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अनुसंधानकर्ता सस्ती प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिये रिसर्च करें

डॉ. ए.के. पाण्डे ने किया 34 वीं युवा वैज्ञानिक कांग्रेस का शुभारंभ
205 शोधार्थियों ने पढ़े 19 विषयों में रिसर्च पेपर

भोपाल : गुरूवार, फरवरी 28, 2019, 21:01 IST

युवा वैज्ञानिकों को अपने आसपास के परिवेश से शोध अथवा रिसर्च के मुद्दों अथवा विषयों की तलाश करना चाहिये। स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास देश के लिए सम्मान और गौरव का विषय है। अनुसंधानकर्ताओं को सस्ती प्रौद्योगिकी विकसित करने की दिशा में भी रिसर्च करना चाहिये। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन डॉ.अखिलेश कुमार पाण्डेय ने आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 34 वीं म.प्र. युवा वैज्ञानिक कांग्रेस का शुभारंभ करते हुए यह विचार व्यक्त किये।

डॉ.पांडेय ने बताया कि कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर किये गये एक सर्वेक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि युवा वर्ग 'टेक्नोफेब' और 'नोमोफोबिया' की चपेट में आ चुका है। इसका प्रभाव उनके जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पचास तरह के मशरूम होते हैं,जिनसे बायोल्यूमीनिसेंस नामक पदार्थ निकलता है,जिसका उपयोग स्मार्ट सिटी में ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की कुपोषण की समस्या पर शोध किये जाने की आवश्यकता बताई।

आरजीपीवी कुलपति प्रो. सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान वहां के लोगों के 'साइंटिफिक टेम्पर' से होती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश अनूठा है। यहां के लिए एक 'सतत मॉडल' विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए ग्रामीण लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेय जल उपलब्ध कराना आज भी एक बड़ी चुनौती है।

परिषद् के महानिदेशक डॉ.नवीन चन्द्रा ने कहा कि जैसे प्रफुल्ल चन्द्र राय, सी.वी.रमन, जगदीश चन्द्र बसु, शांति स्वरूप भटनागर ने उपकरण स्वयं बनाये और बाद में शोध भी किया। उस समय देश स्वतंत्र नहीं हुआ था।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय,भोपाल के कुलपति प्रो. आर.जे. राव ने कहा कि समाज की समस्याओं को सुलझाने में विज्ञान की अहम भूमिका है। उन्होंने न्यूक्लियर ऊर्जा, आनुवांशिकी संशोधित खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूकता के लिए वैज्ञानिक साक्षरता पर जोर दिया। इस अवसर पर शोधपत्रों के सारांश 'एब्सट्रेक्ट' का विमोचन किया गया।

युवा वैज्ञानिक कांग्रेस के पहले दिन तेरह समानांतर सत्रों में 19 विषयों में 205 रिसर्च पेपर पढ़े गये। दिव्या चतुर्वेदी ने एक्वेटिक सिस्टम में प्रदूषण के संदर्भ में गणितीय आकलन, भावना अहीरवाल ने बफेलो काल्वास के परफारमेंस पर मोरिंगा लीफ का प्रभाव,रश्मि विश्वकर्मा ने बफेलोज के नान डिक्रिपिटव ब्रीड में दुग्ध प्राप्ति के लिए तकनीकी हस्तक्षेप एवं सोफिया एम. जब्बर ने इन विट्रो फर्टीलाइज्ड केपराइन एम्ब्रो से संबंधित विषय पर रिसर्च पेपर पढ़ा।

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