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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान ने
कहा है कि
बच्चों का
कुपोषण
दूर करने
सहित
नागरिकों
के
स्वास्थ्य-स्तर
में सुधार
के लिये
राज्य
सरकार धन
की कमी
आड़े नहीं
आने देगी।
बाल
कुपोषण
नियंत्रण
के
क्षेत्र
में अन्य
राज्यों
में हुए
श्रेष्ठ
कार्यों
का
मध्यप्रदेश
सरकार
अनुकरण
करेगी।
इसके साथ
ही राज्य
में
जनसंख्या
स्थिरीकरण
के
प्रयासों
को भी तेज
किया
जायेगा
ताकि
गरीबी कम
हो और
गरीबी के
कारण
उत्पन्न
होने वाली
कुपोषण की
समस्या को
दूर किया
जा सके।
अटल बाल
आरोग्य
एवं पोषण
मिशन
राज्य में
बच्चों के
कुपोषण को
दूर करने
में सहायक
होगा।
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान 27
अगस्त को
भोपाल
स्थित
प्रशासन
अकादमी
में अटल
बाल
आरोग्य
एवं पोषण
मिशन पर
आयोजित
कार्यशाला
को
सम्बोधित
कर रहे थे।
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान ने
कहा कि
समृद्ध और
विकसित
मध्यप्रदेश
कुपोषित
नहीं हो
सकता।
विशेष रूप
से बच्चों
के कुपोषण
को दूर
करने के
उद्देश्य
से अटल बाल
आरोग्य
एवं पोषण
मिशन
आगामी 2
अक्टूबर
से विधिवत
कार्य
करना
प्रारंभ
कर देगा।
राज्य में
बच्चों का
कुपोषण
दूर करने
के लिये
आवश्यक
वातावरण
के
निर्माण
का कार्य
शुरू कर
दिया गया
है। यह
कार्यशाला
भी इसी
उद्देश्य
की कड़ी
है।
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान ने
कहा कि
आंध्रप्रदेश
और गुजरात
में
कुपोषण
दूर करने
के लिये
किये जा
रहे
प्रयासों
और
आंगनवाड़ी
केन्द्रों
के माध्यम
से समुदाय
में इस
संबंध में
जागरूकता
पैदा करने
के
कार्यों
का
मध्यप्रदेश
में भी
अनुकरण
होगा।
उन्होंने
कहा कि
कार्यशाला
में विषय-विशेषज्ञों
द्वारा
कुपोषण
दूर करने
के
सुझावों
पर भी
राज्य
शासन अमल
करेगा।
श्री
चौहान ने
कहा कि
पूर्व में
राज्य में
बाल शक्ति,
बाल
संजीवनी
अभियानों
के साथ ही
शक्तिमान
प्रोजेक्ट
का
क्रियान्वयन
भी किया
गया।
लक्ष्य
अभी दूर
है। अब
राज्य
सरकार अटल
बाल
आरोग्य
एवं पोषण
मिशन के
माध्यम से
दीर्घावधि
योजना
क्रियान्वित
करेगी।
इसके
अंतर्गत
राज्य की
परिस्थितियों
के अनुरूप
प्रयास
करते हुए
कुपोषण
समाप्ति
में जनता
का सहयोग
भी लिया
जायेगा।
प्रदेश के
सभी
विकासखंडों
में गंभीर
रूप से
कुपोषित
बालक-बालिकाओं
के लिये
पोषण
पुनर्वास
केन्द्र
खोले जा
रहे हैं।
अभी लगभग 40
प्रतिशत
बच्चों का
वजन कम है
जो एक
गंभीर
समस्या
है। इस
समस्या का
समाधान
करना
राज्य
सरकार का
दायित्व
है।
उन्होंने
कहा कि यह
स्थिति
जानते हुए
भी आवश्यक
प्रयास न
करने का
कार्य
किसी
अधर्म के
समान है।
वर्तमान
में
प्रदेश
में 213 पोषण
पुनर्वास
केन्द्र
स्थापित
किये जा
चुके हैं।
मुख्यमंत्री
ने कहा कि
बढ़ती
आबादी को
नियंत्रित
करना भी
आवश्यक
है। बड़े
परिवारों
में
परिवारों
के
सदस्यों
के पोषण पर
उचित
ध्यान
देना संभव
नहीं
होता।
श्री
चौहान ने
कहा कि
मध्यप्रदेश
बनाओ
अभियान
में
उन्होंने
प्रदेश के
जिलों में
शिक्षा और
स्वास्थ्य
के
क्षेत्र
में
नागरिकों
को
सकारात्मक
भूमिका
निभाने के
आग्रह के
साथ
जनसंख्या
नियंत्रण
का संदेश
भी दिया
है।
मुख्यमंत्री
ने कहा कि
यह
कार्यशाला
राज्य में
कुपोषण की
चुनौती से
निपटने
में
रणनीति की
दिशा तय
करने में
मददगार
होगी।
महिला-बाल
विकास
राज्यमंत्री
श्रीमती
रंजना
बघेल ने
कहा कि
प्रदेश
में इस
मिशन के
गठन की पहल
कुपोषित
बच्चों को
स्वस्थ
बनाने के
उद्देश्य
से की गई
है।
मध्यप्रदेश
में
कुपोषण को
कलंक नहीं
बनने दिया
जायेगा।
विधानसभा
में पारित
सत्तर
सूत्री
संकल्प
में भी
कुपोषण
दूर करने
का संकल्प
शामिल है।
प्रदेश
में साढ़े
चार सौ बाल
विकास
परियोजनाएं
संचालित
हैं।
प्रदेश के
सभी 313
विकासखंडों
में पोषण
पुनर्वास
केन्द्र
शुरू
होंगे।
आंगनवाड़ी
केन्द्र
पर
मंगलवार
के दिन
मंगल दिवस
के आयोजन
से माँ और
बच्चे के
पोषण से
संबंधित
गतिविधियां
आयोजित
होती हैं।
ये
केन्द्र
गृह भेंट
कार्यक्रम
द्वारा
गंभीर
कुपोषित
बच्चों के
साथ ही
प्रसव
पूर्व और
प्रसव
पश्चात
गर्भवती
और धात्री
माताओं को
मार्गदर्शन
भी देते
हैं।
कार्यशाला
के सत्र को
डीएफआईडी
की पोषण
सलाहकार
सुश्री
एनी
फिलपॉट,
आंध्रप्रदेश
की महिला-बाल
विकास
विभाग की
उप-निदेशक
डॉ. ई.वी.
स्वर्णलता,
राष्ट्रीय
पोषण आहार
मिशन के उप-निदेशक
डॉ. जी.एन.वी.
ब्रह्मम,
गुजरात की
पोषण आहार
विशेषज्ञ
सुश्री
प्रीतु
मिश्रा,
सर्वोच्च
न्यायालय
द्वारा
नियुक्त
प्रमुख
सलाहकार
श्री
बिराज
पटनायक ने
भी
सम्बोधित
किया। इन
सभी
वक्ताओं
ने बच्चों
को दिये
जाने वाले
पोषण आहार,
उपलब्ध
संसाधनों
और किये
जाने वाले
आवश्यक
प्रयासों
के संबंध
में
विस्तार
से
जानकारी
दी।
कार्यशाला
में
यूनीसेफ
एवं
विभिन्न
स्वैच्छिक
संगठनों
के
प्रतिनिधियों
और पोषण
आहार
विशेषज्ञों
ने भी समूह
चर्चा एवं
शोध-पत्रों
के
प्रस्तुतिकरण
के माध्यम
से बच्चों
में
कुपोषण के
विविध
पक्षों को
प्रस्तुत
किया।
कार्यशाला
में महिला
एवं बाल
विकास
विभाग के
सचिव श्री
बी.आर.
नायडू,
स्वास्थ्य
सचिव श्री
एस.आर.
मोहंती,
महिला एवं
बाल विकास
आयुक्त
श्री एम.
मोहन राव,
भोपाल
संभाग
आयुक्त
श्री मनोज
श्रीवास्तव
सहित
विभिन्न
संभाग के
आयुक्त
उपस्थित
थे।
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