Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

 
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
 

आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हम सभी के लिये गर्वोक्ति भरा है कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। सदियों से वे जिन बेेड़ियों से जकड़ी थीं, उन्हें तोड़कर आज नई पहचान बना रही हैं। महिलायेंें अब पुरुषों से दुर्बल नहीं, बल्कि उनसे कहीं ज्यादा सक्षम और सबल हो गई हैंै। भारतीय समाज के परिप्रेक्ष्य में वे आज भी परिवार की मुख्य धुरी हैं, इसीलिये गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था कि ‘‘महिलायें हम लोगोंं के लिये केवल गृहस्थी के यज्ञ की अग्नि की देवी ही नही हैं, अपितु हमारी आत्मा की लौ भी हैं।’’

पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस न्यूयॉर्क शहर में वर्ष 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को मत देने का अधिकार दिलवाना था, क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिलाओं को मत देने का अधिकार नहीं था। विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुये इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।

आज स्थितियां बदल रहीं हैं। राज्यों द्वारा महिला सशक्तिकरण पर बहुत कार्य किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाडोे अभियान, महिला हिंसा के विरुद्ध शौर्या दल का गठन, नई महिला नीति आदि योजनायें बनाकर देश में अभिनव पहल की है। प्रदेश सरकार महिलाओं के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण और सशक्तिरण के लिये नई पहल करते हुये मुख्यमंत्री महिला कोष की स्थापना, बड़े शहरों में कामकाजी महिलाओं के लिये वसति गृहों का संचालन, विधवा पेंशन में गरीबी रेखा की शर्त खत्म करने, अविवाहित महिलाओं को 50 वर्ष की आयु के बाद पेंशन देने के साथ-साथ मजदूर महिलाओं को गर्भधारण के दौरान चार हजार रुपये और संतान के जन्म उपरांत 12 हजार रुपये देने की पहल की गई है।

प्रदेश सरकार ने महिलाओं के आर्थिक तथा सामाजिक सशक्तिकरण के लिये नगरीय निकायों और अध्यापकों के पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। सरकार द्वारा स्वयं का उद्यम स्थापित करने के लिये मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना शुरू की गई है, जिसमें 10 लाख से 2 करोड़ रुपये तक के ऋण 15 प्रतिशत सब्सिडी के साथ दिये जाते हैं। इस योजना में युवाओं का 5 प्रतिशत ब्याज तथा महिलाओं को 6 प्रतिशत ब्याज राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जाता है। इसके साथ-साथ उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालयों में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण भी दिया जायेगा। प्रदेश की आंगनवाड़ियों में वितरित होने वाले टेक होम राशन के निर्माण और प्रदाय का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जायेगा। इसके साथ ही महिला स्व-सहायता समूह शासकीय विद्यालयों में वितरित की जाने वाली गणवेश को सिलने का काम भी करेंगे।

हर स्तर पर यह प्रमाणित हो चुका है कि महिलाओं को अवसर मिलने पर उन्होंने इसे बढ़-चढ़ कर निभाया है। महिलायें समाज का एक अहम  हिस्सा हैं। समाज के निर्माण में उनकी अहम भूमिका होती है। आज के युग में महिलायें सशक्त हो रही हैं और प्रत्येक क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं, परंतु अभी भी उनकी संख्या जनसंख्या के अनुपात से कम है। आइये हम सब मिलकर प्रतिज्ञा करें कि हम अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा और पौष्टिक भोजन के साथ समान स्वतंत्रता और प्रोत्साहन भी दें, ताकि हर बेटी का सर्वांगीण विकास हो सके और हर बेटी अपने सपने को पूरा कर सके।

शुभकामनाओं सहित।