|
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
केन्द्रीय
स्वास्थ्य
एवं
परिवार
कल्याण
मंत्री
श्री
गुलाम
नबी
आज़ाद
को
प्रदेश
के
लिए
स्वीकृत
10
नर्सिंग
स्कूलों
को
खोलने
की
स्वीकृति
जल्दी
प्रदान
करने
का
आग्रह
किया
है।
इसी
के
साथ
श्री
चौहान
ने
राष्ट्रीय
ग्रामीण
स्वास्थ्य
मिशन
की
तर्ज
पर
राष्ट्रीय
शहरी
स्वास्थ्य
मिशन
स्थापित
करने,
राज्य
के
अस्पतालों
में
सुपर
स्पेशियालिटी
सुविधा
उपलब्ध
करवाने
में
सहयोग
देने,
पूरे
प्रदेश
में
असंक्रामक
रोग
नियंत्रण
में
सभी
जिलों
को
शामिल
करने
और
12वीं
पंचवर्षीय
योजना
में
स्वास्थ्य
के
क्षेत्र
के
लिए
जीडीपी
का
3
प्रतिशत
आवंटित
करने
के
लिए
भी
लिखा
है।
|
मुख्यमंत्री
के
पत्र
के
मुख्य
बिन्दु
-
राष्ट्रीय
ग्रामीण
स्वास्थ्य
मिशन
की
तर्ज
पर
हो
राष्ट्रीय
शहरी
स्वास्थ्य
मिशन
का
गठन।
-
दस
नर्सिंग
स्कूल
खोलने
की
जल्दी
मिले
स्वीकृति।
-
विदिशा,
रायसेन,
झाबुआ,
मंदसौर,
सीधी,
राजगढ़,
नरसिंहपुर,
देवास,
सिवनी
और
सतना
में
है
नसिर्ंग
स्कूल
प्रस्तावित।
-
शहरी
अस्पतालों
के
उन्नयन,
सुपर
स्पेशियालिटी
सुविधा
बढ़ाने
में
सहयोग
करे
केन्द्र।
-
प्रदेश
के
सभी
जिलों
को
असंक्रामक
बीमारी
नियंत्रण
में
शामिल
किया
जाए।
-
12वीं
पंचवर्षीय
योजना
में
स्वास्थ्य
के
लिए
जीडीपी
का
3
प्रतिशत
आवंटित
हो।
|
श्री
चौहान
ने
अपने
पत्र
में
लिखा
है
कि
भारत
सरकार
द्वारा
ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना
के
तहत
मध्यप्रदेश
को
दस
जीएनएम
(जनरल
नर्सिंग
एण्ड
मेटरनिटी)
नर्सिंग
स्कूल
खोलने
की
स्वीकृति
प्रदान
की
गई
थी।
इस
संबंध
में
उन्होंने
गत
18
जनवरी,
2012
को
प्रेषित
पत्र
का
हवाला
भी
दिया
है,
जिसके
साथ
राज्य
द्वारा
विदिशा,
रायसेन,
झाबुआ,
मंदसौर,
सीधी,
राजगढ़,
नरसिंहपुर,
देवास,
सिवनी
और
सतना
में
नर्सिंग
स्कूल
खोलने
के
प्रस्ताव
भी
संलग्न
है।
उन्होंने
कहा
कि
इसके
लिए
शीघ्र
अनुमति
प्रदान
करें।
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान
ने
पत्र
में
आगे
लिखा
है
कि
12वीं
पंचवर्षीय
योजना
में
देश
के
स्वास्थ्य
के
क्षेत्र
में
परिवर्तन
की
आवश्यकता
है।
स्वास्थ्य
मिशन
स्थापित
करने
पर
बल
देते
हुए
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
इसे
राष्ट्रीय
ग्रामीण
स्वास्थ्य
मिशन
की
तर्ज
पर
स्थापित
किया
जाना
चाहिए।
मुख्यमंत्री
ने
केन्द्रीय
स्वास्थ्य
मंत्रालय
से
राज्य
के
शहरी
अस्पतालों
के
उन्नयन
और
इनमें
सुपर
स्पेशियालिटी
सुविधा
के
लिए
सहयोग
देने
की
भी
माँग
की
है।
उन्होंने
कहा
कि
असंक्रामक
रोगों
के
नियंत्रण
के
लिए
राज्य
के
कुछ
ही
जिलों
को
शामिल
किया
गया
है।
इसको
पूरे
प्रदेश
में
विस्तारित
करने
की
आवश्यकता
है।
श्री
चौहान
ने
आगे
लिखा
है
कि
ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना
में
स्वास्थ्य
सेवा
के
लिए
जीडीपी
का
केवल
एक
प्रतिशत
आवंटित
किया
गया
था।
बारहवीं
पंचवर्षीय
योजना
में
आवश्यक
है
कि
स्वास्थ्य
आवंटन
जीडीपी
के
3
प्रतिशत
से
कम
न
हो।
श्री
चौहान
के
मुताबिक
ऐसा
होने
से
ही
देश
के
आम
नागरिकों
की
स्वास्थ्य
समस्याओं
का
समाधान
हो
सकेगा।
|