|
चार
साल
पहले
साइना
नेहवाल
से
इतती
उम्मीदें
नहीं
थीं
लेकिन
बीजिंग
ओलंपिक
में
क्वार्टर
फाइनल
तक
पहुंचने
के
बाद
सुपरस्टार
बनीं
साइना
पिछले
कुछ
वर्षों
से
भारतीय
बैडमिंटन
का
चेहरा
बनी
हुई
हैं।
स्टार
बैडमिंटन
खिलाड़ी
साइना
नेहवाल
को
मालूम
है
कि
उनसे
पदक
की
उम्मीद
की
जा
रही
है
और
पदक
जीतना
उनका
ख्वाब
भी
है।
वे
अपने
इस
ख्वाब
को
सच
करने
को
बेकरार
भी
है।
हैदराबाद
की
गाचीबाउली
गोपी
अकादमी
में
मुख्य
राष्ट्रीय
कोच
पुलेला
गोपीचंद
के
मार्गदर्शन
में
छह
से
सात
घंटे
की
कड़ी
ट्रेनिंग
कर
रही
साइना
ने
27
जुलाई
से
शुरू
हो
रहे
ओलंपिक
के
बारे
में
9
जुलाई
को
कहा
कि
मैं
दिन
में
छह
से
सात
घंटे
से
अधिक
समय
ट्रेनिंग
कर
रही
हूँ।
मैं
अपने
मौजूदा
फिटनेस
स्तर
से
खुश
हूं
और
अपने
स्टेमिना
और
गति
के
अलावा
कोर्ट
में
कौशल
पर
भी
काम
कर
रही
हूँ।
उन्होंने
कहा
कि
अगर
सब
कुछ
ठीक
रहा
तो
मुझे
यकीन
है
कि
ओलंपिक
में
पदक
जीतने
का
मेरा
सपना
साकार
हो
जाएगा।
मैं
अपना
सर्वश्रेष्ठ
प्रदर्शन
करने
की
कोशिश
करूंगी।
मात्र
18
बरस
की
उम्र
में
बीजिंग
ओलंपिक
के
दौरान
अपनी
प्रतिभा
को
लोहा
मनवाने
वाली
साइना
ने
कहा
कि
अब
वे
अधिक
अनुभवी
हैं
और
इस
बार
उनका
दावा
मजबूत
है।
साइना
के
पास
बीजिंग
ओलंपिक
के
दौरान
भी
सेमीफाइनल
जगह
बनाकर
पदक
के
करीब
पहुंचने
का
मौका
था
लेकिन
वे
क्वार्टर
फाइनल
में
इंडोनेशिया
की
मारिया
क्रिस्टीना
युलियांती
के
खिलाफ
तीसरे
और
निर्णायक
गेम
में
11-3
की
मजबूत
बढ़त
बनाने
के
बावजूद
हार
गई
थीं।
ओलंपिक
की
बैडमिंटन
स्पर्धा
के
क्वार्टर
फाइनल
में
जगह
बनाने
वाली
पहली
भारतीय
महिला
एकल
खिलाड़ी
साइना
ने
कहा
कि
सभी
समय
के
साथ
सीखते
हैं।
|