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मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल

 

मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्तों का विनियमन) नियम 2002 के नियम 251 के साथ पठित भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम 1996 के अंतर्गत भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार के कल्याण के लिये एक मंडल का गठन राज्य शासन की अधिसूचना दिनांक 9 अप्रैल 2003 द्वारा किया गया है।

देश एवं प्रदेश के 90 प्रतिशत से अधिक श्रमिक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं और इन असंगठित श्रमिकों में बड़ा वर्ग निर्माण कर्मकारों (कामगारोंे) का है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2001 में मध्यप्रदेश में करीब साढ़े नौ लाख निर्माण में कर्मकार कार्यरत थे।

निर्माण कर्मकारों की समस्याएं

देश की अधोसंरचना (जैसे भवन, सड़कें, पुल बांध, नहरें, बिजलीघर आदि) निर्माण कर्मकारों की मेहनत और पसीने से निर्मित होती है, परन्तु ये श्रमिक आये दिन अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझते हैं, जैसे-

  • अनियमित रोजगार

  • रोजगार के लिए प्राय: अपने घर-गांव से दूर जाने की मजबूरी

  • असुरक्षित कार्य दशाएं

  • बीमारी एवं दुर्घटना की दशा में चिकित्सा तथा क्षतिपूर्ति की अपर्याप्त व्यवस्था

  • बच्चों की शिक्षा तथा महिला कर्मकारों के छोटे बच्चों की देखभाल की अपर्याप्त व्यवस्था

  • मजदूरी का भुगतान नियम दर से न होना, आदि।

निर्माण कर्मकारों के लिए विशेष कानून

निर्माण कर्मकारों की समस्याओं के निवारण के लिए संसद ने वर्ष 1996 में निम्नलिखित दो कानून बनाए हैं:-

1. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्त विनिमयन) अधिनियम, 1996 एवं

2. भवन तथा अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996

उक्त प्रथम कानून में निर्माण कर्मकारों के नियोजन तथा कार्य दशाओं के विनियमन, और उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रावधान किए गए हैं। किसी व्यक्ति द्वारा स्वयं अपने निवास के लिए दस लाख रूपये से कम लागत के बनाए जा रहे मकान को छोड़कर, अन्य सभी निर्माण कार्यों पर यह कानून लागू है यदि उनमे गत बारह महीनों में किसी भी दिन दस या अधिक निर्माण कर्मकार नियोजित रहे हों। निर्माण कर्मकारों के कल्याण के लिए इसमें राज्य-स्तर पर एक कल्याण निधि की स्थापना, और इस निधि के प्रशासन के लिए एक राज्य-स्तरीय कल्याण मण्डल के गठन का प्रावधान है।

निर्माण कर्मकार कल्याण निधि के लिए वित्तीय स्त्रोत के बतौर, निर्माण कार्यों पर उपकर लगाने का प्रावधान उक्त दूसरे कानून में किया गया है। इसके तहत केन्द्र सरकार ने उपकर की दर निर्माण कार्यों की लागत के एक प्रतिशत के हिसाब से निर्धारित की हैं। इस दर से वसूल किया जाने वाला उपकर, उक्त प्रथम कानून के तहत गठित राज्य-स्तरीय कल्याण मण्डल को प्राप्त होगा।

ऊपर उल्लिखित प्रथम केन्द्रीय कानून के तहत राज्य सरकारों को नियम बनाने थे। मध्यप्रदेश में ये नियम 1 जनवरी, 2003 को प्रकाशित किए गए, और वह ऐसा करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ। तत्पश्चात राज्य सरकार ने उक्त कानून के तहत 10 अप्रैल, 2003 को प्रकाशित अधिसूचना द्वारा मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल का गठन निम्नानुसार किया है:-

  • राज्य शासन के श्रम विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)- अध्यक्ष

  • निर्माण कर्मकारों के तथा उनके नियोजकों के पांच-पांच प्रतिनिधि (एक महिला कर्मकार प्रतिनिधि सहित)

  • राज्य शासन के श्रम और वित्त विभागों के प्रमुख सचिव, तथा दो निर्माण विभागों (लोक निर्माण तथा जल संसाधन) के प्रमुख अभियंता

  • श्रमायुक्त

  • केन्द्र सरकार द्वारा मनोनीत एक प्रतिनिधि

राज्य में संचालित निर्माण कार्यों से वसूल किए जाने वाले उपकर की राशि मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण निधि में जमा होगी। यह निधि उक्त कल्याण मण्डल में वेष्टित होगी, और मण्डल इस निधि से निर्माण कर्मकारोंे के कल्याण की विभिन्न गतिविधियां संचालित करेगा।

निर्माण कर्मकार' कौन है

उक्त प्रथम कानून के अनुसार भवन या अन्य संनिर्माण कार्य का मतलब है:-

  • भवन

  • निकासी (ड्रेनेज)

  • सड़क/पुल/सुरंग 

  • बाढ़ नियंत्रण कार्य

  • रेलवे 

  • जल प्रदाय

  • विमान तल

  • पाइप लाइन्स

  • टावर्स 

  • बिजली का उत्पादन, पारेषण

  • और वितरण

  • सिंचाई 

  • संचार माध्यमों (रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, टेलीग्राम, वायरलेस) से जुड़े कार्य आदि।

  • बांध/नहर/जलाशय

निर्माण कर्मकार से मतलब हैं उपर्युक्त प्रकार के किसी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में, पारिश्रमिक पर, अकुशल, अर्द्ध-कुशल या कुशल स्वरूप के काम करने वाला व्यक्ति (प्रबंधन, प्रशासन या पर्यवेक्षण करने वाले व्यक्ति को छोड़कर)

निर्माण कर्मकारों का हिताधिकारी के रूप में पंजीयन

किसी निर्माण कर्मकार द्वारा मण्डल की कल्याण योजनाओं का लाभ लेने के लिये यह जरूरी होगा कि सर्वप्रथम वह मण्डल को आवेदन कर स्वयं को हिताधिकारी के रूप में पंजीकृत कराएं।

  • जिनकी आयु 18 से 60 वर्ष के बीच हो, और

  • जिन्होंने पिछले बारह महीनों में न्यूनतम नब्बे दिन, निर्माण कर्मकार के रूप में कार्य किया हो।

पंजीयन कराने के इच्छुक कर्मकार का पच्चीस रुपये के आवेदन शुल्क और पासपोर्ट आकार के दो फोटोग्राफ्स सहित, विहित प्रपत्र में, मण्डल को आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच कर मण्डल आवेदन को हिताधिकारी के रूप में पंजीेकृत करेगा, और इसके प्रमाण-स्वरूप उसे एक फोटो युक्त परिचय पत्र जारी करेगा। एक पंजीयन हो जाने के बाद, हिताधिकारी को साठ वर्ष की उम्र तक राज्य शासन द्वारा निर्धारित मासिक दर से मण्डल में अभिदाय जमा करना होगा। वह अपने नियोजक को, मजदूरी से अभिदाय काटकर सीधे मण्डल को भेजने हेतु भी अधिकृत कर सकेगा। अभिदाय जमा करने में लगातार एक वर्ष तक चूक करने की दशा मेंे वह हिताधिकारी नहीं रह जाएगा।

मण्डल द्वारा हिताधिकारियों को देय सुविधाएँ

कल्याण मण्डल, कानून और नियमों के अनुसार हिताधिकारियों को कतिपय प्रसुविधाएं दे सकेगा। इन प्रसुविधाओं हेतु पात्रता अर्जित करने के लिए हिताधिकारी द्वारा एक न्यूनतम अवधि तक अभिदाय देना आवश्यक होगा। कल्याण निधि से अनुमत कतिपय प्रमुख प्रसुविधाओं का विवरण इस प्रकार है:-

क्र.

सुविधा

अर्हता के लिये अभिदाय की न्यूनतम अवधि

1.

वृद्धावस्था पेंशन

तीन वर्ष

2.

परिवार पेंशन

तीन वर्ष

3.

नि:शक्त सहायता तथा पेंशन

एक वर्ष

4.

मकान खरीदने या निर्माण के लिए ऋण

पाँच वर्ष

5.

वित्तीय संस्था से लिये गये गृह निर्माण ऋण पर ब्याज अनुदान

तीन वर्ष

6.

छात्रवृत्ति

एक वर्ष

7.

वित्तीय संस्था से लिये गये शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान

तीन वर्ष

8.

आय संवर्द्धन के लिये सहायता

तीन/एक वर्ष

9.

विवाह सहायता

तीन वर्ष

10.

चिकित्सा सहायता

एक वर्ष

11.

दुर्घटना के मामले में चिकित्सा सहायता

निरंक

12.

प्रसूति सहायता

एक वर्ष

13.

बीमा सहायता

एक वर्ष

14.

मुत्यु के मामले मे अंत्येष्टि के लिये सहायता और अनुगृह राशि

निरंक

मण्डल अपने संसाधनों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर समय-समय पर तय करेगा कि उपर्युक्त में से कौन-कौन सी प्रसुविधायें दी जायें। इस प्रकार चयनित हर प्रसुविधा की दरें, आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया, आदि को निर्धारित करने के लिये वह एक विस्तृत स्कीम बनायेगा और उस पर राज्य शासन का अनुमोदन प्राप्त कर उसे कार्यान्वित करेगा।

निर्माण कर्मकारों के सामान्य
कल्याण की गतिविधियाँ

ऊपर उल्लिखित हितग्राही-मूलक प्रसुविधाएँ देने के अलावा, कल्याण मण्डल निर्माण कर्मकारों के संपूर्ण वर्ग के हित में निम्नलिखित प्रकार की गतिविधियां भी संचालित कर सकेगा:-

  • सर्वेक्षण और अध्ययन

  • जागरूकता/प्रचार-प्रसार

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुडे कार्य-कलाप खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अध्ययन दौरे, आदि।

मण्डल के कार्य में प्रमुख भागीदार

मण्डल अपने उद्देश्यों में तभी सफल हो सकेगा जब विभिन्न संबंधित पक्ष अपनी-अपनी भूमिका भली-भाँति निभायें, जैसे:-

1. नियोजक (मुख्यत: ठेकेदार):- अपनी स्थापनाओं का पंजीयन कराएं प्रत्येक निर्माण कार्य शुरू करने के न्युनतम 30 दिन पूर्व उसका नोटिस दें, और उपकर की राशि सही-सही और समय पर जमा करें।

2. स्थानीय निकाय, और निर्माण कार्य कराने वाले शासकीय विभाग तथा सार्वजनिक उपक्रम:- उपकर की सही और सामयिक वसूली कर मण्डल को भेजें तथा निर्माण कर्मकारों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण हेतु किये गये प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करें।

3. निर्माण कर्मकार:- अधिक से अधिक संख्या में हिताधिकारी के रूप में पंजीकृत हों और अपना अभिदाय नियमित रूप से जमा करें।

 

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