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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान ने
भोपाल
में 3
जनवरी को
मंत्रालय
में
आयोजित
बैठक में
कहा कि
वर्ष 2012 आम
आदमी की
जिन्दगी
को ठोस
कार्यों
द्वारा
बेहतर
बनाने की
राह में
मील का
पत्थर
साबित
होगा।
उन्होंने
अधिकारियों
से कहा कि
वे मन, वचन
और कर्म
से आम
आदमी की
जिन्दगी
को बेहतर
बनाने के
लिये
कार्य
करें।
मुख्यमंत्री
ने कहा कि
लोकतंत्र
में
जनभावनाओं
का
सम्मान
अनिवार्य
है इसलिए
सभी
कार्य
समय से
हों,
निर्णयों
का
त्वरित
क्रियान्वयन
हो इसके
लिये यदि
आवश्यक
हो तो
प्रक्रियाओं
को सरल
बनाया
जाये।
उन्होंने
कहा कि आम
आदमी की
जिन्दगी
को
खुशहाल
बनाने के
लिये गुड-गवर्नेंस
का
प्रभावी
होना
जरूरी
है।
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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
कहा
है
कि
वर्ष
2012
आम
आदमी
की
जिंदगी
को
ठोस
कार्यों
द्वारा
बेहतर
बनाने
के
मार्ग
में
मील
का
पत्थर
बनाने
के
लिये
टीम
मध्यप्रदेश
को
नई
उमंग,
ऊर्जा
और
उत्साह
के
साथ
संकल्पित
होकर
कार्य
करना
होगा।
प्रदेश
में
आगामी
एक
फरवरी
से
20
फरवरी
तक
विकास
यात्राओं
का
आयोजन
किया
जायेगा।
मुख्यमंत्री
भोपाल
में
तीन
जनवरी
को
मंत्रालय
में
बैठक
को
संबोधित
कर
रहे
थे।
इस
अवसर
पर
अपर
मुख्य
सचिव,
प्रमुख
सचिव,
सचिव
और
विभागाध्यक्ष
उपस्थित
थे।
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
प्रदेश
की
7
करोड़
21
लाख
जनता
की
तकदीर
बदलने
का
अधिकारियों
को
जो
सौभाग्य
मिला
है,
उस
कार्य
में
एक
भी
दिन
व्यर्थ
नहीं
गवायें।
मन,
वचन
और
कर्म
से
आम
आदमी
की
जिंदगी
को
बेहतर
से
बेहतर
बनाने
के
लिये
प्रयास
करें।
उन्होंने
कहा
कि
इस
संबंध
में
यदि
उनके
पास
कोई
सुझाव
है
अथवा
कोई
नया
विचार
आता
है
तो
उसे
वह
मुख्यमंत्री
को
खुले
मन
से
बिना
किसी
विभागीय
सीमाओं
के
बता
सकते
हैं।
इसमें
किसी
भी
प्रकार
की
झिझक
नहीं
करें।
मुख्यमंत्री
ने
बताया
कि
जनवरी
माह
में
छात्र
और
फेरीवालों
की
पंचायत
आयोजित
की
जा
रही
हैं।
इसी
प्रकार
शीघ्र
ही
दस्तकारों,
किसानों
और
महिलाओं
की
पंचायतें
भी
आयोजित
होंगी।
उन्होंने
कहा
है
कि
प्रदेश
में
11वीं
पंचवर्षीय
योजना
में
दो
अंकों
में
विकास
दर
प्राप्त
हो
रही
है।
कृषि
में
भी
10
प्रतिशत
की
विकास
दर
प्राप्त
की
गयी
है।
सरकार
ने
करीब
16
हजार
करोड़
रुपये
की
सड़कें
बनायी
हैं।
बिजली
पर
9
से
10
हजार
करोड़
रुपये
और
ग्रामीण
विकास
पर
करीब
10
हजार
करोड़
रुपये
की
राशि
व्यय
की
है।
कुपोषण
और
मातृ
शिशु
मृत्यु
दर
में
भी
तेजी
से
कमी
आयी
है।
इन
उपलब्धियों
के
साथ
ही
प्रदेश
के
आम
आदमी
की
जिंदगी
को
खुशहाल
बनाने
के
लिये
गुड-गवर्नेंस
का
प्रभावी
स्वरूप
निमिर्त
करने
के
निरंतर
प्रयास
जारी
हैं।
साथ
ही
उन्होंने
कहा
कि
सुशासन
का
मतलब
आम
आदमी
की
रोजमर्रा
की
जिंदगी
के
काम
बिना
किसी
दिक्कत
के
समय
से
होना
हैं।
इसके
लिये
सूचना
प्रौद्योगिकी
का
अधिकतम
उपयोग
किया
जाये।
जनसुनवाई
का
स्वरूप
और
प्रभावी
बनाया
जाये।
कार्यों
में
प्रामाणिक
पारदशिर्ता
हो।
प्रशासनिक
व्यवस्था
का
संचालन
ईमानदारी
के
साथ
हो।
इसकी
निगरानी
भी
की
जाये।
योजनाओं
की
मैदानी
हकीकत
की
निगरानी
के
लिये
प्रमुख
सचिव
स्तर
के
अधिकारी
भी
क्षेत्र
का
भ्रमण
करें।
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
लोकतंत्र
में
जन-भावनाओं
का
सम्मान
अनिवार्य
है।
इसके
लिये
जरूरी
है
कि
आमजन
के
साथ
संवाद
की
जीवंत
व्यवस्था
हो।
उन्होंने
कहा
कि
कार्य
समय
से
हों,
निर्णयों
का
त्वरित
क्रियान्वयन
हो,
इसके
लिये
यदि
आवश्यक
हो
तो
प्रक्रियाओं
को
सरल
बनाया
जाये।
शक्तियों
का
विकेन्द्रीकरण
हो
और
ऐसी
योजनाएँ
और
कार्यक्रम
जो
समय
के
अनुसार
अप्रासंगिक
हो
गये
हैं
उनको
समाप्त
भी
किया
जा
सकता
है।
उन्होंने
प्रशासनिक
कसावट
के
लिये
जिले
के
अधिकारियों
के
साथ
सीधे
संपर्क
में
वीडियो
काँफ्रेंसिंग
को
अत्यंत
उपयोगी
बताया।
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
वे
स्वयं
इस
माह
लोक
निर्माण,
महिला-बाल
विकास
विभाग
और
जिला
पंचायत
के
अधिकारियों
के
साथ
वीडियो
काँफ्रेंसिंग
करेंगे।
वीडियो
काँफ्रेंसिंग
करने
के
लिये
उन्होंने
विभागीय
मंत्रियों
से
भी
कहा
है।
उन्होंने
कहा
कि
विभाग
द्वारा
अच्छे
कर्मचारियों
को
प्रोत्साहित
करने
के
लिये
उनका
सम्मान
किया
जाये।
अकर्मण्य
कर्मचारियों
को
भी
चिन्हित
कर
सख्त
कार्यवाही
की
जाये।
कर्मचारी
कल्याण
के
कार्य
भी
समय-सीमा
में
किये
जायें।
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
नए
वर्ष
में
प्रदेश
के
विकास
और
जनता
के
कल्याण
के
लिये
जरूरी
है
कि
चुनौतियों
और
प्राथमिकताओं
को
चिन्हित
कर
नियोजित
ढंग
से
कार्य
किये
जायें।
प्रदेश
में
अच्छी
सड़कें
हों,
पूरी
बिजली
मिले,
पीने
और
खेती
के
लिये
जल
की
उपलब्धता
हो,
रोजगार
के
अधिकतम
अवसर
उपलब्ध
हों।
घुमक्कड़,
अर्द्ध
घुमक्कड़
जातियां
मुख्यधारा
में
शामिल
हों।
वनोपज
का
उचित
मूल्य
मिले,
ऋण
उचित
दर
पर
मिले।
नये
कल-कारखाने
खुलें,
खेती
का
विकास
हो,
स्वास्थ्य
सूचकांक
बेहतर
हों।
इसी
प्रकार
गेहूँ
उपार्जन,
विद्युत
ट्रांसफार्मर
परिवर्तन,
कोयले
की
उपलब्धता,
उर्वरकों
की
समय
पर
आपूतिर्,
नागरिक
परिवहन
सेवाओं
का
संचालन
और
मौसमी
बीमारियों
की
रोकथाम
के
प्रयासों
को
गतिशील
करने
के
लिये
अग्रिम
तैयारियाँ
की
जायें।
मुख्यमंत्री
ने
कहा
है
कि
बेटियों
की
संख्या
में
गिरावट
एक
गंभीर
सामाजिक
संकट
का
संकेत
है
इसके
लिये
समाज
की
सोच
में
बदलाव
के
लिये
प्रयास
जरूरी
है।
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