सक्सेस स्टोरीज

मासूम बच्चों को गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलवा रहीं स्वास्थ्य योजनायें

भोपाल : गुरूवार, जुलाई 5, 2018, 14:35 IST

प्रदेश में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं से मासूम बच्चों, गरीबों, बुजुर्गों को बड़ी-बड़ी  बीमारियों से छुटकारा मिल रहा है। इन योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी संजीदगी के साथ किया जा रहा है।

बैतूल जिले के विकासखंड घोड़ाडोंगरी के ग्राम सलैया निवासी मनोज बारपेटे का पुत्र यशवीर दो साल की उम्र तक न बोल पाता था और न सुन पाता था। पेशे से ड्रायवर मनोहर ने यशवीर के इलाज के लिये सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र घोड़ाडोंगरी की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम के चिकित्सक डॉ. मनोज सूर्यवंशी से परामर्श किया तो पता चला कि यशवीर को हियरिंग इम्पेयरमेंट की जरूरत है।

मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा यशवीर का कर्ण प्रत्यारोण का प्रकरण बनाकर 6 लाख 50 हजार रुपये की राशि स्वीकृत करवाई गई। तीन वर्ष की आयु में गत वर्ष यशवीर का भोपाल के एम्स अस्पताल में सफलतापूर्वक ऑपरेशन हुआ। आज 4 साल का यशवीर जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र बैतूल में स्पीच थैरेपी का लाभ लेकर बोलना सीख रहा है।

सिवनी जिले के ग्राम कुरई निवासी गरीब परिवार के राजेन्द्र और अभिलाषा पाठक की पुत्री रोशनी बचपन से हृदय रोग से ग्रसित थी। रोशनी का हृदय शरीर के बाँई ओर की जगह दाँयी ओर था। रोशनी का एक हाथ का आकार भी छोटा था, जो उसकी विकलांगता का कारण था।

विभिन्न विशेषज्ञों और चिकित्सकों को दिखाने के बाद भी परिजन रोशनी के इलाज के लिये भटकते रहे। ऐसे में चिरायु मेडिकल कॉलेज के सर्जन की टीम ने रोशनी की सर्जरी को चैलेन्ज के रूप में लिया। एक साल में तीन सर्जरी कर रोशनी के हार्ट के छेद, एक वाल्व की रिपेरिंग और फेफडों की धमनी का सफल ऑपरेशन किया। पूरा खर्च राज्य सरकार ने वहन किया।

बड़वानी जिले के ग्राम रेहगुन की काली बाई की एक बच्ची नन्दनी के बारे में आँगनवाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता एवं सहायिका ने उसे बताया कि उसे एनआरसी में भर्ती नहीं कराया, तो वह गंभीर कुपोषण की श्रेणी में आ जाएगी। ऐसे में नन्दनी की दादी का सहारा और उनकी समझाइश से काली बाई ने नन्दनी को एनआरसी में भर्ती करवाया और 14 दिन तक चले विशेष उपचार एवं 6 बार दिये जाने वाले विशेष पोषण आहार से नन्दनी का वजन तेजी से बढ़ा।

काली बाई को भी एनआरसी में विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसकी बदौलत आज नन्दनी अपने भाई-बहनों के साथ खेलने-हँसने लगी है।


सक्सेस स्टोरी (बैतूल, सिवनी, बड़वानी)


दुर्गेश रायकवार​
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