Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
अपराधों में आई भारी कमी वक्त पर लिया गया एक्शन
मध्यप्रदेश में 13वीं विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होने जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपने विभिन्न नए प्रयोगों की कड़ी में इस बार तगड़े संचार तंत्र की योजना भी तैयार की थी। मतदान केन्द्र से लेकर आयोग तक जुड़े कम्यूनिकेशन के तारों ने पूरी मशीनरी को चौकस और मुस्तैद कर दिया था। पल-पल में सूचनाओं के आदान-प्रदान का आसान और माकूल बंदोबस्त किया गया था। इसके चलते वक्त पर हर एक्शन लिया जाना मुमकिन हो सका। इस कोशिश का सुखद नतीजा यह रहा है कि चुनाव के दौरान होने वाले अपराधों में पिछले चुनाव की तुलना में इस बार भारी कमी आई है।
चुनाव के दौरान इस बार आयोग ने एक और नए प्रयोग के तहत सूचना तंत्र को इसलिए मजबूत कर दिया था ताकि सारी परिस्थितियों पर समग्र विचार और इसके अनुरूप तत्काल कार्रवाई अंजाम देने में सहूलियत हो जाए। संचार सुविधा के आधुनिकतम साधनों में लैंड लाइन फोन, मोबाइल फोन, फैक्स और वायरलेस का भरपूर इस्तेमाल करने की रणनीति तैयार की गई थी। सूचना तंत्र के विस्तृत दायरे में मतदान केन्द्र, करीबी थाना, जोनल अफसर, सेक्टर मजिस्ट्रेट, मतदान केन्द्र के क्षेत्र में रहने वाले भरोसेमंद व्यक्ति जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और चुनाव आयोग आपस में जुड़े हुए थे। मैदानी अफसरों को मोबाइल फोन के इस्तेमाल के लिए कुल 13 लाख 72 हजार 500 रुपए भी मंजूर किए गए थे।
संचार तंत्र के त्वरित और सटीक इस्तेमाल से आयोग के निर्देश पर मुनासिब एक्शन लिया जाना पुलिस और प्रशासन के लिए भी मददगार बना। अगर पिछले चुनाव से ही तुलना करें तो वर्ष 2003 में जहाँ चुनावी हिंसा की 195 वारदातें हुई थीं, इस बार ये 65 पर सिमट आईं। इसी तरह उस वक्त जहाँ 4 लोग मारे गए थे और 239 जख्मी हुए थे, इस बार केवल एक मृत्यु का मामला सामने आया है और 83 लोग जख्मी हुए हैं। यही स्थिति संपत्ति को हुए नुकसान की है जबकि पिछले चुनाव में जहाँ कुल 3 लाख 99 हजार 700 रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुँचा था वहीं इस बार सिर्फ 70 हजार रुपए मूल्य की संपत्ति को क्षति हुई।
चुनावी अपराधों पर काबू रखने की कार्रवाई 2 महीने पहले ही शुरू कर दी गई थी। चुनाव आयोग ने बाकायदा इसके लिए वक्त-वक्त पर हिदायतें दीं और इसके लिए रणनीतियाँ भी तय कीं। इसके नतीजे में पिछले चुनाव में जहाँ कानून की विभिन्न धाराओं के तहत 1 लाख 99 हजार 205 अपराधियों को प्रतिबंधित किया गया था वहीं इस चुनाव में 3 लाख 33 हजार 531 अपराधियों को प्रतिबंधित किया गया। इसी तरह उस चुनाव में जहाँ 34 हजार 75 गैर जमानती वारंट तामील कराए गए थे वहीं इस बार इनकी तादाद 38 हजार 48 थी। यही स्थिति लायसेंसशुदा हथियारों को जमा कराने, कब्जे में लेने या निरस्त करने के मामलों में भी थी जबकि पहले जहाँ यह कार्रवाई ऐसे 1 लाख 76 हजार 169 हथियारों के लिए की गई थी, इस बार 2 लाख 17 हजार 720 हथियारों को लेकर की गई।
गैरकानूनी हथियार बनाए जाने के 107 ठिकानों पर पिछले चुनाव के दौरान छापे डालकर इनकी बरामदगी की गई थी, इस बार यह कार्रवाई 224 ठिकानों पर की गई। इसी तरह पहले जहाँ 2874 गैर लायसेंसी विभिन्न हथियार जप्त किए गए थे, इस बार 3208 ऐसे हथियार जप्त किए गए। पिछले चुनाव के दौरान जहाँ गैरकानूनी रूप से जमा 1512 गोलियाँ और विस्फोटक पदार्थ तलाशी में पाए गए थे, इस बार सघन और कड़ी कार्रवाई के चलते अपराधी पस्त हुए तथा व्यापक तलाशी और छापों में 795 गोलियाँ और विस्फोटक पदार्थ गैर कानूनी कब्जे से जप्त किए गए।
योगेश शर्मा