आलेख

विचार के बाद आकार में बदलता आनंद विभाग

भोपाल : मंगलवार, जनवरी 30, 2018, 20:33 IST

भारतीय मनीषा प्रारम्भ से ही विश्वास प्रकट करती रही है कि सृष्टि के रचयिता ने इसे आनन्द के लिये रचा है। ऋग्वेद कहता है कि - सब नाचते और हँसते हुए प्रकाश की दिशा में आगे बढ़ें -

'प्राच्यो अगाम नृतये हसाय'

आज आंनद की अलग-अलग व्याख्याएँ और स्वरूप होते हैं, परन्तु समग्र रूप में आनंद के मूल में मानसिक संतोष, शारीरिक स्वस्थता, भावनात्मक उन्नति और प्रसन्नता है। यह अलहदा है कि किसे-किस काम में और अनुभूति में आनंद आता है। किसी के लिये परमार्थ आनंद का बॉयस है, तो किसी के लिये सुख-समृद्धि का।

भौतिक विकास से ज्यादा जरूरी मन का विकास है क्योंकि वह चिरस्थायी है। प्रदेश में आनंद विभाग का गठन बहुत अच्छा कदम है।

  • श्री दलाई लामा,
    नोबेल शांति पुरस्कार विजेता
    और आध्यात्मिक गुरू

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान का मानना है कि राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक उन्नति और प्रसन्नता से ही संभव है। अत: नागरिकों को ऐसी विधियाँ और उपकरण उपलब्ध करवाने होंगे, जो उनके लिए आनंद का कारक बनें। विकास का मापदण्ड मूल्य आधारित होने के साथ नागरिकों के आनंद की पहचान करने वाला भी होना चाहिए। अपनी इस अवधारणा को साकार करने के लिए भौतिक प्रगति के पैमाने से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री ने 6 अगस्त 2016 को आनंद विभाग का गठन किया। यह विभाग बनाने वाला मध्यप्रदेश देश में पहला राज्य है।

आनंदक

सवाल यह था कि विभाग कैसे और क्या करे कि नागरिकों के जीवन में आनंद का समावेश हो। बहुतों को तो यह विचार ही अजब-गजब लगा कि आनंद और सरकार का क्या मेल ! आज जब मुख्यमंत्री के विचार ने आकार लेना शुरू कर दिया है तो यह जाहिर है कि असंभव कुछ नहीं है। इच्छाशक्ति होनी चाहिये सद्विचार को मूर्तरूप देने की। आनंदक अपने अन्य सामान्य कार्यकलापों के अलावा राज्य आनंद संस्थान की गतिविधियों में शामिल होने के लिये स्व-प्रेरणा से तैयार स्वयंसवेक है। ये लोग समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर प्रशिक्षण लेते हैं और उसके अनुरूप कार्य करते हैं। आनंदक का काम यह है कि वे अपने कृतित्व तथा विचारों से दूसरों के लिए सकारात्मक उदाहरण बने और अन्य व्यक्तियों को भी आंनद की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। यदि कोई शासकीय सेवक स्वयं को आनंदक के रूप में पंजीकृत कराता है तो उसकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उपस्थिति शासकीय कार्य के अंतर्गत मानी जाती है। स्वयंसेवी लोगों को 'आनंदक' के रूप में राज्य आनंद संस्थान की वेबसाइट www.anandsansthanmp.in पर पंजीयन कराने की सुविधा है। अब तक 44 हजार से अधिक स्वयंसेवक स्वेच्छा से आनंदक बने हैं।

अल्प विराम

अल्प विराम गतिविधि से शासकीय विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के जीवन में सकारात्मक सोच का विकास किया जा रहा है। कहा जाता है कि आनंद की अनुभूति का हम पीछा नहीं कर सकते, आनंद तो स्वत: हमारे हृदय में ही रहता है। इस गतिविधि का रोमांच इस खोज में ही है कि अपने आपको आनन्द की कसौटी पर कसकर देखा जाये। अपने प्रत्येक कर्म को आनन्दपूर्ण बनाया जाये। शासकीय अधिकारियों/ कर्मचारियों को इसका अनुभव कराते हुए इस मार्ग पर सतत रूप से चलने के लिए उन्हें प्रेरित करने हेतु इस गतिविधि की शुरूआत की गई है। अब तक इस गतिविधि में 166 तक इस गतिविधि में 166 आनंदम सहयोगियों को प्रशिचित किया जाकर 780 अल्पविराम कार्यक्रम किये जा चुके हैं।

आनन्दम्

'आनंदम' गतिविधि में उपयुक्त सार्वजनिक स्थलों पर एक स्थल चुनकर, न्यूनतम सुविधा के उपयोग के सामान को छोड़ने तथा उस सामान की जिसे जरूरत हो, वहाँ से नि:शुल्क तथा बिना किसी से पूछे ले जाने की, स्वतंत्रता होती है। सभी 51 जिलों में 172 निर्धारित स्थान पर यह गतिविधि संचालित हो रही है।

आनंद उत्सव

इसमें शासकीय तथा अशासकीय संस्थाओं के जरिये ऐसी गतिविधियों का संचालन किया जाता है जो प्रदेशवासियों को परिपूर्ण जीवन की कला सिखा सकेंगी, जिससे उनके जीवन में आनंद की अनुभूति हो सके। पिछले साल 14 से 21 जनवरी को प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 7600 स्थान पर आनंद उत्सव मनाये गये। इस वर्ष भी 14 से 28 जनवरी के बीच ग्रामीण/नगरीय क्षेत्रों में आनंद उत्सव आयोजित हुए हैं।

यहाँ भी है आनंद की अवधारणा

भूटान में मनोवैज्ञानिक खुशहाली, स्वास्थ्य, शिक्षा, समय का उपयोग, सांस्कृतिक विविधता और सामंजस्य, सुशासन, सामुदायिक सक्रियता, प्राकृतिक विविधता एवं सामंजस्य और जीवन-स्तर से सकल राष्ट्रीय आनंद को मापने का पैमाना माना गया है। अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान ने ग्रॉस नेशनल वेलनेस की अवधारणा को अपनाया है। इसमें मानसिक और भावनात्मक सकुशलता, शारीरिक स्वास्थ्य, कार्य और आय, सामाजिक संबंध, आर्थिक प्रगति और अवकाश तथा रहने के वातावरण आदि को पैमाना माना गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने हैप्पीनेस इंडेक्स में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, स्वस्थ्य दीर्घ जीवन, परस्पर सहयोग, परस्पर विश्वास, निर्णय लेने की स्वतंत्रता और उदारता को शामिल किया है। हाल ही में यू.ए.ई. ने भी हैप्पीनेस मिनिस्ट्री स्थापना की है।

आनंद कैलेण्डर

'आनंद कैलेण्डर' तैयार किया गया है। हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित इस कैलेण्डर का लोकार्पण श्री दलाई लामा ने 19 मार्च 2017 को किया। यह कैलेण्डर जीवन में सकारात्मक सोच को विकसित करते हुए आंतरिक प्रसन्नता और आनंद की अनूभूति प्राप्ति का रास्ता सुझाता है। कैलेण्डर में अप्रैल से दिसम्बर तक कृतज्ञता, खेल, अल्पविराम, मदद, सीखना, संबंध, स्वीकार्यता, लक्ष्य , जागरूकता जैसे विषयों को शामिल कर के अंतिम तीन माह में आनंद की इन सभी 9 धाराओं के संगम के लिए निरंतर अभ्यास का अनुरोध किया गया है।

आनंद शिविर

शासकीय और अशासकीय आनंदकों को परिपूर्ण जीवन जीने की विधा सिखाने तथा उनमें सकारात्मकता विकसित करने के लिए राज्य आनंद संस्थान द्वारा 'आनंद शिविर' लगाये जा रहे हैं। इसके लिये वर्तमान में आर्ट ऑफ लिविंग -बैंगलुरू, एनिशिएटिव ऑफ चेंज-पूणे और ईशा फाउण्डेशन-कोयम्बटूर से एमओयू किया गया है। आनंद शिविरों में अब तक 135 शासकीय सेवक भाग ले चुके हैं।

आनंद रिसर्च फैलोशिप

राज्य आनंद संस्थान अकादमिक शैक्षणिक और अन्य संस्थाओं में 'आनंद एवं खुशहाली' विषय पर शोध तथा अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए आनंद अनुसंधान प्रोजेक्ट, आनंद फैलोशिप, आनंद शोध पुरस्कार और आनंद प्रोजेक्ट पुरस्कार प्रारंभ कर रहा है। प्रत्येक अनुसंधान प्रोजेक्ट के लिये अधिकतम रूपये 10 लाख की सहायता दी जायेगी। फैलोशिप के लिये चयनित व्यक्ति को सालाना 3 लाख रूपये तक की सहायता दी जायेगी। उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में आनंद विषय पर शोध तथा प्रोजेक्ट कार्य को बढ़ावा देने के लिये पुरस्कार राशि और प्रमाण-पत्र देने की व्यवस्था की गई है।

आनंद क्लब

इस क्लब की परिकल्पना इस विचार पर आधारित है कि समाज में स्वयं सेवियों के समूह आनंदमयी जीवन जीने का कौशल पहले खुद सीखें, उसे अपने जीवन में उतारे और फिर उसका प्रसार अपने आस-पास के जीवन में करें। अब तक 266 आनंद क्लब्स ने कार्य शुरू कर दिया है।

हैप्पीनेस इंडेक्स

राज्य आनंद संस्थान ने आई.आई.टी. खड़गपुर के साथ आनंद के पैमानों की पहचान, लोगों को आनंदित करने की विधियों और उपकरणों के विकास के लिये अनुबंध किया है। हैप्पीनेस इंडेक्स की गणना के लिए आईआईटी खड़गपुर ने मध्यप्रदेश के दस जिलों के तीन-तीन सर्वेयर को प्रशिक्षण देकर प्राथमिक सर्वे शुरू कर दिया है।

ऑनलाईन वीडियो कोर्स

राज्य आनंद संस्थान

विभाग की गतिविधियों को क्रियान्वित करने के लिये राज्य आनन्द संस्थान का गठन भी किया गया है। इस पंजीकृत सोसायटी में देश-विदेश की अनेक प्रमुख हस्तियों यथा डा. एच.आर. नागेन्द्र (योगाचार्य एवं योग अन्वेषक), श्री ब्रह्मदेव शर्मा (संरक्षक, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान), श्री प्रभात कुमार (राजनीतिज्ञ एवं प्रशासन), सुश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े (उपाध्यक्ष, विवेकानन्द रॉक मेमोरियल एवं विवेकानन्द केन्द्र), डॉ. प्रणव पण्डया (चांसलर देव संस्कृति विश्वविद्यालय), श्री प्रसून जोशी (मैकेकैन वर्ल्ड ग्रुप इंडिया), श्री महेश श्रीवास्तव (पत्रकारिता), श्री अनुपम खेर (अभिनय), डॉ. सोनल मानसिंह (फाउंडर प्रेसीडेंट इंडियन क्लासिकल डांस) और डॉ. वीरेन्द्र हेगड़े (राजनीतिज्ञ एवं प्रशासन)।

इस कोर्स का हिन्दी में अनुवाद और रूपांतरण का कार्य किया जा रहा है। इंडियन स्कूल आफ बिज़नेस हैदराबाद द्वारा संचालित ''A life of happiness and fulfilment'' वीडियो कोर्स के प्रदेश में भी संचालन की पहल की गई है। इस कोर्स में विविध क्षेत्र जैसे साईक्लोजी, न्यूरोसांइस तथा बिहेवियरल डिसिज़न थ्योरी के माध्यम से व्यवहारिक तथा जाँची- परखी विधियों से जीवन में खुशहाली और आनंद प्राप्त करने की विधियाँ बताई गई हैं।

सीएसआर फंड

अप्रवासी भारतीय उद्योगपति श्री एस.आर. रेखी ने कार्पोरेट-सोशल रेस्पान्सबिलिटी के अंर्तगत राज्य आनंद संस्थान को एक लाख डॉलर देने की सहमति दी है। श्री रेखी से राज्‍य आनंद संस्थान को प्रथम किश्त के रूप में 6 लाख रूपये का योगदान मिल चुका है। इस राशि से जबलपुर में एक हैप्पीनेस सेंटर खोला जायेगा।

आनंद सभा

स्कूल तथा कॉलेजों के विद्यार्थियों को सशक्त और परिपूर्ण जीवन कला सिखाने तथा आंतरिक क्षमता विकसित करने के लिए आनंद सभाएँ भी शुरू की गयी हैं। शैक्षणिक संस्थाओं को ऐसे मॉड्यूल उपलब्ध करवाये जा रहे हैं जिनसे विद्यार्थी ऐसी क्रियाओं में भाग लेंगे, जो उनके जीवन में संतुलन लाने में सहायक होंगी।


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