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मुख्यमंत्री श्री चौहान के विकास और कल्याण के एजेन्डे में किसान सबसे ऊपर रहे - गौरीशंकर बिसेन

भोपाल : शनिवार, मार्च 3, 2018, 19:01 IST
 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी से विकसित राज्यों की श्रेणी में आ गया है। मुख्यमंत्री ने हमेशा विकास और कल्याण के एजेंन्डे में कृषि और किसान को सबसे ऊपर रखा है। शायद ही देश में ऐसा दूसरा प्रदेश होगा जहां किसानो को एक लाख रूपये ऋण दिया जाता हो और उन्हे केवल 90 हजार रूपये लौटाना होते है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कृषि ऋण ब्याज दर को जीरो प्रतिशत से भी नीचे ला दिया है।

मध्यप्रदेश में किसानो की आमदनी दोगुनी करने के लिए भी रोडमेप तैयार किया गया है। प्रदेश के कृषि विकास दर पिछले कुछ वर्षो से 20 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। मध्यप्रदेश को लगातार 5 वर्षो से कृ‍षि के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिये कृषि कर्मण अवार्ड मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान की यह सोच रही है कि कृषि में वैज्ञानिक इनपुट, सिंचाई सुविधा के साथ यह भी आवश्यक है कि किसानो को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो। इसके लिये प्रदेश में समर्थन मूल्य पर उपार्जन एवं भण्डारण की व्यापक व्यवस्था की गई है।

अन्तराष्ट्रीय बाजार में कृषि उत्पादो के मूल्य में अचानक आई गिरावट के कारण कृषि बाजार भी प्रभावित हुए है। बाजार की इस गिरावट से प्रदेश के किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों को मण्डियों में भाव के उतार-चढ़ाव से होने वाली हानि से सुरक्षित करने के लिए भावांतर भुगतान योजना खरीफ-2017 से प्रारंभ की। देश भर में सबसे पहले प्रारंभ की गई इस योजना में प्रदेश के 15 लाख किसान शामिल हुए। इन किसानों ने 28 लाख मेट्रिक टन से अधिक उपज मण्डियों मे बेची। योजना में किसानों के बैंक खातो में 1500 करोड़ रूपये भावांतर राशि जमा की गई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस वर्ष रवी सीजन में चना,मसूर, और सरसों की फसल को शामिल किया है। वर्ष 2018-19 के बजट में इसके लिये 1000 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश में पिछले दो तीन वर्षो प्याज की फसल लगाने वाले किसानो को उनकी उपज का सही दाम नही मिल रहा था। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस बात को ध्यान में रखते हुए भावांतर भुगतान योजना में प्याज को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके लिये बजट में 250 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानो को अपने खेतों में आधुनिक कृषि यंत्रो का उपयोग किये जाने की बात की है कृषि यंत्रीकरण के मामले में मध्यप्रदेश में तेजी से प्रगति हुई है। प्रदेश में वर्ष 2003-04 में फार्म पावर का उपयोग 0.85 किलो वाट प्रति हेक्टयर हुआ करता था जो वर्ष 2016-17 में 1.85 किलो वाट प्रति हेक्टयर हो गया है। कृषि यंत्रीकरण में 2000 कस्टम हायरिंग केन्द्रो की स्थापना के साथ अगले पांच वर्षो यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर 3.00 किलो वाट प्रति हेक्टयर फार्म पॉवर उपयोग किये जाने का कार्यक्रम तैयार किया गया है।

प्रदेश में गेहुँ तथा धान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्यश्य से कृषक समृद्धि योजना प्रारंभ की जा रही है। इस योजना में 9 लाख किसानो को प्रति क्विंटल 200 रूपये के मान से प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। वर्ष 2018-19 के बजट में 3650 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। किसान कल्याण विभाग की योजनाओं के लिये वर्ष 2018-19 के बजट में 9 हजार 278 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया जो वर्ष 2017-18 के मुकाबले 87 प्रतिशत अधिक है। बजट में की गई बढ़ोत्तरी किसानों के हितो के प्रति मुख्यमंत्री के सोच को प्रदर्शित करता है।


(लेखक प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन )
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