सक्सेस स्टोरीज

बंजर भूमि को फलदार-छायादार पेड़-पौधों से किया हरा-भरा

भोपाल : मंगलवार, जुलाई 3, 2018, 14:39 IST

छिन्दवाड़ा जिले के न्यूटन चिखली नगर के महेश कुमार सराठी ने बंजर भूमि को फलदार एवं छायादार पौधों से हरा-भरा बनाया है। महेश कुमार ने भाइयों से हिस्से में मिली पैतृक बंजर भूमि में इमारती लकड़ी सागौन के अलावा आम, कटहल, आँवला, अमरूद, नीम, अचार, जामुन, सीताफल के फलदार पेड़ लगाये। साथ ही पलाश, बाँस, रींझा और औषधि का पौधा ग्वारपाठा भी लगाया। महेश कुमार ने लगभग 20 एकड़ भूमि पर वनीकरण कर एक नया जंगल विकसित किया है।

महेश कुमार ने बताया कि हिस्से में मिली पैतृक जमीन बंजर थी, जिसमें कृषि कार्य नहीं किया जा सकता था। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के साथ वृक्षों के महत्व को समझते हुए बंजर भूमि में वनीकरण का प्रोजेक्ट बनाया। सबसे पहले एक छोटी सी कुईयाँ खुदवाई। इसे बड़ा कुआं बनाकर पानी का स्रोत तैयार किया। बंजर भूमि में रोपित सागौन और अन्य पौधों की सिंचाई की। उनके द्वारा रोपित सागौन और अन्य पौधे बड़े होकर वन के रूप में तब्दील हो गये हैं। सागौन के एक पेड़ की कीमत लगभग 36 हजार रूपये आंकी गई है।

महेश कुमार ने बताया कि पौध-रोपण के लिये वे जिले एवं जिले से बाहर की नर्सरियों से पौधे खरीदकर लाते हैं। महेश कुमार वर्ष 2005 को महत्वपूर्ण वर्ष बताते हुये कहते है कि इस वर्ष मध्यप्रदेश सरकार ने निजी भूमि पर वनीकरण को बढ़ावा देने के लिये नियमों का सरलीकरण किया। भू-राजस्व संहिता की धारा 240 और 241 में राजस्व क्षेत्र में निजी भूमि पर वनीकरण किये जाने पर भूमि स्वामी को स्वयं के लगाये गये वृक्षों को काटकर अभिवहन करने की छूट दी गई है, जिसका उन्हें भरपूर लाभ मिला हैं।

यह प्रावधान निजी भूमि पर वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना में भी शामिल किया गया है। इससे किसानों में उत्साह और जोश का संचार हुआ। वर्ष 2005 से अब तक उन्होंने 5 हजार से अधिक सागौन के पौधों का रोपण किया। महेश ने इन पौधों के रोपण की सूचना प्रारूप ‘ख’ में वन और राजस्व विभाग को दी तो वन विभाग द्वारा जीवित पौधों का सत्यापन किये जाने पर राजस्व विभाग द्वारा उनकी निजी भूमि में किये गये सागौन के 5 हजार 124, आंवला के 334, नीम के 15, पलाश के 10, कंजी के 10, बबूल के 2 और शीशम के 2 पेड़ों की प्रविष्टि उनके खसरा नंबर के राजस्व रिकार्ड में दर्ज की जा चुकी है।

महेश कुमार बताते है कि पौधारोपण पर उन्होंने अपने वेतन, बैंक से ऋण, बीमा से प्राप्त राशि मिलाकर लगभग 40 लाख रूपये खर्च किये हैं। पौधों की सुरक्षा के लिये उन्हें वन अनुसंधान एवं विस्तार केन्द्र सिवनी से लगभग 15 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि भी प्राप्त हुई है। पौधों के रोपण से लेकर उनके पेड़ बनने तक उनकी देख-रेख और सुरक्षा के कार्य में 15 से 20 लोगों को रोजगार मिला है। महेश कुमार इस वन क्षेत्र में दूध डेयरी और मुर्गीपालन व्यवसाय की योजना तैयार कर रहे हैं। महेश कुमार का कहना है कि वनीकरण से उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा सुदृढ़ हो गई है। साथ ही, क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक सौंदर्य में बढ़ोत्तरी दिखाई देने लगी हैं। वे अब अन्य कृषकों को भी निजी भूमि पर पौधारोपण करने के लिये प्रेरित हो रहे हैं। 

सक्सेस स्टोरी (छिन्दवाड़ा)


महेश दुबे
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