Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

बदलते समय की आवश्यकता है पोषण पर वैज्ञानिक चिंतन

भोपाल, पोषण पर वैज्ञानिक तरीके से सोचने की जरूरत है। पोषण की स्थिति में सुधार केवल आर्थिक सहयोग से ही पूरा नहीं किया जा सकता, इस दिशा में कृषि, जीवनशैली, व्यवहार परिवर्तन आदि को समग्रता में देखते हुए ही हम आगे बढ़ सकते हैं। खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर लेने के बाद अब कृषि को पोषण से जोड़ने और पोषण जागरुकता के लिये अभियान चलाने की आवश्यकता है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने भोपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में दी।

श्रीमती चिटनिस ने बताया कि महिला-बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में तकनीकी सहयोग भारतीय अनुसंधान परिषद् अटारी जबलपुर का है। दीनदयाल शोध संस्थान, दिल्ली इस आयोजन का नॉलेज पार्टनर है। प्रदेश का कृषि तथा किसान कल्याण विभाग, यूनिसेफ मध्यप्रदेश, इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट भी इसमें सहयोगी है। कार्यशाला में होने वाले विमर्श के परिणाम को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के माध्यम से नीति आयोग के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे, ताकि भोजन के स्रोत में पोषण की प्रचुरता उपलब्ध कराकर देश में महिलाओं और बच्चों में पोषण की समस्या का स्थायी निराकरण किया जा सके। उन्होंने बताया कि पोषण जागरुकता की दिशा में प्रदेश में लगातार प्रयास जारी हैं। प्रदेश के सभी 313 विकाखंडों में से प्रत्येक में एक गांव को न्यूट्रीशन स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया गया है। यह गांव पोषण संवेदी कृषि और पोषण जागरुकता पर कार्य करते हुये पोषण आत्मनिर्भर गांव के वर्किंग मॉडल के रूप में विकसित हो रहे हैं। इस विषय पर विचार मंथन और जागरूकता के लिये 2016-17 से जारी कार्यशालाओं का समापन इस अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला से किया जायेगा।