सक्सेस स्टोरीज

युवाओं को स्वावलंबी बना रही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

भोपाल : शनिवार, मार्च 3, 2018, 17:13 IST

मध्यप्रदेश में युवा वर्ग को स्वावलम्बी बनाने में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही है। इस योजना की विशेषताओं के कारण बेरोजगार युवा कहीं 10-15 हजार रूपये महीने की नौकरी करने की बजाय स्वयं का कारोबार शुरू करने, नये उद्योग लगाने में ज्यादा रूचि ले रहे हैं। उज्जैन की नितिशा नाटानी, मंदसौर के अमित राठौर और सतना जिले के राजेन्द्र प्रसाद की तरह अन्य जिलों में भी युवा वर्ग मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का फायदा लेकर स्वयं के उद्योग स्थापित कर रहे हैं और सफल भी हो रहे हैं।

उज्जैन की नितिशा नाटानी एवं उनके पति सौरभ विभिन्न प्रायवेट संस्थानों में नौकरी के लिये प्रयासरत थे। एक दिन नितिशा ने दोने-पत्तल के निर्माण में काम आने वाली सिल्वर शीट बनाने का विचार किया। यू-टयूब पर जाकर तकनीक को समझा। पूंजी की आवश्यकता थी, इसलिये जिला हाथकरघा कार्यालय एवं बैंक से सम्पर्क किया। जिला हाथकरघा कार्यालय द्वारा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में सिल्वर पेपर क्राफ्ट शीट निर्माण के लिये मशीन, गोडाउन एवं सम्पूर्ण व्यवस्था का एस्टीमेट बनाते हुए प्रोजेक्ट तैयार किया गया। जिला प्रशासन एवं बैंक की पहल पर नितिशा को 6 लाख 48 हजार का ऋण स्वीकृत हुआ। इसमें दो लाख रूपये की मार्जिन मनी का लाभ भी उनको दिया गया। इस योजना में बैंक ऋण समय पर चुकाने पर ब्याज में भी पांच प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाती है।

आज चार महीने बाद स्थिति यह है कि नितिशा बैंक की किश्त 12,750 रूपये प्रति माह बिना रूकावट चुका रही है। यही नहीं 7-7 हजार रूपये के तीन कारीगरों को उन्होंने रोजगार भी दें रखा है। इस व्यवसाय से उनके परिवार को 20 हजार रूपये प्रति माह की आमदनी आसानी से हो रही है। आज उनका उज्जैन दोना-पत्तल निर्माण कार्य तेजी से तरक्की कर रहा है।

मंदसौर जिले में अमित राठौर अपना स्वयं का रोजगार स्थापित करना चाहते थे। आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे। अमित को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के बारे में जानकारी मिली तो इन्होने योजना में आर्थिक सहायता के लिये आवेदन किया। अमित को 7 लाख रूपये का ऋण मिला तो स्टेशनरी एवं फोटो कॉपी की दुकान स्थापित की। आज अमित मंदसौर के बाजार में सफल उद्यमी के रूप अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं। दुकान से इन्हें लगभग 16 हजार रूपये प्रति माह आमदनी हो रही है। अब अपनी स्टेशनरी एवं फोटो कॉपी की दुकान को और बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिये वे दिन-रात मेहनत भी कर रहे हैं।

सतना जिले के राजेन्द्र प्रसाद रामटेकरी गांव के निवासी हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के बेरोजगार युवा हैं। योजना के माध्यम से राजेन्द्र मजदूर से बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर बन गया है। इसकी अपनी एक दुकान भी खुल गई है।

राजेन्द्र प्रसाद के परिवार में माता-पिता भाई बहन मिलाकर 7 सदस्य हैं। माता-पिता के साथ ईंट-भट्ठों में ईंट पथाई का परम्परागत कार्य करते था राजेन्द्र प्रसाद की इस कमाई से परिवार का भरण-पोषण असंभव हो रहा था। इसी बीच अखबारों में जिला अत्यांवसायी सहकारी विकास समिति की प्रकाशित विज्ञप्ति से इसे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली।

राजेन्द्र प्रसाद ने योजना के तहत बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर बनने के लिये ऋण प्रकरण तैयार कर बैंक आफ बडौदा की स्थानीय शाखा में प्रस्तुत कर दिया। शाखा प्रबंधक ने इस व्यवसाय के प्रति राजेन्द्र की रूचि और लगन देखते हुये सहयोग किया और 5 लाख रूपये का ऋण राजेन्द्र को मिला। स्वीकृत ऋण में उन्हें ढेड़ लाख रूपये का अनुदान भी मिला गया।

प्रकरण स्वीकृत होते ही राजेन्द्र ने थोक डीलरों से सम्पर्क साधा और दीप बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर के नाम से अपनी दुकान शुरू की। व्यापक रूप से आवास निर्माण की संभावनाओं के चलते राजेन्द्र का व्यापार चल निकला। इस कारोबार से पहले उनके परिवार की मासिक आय 5 से 7 हजार रूपये मात्र थी। अब अपना व्यवसाय स्थापित करने के बाद यह आय 15 से 20 हजार रूपये हर महीने हो रही है।

आज आस-पास के गाँव के युवकों के लिये राजेन्द्र प्रसाद रोल मॉडल बन चुके हैं। इनसे प्रेरणा लेकर अनुसूचित जाति वर्ग के कई युवकों ने अपने स्वयं का उद्यम स्थापित करने की पहल की है।

सक्सेस स्टोरी (उज्जैन, मंदसौर,सतना)


राजेश पाण्डेय
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