किया संगोष्ठी का शुभारंभ
पर्यावरण मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग ने कहा कि केवल विश्व वेटलैण्ड दिवस पर ही नहीं, जल-संरचनाओं और जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण के प्रयास निरंतर जारी रखें। उन्होंने तेजी से घटते भू-जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि आज जल-संरक्षण के प्रति नहीं चेते, तो अगला विश्व-युद्ध पानी को लेकर होगा। उन्होंने कहा कि देश के लिये प्राणों का बलिदान ही केवल देशभक्ति नहीं है। भारत-माता के वन, जल, थल, पर्यावरण आदि की रक्षा भी देशभक्ति है, इसे प्रत्येक व्यक्ति निभाए। अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्री मनोज श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव पर्यावरण श्री मलय श्रीवास्तव और कार्यपालन संचालक एप्को श्रीमती तन्वी सुन्द्रियाल और राज्य वेटलैण्ड अथॉरिटी प्राधिकरण के सदस्य श्री अभिलाष खाण्डेकर भी उपस्थित थे। मंत्री श्री डंग ने कहा कि प्रदेश के तालाबों के पास यदि कोई भी निर्माण कार्य करवाता है, तो बिना किसी दबाव में आये अधिकारी उसके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि इंदौर-भोपाल की तरह गाँवों को भी स्वच्छ बनायें। गाँवों में हैण्ड-पम्प के पास जल-निकासी की उचित व्यवस्था करें, ताकि गंदगी से बीमारियाँ न फैलें। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 23 हजार पंचायतों में अधिकतर जगह तालाब हैं, जिनका बेहतर रख-रखाव करें। अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि आज मनरेगा दिवस भी है। मनरेगा की 71 प्रतिशत राशि प्राकृतिक संसाधनों के रख-रखाव पर ही व्यय की गयी है। उन्होंने कहा कि भोपाल तालाब भोजपुर से शुरू होता था, जो आज काफी सिकुड़ चुका है। उन्होंने कहा कि इसी तरह प्रदेश के दूसरे तालाबों के प्राचीनतम रिकार्ड निकालें और आज की आकृति को मिलाते हुए समाधान करें। अपर मुख्य सचिव श्री मलय श्रीवास्तव ने कहा कि वेटलैण्ड पानी को छन्नी की तरह छानने का काम करते हैं। साथ ही बाढ़ के समय वेटलैण्ड पानी की अतिरेकता को भी नियंत्रित करते हैं। श्री अभिलाष खाण्डेकर ने कहा कि पानी किसी फैक्ट्री में नहीं बन सकता। इसे भावी पीढ़ी के लिये सहेज कर रखने की अति आवश्यकता है। मंत्री श्री डंग ने इस अवसर पर तालाबों के हेल्थ-कार्ड भी जारी किये।
|
विज्ञान महाविद्यालयों में शुरू होंगे कृषि एवं चिकित्सा के पाठ्यक्रम - डॉ. यादव
उच्च शिक्षा मंत्री ने की विभागीय कार्यों की समीक्षा
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विज्ञान महाविद्यालयों में कृषि एवं चिकित्सा के पाठ्यक्रमों को भी शुरू कराया जायेगा। इससे व्यावसायिक एवं रोजगारमूलक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में विभागीय समीक्षा कर रहे थे। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहाकि महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के मान से प्राध्यापकों की व्यवस्था युक्ति-युक्तकरण के माध्यम से सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयीन एवं विश्वविद्यालयीन परीक्षाएँ समय-सीमा में आयोजित की जायें। कृषि, चिकित्सा एवं अन्य पाठ्यक्रमों को महाविद्यालयों में संचालित करने के लिये कार्य-योजना बनायी जाये तथा रोजगारमूलक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाये। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर विभागीय गतिविधियों के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाये। इसके लिये महाविद्यालयों के ट्विटर, फेसबुक अकाउंट संचालित करने के लिये नीति बनायी जाये। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप डिजिटल इण्डिया के लिये सभी प्रयास किये जायें। महाविद्यालयों के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी जाये। इसके लिये महाविद्यालयों की जन-भागीदारी मद में दान करने वालों को सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने महापुरुषों पर आधारित स्व-रचित काव्य-पाठ प्रतियोगिताएँ कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महाविद्यालय द्वारा एक गाँव को गोद लेकर उसके विकास के प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भी इस कार्य की सराहना की गयी है। बैठक में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, अपर आयुक्त उच्च शिक्षा श्री चंद्रशेखर वालिम्बे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
|
भारत सरकार से वन विभाग को 46 प्रकरणों में 2685.547 हेक्टेयर वन भूमि की मिली औपचारिक स्वीकृति
वन विभाग को वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत पिछले साल में 46 प्रकरणों में 2685.547 हेक्टेयर वन भूमि की औपचारिक स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हो गई है। इसके अलावा इसी अवधि में 1117.239 हेक्टेयर वनभूमि व्यपवर्तन की सैद्धांतिक मंजूरी भी भारत सरकार से मिली है। वन मंत्री कुंवर विजय शाह ने बताया कि प्रदेश के लेफ्ट विंग एक्सट्रिमज्म प्रभावित जिले बालाघाट और मण्डला जिले में 13 गैर वानिकी उपयोग के लिए शासकीय विभागों को पाँच हेक्टेयर तक और अन्य जिलों में 15 गैर वानिकी उपयोग के लिए शासकीय विभागों को एक हेक्टेयर तक वन भूमि व्यपवर्तन के अधिकार राज्य सरकार को हैं। वन मंत्री ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जिन 46 प्रकरणों में औपचारिक स्वीकृति दी गई है उनमें सड़क के 17 प्रकरण में 378.639 हेक्टेयर, विधुत परियोजना के 12 प्रकरण में 555.825 हेक्टेयर, जल संसाधन विभाग के 6 प्रकरण में 532.419 हेक्टेयर, खनिज से संबधित एक प्रकरण में 874.146 हेक्टेयर, रेलवे के 5 प्रकरण में 329.143 हेक्टेयर में और 5 अन्य प्रकरण में 15.374 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है।
|
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सारंग की भोपाल डीआरएम के साथ बैठक
विभिन्न निर्माण कार्यों और अतिक्रमण हटाने पर हुई चर्चा
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग की आज भोपाल डीआरएम के साथ बैठक हुई। बैठक में भोपाल के ऐशबाग और निशातपुरा कोच फैक्ट्री ओव्हर-ब्रिज निर्माण, भारत टॉकीज ओव्हर-ब्रिज को चौड़ा करने, सुभाष नगर रेलवे क्रॉसिंग से निर्माणाधीन दीवार को शिफ्ट करने, बरखेड़ी/मोतीनगर में रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने और नागरिकों के पुनर्वास पर चर्चा हुई। भोपाल के ऐशबाग (बरखेड़ी) में ओव्हर-ब्रिज के निर्माण की ड्राइंग लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार की गयी है, जिस पर रेलवे द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। निशातपुरा कोच फैक्ट्री के पास प्रस्तावित रेलवे ओव्हर-ब्रिज की सम्पूर्ण लागत राज्य शासन वहन करेगा, निर्माण रेलवे द्वारा किया जाना है। रेलवे ने पूर्व में 58 करोड़ की लागत आंकलित की थी। राज्य शासन द्वारा डीपीआर निर्माण के लिये एक करोड़ 25 लाख की राशि रेलवे को दी जा चुकी है। भारत टॉकीज के पास स्थित ओव्हर-ब्रिज को यातायात के बढ़ते भार के कारण चौड़ा करना आवश्यक हो गया है। सुभाष नगर रेलवे क्रॉसिंग पर सुभाषचन्द्र बोस पार्क बनाया जाना प्रस्तावित है। इस संबंध में भी भारतीय रेलवे द्वारा निर्माणाधीन बाउण्ड्री-वॉल को शिफ्ट करने, बरखेड़ी रेलवे फाटक के पास और मोतीनगर में रेलवे की भूमि पर किये गये अतिक्रमण को मुक्त कराते हुए वहाँ रहने वाले नागरिकों को पुनर्वासित करने पर भी चर्चा की गयी।
|
म.प्र. शूटिंग अकादमी की खिलाड़ी मनीषा कीर ने देश को दिलाया कांस्य पदक
प्रदेश की बेटियां फहरा रही हैं देश का परचम-खेल मंत्री खेल मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने किया शूटिंग अकादमी का निरीक्षण
मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की प्रतिभावान खिलाड़ी मनीषा कीर ने दिल्ली से ऑनलाइन शूटिंग चैंपियनशिप में भागीदारी करते हुए कुवैत में आयोजित फर्स्ट एशियन ऑनलाईन शूटिंग चैम्पियनशिप में देश को कांस्य पदक दिलाया। मनीषा ने यह पदक वूमेन ट्रैप इवेंट में प्रदर्शन करते हुए 136 अंकों के साथ अर्जित किया। कुवैत शूटिंग फेडरेशन द्वारा फर्स्ट एशियन ऑनलाइन शूटिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। खिलाड़ी बेटी पर गर्व खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने आज शूटिंग अकादमी का भ्रमण कर विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणाधीन कार्यों को गुणवत्ता के साथ समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इस अवसर पर संचालक खेल और युवा कल्याण श्री पवन जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। शूटिंग अकादमी पहुँची खेल मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया से अकादमी की खिलाड़ी मनीषा कीर ने सौजन्य भेंट की और उन्हें अपनी उपलब्धियों से अवगत कराया। खेल मंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए हरसंभव प्रयास करते हुए उन्हें ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। मनीषा कीर की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि कोरोना जैसी बीमारी भी हमारे खिलाड़ियों के हौसले को दबा नहीं सकती। उन्होंने चैंपियनशिप में मनीषा कीर द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए मनीषा को बधाई दी। खेल मंत्री ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में प्रदेश की बेटियां उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और पदक जीत कर देश का परचम फहरा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी खिलाड़ी बेटी पर गर्व है। मनीषा ने अब तक देश को दिलाए हैं 11 पदक मत्स्य पालक की बेटी मनीषा कीर ने वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी में प्रवेश लिया और शूटिंग अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक श्री मनशेर सिंह के मार्गदर्शन में शॉटगन खेल का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। शूटिंग में अपना कैरियर बनाने वाली मनीषा ट्रैप इवेंट की प्रतिभावान खिलाड़ी हैं। उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अब तक दो स्वर्ण, 5 रजत और 4 कांस्य सहित 11 पदक देश को दिलाए हैं। मनीषा ने राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में 21 स्वर्ण, 6 रजत एवं 6 कांस्य पदक इस प्रकार कुल 33 पदक अर्जित कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। वर्ल्ड क्लास शूटिंग अकादमी संचालक खेल और युवा कल्याण श्री पवन जैन ने बताया कि खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा राजधानी भोपाल के समीप गोरा गांव में संचालित मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय खेल सुविधाएं और ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जा रही है। खेल मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया जी की पहल और प्रयासों से प्रारम्भ हुई वर्ल्ड क्लास शूटिंग अकादमी के माध्यम से प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर मिल रहा है।
|