सक्सेस स्टोरीज

महिलाओं की जिद और जुनून से घर-घर बने शौचालय

भोपाल : मंगलवार, अक्टूबर 3, 2017, 19:24 IST

जीवन की आखिरी दहलीज पर खड़ी जेबो बाई ने शौचालय बनवाने के लिये बकरियाँ बेच दीं तो विधवा महिला पाँचो बाई ने अपनी भैंस। गीता बघेल की शौचालय बनाने की जिद जब पिता ने पूरी नहीं की तो वह खुद फावड़ा लेकर गड्डा खोदने जुट गई और पिता को शौचालय बनवाने के लिये विवश होना पड़ा। इन सभी से और आगे सपना परिहार की पहल है, जिन्होंने न केवल खुद की ग्राम पंचायत बल्कि समीपवर्ती आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त कराया है। ग्वालियर जिले की ऐसी ही अन्य महिलाओं ने स्वच्छता प्रेरक बनकर सम्पूर्ण जिले को खुले में शौचमुक्त जिला बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

ग्वालियर जिले की जनपद पंचायत भितरवार के ग्राम किशोरगढ़ निवासी श्रीमती जेबो बाई जीवन के लगभग 100 बसंत देख चुकीं हैं। उन्होंने गाँव में सबसे पहले स्वच्छता मिशन के तहत शौचालय का निर्माण कराया। शौचालय का काम शुरू करने के लिये उन्होंने अपनी बकरियाँ तक बेच दीं। इस मिशन में उनके पति श्री बच्चू सिंह का भी उन्हें पूरा सहयोग मिला। इसी तरह बागवाला गाँव में जब शौचालय बनवाने पर चर्चा चल रही थी, तब गाँव की एक विधवा महिला श्रीमती पाँचो बाई खड़ी हो गईं और बोली आप सब बहस करो, हम अपनी भैंस बेचकर शौचालय बनवायेंगे। उन्होंने ऐसा किया भी। इन दोनों महिलाओं के प्रोत्साहन से उनके गाँव के हर घर में शौचालय बन गए हैं।

ग्राम देवगढ़ की कु. गीता बघेल ने भी शौचालय बनवाने की जिद पकड़ ली। मगर उसके पिता इस ओर ध्यान नहीं दे रहे थे। गीता यहीं नहीं रूकीं, उसने स्वयं फावड़ा उठाया और शौचालय के लिये धीरे-धीरे गड्डा खोद डाला और पिता को पक्का शौचालय बनवाने के मजबूर होना पड़ा।

ग्राम ररूआ निवासी कु. सपना परिहार की कहानी सबसे अधिक प्रेरणादायक है। गाँव की इस बालिका ने “स्वच्छता समग्र जागृति” नाम से एक प्रेरक दल बनाया और हर घर में शौचालय की सफल कहानी लिख दी। सपना ने पहले अपनी ग्राम पंचायत को शौच मुक्त किया। फिर उसके बाद समीपवर्ती चीनौर, किशोरगढ़, पुरी व ररूआ सहित लगभग एक दर्जन ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त करा दिया। शौचालयों का उपयोग भी हो, इसके लिये सपना समय-समय पर तड़के 4 बजे से अपनी सहेलियों के साथ गाँव में फोलोअप के लिये भी निकलती हैं। इन जागरूक महिलाओं के चर्चे ग्वालियर जिले के ग्रामीण अंचल की चौपालों में प्रमुखता से छाए रहते हैं।

ऐसे प्रेरकों के समर्पण और अथक मेहनत की बदौलत ही ग्रामीण स्वच्छता में ग्वालियर जिला देश के अव्वल जिलों में चयनित हुआ है। स्त्री-पुरूष अनुपात में पिछड़े जिलों में शुमार ग्वालियर जिले में इन महिला प्रेरकों ने महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वच्छता का संदेश दिए जाने के बाद ग्वालियर जिले के गाँव-गाँव की चौपाल पर भी शौचालय बनवाने की चर्चा आम थी। कोई कहता फसल बिके तब घर में शौचालय बनवाऊँ तो किसी का कहना था कि सरकार की आर्थिक मदद आए तब शौचालय का निर्माण शुरू करूँ। घर में शौचालय न होने से सबसे ज्यादा कष्ट जाहिर तौर पर महिलाओं को उठाना पड़ता है। जब हर घर में शौचालय की बातें गाँव की महिलाओं ने सुनीं तो उनके मन में उम्मीद की किरण जागी। गाँव के पुरूष अभी इसी उधेड़बुन में थे कि शौचालय का निर्माण कैसे शुरू करूँ, तभी गाँव की कुछ महिलाओं ने ऐसी मिसाल कायम कर दी कि एक घर में क्या गाँव के सभी घरों में शौचालय बन गए और ग्वालियर जिला अब खुले में शौचमुक्त जिला है।


महेश दुबे
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