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अमीरों
का
खेल
माने
जाने
वाले
निशानेबाजी
में
भारतीय
सेना
के
एक
सूबेदार
ने
3
अगस्त
को
अपना
लोहा
मनवाते
हुये
लंदन
ओलिम्पिक
में
रजक
पदत
जीता
है।
भारत
के
लिये
लंदन
ओलिम्पिक
में
रजत
पदक
हासिल
करने
वाले
विजय
कुमार
भारतीय
सेना
में
सूबेदार
के
पद
पर
काम
कर
रहे
हैं।
उनके
पिता
बांकूराम
भी
सेना
से
ही
सूबेदार
पद
से
सेवानिवृत्त
हुये
थे।
विजय
कुमार
जब
सेना
में
भर्ती
हुये
तब
उनकी
उम्र
थी
सिर्फ
सोलह
साल
निशानेबाजी
उन्होंने
सेना
में
आने
के
बाद
ही
शुरू
की।
विजय
कुमार
की
खास
बात
ये
है
कि
वो
जमीन
से
जुड़े
हुए
हैं
उनसे
मिलकर
एहसास
होता
है
कि
वो
उतने
ही
शांत
सहज
और
एकाग्र
हैं
जितना
एक
निशानेबाज
को
होना
चाहिए
और
उतने
ही
मिलनसार
और
दोस्ताना
जितना
एक
इंसान
हो
होना
चाहिए।
विजय
कुमार
कहते
हैं
कि
वो
निशानेबाजी
में
हैं
इसके
पीछे
सिर्फ
और
सिर्फ
सेना
ही
प्रमुख
वजह
है।
वो
अपने
पिता
को
अपनी
सबसे
बड़ी
ताकत
मानते
हैं।
विजय
कुमार
ने
सेना
में
रहते
हुए
दो
साल
बॉक्सिंग
भी
की
है
और
कहते
हैं
कि
अगर
वो
निशानेबाज
ना
होते
तो
जरूर
एक
मुक्केबाज
होते।
ऐसा
नहीं
है
कि
लंदन
ओलिम्पिक
में
पदक
जीतकर
उन्होंने
कोई
चमत्कार
कर
दिखाया
है।
वो
लगातार
इसके
लिए
मेहनत
करते
रहे
हैं।
विजय
कुमार
और
बाकि
निशानेबाजों
में
फर्क
ये
है
कि
वो
मीडिया
की
सुर्खियों
में
नहीं
छाए।
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