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27 सितम्बर विश्व पर्यटन दिवस

 

हर साल 27 सितंबर को दुनियाभर में विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। विश्व पर्यटन संगठन ने 1980 से यह दिन मनाना शुरू किया। इसके लिए 27 सितंबर का दिन चुना गया क्योंकि 1970 में इसी दिन विश्व पर्यटन संगठन का संविधान स्वीकार किया गया था। अब हर साल इस दिन की थीम संयुक्त राष्ट्र महासभा तय करती है। इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद पर्यटन और उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक मूल्यों के प्रति विश्व समुदाय को जागरूक करना है।

इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और पर्यटन से अपने देश की आय को बढ़ाना है। इस अवसर पर एक राष्ट्र को मेजबान राष्ट्र घोषित किया जाता है जो कि जीवोग्राफिकल आर्डर पर होता है। 2006 में यूरो, 2007 में दक्षिण एशिया, 2008 में अमेरिका और 2009 में अफ्रीका को इसका मेजबान बनाया गया। इस तरह पूरे विश्व के देशों में पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। जिनमें सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कार्यक्रम शामिल हैं।

देश में निरंतर आई आर्थिक मंदी एवं ताज बम काण्ड जैसे धमाके होने के बावजूद भारत के प्रति विश्व के पर्यटकों की संख्या कम नहीं हुई है। यहां विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न शहरों में अलग-अलग योजनाएं लागू की गयीं। देश में कायम शांति से पर्यटन उद्यम की आय में बढ़ावा हुआ है और इससे जुड़ उद्यम समूहों में होटल समूह की तादाद काफी है जिनमें बड़ी संख्या में बुकिंग मिलने की आशा है।

देश की शाही सैलानी रेलगाड़ी पैलेस ऑन व्हील्स को तीसरा हॉस्पिटेलिटी इंडिया इंटरनेशनल अवार्ड दिया गया है। राजस्थान पर्यटन विकास निगम का यह पहियों पर राजमहल दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर भारत का नाम रौशन करने वाला माना गया है।

सितम्बर 2002 में भारतीय पर्यटन विभाग ने 'अतुल्य भारत' नाम से एक नया अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य भारतीय पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रमोट करना था। शुरुआती चरण के पहले तीन माह का खर्च सरकार और एक्सपीरियेंस इंडिया सोसायटी ने वहन किया था। यह संस्था ट्रैवेल एजेंट्स से जुड़ी हुई है। इस अभियान के तहत हिमालय, वन्य जीव, योग और आयुर्वेद पर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान खींचा गया। इस अभियान से देश के पर्यटन क्षेत्र के लिए संभावनाओं के नए द्वार खुले।

अपने किस्म का यह पहला प्रयास था, जिसमें देश की पर्यटन क्षमता को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके पहले पर्यटन के क्षेत्र में विकास राज्य सरकारों के अधीन हुआ करता था। यही नहीं राज्यों में समन्वय के स्तर पर भी बहुत थोड़े प्रयास दिखते थे। कह सकते हैं कि यदि सही और सटीक मार्केटिंग ने देश के द्वार विदेशी सैलानियों के लिए खोलने का काम किया तो हवाई अड्डों से पर्यटन स्थलों की बेहतर कनैक्टीविटी ने पर्यटन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही वजह है कि आज सैलानी पर्यटन के लिहाज से सुदूर स्थलों की सैर भी आसानी से कर सकते हैं। निजी क्षेत्रों की विमान कंपनियों को देश में उड़ान भरने की इजाजत ने भी महती भूमिका अदा की।

सिर्फ गोवा, केरल, राजस्थान, उड़ीसा और मध्यप्रदेश में ही पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है, बल्कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पर्यटन को भी अच्छा लाभ पहुंचा है। पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश में ही 6.5 मिलियन पर्यटक गए। यह आंकड़ा राज्य की कुल आबादी के लगभग बराबर बैठता है। इनमें से 2.04 लाख पर्यटक विदेशी थे। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो प्रदेश ने अपेक्षा से कहीं अधिक सफल प्रदर्शन किया।

राज्य स्तर पर नए हवाई अड्डों समेत चुनिंदा पर्यटन स्थलों के बीच बेहतर कनैक्टीविटी के और प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासें के केंद्र में राज्य में आधारभूत ढांचागत विकास ही है। इसी तरह उत्तराखंड में भी ढांचागत विकास पर जोर दिया जा रहा है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की मदद से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। एक मोटे अनुमान के मुताबिक सिर्फ उत्तराखंड राज्य में ही पर्यटन के लिहाज से दो हजार कमरों की कमी है। इस कमी को राज्य अपने दम पर पूरा करने का प्रयास कर रहा है।

 

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