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सी.एम. हेल्पलाइन ने पुडुचेरी से बिछुड़े बैद्यनाथन को परिजन से मिलाया

भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 23, 2017, 19:23 IST

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रारंभ की गई सी.एम. हेल्पलाइन (181 टोल-फ्री) सेवा आमजन के आसपास की समस्याओं/शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए काफी प्रभावी व्यवस्था के रूप में कामयाब हुई है। यह सेवा सामान्य शिकायतों एवं समस्याओं का निराकरण कर रही है। बैतूल में 9 साल से परिवार से बिछुड़े पुडुचेरी निवासी डॉ. बैद्यनाथन अकेले रह रहे थे। डॉ. बैद्यनाथन को उनके परिजन से मिलाने में सी.एम. हेल्पलाइन में एक व्यक्ति द्वारा कराई शिकायत ने अहम् भूमिका निभाई।

विगत 9 जून, 2017 को बैतूल के श्री नरेन्द्र कुमार द्वारा की गई शिकायत के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सी.एम. हेल्पलाइन में शिकायत की प्रविष्टि कराई गई कि ग्राम उड़दन में संचालित शिशु गृह एवं वृद्धाश्रम में करीब 5 वर्ष पूर्व एक व्यक्ति को लाया गया था, जो अपनी याददास्त खो चुका है एवं उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है। उसके द्वारा स्वयं के बारे में भी जानकारी नहीं दी जा पा रही है। उक्त मामले की उचित जांच की जाए। उक्त शिकायत विभिन्न स्तर से गुजरते हुए सी.एम. हेल्पलाइन के एल-3 स्तर के अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के कार्यालय में पहुँची।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा वृद्धाश्रम पहुँचकर जब समूचे प्रकरण की छानबीन की गई तो यह तथ्य प्रकाश में आया कि अपनी याददाश्त खो चुके डॉ. बैद्यनाथन तमिल एवं अंग्रेजी में कुछ अस्पष्ट बोलते हैं, जो समझ पाना संभव नहीं था। उनके द्वारा लिखे गए कागजों में पुडुचेरी निवासी होने की जानकारी मिली। जिला पंचायत कार्यालय द्वारा इस मामले में रुचि लेते हुए इंटरनेट के माध्यम से पुडुचेरी के सामाजिक संगठनों के दूरभाष नम्बरों की तलाश कर उनसे सम्पर्क किया गया। एक सामाजिक संगठन द्वारा पुडुचेरी पुलिस अधीक्षक सुश्री रचना सिंह का मोबाइल नम्बर दिया गया, जिनसे सम्पर्क करने पर उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉ. बैद्यनाथन के परिजनों को ढूंढ निकाला।

जब घर से लापता डॉ. बैद्यनाथन के बैतूल में होने की जानकारी उनके परिजन को दी गई तो वे खुशीमिश्रित आश्चर्य से झूम उठे। डॉ. बैद्यनाथन की पत्नी श्रीमती राजलक्ष्मी, उनका भाई एवं भतीजा एवं पुडुचेरी पुलिस के अधिकारी 11 दिसम्बर, 2017 को बैतूल पहुँचे एवं डॉ. वैद्यनाथन से मिले।

सफलता की कहानी (बैतूल)


राजेश पाण्डेय/सुरेन्द्र तिवारी
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