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केंद्र सरकार ने खरीफ की 14 फसलों का बढ़ाया न्यूनतम समर्थन मूल्य

नई दिल्ली, वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाते हुये केंद्र सरकार द्वारा 14 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया गया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल की समिति (सीसीईए) ने किसानों की आय को  प्रोत्साहन देते हुये वर्ष 2018-19 के लिये सभी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है।

सरकार का यह फैसला केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित एमएसपी को उत्पादन लागत के मुकाबले कम से कम 150 प्रतिशत रखने के पूर्व निर्धारित सिद्धांत के वादे पर खरा उतरता है।
वर्ष 2018-19 के लिये सभी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोत्तरी इस प्रकार है-

  • प्रतिशत के आधार पर देखा जाये तो इस साल एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि (52.47 प्रतिशत) रागी में की गई है।
  • वहीं दूसरे स्थान पर ज्वार हाइब्रिड (42.94 प्रतिशत) है।

इसमें सबसे महत्व वाली फसल धान (सामान्य) के एमएसपी में 200 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि की गयी है, जिससे धान का समर्थन मूल्य 1550 रुपये से बढ़कर 1750 रुपये हो गया है। वहीं ज्वार (हाईब्रिड) में 730 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई।

दलहन फसलों में अरहर (तुअर) के एमएसपी में 225 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, इससे रिटर्न में 62.89 प्रतिशत की वृद्धि होगी। उड़द के एमएसपी में लागत के मुकाबले के लिए 220 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार बाजरे के एमएसपी में 525 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, ताकि लागत के मुकाबले रिटर्न में 96.97 प्रतिशत की वृद्धि हो सके।

पांच फसलों के एमएसपी में
हुई सबसे अधिक बढ़ोत्तरी

इसमें काला तिल-1827 रुपये प्रति क्विंटल, मूंग-1400 रुपये प्रति क्विंटल, सूरजमुखी का बीज-1288 रुपये प्रति क्विंटल, कपास-1130 रुपये प्रति क्विंटल और रागी-997 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

एमएसपी से इतर सरकार की पहल
खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि के अलावा सरकार ने किसानों के अनुकूल कई अन्य पहलें भी की हैं जो इस प्रकार हैं - मोबाइल फोन एवं रिमोट सेंसिंग जैसी स्मार्ट प्रौद्योगिकी के जरिये तत्काल आकलन एवं दावों का जल्द निपटारा किया जायेगा। सरकार ने फसल बीमा के लिये एक मोबाइल ऐप भी जारी किया है, जो किसानों को उनके क्षेत्र में उपलब्ध बीमा कवर के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने में मदद करेगा।