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सक्सेस स्टोरीज

अनवर मियाँ अब ड्रायवर नहीं, ई-ऑटो के मालिक हैं

भोपाल : गुरूवार, नवम्बर 16, 2017, 14:45 IST

ग्वालियर में अवाड़पुरा (इंन्द्रानगर) के निवासी अनवर मियाँ एक निजी स्कूल की बस चलाते थे। रोज सुबह बच्चों को स्कूल ले जाना और उन्हें वापस घर पहुँचाकर सांझ ढले घर लौटना उनकी दिनचर्या थी। इसी से उनके परिवार की रोजी-रोटी चलती थी। वे दिन-रात सोचते रहते थे कि अगर खुद का एक ऑटो रिक्शा हो जाए तो ज्यादा कमा लेंगे। मगर परिवार की माली हालत ऐसी न थी कि वे ड्रायवर से वाहन मालिक बन जाएँ।

'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना' से उनकी वर्षों पुरानी हसरत पूरी हुई है। अनवर खान अब ई-आटो के मालिक बन गए हैं। अनवर के परिवार का नाम गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी बसर कर रहे परिवारों में शुमार था। उन्हें दीनदयाल राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के तहत स्वरोजगार के लिये मदद मिली। यहीं से उनकी जिंदगी के खुशनुमा पल शुरू हो गए।

ग्वालियर जिला प्रशासन की पहल पर अभी बीते अक्टूबर माह में संभागीय ग्रामीण हाट बाजार में ऋण वितरण मेला लगाया गया। मेले में कलेक्टर श्री राहुल जैन ने जब अनवर मियाँ को 'ई-ऑटो' की चाबी सौपीं तो उनकी आँखे छलक आईं। उन्हें एक लाख 70 हजार रूपये की लागत का 'ई-ऑटो' मिला है। इसमें प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना के तहत दी गई 34 हजार रूपए की अनुदान राशि शामिल थी।

अब अनवर मियाँ स्कूली बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने और वापस घर छोड़ने का काम कर अच्छी कमाई कर लेते हैं। स्कूल के समय के अलावा सवारियों से भी कमाई कर लेते हैं। अनवर मियाँ की दो बेटी और एक बेटा है। अपने ऑटो से पद्मा स्कूल में बड़ी बिटिया और बजरिया स्कूल में छोटी बिटिया को लाने-ले-जाने का काम भी करते हैं। छुट्टी के दिन पूरे परिवार को कभी तिघरा तो कभी फूलबाग में पिकनिक मनाने भी निकल जाते हैं। अनवर मियाँ की माली हालत बहुत बेहतर हो गई है।

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ऋषभ जैन
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