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नौनिहालों को निमोनिया से बचाने के लिये बनाई रणनीति पर अमल सुनिश्चित हो

"सांस" अभियान के राज्य-स्तरीय शुभारंभ समारोह में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी 

भोपाल : शुक्रवार, फरवरी 5, 2021, 20:40 IST

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का प्रशिक्षित अमला 0 से 5 वर्ष के बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिये बनाई गई रणनीति पर अमल करे। देश में निमोनिया और डायरिया जैसे रोगों से बाल मृत्यु दर बढ़ती है, जिसका इलाज संभव है और उपलब्ध भी है। जरूरत है जन-जागरूकता बढ़ाने की और समय पर बच्चों को इलाज उपलब्ध कराने की। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी "सांस" (सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रीलाइज़ निमोनिया सक्सेसफुली) अभियान के मिंटो हॉल में आयोजित राज्य-स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि देश में हर वर्ष 3 करोड़ बच्चे निमोनिया से ग्रसित होते हैं। इन बच्चों में प्रदेश के 23 लाख बच्चे शामिल हैं। बच्चों की मृत्यु दर में 15 प्रतिशत निमोनिया की बीमारी एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि निमोनिया ऐसी बीमारी नहीं है, जो लाइलाज हो, लेकिन समय पर निमोनिया की पहचान नहीं कर पाने और सही समय पर सही उपचार नहीं मिल पाने से बच्चों की मृत्यु हो जाती है। निमोनिया से होने वाली नौनिहालों की मृत्यु दर में बहुत कमी लायी जा सकती है। इसके लिये बनाई रणनीति को प्रदेश में "सांस" अभियान के माध्यम से क्रियान्वित करने जा रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आपदा को चुनौती में बदलने के संकल्प को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना काल में आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण की रूपरेखा तैयार की। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश विकास के रोडमैप में स्वास्थ्य विभाग की कार्य-योजना भी महत्वपूर्ण है। स्वस्थ समाज विकास के लिये जरूरी है। बच्चे देश का भविष्य है। बच्चों के स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि "सांस" अभियान में राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है। राज्य-स्तरीय ट्रेनर्स जिलों में और जिलों से पीएचसी, सीएचसी और गाँव स्तर तक बाल स्वास्थ्य की देख-रेख करने वाले अमले को प्रशिक्षण दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि गाँव-गाँव, घर-घर में परिवार के सदस्यों को निमोनिया के शुरूआती लक्षणों को पहचान करने की जानकारी देने के साथ उन्हें उनके गाँव और घर के नजदीक उपलब्ध स्वास्थ्य केन्द्रों की जानकारी भी दी जायेगी। प्रदेश में 4 हजार हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बन चुके हैं। मार्च तक इनकी संख्या 7 हजार हो जायेगी। इन सेंटर्स पर इलाज की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। निमोनिया की पहचान कर कोई भी माता-पिता/अभिभावक अपने नौनिहाल को समय पर स्वास्थ्य केन्द्र ले जाकर इलाज उपलब्ध करवाएगा और बच्चों के जीवन पर निमोनिया से आने वाले संकट को समय रहते दूर कर सकेगा।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने पिछले 10 माह में कोविड-19 के संक्रमितों के उपचार करने में उल्लेखनीय कार्य किया है। आज की स्थिति में प्रदेश में केवल 2 हजार के आसपास कोविड संक्रमित है। इसी प्रकार दुनिया के सबसे बड़े कोविड-19 वैक्सीनेशन के अभियान में पहले चरण में किये जाने वाले कुल स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 67 प्रतिशत का वैक्सीनेशन कर प्रदेश ने देश में पहला स्थान पाया है। स्वास्थ्य विभाग का पूरा अमला प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसी का परिणाम हैं कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रदेश ने कोविड-19 की रोकथाम, उपचार और वैक्सीनेशन में देश में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि "सांस" अभियान में भी हम सफल होंगे।

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव श्री मो. सुलेमान ने कहा कि चुनौती को हम अवसर में बदलने की क्षमता रखते हैं। हमें बाल और मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है। अभियान की रूपरेखा के संबंध में स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय गोयल, एम.डी. एनएचएम श्रीमती छवि भारद्वाज ने जानकारी दी। यूनीसेफ की मध्यप्रदेश प्रमुख सुश्री मार्गरेट ग्वाड़ा ने कोविड-19 के संक्रमितों के टेस्ट, उपचार, नियंत्रण और वैक्सीनेशन में प्रदेश में किये गये उल्लेखनीय और सफल कार्य के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की सराहना की।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी एवं अतिथियों ने विभाग द्वारा तैयार की गई रणनीति, नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई (NBSU), बाल्य गहन चिकित्सा इकाई (PICU) तथा सिविल अस्पताल/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों के उपचार के रिकॉर्ड संधारण प्रपत्रों, SNCU से डिस्चार्ज उपरांत बच्चों के फोलोअप किये जाने के संबंध में तैयार किये गये माड्यूल तथा बाल्य गहन चिकित्सा इकाई में कार्यरत चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्स द्वारा उपचार हेतु प्रोटोकॉल (IMPACT Module) का अनावरण किया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने आगर जिले में स्थापित नवनिर्मित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) एवं बाल्य गहन चिकित्सा इकाई (PICU) का ऑनलाइन लोकार्पण किया। समारोह में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले चिकित्सकों का सम्मान भी किया।


महेश दुबे
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