सक्सेस स्टोरीज

सतना का गुलाब पहुँचा दिल्ली : गेंदा फूल की खेती हुई लाभकारी

भोपाल : शुक्रवार, मई 11, 2018, 14:34 IST

प्रदेश में किसानों ने परम्परागत फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलें लेकर अतिरिक्त आमदनी का सशक्त जरिया विकसित कर लिया है। इसके लिये किसानों को सरकारी स्तर पर विभिन्न योजनाओं में सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

दिल्ली बाजार में पहुँच रहे सतना के गुलाब: सतना के प्रगतिशील किसान निखिल खण्डेलवाल के पास सतना-पन्ना रोड पर ग्राम सितपुरा में 4 हजार वर्गमीटर भूमि है। उन्होंने एक साल पहले गुलाब की खेती करना शुरू किया। निखिल को उद्यानिकी विभाग की पॉली-हाउस योजना में 50 लाख रुपये लागत का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया था। इसमें उन्हें उद्यानिकी विभाग ने करीब 17 लाख रुपये सब्सिडी और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया। निखिल ने पॉली-हाउस में गुलाब के एक लाख पौधे लगाये। आज वे हर रोज गुलाब के 2 हजार फूल सुरक्षित रूप से पैक कर दिल्ली भेज रहे हैं। उन्हें 5 रुपये प्रति फूल के हिसाब से हर रोज 10 हजार रुपये की कमाई हो रही है।

निखिल खण्डेलवाल ने मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। हमेशा से खेती से जुड़ा कारोबार करना चाहते थे। उनकी यह चाहत अब पूरी हो गई है। निखिल खण्डेलवाल के पॉली-हाउस में काफी लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

गेंदा फूल की खेती बनी लाभकारी: नीमच जिले के विकासखण्ड जावद के किसान रामलाल धाकड़ नई तकनीक को अपनाने के लिये हमेशा प्रयासरत रहते हैं। उन्होंने सोयाबीन की विभिन्न किस्मों की खेती की, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप आमदनी प्राप्त नहीं कर सके। कृषि विभाग द्वारा उन्हें उद्यानिकी फसलों के अध्ययन के लिये राज्य से बाहर अध्ययन दौरे पर भेजा गया। इस दौरे में उन्होंने उद्यानिकी फसलों के बारे में गहन अध्ययन किया।

किसान रामलाल ने अध्ययन दौरे से लौटकर एक हेक्टेयर भूमि में गेंदा फूल के 1600 पौधे लगाये। गेंदा फूल की फसल जुलाई में लगायी थी और अक्टूबर में फूल तोड़कर बेचे। इससे उन्हें 70 हजार रुपये की आय हुई, जो परम्परागत सोयाबीन के मुकाबले ज्यादा थी। उन्होंने अब निरंतर रूप से परम्परागत फसलों के साथ-साथ गेंदा फूल की खेती करने का निश्चय किया है। कृषक रामलाल अपनी सफलता को अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के बीच भी साझा करते हैं।

सक्सेस स्टोरी (सतना, नीमच)


मुकेश मोदी
सुलोचना ने प्रारब्ध से जीती जिन्दगी की ज़ंग
दिव्यांगों को मिल रहे नि:शुल्क उपकरण
अंजू और छगन को वास्तव में मिला सपनों का पक्का घर
बकाया बिजली माफी से चाय वाले विजय को मिली राहत
प्रसूति सहायता से जच्चा और बच्चा दोनों ही हैं स्वस्थ
मुस्कराने लगी है मासूम कामिनी, सुनने लगे है बुजुर्ग बगदीराम
सत्तर वर्षीय चरवाहे जागेश्वर ने ली पशु नस्ल सुधार की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना ने मासूम भावना और प्रियंका को दी नई जिंदगी
अनार की फसल से सँवरी ओमप्रकाश की आर्थिक स्थिति
15 हजार गरीब बिजली उपभोक्ताओं के माफ हुए 651 लाख
कॉलेज में पढ़ रही है अब धारे गाँव की बेटियाँ
आदिवासी महिलाओं ने अपनाया कड़कनाथ पालन व्यवसाय
आजीविका मिशन से 25 लाख महिलाएँ बनीं आत्म-निर्भर
मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से बचपन के हुनर को बनाया जीने का सहारा
मासूम अखिलेश को आरबीएसके टीम ने ह्रदय रोग से दिलाई मुक्ति
विशेषज्ञों की सलाह पर कृषि को लाभकारी बना रहे किसान
गरीबों के लिये मुसीबत में सहारा बन रही संबल योजना
बिजली माफी से खिले गरीबों के चेहरे
स्व-रोजगार योजनाओं से आत्म-निर्भरता की ओर बढ़ता युवा वर्ग
मुख्यमंत्री बकाया बिजली बिल माफी योजना से प्रसन्न है कमजोर वर्ग
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना ने दिलवाया आत्म-सम्मान
डॉ. रूपाली का है अब अपना क्लीनिक
ई-रिक्शा से रवि रैकवार की आमदनी हुई दोगुनी
प्रधानमंत्री सड़कें बनने से ग्रामीणों को साहूकारों से मिली मुक्ति
रवि ने साइबर कैफे से पाई आत्म-निर्भरता
गरीबों का संबल बनी मुख्यमंत्री जन-कल्याण और स्व-रोजगार योजना
रेवाराम के परिवार का संबल बने 4 लाख रुपये
समाधान एक दिन में योजना से समय पर मिल रहीं लोक सेवायें
आत्म-निर्भर बने युवा नरेन्द्र, दिलीप और शरीफ
मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से गंगाराम बने साड़ी व्यापारी
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 ...