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2
सितंबर
को
दिल्ली
में
फुटबॉल
का
जुनून
अपने
पूरे
शबाब
पर
था
और
सांसों
को
रोक
देने
वाले
नेहरू
कप
फुटबॉल
के
फाइनल
मैच
में
भारत
ने
मजबूत
कैमरून
को
पेनल्टी
शूटआउट
में
5-4
से
हराकर
लगातार
तीसरी
बार
नेहरू
कप
फुटबॉल
टूर्नामेंट
का
खिताब
जीत
लिया।
इससे
पहले
भारत
2007
और
2009
में
अंबेडकर
स्टेडियम
में
नेहरू
कम
का
खिताब
जीत
चुका
है।
जवाहरलाल
नेहरू
स्टेडियम
में
खेले
गए
रोमांचक
मुकाबले
में
भारतीय
टीम
ने
शानदार
प्रदर्शन
कर
अपने
से
कहीं
ऊंची
रैंकिंग
वाली
कैमरून
(59वीं
रैंकिंग
पर)
की
एक
नहीं
चलने
दी
और
खिताब
पर
कब्जा
कर
लिया।
कैमरून
टीम
पहली
बार
नेहरू
कप
में
खेल
रही
थी।
शुरुआत
में
ही
मेजबान
टीम
ने
दबदबा
बनाने
की
कोशिश
की
और
अंत
तक
जुझारू
खेल
दिखाया।
निर्धारित
समय
और
इंजरी
टाइम
तक
स्कोर
2-2
से
बराबर
रहने
के
बाद
अतिरिक्त
समय
का
सहारा
लिया
गया
लेकिन
15-15
मिनट
के
दो
अतिरिक्त
हाफ
में
भी
कोई
फैसला
नहीं
हो
सका
और
मैच
आखिरकार
पेनल्टी
शूटआउट
में
खिंच
गया।
पेनल्टी
शूटआउट
में
कैमरून
के
एमकोन
थिएरी
भारी
दबाव
के
बीच
अपने
टीम
की
पाँचवीं
पेनल्टी
पर
चूक
गए
और
इस
तरह
खिताब
भारत
की
झोली
में
आ
गया।
इससे
पहले
पेनल्टी
में
भारत
की
ओर
से
रोबिन
सिंह,
सुनील
छेत्री,
डेंजिल
माइकल
फ्रांसो,
मेहताब
हुसैन
और
क्लिफोर्ड
मिरांडा
ने
सही
निशाने
लगाए
जबकि
कैमरून
की
ओर
से
आशु
ताम्बे,
ओसमिला
बाबा,
पाल
बाबे,
किंगुए
एमपोंडो
के
शॉट
लक्ष्य
पर
रहे।
निर्धारित
समय
के
अंदर
भारत
की
ओर
से
गौरमांगी
सिंह
और
सुनील
छेत्री
ने
गोल
किए
जबकि
कैमरून
की
तरफ
से
मैकोन
थिएरी
और
किंगुए
एमपोंडो
ने
गोल
दागे।
सबसे
बड़ा
खिलाड़ियों
का
जज्बा
रहा।
वे
ऊँची
रैंकिंग
की
टीम
के
सामने
कभी
दबाव
में
नहीं
दिखे
और
घरेलू
प्रसंशकों
को
एक
बेहद
रोमांचक
मैच
देखने
का
मौका
दिया।
जिसमें
भारतीय
टीम
ने
एक
टीम
के
रूप
में
शानदार
खेल
का
नजारा
पेश
किया।
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