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साल
भर
से
चोटों
और
खराब
फार्म
से
जूझ
रहे
भारतीय
गोल्फर
अर्जुन
अटवाल
ने
22
अगस्त
को
अमेरिका
के
ग्रींसबोरो
में
विंडहैम
चैंपियनशिप
जीतकर
भारतीय
खेलों
के
इतिहास
में
एक
सुनहरा
अध्याय
लिख
दिया।
लगभग
सारे
बड़े
टूर्नामेंटों
में
जीत
हासिल
कर
चुके
अटवाल
अभी
तक
अमेरिकी
पीजीए
टूर
खिताब
से
महरूम
थे।
अटवाल
अंतिम
दौर
में
तीन
शाट
की
बढ़त
के
साथ
उतरे
थे।
लेकिन
इसके
बावजूद
मुकाबला
आसान
नहीं
रहा।
अंतिम
दौर
में
बार-बार
चोटी
के
खिलाड़ियों
के
स्थान
में
बदलाव
हो
रहा
था
और
कुछ
भी
सुनिश्चित
नहीं
था।
लेकिन
आखिरकार
अटवाल
ने
14वें
और
16वें
होल
में
बर्डी
बनाते
हुए
खिताब
पर
कब्जा
कर
लिया।
इस
जीत
के
साथ
अटवाल
अमेरिकी
पीजीए
टूर
खिताब
जीतने
वाले
पहले
भारतीय
बन
गए।
साथ
ही
उन्होंने
अपना
एलीट
टूर
कार्ड
भी
दोबारा
हासिल
कर
लिया।
महान
आलराउंडर
कपिल
देव,
महान
धावक
मिल्खा
सिंह
और
खेल
मंत्री
एम.एस.
गिल
सहित
खेलों
से
जुड़ी
कई
अन्य
हस्तियों
ने
अटवाल
को
इस
उपलब्धि
के
लिए
बधाई
दी
है।
कपिल
देव
ने
कहा
कि
अटवाल
को
उनकी
कड़ी
मेहनत
का
फल
मिला
है।
यह
भारतीय
खेलों
के
लिए
बड़ी
जीत
है।
अर्जुन
निरंतर
अच्छा
प्रदर्शन
करने
के
लिए
काफी
संघर्ष
कर
रहा
था।
इस
स्तर
पर
एक
बड़ी
जीत
से
उनका
आत्मविश्वास
बढ़ेगा
और
आशा
है
कि
आगे
वे
कई
अन्य
टूर्नामेंट
जीतने
में
सफल
रहेंगे।
उन्हें
इस
तरह
की
जीत
की
जरूरत
थी
और
इससे
वे
पहले
से
बेहतर
गोल्फर
बनेंगे।
'उड़न
सिख'
मिल्खा
सिंह
ने
भी
अटवाल
को
बधाई
देते
हुए
चंडीगढ़
से
कहा
कि
अटवाल
का
अमेरिका
में
खिताब
जीतना
तारीफ
के
काबिल
है।
उनकी
जीत
से
भारत
का
मान
सम्मान
बढ़ा
है।
यह
इस
बात
का
सबूत
है
कि
भारतीय
गोल्फर
भी
यूरोपीय
और
अमेरिकी
गोल्फरों
की
तरह
प्रतिभाशाली
हैं।
खेल
मंत्री
एमएस
गिल
ने
भी
अटवाल
की
जमकर
तारीफ
करते
हुए
कहा-मैं
प्रफुल्लित
हूं
कि
अर्जुन
अटवाल
को
पीजीए
टूर
पर
यह
बेहतरीन
जीत
मिली।
यह
असाधारण
जीत
है
और
इसने
अंतर्राष्ट्रीय
स्तर
पर
भारतीय
गोल्फरों
का
कद
और
बढ़ा
दिया
है।
मैं
उन्हें
बधाई
देना
चाहता
हूँ।
प्रोफेशनल
गोल्फ
टूर
ऑफ
इंडिया
(पीजीटीए)
के
निदेशक
पद्मजीत
संधू
ने
कहा
कि
अटवाल
खेल
के
प्रति
बहुत
समर्पित
खिलाड़ी
हैं
और
वे
इस
खिताब
के
हकदार
थे।
उन्होंने
कहा-अटवाल
को
विंडहैम
चैंपियनशिप
में
इस
शानदार
जीत
के
लिए
बहुत-बहुत
बधाई।
यह
जीत
भारतीय
पेशेवर
गोल्फ
के
लिए
बहुत
अहम
है
और
इससे
देश
के
मौजूदा
पीढ़ी
के
पेशेवरों
को
आगे
बढ़ने
के
लिए
प्रेरणा
मिलेगी।
अपने
समर्पण
और
अनुशासन
से
ही
अर्जुन
यह
उपलब्धि
हासिल
कर
पाया।
हम
उन्हें
शुभकामनाएं
देते
हैं।
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