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परिजनों की तरह नागरिकों की स्वास्थ्य चिंता करते हैं मुख्यमंत्री - रुस्तम सिंह

भोपाल : शनिवार, मार्च 3, 2018, 17:15 IST
 

अपने प्रशासनिक और राजनैतिक जीवन में मैंने कई मुख्यमंत्री देखे। श्री शिवराज सिंह चौहान उनसे बिल्कुल भिन्न मुख्यमंत्री हैं। आदत थी मुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की। श्री चौहान व्यक्ति पहले हैं मुख्यमंत्री बाद में। श्री चौहान के लिये मुख्यमंत्री पद के मायने हैं गरीब, कमजोर तबकों के उन्नयन के साथ प्रदेश का सर्वांगीण विकास। स्वास्थ्य विभाग की बैठकों में मैंने पाया कि मुख्यमंत्री प्रदेश के नागरिकों खासतौर से गरीब लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान कुछ इस तरह रखते हैं जैसे वे उनके घर-परिवार के ही लोग हों।

मध्यप्रदेश में पिछले 14 सालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में न केवल अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी हुई है बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए नवाचारों में भी प्रदेश देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री की चिंता का ही परिणाम है कि प्रदेश में आज लाखों रुपये के खर्च वाले हृदय, किडनी, कैंसर आदि बड़े-बड़े रोगों के इलाज और दवाएँ आर्थिक रूप से असमर्थ लोगों के लिए नि:शुल्क उपलब्ध हैं। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य से लेकर वृद्धजनों तक सभी के स्वास्थ्य का ख्याल रखा जा रहा है।

मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिये प्रदेश में अभिनव पहल करते हुए स्वास्थ्य और महिला-बाल विकास की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। दस्तक अभियान में ये टीमें घर-घर जाकर कुपोषित-अतिकुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उनके इलाज और पोषण का प्रबंध कर रही हैं। वर्ष 2017-18 के प्रथम चरण में 76 लाख 68 हजार बच्चों की जाँच की गई। इनमें से 15 हजार 349 गंभीर कुपोषित बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर उपचार कराया गया। गंभीर ऐनीमिक 8,726 बच्चों की पहचान की जाकर 1476 बच्चों को खून चढ़ाया गया। साथ ही 63 लाख 24 हजार बच्चों को विटामिन '' की खुराक दी गई। सघन मिशन इन्द्रधुनष अभियान में अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018 तक 14 जिलों में 2 लाख 82 हजार टीकाकरण से छूटे हुए बच्चों का और 59 हजार 730 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया। वर्ष 2017-18 में महिला स्वास्थ्य शिविरों में 21 लाख महिलाएँ लाभान्वित हुईं। मुझको विश्वास है कि इन प्रयासों से भविष्य में सुखद परिणाम मिलेंगे। निश्चित रूप से मध्यप्रदेश में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी।

मध्यप्रदेश के 51 जिलों में से 38 जिलों को एक से 18 वर्ष तक के बच्चों को कटे होंठ एवं फटे तालु से मुक्त घोषित किया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में 71 हजार से अधिक बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जिसमें 8 लाख 63 बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पाये गये। इनमें से 6 लाख 51 हजार बच्चों को उपचारित और 16 हजार 294 की नि:शुल्क सर्जरी की गई। मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना में 1160 बच्चों की हृदय चिकित्सा, मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना में 373 बच्चों की कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी कराई गई। इन पर खर्च होने वाला लाखों का खर्चा शासन ने उठाया।

राज्य बीमारी सहायता निधि से पिछले साल 10,100 हितग्राहियों पर 102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई। इस वर्ष दिसम्बर तक निधि में 60 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में कैंसर रोगियों को नि:शुल्क कीमोथेरेपी सुविधा दी जा रही है। अब तक करीब 20 हजार रोगियों ने पंजीयन कराया है। सभी जिला चिकित्सालयों में कीमोथेरेपी के लिये आवश्यक 19 प्रकार की दवाइयाँ उपलब्ध है।

नि:शुल्क डॉयलिसिस सुविधा भी सभी 51 जिलों में उपलब्ध है। प्रदेश में 160 डॉयलिसिस मशीन स्थापित और लगभग 18 हजार रोगी पंजीकृत हैं। किडनी मरीजों के लिये इस वर्ष अब तक करीब 60 हजार डॉयलिसिस सत्र किये जा चुके हैं।

प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में ट्रॉमा यूनिट की स्थापना की जा रही है। 36 जिलों में अगले वर्ष से ट्रॉमा यूनिट क्रियाशील हो जाएगी। नि:शुल्क सिटी स्केन सुविधा भी वर्ष 2018-19 में प्रदेश के 19 जिला चिकित्सालयों में शुरू हो रही है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल नि:शुल्क औषधि योजना में प्रत्येक वर्ग के रोगियों को वर्ष 2012 से न्यूनतम आवश्यक औषधियों का वितरण किया जा रहा है। इनमें सर्वाधिक उपयोग में आने वाली जेनेरिक औषधियाँ उपलब्ध हैं।

दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में प्राथमिक उपचार पहुँचाने के लिये वर्ष 2006 से दीनदयाल चलित अस्पताल योजना संचालित है। वनांचल में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के उद्देश्य से वन विभाग की सहायता से दीनदयाल वनांचल सेवा भी संचालित की जा रही है।

मुख्यमंत्री की मंशानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भस्थ शिशु, गर्भवती माता, किशोरी-किशोर, वृद्ध और आमजनों को बड़े से बड़े रोग में भी आसान चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। इनके दूरगामी परिणाम दिखने भी लगे हैं। वह दिन दूर नहीं जब मुख्यमंत्री का विकसित ओर स्वस्थ मध्यप्रदेश का सपना पूरा होगा।


लेखक प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री है।
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