सक्सेस स्टोरीज

कुपोषण से मुक्त हुआ छोटू ; यूनीसेफ के रिकार्ड में दर्ज हुई अनुसुईया

भोपाल : सोमवार, जुलाई 9, 2018, 21:00 IST

मध्यप्रदेश में कुपोषण पहले कभी एक गंभीर समस्या हुआ करती थी लेकिन अब राज्य शासन के प्रयासों से प्रदेश तेजी से कुपोषण मुक्त हो रहा है। प्रदेश में आँगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से कुपोषण को सुपोषण में परिवर्तित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा सहरिया परिवार की प्रत्येक महिला मुखिया के बैंक खाते में उनके कमजोर बच्चों के बेहतर खान-पान के लिये प्रति माह 1000 रुपये जमा किये जा रहे हैं।

श्योपुर जिले के कराहल क्षेत्र के ग्राम लहरौनी की सीमा पत्नी सगुन आदिवासी का 7 साल का बेटा छोटू अब नियमित रूप से गुड़ और दलिया का नाश्ता करने के बाद स्कूल जाता है। उसे स्कूल में भी मध्यान्ह भोजन मिल रहा है। इस सुविधा से सीमा और अन्य सहरिया परिवारों के बच्चों के ग्रेड में सुधार और कुपोषण को समाप्त करने में सफलता हासिल हो रही है। सीमा अब 1000 रुपये की मासिक सहायता राशि मिलने से छोटू को हरी सब्जी तथा पौष्टिक आहार दे रही है। राज्य शासन की ओर से एक रुपये प्रति किलो के मान से गेहूँ, चावल और नमक की सुविधा भी मिल रही है। इससे उनके क्षेत्र के आदिवासी परिवारों को कुपोषण से छुटकारा मिल गया है।

गुना जिले का पहलवान आदिवासी पत्नी अन्नो और दो वर्षीय बेटी अनुसुईया के साथ एक माह पहले मुरैना के अम्बाह क्षेत्र में मजदूरी करने आया था। अतिकुपोषित बच्ची अनुसुईया को आँगनबाड़ी केन्द्र से अम्बाह पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कर 14 दिन उसकी विशेष परवरिश की गई। इससे उसका वजन 4 किलो 440 ग्राम से बढ़कर 5 किलो 700 ग्राम हो गया। एनयूएसी भी 7.5 से बढ़कर 7.9 से.मी. तक पहुँच गया है, जो एक स्वस्थ बच्चे का परिचायक है। अनुसुईया के हीमोग्लोबीन की मात्रा अब 8 से बढ़कर 9.5 ग्राम हो गई है। स्वास्थ्य सुधार के इन ऑकड़ों के कारण आदिवासी बालिका अनुसुईया का नाम यूनीसेफ ने अपने रिकार्ड में दर्ज किया है।

अतिकुपोषित बच्चों के वजन में वृद्धि होने पर उसको पोषण पुनर्वास केन्द्र से घर जाने के लिये डिस्चार्ज किया जाता है। आँगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता अथवा स्वास्थ्य विभाग की आशा कार्यकर्ता हर 15 दिन में कुपोषित बच्चे के घर जाकर उसका वजन, एनयूएसी, हीमोग्लोबीन की जाँच करती हैं। इस आधार पर 2 महीने में 4 फॉलोअप लिये जाते हैं। इसके लिये कार्यकर्ता और आशा को 250 रुपये मानदेय दिया जाता है। घर गृहस्थी का काम छोड़कर 14 दिन पोषण पुनर्वास केन्द्र में अपने अतिकुपोषित बच्चे के साथ समय बिताने के कारण उसकी माँ को भी 1780 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

सक्सेस स्टोरी ( श्योपुर, मुरैना )


दुर्गेश रायकवार
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