social media accounts







सक्सेस स्टोरीज

सेवंती के फूलों की खेती से करोड़पति बने किसान

भोपाल : शुक्रवार, दिसम्बर 22, 2017, 14:47 IST

 

बैतूल जिले के आठनेर विकासखंड के गुनखेड़ गाँव के कृषक हनुमंतराव पुत्र कृष्णराव कनाठे पूरे गांव में विकास की मिसाल बन गये है। पूर्व में अपनी ढाई हेक्टेयर जमीन पर परंपरागत रूप से खेती करते थे। वर्ष 2002 में उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आने पर एक हजार वर्ग मीटर पर सेवंती के फूलों की खेती प्रारंभ की। पहले ही वर्ष में मेहनत रंग लाई और मात्र 3 हजार रुपये खर्च करके 55 हजार रुपए की शुद्ध आय प्राप्त हुई। सेवंती के फूलों से हुए इस लाभ से प्रोत्साहित होकर हनुमंतराव ने अगले वर्ष इसके दुगने क्षेत्र में सेवंती के फूलों की खेती की। अगले वर्ष भी फूलों की खेती से आशातीत लाभ मिलने से प्रोत्साहित होकर हनुमंतराव वर्ष-दर-वर्ष फूलों की खेती का क्षेत्र बढ़ाते रहे। आज लगभग 2.5 एकड़ जमीन में सेवंती, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, गेंदा, डेजी एवं अन्य फूलों की खेती कर लाभ कमा रहे हैं।

नई पीढ़ी के हनुमंतराव नई तकनीकी को अपनाने में भी पीछे नहीं हैं। वर्ष 2016-17 में उद्यानिकी विभाग की संरक्षित खेती योजना का लाभ लेते हुये विभाग से 4 लाख 67 हजार 500 रूपये का अनुदान प्राप्त कर एक हजार वर्गमीटर में पॉली हाउस निर्माण कर वहां सेवंती की खेती करना प्रारंभ किया। खुले क्षेत्र में 1.5 एकड़ में सेवंती की खेती से लगभग 30 क्विंटल फूल का उत्पादन हो रहा है। इसे औसतन 125 रूपये किलो मूल्य पर स्थानीय बाजार एवं नागपुर बाजार में बेचा जा रहा है। एक हजार वर्गमीटर के पॉलीहॉउस में लगभग 18-20 क्विंटल सेवंती फूल का उत्पादन हो रहा है। पॉली हाउस में उत्पादित फूल की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण फूल औसतन 250 रूपये प्रति किलो के मूल्य पर आसानी से बिक जाते हैं। लगभग एक एकड़ जमीन पर अन्य फूल जैसे रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, गेंदा आदि की खेती करते हैं। वर्तमान में सेवंती एवं अन्य फूलों की खेती से 2.5 एकड़ जमीन पर उन्हें प्रतिवर्ष 7,50,000 से 8,00,000 रूपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।

फूलों की खेती से हो रहे लाभ से हनुमंतराव ने अपने बच्चों के साथ छोटे भाइयों को भी पढ़ाया-लिखाया। एक भाई कृषि में पोस्ट ग्रेजुएट होकर कृषि विभाग में तथा दूसरा भाई राष्ट्रपति भवन में बॉडी गॉर्ड के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहा है। हनुमंत राव के खेती एवं सामुदायिक विकास को देखते हुए उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 में उन्हें हॉलैंड- नीदरलैंड की विदेश यात्रा पर भी भेजा गया, जहाँ से फूलों की खेती एवं विपणन के नए गुर सीख कर आये हनुमंतराव नई ऊर्जा से फूलों की खेती में लग गए हैं।

हनुमंतराव की खेती से हो रहे लाभ से गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। इन किसानों ने सेवंती के फूलों की खेती प्रारंभ की है। ये सभी किसान आपस में मिलजुल कर सेवंती की खेती करते है और उत्पादित फूलों को मिलजुल कर बाजार में बेचते हैं। धीरे धीरे, वर्ष-दर-वर्ष गाँव में सेवंती के फूलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही हैं। वर्तमान में गुनखेड़ गाँव का लगभग हर किसान सेवंती के फूलों की खेती कर रहा है। इस समय गाँव में लगभग 70 एकड़ जमीन पर सेवंती के फूलों की खेती की जा रही है। इसी वर्ष सेवंती की खेती से गाँव के किसानों को लगभग 2 करोड़ रूपये की आमदनी हुई है।

सफलता की कहानी (बैतूल)


राजेश पाण्डेय
बीकानेरी पापड़ बन रहे हैं पन्ना की पहचान
प्रधानमंत्री आवास में चैन की नींद सो पा रहे हैं हितग्राही
मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से निशा को मिली नई जिंदगी
खेतिहर मजदूर कमलेश जाटव मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से हुए आत्म-निर्भर
मंशाराम ने पत्नी से 45 वर्ष पहले के वादे को पूरा किया
सोलर पम्प से रूपवती की खेती लाभ का धंधा बनी
प्रधानमंत्री सड़क से ग्राम गांगपुर बना रमणीक स्थल
स्व-सहायता समूह से जुड़कर सशक्त महिला बनी अनीता
गरीबों के हमदर्द हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री
कम्बाइन हारवेस्टर और व्हील स्प्रेयर अविष्कार के लिये पुरस्कृत होंगे कृषक राजपाल
खानाबदोशों को प्रधानमंत्री आवास योजना में मिले पक्के घर
फिर से मुस्कुराने लगी है मासूम गरिमा
जैविक खेती और वर्मी कम्पोस्ट यूनिट से सालाना मुनाफा हुआ 5 लाख
मासूम नमन को मुख्यमंत्री बाल हदय उपचार योजना से मिला नया जीवन
मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना से स्वावलम्बी बनते लोग
बकाया बिजली बिल माफी से गरीबों के घर फिर हुए रौशन
मछली पालन और पशुपालन से करोड़पति बने वर्मा बंधु
केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री वीरेन्द्र कुमार ने सराही प्रधानमंत्री आवास की गुणवत्ता
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ने बदली नन्ही सविता की जिंदगी
कुपोषण से मुक्त हुआ छोटू ; यूनीसेफ के रिकार्ड में दर्ज हुई अनुसुईया
मासूम सीता, गीता और मीनाक्षी के होठों पर आई मुस्कान : रीतेश पैरों पर खड़ा हुआ
अनाज-दालों के साथ सब्जी से आई रामरतन के जीवन में खुशहाली
प्रधानमंत्री आवास योजना ने बढ़ाया लक्ष्मणदास का मान सम्मान
कुपोषण से मुक्ति के अभियान में मुनगा (सुरजना) से मिल रही कामयाबी
मासूम बच्चों को गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलवा रहीं स्वास्थ्य योजनायें
मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से कैलाश धुर्वे बने इलेक्ट्रानिक्स व्यवसायी
मुख्यमंत्री बिजली बिल माफी स्कीम से गरीबों के घरों में आयी खुशहाली
आदिवासी युवक उमाशंकर को झोपड़ी की जगह पर ही मिला पक्का मकान
20 लाख से अधिक का लेन-देन कर रही है बैक-सखियाँ
विलुप्त बाघों ने पन्ना टाइगर रिजर्व को बनाया शोध एवं अध्ययन केन्द्र
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 ...