आलेख
जन-कल्याण के 11 वर्ष

प्रदेश की तरक्की में खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग

भोपाल : शुक्रवार, दिसम्बर 23, 2016, 18:46 IST
 

मध्यप्रदेश खनिज संसाधन के मामले में हमेशा से समृद्ध रहा है। राज्य सरकार ने पिछले 11 वर्षों में प्रदेश की तरक्की में खनिज संसाधनों के शोषण नहीं प्रदेश हित में दोहन और बेहतर उपयोग के लिये कई कदम उठाये हैं। इनके जरिये उन क्षेत्रों के विकास की तरफ विशेष ध्यान दिया गया है जिन क्षेत्रों में खनिज की प्राप्ति के लिये निरंतर खनन का कार्य किया जा रहा है।

इन कदमों में राज्य सरकार ने खनिज क्षेत्रों में सड़कों और अन्य अधोसंरचना कार्य के लिये नियम 2005 प्रभावशील किया। इसके जरिये वर्ष 2004 से 2016 तक 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त कर राजस्व आय की प्राप्ति हुई। राज्य सरकार ने खनिज के अवैध भंडारण पर कड़ाई से रोक लगाने के लिये अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण निवारण नियम वर्ष 2006 लागू किया। इस नियम के बन जाने से खनिजों का भंडार कर व्यापार करने के लिये प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना को भी क्रियान्वित किया गया। इसके लिये मध्यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्ठान न्यास नियम को इस वर्ष जुलाई 2016 में लागू किया गया। इस नियम से खनिज प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिये 480 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है।

रेत खनन के लिये नीति

मध्यप्रदेश में गौण खनिज रेत का खनन मुख्य रूप से नर्मदा, तवा, सिंध, चम्बल, बेतवा आदि नदियों में मुख्य रूप से किया जाता है। पिछले कई वर्षों से यह महसूस किया जा रहा था कि रेत खनिज की पूर्ति जन-सामान्य को तर्कसंगत मूल्यों पर हो और साथ ही अवैध उत्खनन पर रोक लगे। इसके लिये प्रदेश में रेत खनन नीति 2015 बनाई गई। यह नीति बन जाने से प्रदेश में अब रेत खनिज की खदान का आवंटन ई-ऑक्शन से किया जा रहा है। वर्ष 2015 में नीलाम हुई 93 रेत खदानों के ऑफसेट प्राइज 61 करोड़ 21 लाख रूपये के विरुद्ध करीब 138 करोड़ 51 लाख रूपये की सर्वोच्च बोली प्राप्त हुई। ई-ऑक्शन से राज्य सरकार को 75 करोड़ रुपये का अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। ई-ऑक्शन के जरिये फर्शी पत्थर आदि की 224 खदान की भी नीलामी की जा रही है। प्रदेश में रेत खनन का कार्य 18 जिलों में मध्यप्रदेश स्टेट माईनिंग कारर्पोरेशन के जरिये हो रहा है। ये 18 जिले होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन, हरदा, देवास, ग्वालियर, दतिया, भिण्ड, जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, उमरिया, सतना, टीकमगढ़, खरगोन, धार, बड़वानी और खण्डवा है। इन जिलों में रेत खदान के 445 समूह बनाकर ई-ऑक्शन की कार्यवाही की गई है।

खनिज सम्पदा

खनिज सम्पदा के मामले में मध्यप्रदेश देश के 8 खनिज सम्पन्न राज्य में से एक है। प्रदेश में प्रमुख रूप से 20 प्रकार के खनिजों का उत्पादन किया जा रहा है। हीरा उत्पादन में मध्यप्रदेश को राष्ट्र में एकाधिकार प्राप्त होने के साथ-साथ पायरोफलाइट, ताम्र अयस्क, मैंगनीज के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त है। इसके अलावा प्रदेश को राक फॉस्फेट, चूना पत्थर, डायस्पोर, क्ले के उत्पादन में दूसरा, शैल लेटराईट और ओकर के उत्पादन में तीसरा स्थान प्राप्त है। कोयले, डोलोमाईट के उत्पादन में प्रदेश का स्थान राष्ट्रीय परिदृश्य में चौथा है। प्रदेश में पिछले 11 वर्ष में खनिज से होने वाली राजस्व आय में भी पाँच गुना तक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में खनिज राजस्व आय 748 करोड़ 95 लाख हुआ करती थी जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 3610 करोड़ 56 लाख रूपये तक पहुँच गई है। राज्य सरकार ने अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर भी रोक लगाई है। राज्य में पिछले छह वर्ष में 8,863 प्रकरण दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

खनिज संसाधनों की खोज

प्रदेश में चूना पत्थर भंडारों का आकलन किया गया है। सतना, धार, मुरैना जिले में चूना पत्थर के भंडार का सर्वेक्षण किया गया है। भिण्ड जिले में आयरन का पूर्वेक्षण किया जा रहा है। झाबुआ जिले में राक फास्फेट का पूर्वेक्षण किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की नई ऑक्शन नीति के अनुसार चूना पत्थर के तीन ब्लाक और हीरा खनिज के एक ब्लाक के ई-आक्शन की कार्यवाही तेजी से की जा रही है। स्टेट माईनिंग कारर्पोरेशन को केन्द्र सरकार द्वारा 10 कोल ब्लाक आवंटित किये गये थे। इनमें से 9 कोल ब्लाक के विकास और खनन के लिये संयुक्त क्षेत्र कम्पनियों का गठन किया गया है। एक कोल ब्लाक का विकास निगम द्वारा किया जा रहा है।

खदानों की निगरानी के लिये ई-गवर्नेंस

प्रदेश में कागज आधारित पास व्यवस्था के स्थान पर वेब बेस्ड इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट पास (ईटीपी) जारी किये जाने की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था में चालू खदानों की लीज की प्रविष्टि की जा रही है। इसके बाद खदान ठेकेदारों को निर्धारित राशि जमा करने पर उनका एक यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया है। इस व्यवस्था से पट्टाधारी लीज में स्वीकृत मात्रा से अधिक खनिज के लिये राशि जमा नहीं कर सकेंगें। इस व्यवस्था से एकल खिड़की प्रणाली को मजबूती मिली है। खदान ठेकेदार ई-खनिज पोर्टल पर ऑनलाइन टैक्स जमा कर रहे हैं। ईटीपी व्यवस्था में सॉफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी का काम भी आसान हुआ है। राज्य शासन को रियल टाईम में यह पता लग सकेगा कि स्वीकृत खदान में कितना खनिज खनन हुआ है और कितनी मात्रा में इसका विक्रय किया जा चुका है। ईटीपी व्यवस्था से डुप्लीकेट और फर्जी पास पर भी रोक लगी है। खनिज परिवहन में लगे पंजीकृत वाहनों में ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगाया जाने का निर्णय भी लिया गया है।

खनिज पट्टों में महिलाओं को प्राथमिकता

राज्य की महिला नीति 2013-17 का क्रियान्वयन खनिज संसाधन विभाग में भी किया गया है। नीति के पालन में महिला समूह को खनिज खदान में उत्खनन के पट्टे प्राथमिकता के साथ दिये जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक करीब 400 महिलाओं को उत्खनन के पट्टे मंजूर किये जा चुके है।


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