Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

भारत और सेशेल्स
दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग
 

भारत की नज़रें पूर्व की ओर देखो नीति (वर्तमान में एक्ट ईस्ट नीति) के साथ ही हिन्द महासागरीय देशों की ओर भी हैं। ज्ञात हो कि चीन हिन्द महासागर में बहुत तेजी से अपने पांव पसारने में लगा है। हाल ही में चीन ने अफ्रीकी देश जिबूती में अपना नया नौसैनिक अड्डा स्थापित किया है। इन्ही क्षेत्रों के मद्देनज़र भारत भी सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण हिंद महासागर के 115 द्वीपों वाले देश सेशेल्स में सैन्य बेस स्थापित कर रहा है, जिसका वहां की सरकार ने समर्थन भी दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने तीन साल पहले 10 मार्च 2015 को सेशेल्स की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुल चार समझौते हुये थे, जिसमें से एक समझौता आर्मी बेस स्थापित करने के लिये भी हुआ था। इस समझौते के तहत सैन्य बेस का इस्तेमाल दोनों देशों द्वारा किया जाना है। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा था कि इस सहयोग से सामुद्रिक पारिस्थितिकी और संसाधनों में हमारी आपसी समझ बढ़ेगी।
वर्तमान में भारत, चीन से संभावित खतरों के मद्देनज़र सेशेल्स को अपना प्रमुख अड्डा बना रहा है और सेशेल्स से रक्षा सम्बन्धों को मजबूत करने में लगा है। पिछले माह के अंतिम दिनों में भारत और सेशेल्स के मध्य आठवां द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लैमिटी’ सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में आयोजित किया गया था।
  यह 115 द्वीपों वाला पूर्वी अफ्रीकी देश है।
       यहां लगभग 90 हजार लोग रहते हैं, जिसमें से लगभग 10 प्रतिशत भारतीय हैं।
 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मार्च 2015 में सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत सेशेल्स को-ऑपरेशन प्रोजेक्ट लाँच करते हुए।
जानिये क्या है लैमिटी
   इस संयुक्त सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2001 में कई गयी थी।
   लैमिटी को सेशेल्स के स्थानीय भाषा मे ‘क्रियोल’ कहा जाता है, जिसका अर्थ ‘मित्रता’ से है।
       वर्तमान में इस सैन्य अभियान का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत अर्द्ध-शहरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों का संचालन जारी रखना है।