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मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कला-संस्कृति की समृद्ध परम्परा को मिला अभूतपूर्व विस्तार - सुरेन्द्र पटवा

भोपाल : शनिवार, मार्च 3, 2018, 19:54 IST
 

मध्यप्रदेश में कला-संस्कृति की समृद्ध परम्परा को अभूतपूर्व विस्तार दिया गया है। यह संभव हुआ हमारे प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सुविचारित सोच से। प्रदेश सांस्कृतिक धरोहर,पुरातात्विक सम्पदा, ऐतिहासिक महत्व का यथास्थिति संरक्षण, संवर्धन,राजभाषा, स्वाधीनता संग्राम से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पहलु के साथ बेहतर पर्यटन सुविधाओं का साक्षी बना है।

मध्यप्रदेश देश का संभवत: पहला प्रदेश है जहाँ साहित्य, संस्कृति, सिनेमा, सामाजिक समरसता, सदभाव आदि बहु-आयामी क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य और उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान स्थापित हैं। संस्कृति विभाग द्वारा 81 राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान, पुरस्कार एवं फैलोशिप दिए जा रहे हैं। इनमें से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में 12 नए राष्ट्रीय एवं एक राज्य स्तरीय सम्मान शिखर सम्मान श्रेणी में शुरू किये गए हैं। संस्कृति विभाग ने देश और दुनिया मं अलग ही कीर्तिमान स्थापित किया है। मुझे यह बताने पर फक्र है कि मुख्यमंत्री जी के विशेष प्रयासों के कारण ही संस्कृति विभाग ने वर्ष के 365 दिनों में 1600 से अधिक छोटे-बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर यह संदेश दिया है कि देश के हृदय प्रदेश में संस्कृति की अविरल धारा सदैव प्रवाहमान रहेगी।

मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में वैचारिक महाकुंभ,अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन, शौर्य स्मारक का निर्माण, लोक मंथन,सिंहस्थ 2016 और एकात्म यात्रा के सफल आयोजन से इस बात पर मुहर लगी है कि भारत की अस्मिता और संस्कृति की पताका मध्यप्रदेश के हाथों में ही रहेगी। राजधानी भोपाल में स्थापित स्वराज संस्थान एवं भारतीय सेना के शहीदों की स्मृति एवं सम्मान में स्थापित 'शौर्य स्मारक' ने मध्यप्रदेश को नयी पहचान मिली है, तो इसका पूरा श्रेय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को ही जाता है।

प्रदेश में मुख्यमंत्री जी के कार्यकाल में 154 नए राज्य संरक्षित स्मारक घो‍षित किए जाकर इनका समुचित संरक्षण एवं रखरखाव हुआ है। प्रदेश में अब तक 497 स्मारक/स्थल संरक्षित किए जा चुके हैं। सर्वाधिक 47 संरक्षित स्मारक वर्ष 2015 में घोषित हुए। गत 2002-03 तक कुल 343 राज्य संरक्षित स्मारक थे। इसकी वजह से पर्यटक स्मारकों का अवलोकन कर प्रदेश की पुरातत्वीय महत्व से रू-ब-रू हो रहे हैं। प्रदेश में पहली बार व्यापक तौर पर 320 स्मारकों का अनुरक्षण,उन्नयन एवं विकास कार्य पूरे होकर स्मारकों को नया स्वरूप प्रदान किया गया है। राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित जनजाति संग्रहालय परिसर में वर्ष 2005 में उच्च-स्तरीय 17 दीर्घाओं वाला राज्य संग्रहालय निर्मित होकर प्रबुद्ध वर्ग एवं आमजन के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गया है। राज्य संग्रहालय में सहेजी गईं प्राचीन दुर्लभ बहुतायत प्रतिमाएँ प्रदर्शित हैं। प्रदर्शनी सभागार में आये दिन पुराने सिक्कों की कहानी, डेढ़ हजार साल पहले की प्राचीन गणेश-कार्तिकेय की प्रतिमाओं और मुद्रा शास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई जाकर कलाप्रेमियों और आमजनों को दुर्लभ इतिहास से रू-ब-रू करवाया जाता है। राज्य संग्रहालय में विभागीय व्याख्यान और अन्य विभागों की कार्यशाला और व्याख्यान सतत रूप से आयोजित होते हैं। राजधानी भोपाल में आने वाले पर्यटक, आगन्तुक और विद्यालयों के छात्र- छात्राओं और युवा वर्ग इस संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री के अवलोकन के साथ ही पुरातन इतिहास की जानकारी प्राप्त कर अपने ज्ञान को बढ़ा रहे हैं। भिण्ड जिले के महिदपुर किले के अनुरक्षण कार्य को यूनेस्को एशिया पेसिफक हैरिटेज अवार्ड 2016 के अंतर्गत 'अवार्ड ऑफ मेरिट' मिलने से प्रदेश का गौरव बढ़ा है।

मध्यप्रदेश बेहतर पर्यटन सुविधाओं का साक्षी बना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान के मार्गदर्शन में पर्यटन-स्थलों को पोषित करने के लिए बजट में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। पर्यटकों को दी जाने वाली सुविधाओं और सहुलियतों का विस्‍तार हुआ है। इन प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश लगातार 3 वर्ष 'बेस्ट टूरिज्म स्टेट' का राष्ट्रीय अवार्ड हासिल करने वाला प्रदेश बन गया है। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर प्रदेश को एक बार फिर एक साथ 10 नेशनल अवार्ड प्राप्त हुए। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन केबिनेट और टूरिज्म बोर्ड का गठन, पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन नीति 2016 जारी की गई है।


लेखक म.प्र. शासन के पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) है।
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