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मध्यप्रदेश
में राज्य
सरकार ने
अपनी
घोषित
सर्वोच्च
प्राथमिकता
को पूरा
करते हुये
पिछले
लगभग
साढ़े छ:
वर्षों की
अवधि में 64
हजार 368
किलोमीटर
लम्बी
सड़कों का
निर्माण
एवं
उन्नयन का
कार्य
किया है।
जिसके
कारण
राज्य में
नये
उद्योगों
की
स्थापना,
पर्यटन
स्थलों पर
आने वाले
पर्यटकों
की संख्या
में
बढ़ोत्तरी
के साथ ही
राज्य
व्यापार
को भी
बढ़ावा
मिला है।
शहरों से
होकर
दूरस्थ
ग्रामीण
अंचलों तक
सड़कों का
निर्माण
एवं विकास
हो जाने से
किसानों
को अब अपनी
कृषि उपज
एवं अन्य
उत्पादों
को शहरों
एवं
कस्बों तक
ले जाने
में
सुविधा
हुई है।
जिससे
किसानों
को अपनी
मेहनत का
वाजिब दाम
विभिन्न
उत्पादों
के विक्रय
से मिलने
लगा है।
राज्य
सरकार के
प्रयासों
से साढ़े
छ: वर्षों
की अवधि
में
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजनांतर्गत
39 हजार 398
किलोमीटर
लम्बी
सड़कों का
निर्माण
करा कर
सैकड़ों
गाँवों को
बारहमासी
सड़कों से
जोड़ दिया
गया है।
लोक
निर्माण
विभाग के
सहयोग से
इस अवधि
में 24 हजार 970
किलोमीटर
सड़कों के
निर्माण
एवं
उन्नयन का
कार्य
पूर्ण
किया गया
है। जिस पर
लगभग 9310
करोड़
रुपये की
राशि व्यय
की गई है।
लोक
निर्माण
विभाग में
331 सेतु
परियोजना
के
प्रस्तावित
कार्यों
में से अब
तक 249 पुलों
का
निर्माण
एवं
उन्नयन के
साथ ही 3
रेलवे ओवर
ब्रिज का
निर्माण
पूर्ण कर
लिया गया
है।
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजनांतर्गत
निमिर्त
की गई 39
हजार 398
किलोमीटर
लम्बी
सड़कों से
अब तक
प्रदेश के
8 हजार 867
गाँवों को
बारहमासी
पक्की
सड़कों से
जोड़ दिया
गया है।
जिसमें 5
हजार 492
ग्राम एक
हजार से
अधिक
जनसंख्या
तथा 3 हजार 375
ग्राम
पाँच सौ से
अधिक
जनंसख्या
वाले
ग्राम
शामिल
हैं।
राज्य
सरकार ने
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना के
निर्धारित
मापदण्डों
में ना आने
वाले
प्रदेश के
शेष 9 हजार 338
ग्रामों
को 'मुख्यमंत्री
सड़क
योजना' के
माध्यम से
अगले तीन
सालों (वर्ष
2013 टन)
बारहमासी
सड़कों से
जोड़ने का
निर्णय
लिया है।
एक अप्रैल
2010 से
प्रारंभ
की गई इस
योजना
द्वारा
सामान्य
क्षेत्र
में 500 एवं
आदिवासी
विकासखण्ड
क्षेत्रों
में 250 से कम
आबादी के
सभी
ग्रामों
को
बारहमासी
सड़कों से
जोड़ दिया
जायेगा।
तीन चरणों
में
निमिर्त
होने वाली
मुख्यमंत्री
सड़क
योजनांतर्गत
19 हजार 386
किलोमीटर
लम्बाई की
ग्रेवल
रोड का
निर्माण 3
हजार 296
करोड़
रुपये के
व्यय से
किया
जायेगा।
भारत
सरकार ने
मध्यप्रदेश
सरकार की
मुख्यमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना की
सराहना
करते हुये
देश के
अन्य
राज्यों
को भी ऐसी
योजना
बनाने और
तकनीक को
अपनाने के
निर्देश
दिये हैं।
मुख्यमंत्री
जनसंकल्प
योजनांतर्गत
प्रदेश के
सभी
संभागीय
मुख्यालयों
को
राजधानी
से 4-लेन
सड़कों से
जोड़ने,
जिला
मुख्यालयों
को
संभागीय
मुख्यालय
से दो-लेन
सड़कों से
जोड़ने
तथा तहसील
एवं ब्लाक
मुख्यालयों
को जिला
मुख्यालय
से पक्की
सड़कों से
जोड़ा जा
रहा है। इस
दिशा में
पहल
प्रारंभ
कर दी गई
है जिसके
प्रथम चरण
में भोपाल
से इंदौर
संभागीय
मुख्यालय
को 4-लेन
सड़क से
जोड़ दिया
गया है और
इंदौर से
उज्जैन
सड़क को
4-लेन
बनाने का
कार्य
जारी है।
सागर से
जबलपुर तक
की 4 लेन
सड़क का
निर्माण
नेशनल
हाइवे
अथॉरिटी
ऑफ
इण्डिया
करेगी।
इस
योजना के
द्वितीय
चरण में
भोपाल से
ग्वालियर
तथा
जबलपुर से
रीवा तक के
हिस्सों
को 4 लेन
सड़कों से
जोड़े
जाने की
सैद्धांतिक
सहमति
भारत शासन
ने प्रदान
कर दी है।
इसी के साथ
सड़क
यातायात
को और अधिक
सुविधाजनक
बनाने की
दृष्टि से
प्रदेश से
गुजरने
वाले
राष्ट्रीय
राजमार्गों
से दस
बायपास
मार्गों
को जोड़ा
जायेगा
तथा
प्रदेश
में एक
रेलवे
ओव्हर
ब्रिज का
निर्माण
और एक घाट
के
चौड़ीकरण
का कार्य
भी किया
जायेगा।
राज्य
में अच्छी
गुणवत्ता
वाली
सड़कों के
निर्माण
के लिये 14
जुलाई 2004 को
मध्यप्रदेश
रोड
डेवलपमेंट
कार्पोरेशन
लिमिटेड (मध्यप्रदेश
सड़क
विकास
निगम) नाम
से एक
स्वतंत्र
कम्पनी
बनायी गई
है। जो
मध्यप्रदेश
के समस्त
राजमार्गों
के विकास
एवं
संधारण
तथा निजी
क्षेत्र
के सहयोग
से प्रदेश
में सड़क
परियोजनाओं
को विकसित
कर रही है।
मध्यप्रदेश
रोड
डेवलपमेंट
कार्पोरेशन
लिमिटेड
को बॉण्ड
योजनांतर्गत
प्रदेश की
46 सड़कों
के
निर्माण
का
दायित्व
सौंपा गया
था। इन 46
सड़कों
में से 25
सड़कें
बी.ओ.टी.
योजनांतर्गत
निमिर्त
की जानी
थीं जिनकी
कुल
लम्बाई 2700
किलोमीटर
है तथा शेष
21 मार्ग
सामान्य
कान्ट्रेक्ट
योजनांतर्गत
निमिर्त
किये जाने
थे, जिनकी
लम्बाई 1249
किलोमीटर
है।
बी.ओ.टी.
योजनांतर्गत
25 मार्गों
में से अब
तक 12
मार्गों
का कार्य
पूर्ण हो
चुका है।
जिनकी
लम्बाई 1673
किलोमीटर
है।
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