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ऊर्जा
तथा
खनिज
साधन
राज्यमंत्री
(स्वतंत्र
प्रभार)
श्री
राजेन्द्र
शुक्ल
ने
कहा
है
कि
राज्य
शासन
ने
वर्ष
2013
से
शहरी
एवं
ग्रामीण
क्षेत्र
के
उपभोक्ताओं
को
24
घंटे
विद्युत
आपूर्ति
करने
का
लक्ष्य
निर्धारित
किया
है
वहीं
कृषि
क्षेत्र
में
8
घंटे
सतत
विद्युत
आपूर्ति
का
लक्ष्य
निर्धारित
किया
है।
उन्होंने
कहा
कि
इसके
लिए
जरूरी
है
कि
निर्माणाधीन
विद्युत
परियोजनाओं
का
निर्माण
कार्य,
हर
हाल
में
निर्धारित
समयावधि
में
पूर्ण
किया
जाना
सुनिश्चित
हो।
श्री
शुक्ल
5
जुलाई
को
भोपाल
में
सतपुड़ा
ताप
विद्युत
गृह
सारणी
तथा
श्री
सिंगाजी
ताप
विद्युत
गृह
परियोजना
की
निर्माणाधीन
विद्युत
उत्पादन
इकाइयों
में
निर्माण
कार्य
की
प्रगति
की
समीक्षा
कर
रहे
थे।
बैठक
में
निर्माणाधीन
सतपुड़ा
ताप
विद्युत
गृह
की
2x250
मेगावॉट
की
विस्तारित
इकाई
क्रमांक
10
एवं
11,
श्री
सिंगाजी
ताप
विद्युत
गृह
खंडवा
की
2x600
मेगावॉट
की
इकाई
क्रमांक
1
तथा
2
के
कार्यों
की
समीक्षा
की
गई।
इस
अवसर
पर
प्रबन्ध
संचालक
मध्यप्रदेश
पावर
जनरेटिंग
कंपनी
श्री
विजेन्द्र
नानावटी,
बी.एच.ई.एल.
के
निदेशक
(पावर)
श्री
अतुल
सरैया,
निर्माण
एजेंसियों
के
प्रतिनिधि
सहित
अन्य
अधिकारी
मौजूद
थे।
श्री
शुक्ल
ने
कहा
कि
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
के
शहरी
तथा
ग्रामीण
क्षेत्र
में
सतत
विद्युत
प्रदाय
के
संकल्प
के
मद्देनजर
तथा
इसकी
महत्ता
को
देखते
हुए
हर
स्तर
पर
निर्माण
एजेंसियाँ
कार्यों
की
प्रगति
पर
सतत
निगरानी
रखें।
उन्होंने
कहा
कि
परियोजनाओं
की
निर्माण
एजेंसी
यह
सुनिश्चित
करें
कि
निर्माणाधीन
विद्युत
इकाइयों
का
कार्य
हर
हाल
में
निश्चित
समय-सीमा
में
पूरा
हो।
ऊर्जा
सचिव
श्री
मोहम्मद
सुलेमान
ने
निर्माण
एजेंसियों
के
प्रतिनिधियों
से
कहा
कि
बरसात
के
मौसम
में
निर्माण
कार्य
प्रभावित
न
हो
इस
पर
भी
विशेष
ध्यान
दिया
जाए।
उन्होंने
कहा
कि
विद्युत
इकाईयों
के
निर्माण
में
लगने
वाली
सामग्री
का
पूर्वानुमान
कर
उसका
भंडारण
किया
जाए,
जिससे
बरसात
में
निर्माण
कार्य
प्रभावित
न
हो।
बैठक
में
प्रस्तुतीकरण
के
माध्यम
से
निर्माणाधीन
विद्युत
इकाइयों
के
कार्यों
की
अद्यतन
स्थिति
तथा
कार्य
पूर्ण
करने
के
लक्ष्य
की
जानकारी
भी
दी
गई।
इस
मौके
पर
पावर
जनरेटिंग
कंपनी
के
निदेशक
(वाणिज्य)
श्री
ए.पी.
भैरवे,
ओएसडी
(परियोजना)
श्री
अरविन्द
श्रीवास्तव,
कार्यपालक
निदेशक
श्री
वी.एल.
नेवल,
मुख्य
अभियंता
श्री
एस.सी.
चांदिल,
श्री
ए.के.
लखेरा
एवं
विभिन्न
निर्माण
एजेन्सियों
के
उच्च
अधिकारी
उपस्थित
थे।
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