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भारतीय
संसद के
निचले सदन
लोकसभा
में
परमाणु
दायित्व
विधेयक कई
संशोधनों
के बाद
पारित हो
गया है।
इससे पहले
बहस के
दौरान
प्रधानमंत्री
डॉ. मनमोहन
सिंह ने 25
अगस्त को
नई दिल्ली
में कहा कि
परमाणु
दायित्व
विधेयक उस
सफर का
अंतिम
पड़ाव है।
जिससे
भारत पर
थोपी गई
परमाणु
भेदभाव की
नीति का
अंत होगा।
उन्होंने
पूरी
लोकसभा से
इसे
सर्वसम्मति
से पारित
करने का
अनुरोध
किया है।
परमाणु
दायित्व
विधेयक को
लोकसभा
में पेश
किया गया।
सरकार ने
कहा कि
इसमें
विपक्षी
दलों की
माँग के
अनुरूप
संशोधन
किए गए हैं
और धारा
सात-बी में
आपूर्तिकर्ताओं
के लिए
जोड़ा गया
है। 'जानबूझ
कर' या 'इरादतन'
शब्द हटा
दिया गया
है। इस
विधेयक को
लोकसभा
में रखते
हुए
प्रधानमंत्री
कार्यालय
में
राज्यमंत्री
पृथ्वीराज
चौहान ने
कहा कि
इसके तहत
मुआवजे की
दर 500 करोड़
से बढ़ाकर
1,500 करोड़ कर
दी गई है
जैसा कि
अमेरिका
में भी है।
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क्या
है
परमाणु
दायित्व
विधेयक?
विपक्षी
दल
भारतीय
जनता
पार्टी
के नेता
जसवंत
सिंह ने
परमाणु
संयंत्रों
की
पर्याप्त
सुरक्षा
पर जोर
दिया।
कांग्रेस
और
भारतीय
जनता
पार्टी
के
सदस्यों
द्वारा
रखे गए कई
संशोधन
भी पारित
किए गए,
लेकिन
वाम दलों
समेत
अन्य
विपक्षी
दलों के
संशोधन
पारित
नहीं
हुए।
परमाणु
संयंत्र
के लिए
आपूर्तिकर्ताओं
को बचने
का
रास्ता
दे रही
है।
सरकार ने
बताया कि
इस पेश
किए गए
बिल की
धारा 17
में लिखा
हुआ है कि
किसी
दुर्घटना
की
स्थिति
में
उपकरण और
ईंधन आदि
की
आपूर्ति
करने
वाले की
जिम्मेदारी
तभी होगी
जब यह
साबित हो
जाए कि
ऐसा 'जानबूझ
कर' या 'इरादतन'
किया गया
है।
विपक्षी
दलों का
कहना था
कि ऐसा
लिखने से
आपूर्तिकर्ता
पर
जिम्मेदारी
साबित
करना
कठिन हो
जाएगा। |
बहस
में
विपक्षी
दलों के
सदस्यों
के उठाए
कुछ
मुद्दों
का जवाब
देते हुए
प्रधानमंत्री
डॉ. मनमोहन
सिंह ने
कहा, "ये
कहना कि ये
विधेयक
भारत के
हितों से
समझौता
करता है या
अमेरिकी
कंपनियों
को मदद
करता है।
तथ्यों से
दूर होगा।
ये परमाणु
भेदभाव की
नीति को
खत्म करता
है।" श्री
सिंह का
कहना था कि
उनके
खिलाफ ये
पहली बार
नहीं कहा
जा रहा कि
अमेरिका
के दबाव
में कोई
कदम उठाया
जा रहा है।
उनका कहना
था कि जब
उन्होंने
1992 में
वित्त
मंत्री के
तौर पर बजट
पेश किया
था तब भी
ऐसे ही
आरोप लगे
थे। बहस को
समाप्त
करते हुए
पृथ्वीराज
चौहान ने
कहा कि
विधेयक
में
विपक्षी
पार्टी
भाजपा की
आपत्तियों
को सुना
गया और
सुझाए गए
संशोधन को
माना भी
गया है।
उनका कहना
था कि इस
विधेयक के
बाद भारत
के शोध
कार्यक्रमों
पर कोई
प्रभाव
नहीं
पड़ेगा।
उन्होंने
कहा कि
परमाणु
विधेयक के
जरिए
परमाणु
ऊर्जा का
उत्पादन
होगा जो
साफ ईंधन
है। उनका
कहना था कि
इस विधेयक
में किसी
आपदा की
स्थिति
में
मुआवजा
जल्दी
मिलने का
भी
प्रावधान
किया गया
है। इससे
पहले
चौहान ने
कहा था कि
इसकी
जरूरत
इसलिए है
ताकि यदि
कोई हादसा
होता है तो
पीड़ित
लोगों को
दर-दर
भटकना न
पड़े और
उन्हें
मुआवजा
मिल सके।
भोपाल गैस
त्रासदी
का जिक्र
करते हुए
उन्होंने
कहा कि इस
तरह के
किसी भी
कानून के न
होने के
कारण
पीड़ितों
को अनेक
दुख भोगने
पड़े हैं।
चौहान का
कहना था कि
28 देशों
में पहले
से ऐसे
कानून हैं
लेकिन
भारत और
पाकिस्तान
में ही ऐसा
कानून
नहीं है।
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