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मध्यप्रदेश
के
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
प्रदेश
की
औद्योगिक
प्रगति
के
लिये
सदैव
प्रयत्नशील
रहे
हैं।
मुख्यमंत्री
पिछले
दिनों
विदेशी
पूंजी
निवेश
को
बढ़ावा
देने
के
लिये
जापान,
दक्षिण
कोरिया
और
सिंगापुर
की
यात्रा
पर
गये
थे
इसका
अच्छा
प्रतिसाद
मिला
है।
इन
देशों
के
उद्योगपतियों
ने
मध्यप्रदेश
में
पूंजी
निवेश
में
दिलचस्पी
दिखाई
है।
मुख्यमंत्री
ने
देश
के
अन्य
भाग
से
आने
वाले
उद्योगपतियों
को
भी
मध्यप्रदेश
में
निवेश
के
लिये
आमंत्रित
किया
है।
इसी
सिलसिले
में
मुख्यमंत्री
ने
मुम्बई
में
उद्योग
समूहों
के
प्रतिनिधियों
से
सीधे
बात
की।
उन्होंने
कहा
कि
औद्योगिक
विकास
के
लिये
मध्यप्रदेश
में
सुशासन
को
सर्वोच्च
प्राथमिकता
दी
गई
है।
लोक
सेवा
प्रदाय
गारंटी
अधिनियम
के
अंतर्गत
निवेशकों
को
भी
समय-सीमा
में
सभी
औपचारिकताएं
पूरी
करते
हुये
सेवाएं
उपलब्ध
करवायी
जायेंगी।
उन्होंने
उद्योगपतियों
को
संबोधित
करते
हुए
कहा
कि
देश
में
चल
रही
आर्थिक
मायूसी
की
स्थिति
को
बदलने
में
मध्यप्रदेश
प्रमुख
भूमिका
निभायेगा।
उन्होंने
कहा
कि
बीमारू
राज्य
कहलाने
वाले
मध्यप्रदेश
ने
अब
12
प्रतिशत
की
वृद्धि
दर
और
18
प्रतिशत
की
कृषि
वृद्धि
दर
हासिल
कर
ली
है।
यह
विकास
करने
की
दृढ़
इच्छाशक्ति
से
संभव
हुआ
है।
उन्होंने
कहा
कि
मध्यप्रदेश
देश
में
निवेश
की
नई
मंजिल
बनने
जा
रहा
है।
कृषि
क्षेत्र
में
हुई
अभूतपूर्व
प्रगति
और
मूल्य
संवर्धन
के
क्षेत्र
में
निवेश
संभावनाओं
की
चर्चा
करते
हुए
उन्होंने
कहा
कि
अगले
तीन
साल
में
गेहूं
उत्पादन
में
प्रदेश,
देश
में
सबसे
आगे
की
पंक्ति
में
खड़ा
होगा।
उन्होंने
कहा
कि
प्रदेश
की
जल
राशि
के
बेहतर
प्रबंधन
से
यह
संभव
होगा।
प्रदेश
में
उद्यानिकी
फसलों
का
उत्पादन
और
क्षेत्र
बढ़ा
है,
अब
मूल्य
संवर्धन
पर
ध्यान
दिया
जा
रहा
है।
उन्होंने
कहा
कि
औद्योगिक
और
कृषि
क्षेत्र
का
समान
गति
से
विकास
करने
के
लिये
राज्य
संकल्पित
है।
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
अगले
साल
से
प्रदेश
के
ग्रामीण
क्षेत्रों
को
चौबीस
घंटे
बिजली
मिलने
लगेगी।
इससे
न
सिर्फ
बड़े
बल्कि
लघु
उद्योगों
को
भी
उत्पादन
में
लाभ
मिलेगा।
उन्होंने
कहा
कि
प्रदेश
में
तीन
नये
औद्योगिक
कॉरिडोर
बनाये
जा
रहे
हैं।
भोपाल-इंदौर,
भोपाल-बीना
और
जबलपुर-कटनी-सिंगरौली।
इन
कॉरिडोर
में
निवेश
की
बड़ी
संभावना
है।
शिक्षा
और
कौशल
विकास
के
संबंध
में
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
उद्योगों
के
लिये
जरूरी
कौशल
सम्पन्न
जनशक्ति
तैयार
करने
के
लिये
कौशल
विकास
मिशन
चलाया
जा
रहा
है।
व्यावसायिक
शिक्षा
के
लिये
विश्वविद्यालय
खोलने
के
संबंध
में
निवेशकों
के
साथ
प्रारंभिक
चर्चा
चल
रही
है।
श्री
चौहान
ने
उद्योग
समूहों
को
इंदौर
में
होने
वाली
ग्लोबल
इन्वेस्टर्स
समिट
में
भाग
लेने
के
लिये
आमंत्रित
किया।
उन्होंने
उद्योगपतियों
को
बताया
कि
विकासखंड
स्तर
पर
अस्पतालों
के
प्रबंधन
को
निजी
हाथों
में
सौंपने
पर
विचार
किया
जा
रहा
है।
उन्होंने
बताया
कि
ग्लोबल
इन्वेस्टर्स
समिट
में
लघु
उद्योगों
पर
विशेष
रूप
से
चर्चा
होगी।
उद्योग
समूहों
के
प्रतिनिधियों
ने
प्रदेश
में
तेजी
से
बढ़
रही
अधोसंरचनात्मक
व्यवस्थाओं
और
सुविधाओं
की
सराहना
करते
हुए
कहा
कि
मध्यप्रदेश
के
उज्ज्वल
भविष्य
को
देखते
हुये
निवेश
प्रस्ताव
तैयार
किये
हैं।
श्री
चौहान
ने
उद्योगपतियों
को
बताया
कि
उद्योग
समुदाय
के
सुझावों
को
शामिल
करते
हुए
और
परिवर्तनशील
आर्थिक
परिदृश्य
को
देखते
हुए
31
जुलाई
तक
उद्योग
नीति
तैयार
की
जायेगी।
उन्होंने
कहा
कि
प्रदेश
सूचना
प्रौद्योगिकी
का
प्रमुख
केंद्र
बनेगा।
उन्होंने
कहा
कि
बारहवीं
योजना
में
12
प्रतिशत
की
विकास
दर
हासिल
करने
का
लक्ष्य
है।
मुख्यमंत्री
ने
मध्यप्रदेश
को
असीम
संभावनाओं
का
प्रदेश
बताते
हुए
कहा
कि
मध्यप्रदेश
में
विश्वसनीय
निवेश
की
अनुकूल
परिस्थितियां
हैं।
सांची
में
बुद्धिस्ट
विश्वविद्यालय
की
स्थापना
हो
रही
है।
इससे
सांची
बौद्ध
देशों
के
लिये
धार्मिक
पर्यटन
का
केंद्र
बनेगा
और
इससे
न
सिर्फ
सांस्कृतिक
बल्कि
आर्थिक
संबंध
भी
मजबूत
होंगे।
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
उद्योगपतियों
से
सीधे
बातचीत
का
ही
यह
सुपरिणाम
है
कि
बड़ी
संख्या
में
देश
और
विदेश
से
उद्योगपति
प्रदेश
में
निवेश
की
इच्छा
रखते
हैं।
मुख्यमंत्री
से
सीधे
बातचीत
के
दौरान
ज्यादातर
उद्योगपतियों
की
शंकाओं
का
समाधान
भी
शीर्ष
स्तर
से
हो
जाता
है।
इससे
उद्योगपति
अपने
को
बेहतर
सुविधाजनक
स्थिति
में
पाते
हैं।
मुख्यमंत्री
स्वयं
उद्योगपतियों
द्वारा
बताई
गयी
कठिनाइयों
पर
ध्यान
देते
हैं
और
भविष्य
में
तैयार
की
जाने
वाली
उद्योग
नीति
में
बतायी
गई
कठिनाइयों
के
निराकरण
के
लिये
उचित
निर्देश
भी
देते
हैं।
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