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सर्व संसाधन सम्पन्न शालाएँ - आत्म-निर्भर-मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण पहल 

भोपाल : मंगलवार, फरवरी 2, 2021, 20:14 IST

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश 'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री इन्दर सिंह परमार ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति के अनुसार सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं' की स्थापना के लिए कार्ययोजना बनाई है। इस कार्ययोजना के तहत राज्य में 9200 शालाओं को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने वाली विश्व स्तर की 'सर्व संसाधन सम्पन्न शाला' के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रथम चरण में वर्ष 2023 तक प्रदेश भर में 350 अत्याधुनिक भौतिक अधोसंरचना, विशिष्ट चयन प्रक्रिया से चयनित स्टाफ, उच्चतम तकनीक, गुणवत्ता उन्नयन और परिवहन सुविधा युक्त शालाओं का विकास किया जाएगा।

वर्तमान में मध्यप्रदेश में बहुत सी ऐसी शालाएँ हैं जहाँ 60 से भी कम बच्चे पढ़ते हैं। ऐसी शालाओं के बच्चों को सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये, शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन और मध्यप्रदेश के स्कूलों को देश के अग्रणी स्कूलों के समकक्ष लाने के लिए यह महत्वकांक्षी योजना प्रारंभ की जा रही है। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि प्रदेश के सभी छात्रों को 15 किलोमीटर के भीतर कम से कम एक उच्च गुणवत्ता वाली 'सर्व संसाधन सम्पन्न शाला' उपलब्ध हो। बच्चों को सुगमता पूर्वक शालाओं तक पहुँचाने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। शालाओं में केजी से लेकर कक्षा 12वीं तक की कक्षाएँ संचालित की जाएंगी। सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं में अत्याधुनिक भौतिक अधोसंरचना, शत प्रतिशत शिक्षक और सपोर्ट, सर्व सुविधा युक्त प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय के साथ स्मार्ट क्लासेस और डिजिटल लर्निंग के माध्यम से स्कूली बच्चों को शिक्षित किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के अनुसार आर्थिक, सामाजिक रुप से कमजोर वर्ग के छात्रों, विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रत्येक शाला में यथासंभव एक इंग्लिश मीडियम का सेक्शन भी संचालित किया जाएगा। इन स्कूलों में माता-पिता की सक्रिय भागीदारी होगी, उन्हें सह - शिक्षक के रूप में सक्रिय किया जाएगा।

सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं के लिए शाला का चयन स्थानीय जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के अनुमोदन उपरांत किया जा रहा है। प्रति जन शिक्षा केंद्र लगभग 3 शालाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है ताकि भौगोलिक रूप से संपूर्ण राज्य को कवर किया जा सके। जिलों में अधिक नामांकन और बुनियादी अधोसंरचना उपलब्धता वाली शालाओं को वरीयता दी जा रही है। इस तरह कुल चयनित 9200 शालाओं में चरणबद्ध तरीके से जिला स्तर पर 52, विकासखंड स्तर पर 261, संकुल स्तर पर 3200 और ग्रामीण स्तर पर 5687 शालाओं का विकास किया जाएगा।

सर्व संसाधन सम्पन्न शालाओं के संचालन से स्कूली छात्रों के बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से बोर्ड परीक्षा परिणाम अच्छे आएंगे। कक्षा 12वीं के बाद होने वाली अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगिता परीक्षाओं में मध्यप्रदेश के बच्चे सफलता हासिल करेंगे। शिक्षा विभाग ने हमेशा ही स्कूली बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए नए नवाचारों को अपनाया है और स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रयास निरंतर जारी हैं। 'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों के उज्जवल भविष्य और सफल जीवन के लिए दृढ़ संकल्पित और प्रतिबद्ध है। निश्चित ही नई शिक्षा नीति से पोषित ये भावी पीढ़ी 'आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश' से लेकर 'आत्म-निर्भर भारत' को विश्व पटल पर गढ़ने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी।


अनुराग उइके
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