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सार्वजनिक वितरण प्रणाली का बेहतर क्रियान्वयन

राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता-मुख्यमंत्री

तीन दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 सितंबर को भोपाल में तीन दिवसीय कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेंस का उद्घाटन करते हुए कहा कि कांफ्रेंस के निष्कर्षों के आधार पर प्रदेश में अगले एक वर्ष के विकास की कार्ययोजना बनाई जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्रायमरी सेक्टर में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा और औसत विकास दर में दूसरे स्थान पर रहा था।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 सितंबर को भोपाल में तीन दिवसीय कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र में कहा कि कांफ्रेंस के निष्कर्षों के आधार पर प्रदेश के अगले एक वर्ष के विकास की समयबद्ध कार्ययोजना बनायी जायेगी। कार्ययोजना का क्रियान्वयन आगामी अक्टूबर माह से होगा। मुख्यमंत्री ने कांफ्रेंस में कहा है कि मध्यप्रदेश ने तेज गति से विकास किया है। इसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्राइमरी सेक्टर में मध्यप्रदेश का देश में प्रथम स्थान रहा और मध्यप्रदेश औसत विकास दर में देश में भी तेजी से आगे बढ़ते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि यह पड़ाव है मंजिल नहीं, मध्यप्रदेश को विकास के क्षेत्र में बहुत आगे जाना है। मध्यप्रदेश में इसकी संभावनाएँ हैं। इसके लिये जज्बे और जुनून से काम कर बेहतर से बेहतर परिणाम दें। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उपार्जन एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर केंद्रित सत्र को संबोधित करते हुये कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का बेहतर क्रियान्वयन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गरीबों के लिये आवंटित अनाज का हर हालात में उन्हीं तक समय से पहुँचना सुनिश्चित किया जाये। इसमें लापरवाही पाई जाने पर सख्त कार्रवाई की जाये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाये कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों को कठोर सजा मिले। उन्होंने कहा कि जिलों से भेजी गई उपार्जन के अनुमान की जानकारी वास्तविक हो। उपार्जन की ऐसी व्यवस्था बनायें जिसमें किसानों को दिक्कत नहीं हो। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अच्छी वर्षा हुई है इससे कृषि का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ेगा, इसे ध्यान में रखते हुए उपार्जन के लक्ष्य तय करें। उन्होंने गेहूँ उपार्जन में अच्छा काम करने वाले हरदा, होशंगाबाद, श्योपुर और खण्डवा जिले को बधाई दी।

दो वर्ष में 60 लाख मीट्रिक टन भंडारण की क्षमता बनेगी

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संबंध में किये गये प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि प्रदेश में नयी वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स पॉलिसी बनायी गई है।

इसके तहत दो वर्ष में 60 लाख मीट्रिक टन भंडारण की क्षमता विकसित की जायेगी। वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स पॉलिसी बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के परिवहन वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जायेगा। बताया गया कि इस वर्ष धान की उत्पादकता में 10 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है। धान उपार्जन के लिये किसानों के पंजीयन का काम जारी है। अब तक एक लाख 61 हजार किसानों का पंजीयन किया जा चुका है। पंजीयत सभी किसानों का सत्यापन किया जायेगा। धान का समर्थन मूल्य 1250 रुपये है तथा इस पर 100 रुपये बोनस दिया जायेगा। परिवहन व्यवस्था के लिये 170 सेक्टर बनाये गये हैं। धान उपार्जन के लिये प्रदेश में 941 केन्द्र बनाये गये हैं। गरीब वरिष्ठ नागरिक दम्पत्तियों को अंत्योदय अन्न कार्ड जारी किये जा रहे हैं। बोगस राशन कार्ड निरस्त करने के लिये जिस तरह की कार्रवाई ग्वालियर और सागर जिले में की गई है वैसी ही कार्रवाई अन्य जिलों में की जायेगी। लोक सेवा गारंटी प्रदाय अधिनियम में खाद्यान्न के प्रदाय तथा डुप्लीकेट राशन कार्ड देने की सेवा को शामिल करना प्रस्तावित है।

चर्चा के दौरान सुझाव दिया गया कि छोटे और सीमांत किसानों से उपार्जन को प्राथमिकता दी जाये। जहाँ ज्यादा उत्पादन हुआ है वहाँ अधिक केन्द्र बनाये जायें। उपार्जन के लिये मंडियों में आधुनिक व्यवस्था की जाये, खरीदी केन्द्र पर ही गोदाम बनाये जायें। सहकारिता के माध्यम से छोटे गोदाम बनाये जायें। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की उचित मूल्य दुकान का सुदृढ़ीकरण किया जाये। वन समितियों को केवल आदिवासी जिलों में ही उचित मूल्य की दुकानों का संचालन सौंपा जाये। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवंटित खाद्यान्न की जानकारी में पारदर्शिता रहे। दूरस्थ क्षेत्रों के लिये मोबाइल उचित मूल्य की दुकान की व्यवस्था की जाये। ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को छोटे भंडारगृह बनाने की सुविधा दी जाये। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रदाय किये गये खाद्यान्न की जाँच सीधे उपभोक्ता से सम्पर्क कर की जाये। बताया गया कि प्रदेश के होशंगाबाद और खण्डवा जिले में केरोसिन का अनुदान सीधे उपभोक्ताओं को देने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। सत्र के दौरान मंत्रीगण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, कमिश्नरों और कलेक्टरों ने चर्चा में भाग लिया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में अभिनव कार्य पद्धति विकसित करने का प्रयास किया गया है। वर्ष 2006 में ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में 7.5 विकास दर का लक्ष्य तय किया गया था, जिसे पार कर इस अवधि में प्रदेश में 10.2 प्रतिशत औसत विकास दर हासिल की गई। इसी के साथ कृषि से जुड़े प्राथमिक क्षेत्र में 18 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त की गई, जो देश में सबसे अधिक है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना के पहले साल में लगभग 12 प्रतिशत की विकास दर हासिल की गई है। यह विकास दर दिखाती है कि बीते वर्षों में प्रदेश में किये गये प्रयासों के परिणाम मिलने लगे हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इन उपलब्धियों के बाद भी अभी और प्रयास करने की जरूरत है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय को और बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि सब मिलकर मध्यप्रदेश के भविष्य को बदल सकते हैं। हमारा कर्तव्य है कि पूरी क्षमता से काम करें और कोई कसर नहीं छोड़ें। लोगों की सेवा को ही जीवन का लक्ष्य बनायें, क्योंकि आम आदमी की सेवा के लिये ही लोकतांत्रिक व्यवस्था है। इस सच्चाई को कभी नहीं भूलें कि हम जनता के सेवक हैं। जब आम लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएँ मिलेंगी और उनके जीवन-स्तर में सुधार होगा तब ही कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी पूरी होगी। मध्यप्रदेश में इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विकास का रोड मैप तैयार कर सात प्राथमिकताएँ तय की गई हैं। जिसमें अधोसंरचना, ऊर्जा, सिंचाई, उद्योग, कृषि, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा है। इसके लिये सबको मिलकर काम करना होगा। उद्योगों के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाना होंगे। बड़े पैमाने पर स्किल डेवलपमेंट के काम करना होंगे। यह सुनिश्चित करना होगा कि गरीब लोगों को जो सुविधाएँ दी जा रही हैं वह उन तक बिना बाधा के पहुँचें। स्वास्थ्य कार्यक्रमों का बेहतर क्रियान्वयन करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का प्रकाश आम आदमी तक पहुँचे और सुशासन के परिणाम सबको मिलें, इसी दिशा में काम करें। अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें और मध्यप्रदेश को देश का अव्वल राज्य बनायें।

आरंभ में कांफ्रेंस की रूपरेखा बताते हुए मुख्य सचिव श्री आर. परशुराम ने कहा कि प्रत्येक सत्र के बाद चर्चा के दौरान सामने आये मुद्दों का वर्गीकरण किया जायेगा। इसके बाद कार्ययोजना की रूपरेखा बनाई जायेगी। कार्ययोजना की मासिक मॉनिटरिंग की जायेगी। कांफ्रेंस में मंत्रीगण तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। उद्घाटन सत्र का आरंभ वंदे-मातरम् और मध्यप्रदेश गान से हुआ।

 

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