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उच्च
शिक्षा
मंत्री
श्री
लक्ष्मीकांत
शर्मा
ने
केन्द्र
सरकार
से
शिक्षा
पर
नई
राष्ट्रीय
नीति
लागू
करने
की
माँग
की
है।
श्री
शर्मा
ने
नई
दिल्ली
में
सात
जून
को
केन्द्रीय
शिक्षा
सलाहकार
मण्डल
की
५८वीं
बैठक
में
कहा
कि
राष्ट्रीय
और
अंतर्राष्ट्रीय
स्तर
पर
शिक्षा
में
तेजी
से
हो
रहे
बदलाव
को
देखते
हुए
नई
नीति
अत्यंत
आवश्यक
है।
उन्होंने
मध्यप्रदेश
में
प्रस्तावित
हिन्दी
विश्वविद्यालय
में
मेडिकल
और
इंजीनियरिंग
सहित
अन्य
विषयों
की
हिन्दी
में
शिक्षा
के
प्रयासों
का
उल्लेख
करते
हुए
केन्द्र
से
राष्ट्रीय
शिक्षा
नीति
में
हिन्दी
माध्यम
से
शिक्षा
को
राष्ट्रहित
में
अधिक
महत्व
देने
का
अनुरोध
किया।
बैठक
का
शुभारंभ
केन्द्रीय
मानव
संसाधन
विकास
मंत्री
श्री
कपिल
सिब्बल
ने
किया।
उच्च
शिक्षा
मंत्री
ने
केन्द्र
सरकार
द्वारा
जारी
होने
वाली
विभिन्न
रिपोर्ट,
पुस्तकें
और
एजेंडा
केवल
अंग्रेजी
में
होने
पर
आपत्ति
व्यक्त
करते
हुए
कहा
कि
यह
सभी
दस्तावेज
हिन्दी
में
भी
उपलब्ध
होने
चाहिये।
बैठक
के
एजेंडा
पर
मध्यप्रदेश
का
पक्ष
रखते
हुए
श्री
शर्मा
ने
कहा
कि
कुलपतियों
के
सम्मेलन
की
अधिकांश
अनुशंसाओं
से
मध्यप्रदेश
शासन
सहमत
है।
उच्च
शिक्षा
में
संस्थानों
की
संबद्धता
की
वर्तमान
व्यवस्था
में
सुधार
की
उन्होंने
आवश्यकता
बताई।
उन्होंने
पब्लिक
प्रायवेट
पार्टनरशिप
पर
आधारित
महाविद्यालय
खोलने
की
योजना
शुरू
करने
का
अनुरोध
किया।
पिछड़े
और
दूरस्थ
ग्रामीण
क्षेत्रों
में
महाविद्यालय
और
विश्वविद्यालय
खोलने
के
लिये
पृथक
नीति
की
आवश्यकता
श्री
शर्मा
ने
बताई।
मध्यप्रदेश
में
महाविद्यालयों
और
विश्वविद्यालयों
में
ई-गवर्नेंस
के
सफल
प्रयोग
का
उल्लेख
करते
हुए
उन्होंने
कहा
कि
इस
वर्ष
से
महाविद्यालयों
में
ऑॅनलाइन
प्रवेश
की
व्यवस्था
प्रारंभ
की
गई
है।
विश्वविद्यालयों
के
मध्य
संसाधनों
के
शेयरिंग
के
सुझाव
का
उन्होंने
स्वागत
किया।
उच्च
शिक्षा
के
वित्त
पोषण
में
कार्य
मूल्यांकन
के
आधार
पर
वित्तीय
पोषण
के
सुझाव
को
उन्होंने
अत्यंत
उपयोगी
बताया।
उच्च
शिक्षा
मंत्री
श्री
शर्मा
ने
कहा
कि
उच्च
शिक्षा
और
तकनीकी
शिक्षा
को
सुलभ
एवं
कम
मूल्य
में
उपलब्ध
कराने
के
लिये
पुस्तकों
के
लेखन
एवं
प्रकाशन
के
पृथक
प्रावधान
राष्ट्रीय
नीति
में
होना
आवश्यक
है।
आसान
भाषा
में
पुस्तकों
की
उपलब्धता
शिक्षा
के
विस्तार
के
लिये
बहुत
जरूरी
है।
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