|
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
कहा
कि
उद्योग
समुदाय
के
सुझावों
को
शामिल
करते
हुए
और
परिवर्तनशील
आर्थिक
परिदृश्य
को
देखते
हुए
31
जुलाई
तक
उद्योग
नीति
तैयार
हो
जायेगी।
उन्होंने
कहा
कि
प्रदेश
सूचना
प्रौद्योगिकी
का
प्रमुख
केन्द्र
बनेगा।
उन्होंने
कहा
कि
12वीं
योजना
में
12
प्रतिशत
की
विकास
दर
हासिल
करने
का
लक्ष्य
है।
प्रदेश
ने
कृषि
के
क्षेत्र
में
अभूतपूर्व
18
प्रतिशत
की
विकास
दर
हासिल
कर
ली
है।
शीघ्र
ही
प्रदेश
देश
का
सर्वाधिक
गेहूँ
उत्पादक
राज्य
बनेगा।
उद्यानिकी
हब
नीति
को
मंजूरी
दे
दी
गई
है।
अब
कृषि
उत्पादों
के
मूल्य
संवर्धन
में
निवेश
की
जरूरत
है।
श्री
चौहान
11
जुलाई
को
पुणे
में
उद्योगपतियों
और
निवेशकों
के
सम्मेलन
को
संबोधित
कर
रहे
थे।
सम्मेलन
का
आयोजन
मराठा
चेम्बर
ऑॅफ
कॉमर्स
एण्ड
इण्डस्ट्रीज
और
भारतीय
उद्योग
परिसंघ
द्वारा
संयुक्त
रूप
से
किया
गया
था।
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
उद्योगों
में
जरूरी
कौशल
सम्पन्न
जनशक्ति
तैयार
करने
के
लिये
200
कौशल
विकास
केन्द्र
खोले
जायेंगे।
उन्होंने
कहा
कि
निवेश
के
लिये
राज्य
ने
20
हजार
हैक्टेयर
जमीन
का
बैंक
तैयार
किया
है।
उन्होंने
कहा
कि
सुशासन
औद्योगिक
विकास
के
लिये
जरूरी
है।
राज्य
शासन
ने
सुशासन
स्थापित
करने
के
लिये
सभी
जरूरी
कदम
उठाये
हैं।
अब
लोक
सेवा
केन्द्रों
की
स्थापना
की
जा
रही
है।
उद्योगों
को
प्रोत्साहन
देने
के
प्रयासों
की
चर्चा
करते
हुए
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
उद्योगों
को
अबाध
विद्युत
आपूर्ति
हो
रही
है।
अगले
साल
से
गाँवों
को
24
घंटे
बिजली
मिलने
लगेगी।
इससे
कॉटेज
इण्डस्ट्रीज
को
भी
मदद
मिलेगी।
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान
ने
मध्यप्रदेश
को
असीम
संभावनाओं
का
प्रदेश
बताते
हुए
कहा
कि
मध्यप्रदेश
में
विश्वसनीय
निवेश
की
अनुकूल
परिस्थितियाँ
हैं।
साँची
में
बुद्धिस्ट
विश्वविद्यालय
की
स्थापना
हो
रही
है।
इससे
साँची
बौद्ध
देशों
के
लिये
धार्मिक
पर्यटन
का
केन्द्र
बनेगा
और
इससे
न
सिर्फ
सांस्कृतिक
बल्कि
आर्थिक
संबंध
भी
मजबूत
होंगे।
उन्होंने
बताया
कि
धम्म
कान्फ्रेंस
का
आयोजन
होने
जा
रहा
है।
मुख्यमंत्री
ने
उद्योगपतियों
और
प्रतिनिधियों
को
ग्लोबल
इन्वेस्टर्स
समिट
इंदौर
में
आने
का
निमंत्रण
दिया।
उद्योग
मंत्री
श्री
कैलाश
विजयवर्गीय
ने
कहा
कि
राज्य
की
इच्छाशक्ति
और
राजनैतिक
स्थिरता
पर
औद्योगिक
विकास
निर्भर
करता
है।
उन्होंने
कहा
कि
मध्यप्रदेश
में
दोनों
ही
मुखर
रूप
से
उपलब्ध
हैं।
मराठा
चेम्बर
ऑॅफ
कॉमर्स
एण्ड
इंडस्ट्रीज
के
अध्यक्ष
डॉ.
अभय
फिरोदिया
ने
प्रदेश
को
क्रांतिकारी
प्रदेश
बताते
हुए
कहा
कि
प्रदेश
ने
विगत
दस
सालों
में
अभूतपूर्व
प्रगति
की
है।
इसका
श्रेय
संतुलित
नीतियों,
परिणामोन्मुखी
निर्णयों
को
जाता
है।
उन्होंने
कहा
कि
प्रदेश
के
लोग
शांतिप्रिय
हैं
और
व्यापार
की
समझ
रखते
हैं
जो
बिजनेस
समुदाय
के
लिये
सबसे
ज्यादा
जरूरी
है।
उन्होंने
कहा
भू-संसाधन
की
बहुलता
प्रदेश
की
सबसे
बड़ी
ताकत
है।
जहाँ
अन्य
राज्यों
में
जमीन
की
कमी
पड़
रही
है
वहीं
मध्यप्रदेश
में
उद्योगों
के
विकास
के
लिये
पर्याप्त
भूमि
उपलब्ध
है।
निवेशकों
के
पक्ष
में
उद्योग
नीति
के
प्रावधान
उपलब्ध
हैं
और
सबसे
ज्यादा
महत्वपूर्ण
राज्य
सरकार
का
उद्योगों
को
प्रोत्साहन
है।
सुशासन
के
क्षेत्र
में
भी
प्रदेश
नये
उदाहरण
प्रस्तुत
कर
रहा
है।
औद्योगिक
निवेश
के
लिये
यह
जरूरी
है।
भारतीय
उद्योग
परिसंघ
के
पश्चिम
क्षेत्र
के
अध्यक्ष
श्री
प्रदीप
भार्गव
ने
कहा
कि
मध्यप्रदेश
ने
पिछले
वर्षों
में
सुनियोजित
तरीके
से
विकास
किया
है।
सबसे
महत्वपूर्ण
तथ्य
यह
है
कि
प्रदेश
में
सामाजिक
और
आर्थिक
क्षेत्र
में
समान
गति
से
विकास
हुआ
है।
कृषि
उत्पादन
आयुक्त
श्री
एम.एम.
उपाध्याय
ने
कृषि
क्षेत्र
की
प्रगति
और
खाद्य
प्र-संस्करण
में
निवेश
की
संभावनाओं
की
चर्चा
की।
अपर
मुख्य
सचिव
उद्योग
श्री
पी.के.
दाश
ने
औद्योगिक
परिदृश्य
पर
प्रस्तुति
दी।
श्री
सुधीर
मेहता
पिनेकल
इंडस्ट्रीज
के
प्रबंध
संचालक
ने
आभार
व्यक्त
किया।
|