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स्मार्ट सोच से बनती है स्मार्ट सिटी -श्रीमती माया सिंह

भोपाल : शुक्रवार, अगस्त 10, 2018, 19:38 IST

मध्यप्रदेश में स्मार्ट सिटी के स्वरूप में प्रदूषणमुक्त शहर विकसित करने के प्रयासों की सफलता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच का ही परिणाम है। इन शहरों में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक स्वरूप को बरकरार रखते हुए आधुनिक तकनीक तथा बेहतर नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराने के प्रावधान हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि 'वही देश, समृद्ध राष्ट्र की परिभाषा पर खरा उतर सकता है, जिसके शहर अपनी सांस्कृतिक-पुरातात्विक धरोहर को सहेजते हुए आधुनिकता को आत्मसात करते हैं। यही भाव शहरवासियों में भी होना चाहिये। इसलिये मेरा दृढ़ विश्वास है कि 'स्मार्ट सोच से ही स्मार्ट सिटी'' बनती है।''

अपनी इस अवधारणा को साकार रूप देने के लिये 25 जून, 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'स्मार्ट सिटी'' की बात देश के सामने रखी। पूरे देश में इस बात पर बहस शुरू हो गई कि यह अवधारणा केवल विचार मंथन तक ही सीमित होकर तो नहीं रह जायेगी। इस आइडियल सोच को साकार रूप कैसे प्रदान किया जायेगा। तीन वर्ष की अवधि में चुनिंदा 100 शहरों ने सिद्ध कर दिया है कि सरकार की इच्छा-शक्ति और जन-मानस की भागीदारी से कुछ भी असंभव नहीं है।

मध्यप्रदेश के परिप्रेक्ष्य में सराहनीय बात यह है कि प्रतिस्पर्धा के आधार पर देश के जिन 100 शहर का चयन किया गया है, उनमें प्रदेश के 7 शहर को चुना गया है। वर्ष 2015 में तीन शहर इंदौर, भोपाल और जबलपुर का प्रतिस्पर्धा में अव्वल आने पर चयन हुआ। वर्ष 2016 में द्वितीय चरण में 2 शहर उज्जैन और ग्वालियर का तथा तृतीय चरण वर्ष 2017 में 2 शहर सागर और सतना चुने गये हैं।

प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व में इन शहरों में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को साकार बनाने के लिये आगामी 5 वर्षों के लिये 20 हजार करोड़ से अधिक निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सातों शहर में स्मार्ट सोच के साथ मजबूती से लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इन शहरों में लगभग 16 हजार करोड़ के 409 प्रोजेक्ट तैयार कर लिये गये हैं। इनमें से 1610 करोड़ के 60 प्रोजेक्ट तो पूरे भी किये जा चुके हैं। अभी 2498 करोड़ के 139 प्रोजेक्ट निरंतर प्रगति पर हैं।

प्रदेश के युवा अधिकारियों, स्थानीय जन-प्रतिनिधि और शहरवासियों की भागीदारी से किये जा रहे नये-नये प्रयोग को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। अभी हाल में 27-28 जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रदेश के 2 स्मार्ट शहर भोपाल और जबलपुर को नवाचारों के लिये 5 राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा है, जो प्रदेशवासियों के लिये गौरव की बात है। यह पुरस्कार भोपाल स्मार्ट सिटी को शहर में पर्यावरण संरक्षण और यातायात नियंत्रण के लिये जून-2017 से प्रारंभ किये गये 'पब्लिक बाइक शेयरिंग' के लिये दिया गया। प्रोजेक्ट में 36 हजार यूजर्स को 69 साइकिल स्टेशन से 350 साइकिल उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसी क्रम में, भोपाल में युवाओं को उनके नये-नये आइडियाज को साकार करने के लिये बी-नेस्ट इंक्यूबेशन सेंटर के लिये भी अवार्ड मिला है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण अवार्ड प्रधानमंत्री ने स्वयं 'इंटीग्रेटेड कमाण्ड कंट्रोल-सेंटर' के लिये प्रदान किया।

भोपाल के इंटीग्रेटेड कमाण्ड कन्ट्रोल सेंटर को देखकर भारत सरकार के शहरी विकास, आवासीय एवं शहरी गरीबी उन्मूलन राज्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था- 'मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं अमेरिका के नासा कंट्रोल-रूम में आ गया हूँ''। यह हम सभी के लिये हर्ष का विषय है। यह देश का पहला ऐसा कमाण्ड सेंटर है, जिससे प्रदेश के सभी 7 स्मार्ट शहरों में 20 सेवाओं को जोड़ा गया है। इनमें राज्य-स्तर को सी.एम. हेल्पलाइन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेवा के साथ आपातकालीन फायर, पुलिस और हेल्थ सेवा-108 तथा शहर स्तर की सेवाओं में मेयर एक्सप्रेस, पब्लिक बाइक शेयरिंग, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट की मॉनीटरिंग की जायेगी। इ

सी क्रम में 2 पुरस्कार जबलपुर स्मार्ट सिटी को एनडीएमसी के स्मार्ट क्लास-रूम की वर्चुअल क्लासेस को और वेस्ट-टू-इनर्जी प्लांट से पीपीपी मोड पर 11.5 मेगावॉट विद्युत उत्पादन के लिये मिले हैं।

ग्वालियर स्मार्ट सिटी को स्मार्ट सिटी की राष्ट्रीय रेंकिंग में 28वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। जन-सुविधाओं के लिये प्रारम्भ किये गये 'वन सिटी-वन एप'' को 'स्कॉच आर्डर ऑफ मेरिट अवार्ड-2018'' प्रदान किया गया है। इन सभी शहरों में पर्यावरण संरक्षण और पुरातात्विक धरोहर को सहेजने का काम तेजी से किया जा रहा है। आशा है हम शीघ्र ही अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।

मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के अन्य शहरों को अपने संसाधनों से मिनी स्मार्ट सिटी बनाने का भी निर्णय लिया है। इन्हें राज्य सरकार मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से राशि मुहैया कराएगी। इसके लिये 300 करोड़ की व्यवस्था की गई है। प्रथम चरण में अमरकंटक, चित्रकूट, मैहर, ओरछा और मुंगावली का मिनी स्मार्ट सिटी के लिये चयन किया गया है। प्रत्येक को 25 करोड़ रुपये की राशि राज्य सरकार अपने संसाधनों से प्रदान करेगी। मुझे विश्वास है कि मध्यप्रदेश में आगामी तीन वर्षों में स्मार्ट सिटी की अवधारणा साकार रूप प्राप्त कर लेगी।


(लेखक मध्यप्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास मंत्री है)
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