Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
पर्चा खारिज नहीं लेकिन सजा
छह महीने की कैद और जुर्माना

विधानसभा चुनाव की जंग लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए नामजदगी के पर्चे के साथ दो शपथ पत्र पेश करना जरूरी किया गया है। इन हलफनामों में दी गई जानकारी यदि झूठी या मिथ्यापूर्ण है तो चुनाव कानून के मुताबिक पर्चा खारिज तो नहीं होगा पर इस वजह से उम्मीदवार सजा का पात्र अवश्य हो सकेगा। उसे छह महीने तक की कैद और जुर्माने या दोनों की एक साथ सजा से गुजरना पड़ सकता है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान के मुताबिक उम्मीदवार को शपथ पत्र में मिथ्यापूर्ण कथन करना या सूचना देना भारी पड़ सकता है। अलबत्ता, इस आधार पर नामजदगी का पर्चा खारिज नहीं किया जा सकेगा। लेकिन, उसके द्वारा शपथ पत्र में आपराधिक रिकार्ड या चल-अचल संपत्ति को लेकर कोई गलीत जानकारी दी जाए या कोई सूचना छिपा ली जाए तो वह सजा का पात्र बन सकता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत उम्मीदवार के ऐसा करने पर इस कृत्य को निर्वाचन अपराध माना गया है। अधिनियम की दो धाराओं यथा धारा 33 की उप धारा (1) और धारा 33 क की उपधारा (2) के तहत शपथ पत्र में संबंधित सूचना देने में असफल रहने, ऐसी मिथ्यापूर्ण सूचना देने जिसकी उम्मीदवार को जानकारी है और विश्वास भी कि यह मिथ्या है तथा सूचना छिपाने पर सजा का प्रावधान है।