Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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उत्तराखंड के जीवों को मिला जीवित व्यक्ति का कानूनी दर्जा

उत्तराखंड के उच्च न्यायालय ने राज्य में तीनों स्तर हवा, पानी और स्थल पर रहने वाले सभी जीवों को विधिक अस्तित्व की श्रेणी में रखने का फैसला दिया है तथा इसके साथ ही यह भी निर्धारित किया है कि इनके अधिकार, कर्तव्य तथा दायित्व एक व्यक्ति की तरह ही होंगे। उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड के समस्त नागरिकों को उनका संरक्षक भी घोषित किया है।

याचिकाकर्ता नारायण दत्त भट्ट ने बताया था कि प्रदेश में बनबसा से लेकर नेपाल के महेंद्रनगर तक घोड़ा-बग्घियों और तांगों का काफी प्रयोग किया जाता है। उन्होंने इससे यातायात प्रभावित होने और इनके जरिये अवैध हथियारों, ड्रग्स और मानव तस्करी की आशंका जताई थी।

याची ने याचिका में यह भी स्पष्ट किया था कि भारत-नेपाल सीमा पर इनकी जांच नहीं की जाती है और वहीं यह भारत-नेपाल सहयोग संधि 1991 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है।

  • उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने बनबसा चंपावत निवासी नारायण दत्त भट्ट की जनहित याचिका पर यह फैसला दिया है।
  • न्यायालय ने पर्यावरण प्रदूषण, नदियों के सिमटने जैसी घटनाओं से लुप्त हो रहे प्राणियों और वनस्पतियों की जैव विविधता पर भी जताई चिंता।
  • न्यायपालिका ने नेपाल से आने वाले खच्चरों और तांगों की जांच करने तथा सीमा पर एक पशु चिकित्सा केंद्र खोले जाने की बात भी कही है।