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पाठकों
के लिए
तम्भ का
प्रकाशन
महीने
में दो
बार
किया जा
रहा है।
इस
स्तम्भ
के लिये
रोजगार
और
निर्माण
के
पाठकों
से
कॅरियर
संबंधी
सवाल
आमंत्रित
किये
जाते
हैं। इन
सवालों
के जवाब
महीने
में दो
बार
प्रोफेसर
जयंतीलाल
भंडारी
देते
हैं।
पाठक
अपने
सवाल
नीचे
दिये
पते पर
भेजकर
कॅरियर
संबंधी
जानकारी
प्राप्त
कर सकते
हैं।
पाठक
पत्र
लिखते
समय
पोस्टकार्ड
या
लिफाफे
के ऊपर 'हमसे
पूछिये'
कॉलम
जरूर
लिखें।
|
रोजगार
और
निर्माण
(हमसे
पूछिये)
40
प्रशासनिक
क्षेत्र,
अरेरा
हिल्स
भोपाल,
मध्यप्रदेश,
पिनकोड-462011
|
|
|
|
|
|
मैं
टूरिज्म
के
क्षेत्र
में
कॅरियर
बनाना
चाहता
हूँ।
कृपया
मार्गदर्शन
प्रदान
करें?
-
राजीव
नीमा,
देवास,
प्रवीण
नामदेव,
उज्जैन,
दीपक
गोले,
भोपाल
|
|
|
आज
रोजगार
के जो
नए
क्षेत्र
सामने
आ रहे
हैं
उनमें
टूरिज्म
क्षेत्र
की
भूमिका
अहम और
अग्रणी
है।
इसमें
कोई
आश्चर्य
नहीं
कि आने
वाले
समय
में
टूरिज्म
देश
में
सबसे
ज्यादा
रोज़गार
पैदा
करने
वाला
क्षेत्र
बनने
वाला
है।
देश के
लिए
बहुमूल्य
विदेशी
मुद्रा
की
कमाई
करने
में
टूरिज्म
इंडस्ट्री
का
विशेष
महत्व
है।
र्वल्ड
ट्रेवल
काउंसिल
के
आँकड़ों
के
अनुसार
भारतीय
अर्थव्यवस्था
में
टूरिज्म
क्षेत्र
की
हिस्सेदारी
6
प्रतिशत
के
करीब
है। इस
समय
करीब 2.5
करोड़
लोग
किसी न
किसी
तरह से
टूरिज्म
क्षेत्र
से
जुड़े
हुए
हैं और
अनुमान
है कि
आनेे
वाले
दस
वषोर्ं
में इस
क्षेत्र
में
करीब
तीन
करोड़
नए
रोजगार
के
अवसर
सृजित
होंगे।
इस
प्रकार
कहा जा
सकता
है कि
टूरिज्म
के
क्षेत्र
में
कॅरियर
की
बहुत
उजली
संभावनाएँ
हैं।
सामान्यत:
ट्रेवल
एंड
टूरिज्म
मैनेजमेंट
में
तीन
तरह के
कोर्स
उपलब्ध
हैं।
जो
डिग्री,
मास्टर
डिग्री
तथा
डिप्लोमा
पाठ्यक्रम
हैं।
इसके
साथ ही
कुछ
संस्थान
सटिर्फिकेट
पाठ्यक्रम
भी
संचालित
करते
हैं।
डिग्री
पाठ्यक्रमों
में
प्रवेश
के लिए
बारहवीं
उत्तीर्ण
होना
आवश्यक
है।
जबकि
मास्टर
डिग्री
के लिए
स्नातक
होना
आवश्यक
है।
डिप्लोमा
पाठ्यक्रम
के लिए
भी
स्नातक
डिग्री
आवश्यक
है।
इसके
साथ ही
टूरिज्म
में आज
सबसे
ज्यादा
लोकप्रिय
इग्नू
का
पत्राचार
कोर्स
है।
इसके
माध्यम
से
उम्मीदवार
घर
बैठे
ही
आसानी
से
टूरिज्म
के
कोर्स
कर
सकते
हैं।
भारत
सरकार
ने देश
के
युवक-युवतियों
के लिए
कई
बड़े
शहरों
में
पर्यटन
क्षेत्र
में
प्रशिक्षण
देने
के लिए
पर्यटन
प्रशिक्षण
विभाग
की
शाखाएँ
खोल
रखी
हैं।
जहाँ
से वे
पर्यटक
गाइड,
कंडक्टर,
बुकिंग
अधिकारी,
ट्रैवल
एजेंसी,
गेस्ट
हाउस
रिसेप्शनिस्ट,
विमान
परिचारिका,
जहाज
में
सामान
बुकिंग
अधिकारी
आदि
पदों
के लिए
प्रशिक्षण
पाठ्यक्रम
कर
सकते
हैं।
टूरिज्म
का
कोर्स
कराने
वाले
प्रमुख
प्रशिक्षण
संस्थान
इस
प्रकार
हैं-
-
इंडियन
इंस्टीट्यूट
ऑफ
टूरिज्म
एंड
ट्रैवल
मैनेजमेंट,
9
न्यायमार्ग,
चाणक्यपुरी,
नई
दिल्ली।
-
इंडियन
इंस्टीट्यूट
ऑफ
मैनेजमेंट
स्टडीज,
देवी
अहिल्या
विश्वविद्यालय,
तक्षशिला
कैम्पस
खंडवा
रोड,
इंदौर।
-
इंदिरा
गाँधी
राष्ट्रीय
मुक्त
विश्वविद्यालय,
क्षेत्रीय
केंद्र,
तीसरी
मंजिल,
साँची
कॉम्प्लेक्स,
शिवाजी
नगर,
भोपाल।
-
डिपार्टमेंट
ऑफ
टूरिज्म
एवं
होटल
मैनेजमेंट,
बरकतउल्ला,
विश्वविद्यालय,
भोपाल।
-
आईपीएस
एकेडमी,
राजेन्द्रनगर,
इंदौर।
-
जीवाजी
विश्वविद्यालय,
ग्वालियर।
-
अवधेश
प्रतापसिंह
विश्वविद्यालय,
रीवा।
-
गुरु
घासीदास
विश्वविद्यालय,
बिलासपुर।
|
|
मध्यप्रदेश
लोक
आयोग
द्वारा
ली जाने
वाली
प्राचार्य,
उच्चतर
माध्यमिक
विद्यालय
भर्ती
परीक्षा
के बारे
में
जानकारी
प्रदान
करें।
कृपया
यह भी
बताएँ
की इस
परीक्षा
की
तैयारी
किन
अध्ययन
संदर्भों
को आधार
बनाकर
की जानी
चाहिए
है?
-
वर्षा
सचदेव,
धार,
भूमिका
गुप्ता,
भिण्ड,
राजीव
निगम,
पिपरिया
(होशंगाबाद)
|
|
|
मध्यप्रदेश
लोक
सेवा
आयोग
द्वारा
उच्चतर
माध्यमिक
विद्यालयों
में
प्राचार्य
के 240
रिक्त
पदों
की
भर्ती
हेतु 28
नवंबर
को
प्राचार्य
भर्ती
परीक्षा-2010
आयोजित
की
जानी
है। इस
परीक्षा
में
बैठने
हेतु
कम से
कम
द्वितीय
श्रेणी
में
स्नातक
परीक्षा
उत्तीर्ण
होना
आवश्यक
है।
इसके
साथ बी.एड.
तथा
उच्चतर
माध्यमिक
शाला
कक्षाओं
में
पाँच
वर्ष
का
शिक्षण
अनुभव
भी
जरूरी
है। इस
परीक्षा
में दो
प्रश्नपत्र
होंगे।
प्रथम
प्रश्न
पत्र
में
सामान्य
ज्ञान
तथा
शिक्षा
प्रशासन
के
प्रश्न
पूछे
जाएँगे।
यह
प्रश्नपत्र
वस्तुनिष्ठ
प्रकार
का
होगा।
प्रथम
प्रश्नपत्र
में
नेगेटिव
मार्किंग
भी
होगी
अर्थात
प्रत्येक
प्रश्न
के गलत
उत्तर
के
लिए।
अंक
काटा
जाएगा।
द्वितीय
प्रश्नपत्र
वर्णनात्मक
प्रकार
का
होगा
जिसमें
निबंध,
संक्षेपण
आदि से
संबंधित
प्रश्न
पूछे
जाएँगे।
इस
परीक्षा
की
तैयारी
हेतु
सामान्य
अध्ययन
के लिए 9वीं
से 12वीं
तक की
एनसीईआरटी
की
इतिहास,
भूगोल,
विज्ञान,
राजव्यवस्था
तथा
अर्थशास्त्र
की
पुस्तकों,
प्रतियोगी
परीक्षाओं
की
मासिक
पत्रिका
प्रतियोगिता
निर्देशिका
के
प्राचार्य
भतीर्
परीक्षा
नोट्स
तथा
बीएड
एवं
एमएड
में
उपयोग
आने
वाली
शिक्षा
प्रशासन
की
पुस्तकों
तथा
निबंध
एवं
संक्षेपीकरण
की
स्तरीय
पुस्तकों
का
उपयोग
लाभप्रद
रहेगा।
|
|
एग्रीकल्चर
मैटीरियोलॉजी
क्या है?
इससे
संबंधित
पाठ्यक्रम
कहाँ से
किया जा
सकता है?
-
गणेश
वर्मा,
श्योपुर
|
|
|
खेती
की
प्रचुरता
और
गुणवत्ता
मानसून,
बीज, खाद,
टेक्नोलॉजी
और
किसान
की खेती
की
तकनीक
पर
निर्भर
करती
है।
इनमें
से एक भी
पक्ष
दुर्बल
होने पर
फसल
बर्बाद
हो सकती
है। आज
एग्रीकल्चर
मैटीरियोलॉजी
इन सभी
पहलुओं
को
मजबूत
रखने
में मदद
करती
है।
इसके
अलावा
फसल का
उत्पादन
कैसे
बढ़ाया
जाए,
इसके
तहत
इसका भी
पूरा
ख्याल
रखा
जाता
है।
चूँकि
भारत की
अर्थव्यवस्था
का मूल
आधार
कृषि है
इसलिए
एग्रीकल्चर
मैटीरियोलॉजी
आज एक
अच्छे
कॅरियर
विकल्प
के रूप
में
देखी जा
रही है।
एग्रीकल्चर
मैटीरियोलॉजी
का
मुख्य
कार्य
कृषि के
क्षेत्र
में शोध
करना
है।
इसके
तहत
फसलों
के
उत्पादन
आदि पर
प्रभाव
डालने
वाले
प्रमुख
कारक
जलवायु,
मौसम,
फसलों
में
लगने
वाली
बीमारी
और
तापमान
आदि के
बारे
में
किसानों
को
जरूरी
जानकारी
उपलब्ध
कराई
जाती
है।
एग्रीकल्चर
मैटीरियोलॉजी
का
कोर्स
करने के
लिए 12वीं
की
परीक्षा
साइंस
बायोलॉजी
या कृषि
विषयों
के साथ
उत्तीर्ण
होना
जरूरी
है।
एग्रीकल्चर
मैटीरियोलॉजी
का
कोर्स
करने के
बाद
रोजगार
के काफी
उजले
अवसर
मौजूद
हैं।
एग्रीकल्चर
मैटीरियोलॉजी
का
कोर्स
इन
संस्थानों
में
उपलब्ध
है-
-
जवाहरलाल
नेहरू
कृषि
विश्वविद्यालय,
जबलपुर।
-
इंदिरा
गाँधी
कृषि
विश्वविद्यालय,
रायपुर।
-
गोविंदवल्लभ
पंत
यूनिवसिर्टी
ऑफ
एग्रीकल्चर
एंड
टेक्नोलॉजी,
पंतनगर,
उत्तराखंड।
-
सीसीएस
हरियाणा
एग्रीकल्चरल
यूनिवसिर्टी,
हिसार।
|
|
मैं
आकिर्विस्ट
बनाना
चाहता
हूँ।
कृपया
जानकारी
प्रदान
करें?
-
रुद्राक्ष
पुरोहित,
सीधी
|
|
|
विरासतों
को
सहेजने
और इनके
द्वारा
दी गई
सूचनाओं
को
जनसामान्य
तक
पहुँचाना
जिस
प्रोफेशनल
व्यक्ति
के
जिम्मे
होता है
वह
आकिर्विस्ट
या
अभिलेखाकार
कहलाता
है। इन
विरासतों
में
प्राचीन
हस्तलिखित
पांडुलिपियाँ,
पत्र
पेपर,
किताबें,
नक्शे,
प्लान,
फोटोग्राफ्स,
डायरी,
क्लिपिंग,
कानूनी
दस्तावेज,
चित्रकारी,
फोटोकॉपी
आदि का
संग्रह
होता
है।
धीरे-धीरे
इन
संग्रहालयों
में
माइक्रो
फिल्म
मटेरियल्स,
वीडियो,
साउंड
रिकार्डिंग
और
कम्प्यूटर
डिस्क
का
संग्रह
भी
वृहत्त
रूप
लेता जा
रहा है।
आकिर्विस्ट
इन्हीं
महत्वपूर्ण
रिकार्डों
पर
नियंत्रण
एवं
उसका
आकलन कर
सुरक्षित
तरीके
से रखता
है।
भारत का
राष्ट्रीय
अभिलेखागार
संगठन
अपने
चार
क्षेत्रीय
संग्रहालयों-
भोपाल,
जयपुर,
भुवनेश्वर
और
पांडिचेरी
के साथ
एशिया
में
महत्वपूर्ण
स्थान
रखता
है। इस
लिहाज
से इस
क्षेत्र
में भी
विशेषज्ञों
की
जरूरत
पड़ती
है और यह
कॅरियर
की
दृष्टि
से
महत्वपूर्ण
हो जाता
है। एक
आकिर्विस्ट
बनने के
लिए इस
क्षेत्र
से
संबंधित
पाठ्यक्रम
करना
आवश्यक
है।
किसी भी
विषय
में
स्नातक
छात्र
आकिर्विस्ट
के
पाठ्यक्रमों
में
प्रवेश
ले सकते
हैं,
लेकिन
इतिहास
एवं
पुस्तकालय
विज्ञान
में
डिग्रीधारक
को
संस्थान
की तरफ
से
वरीयता
दी जाती
है।
अनेक
संस्थाओं
द्वारा
आर्काइव्स
और
रिकॉर्ड
मैनेजमेंट
में
डिप्लोमा
अथवा
सटिर्फिकेट
कोर्स
कराए
जाते
हैं।
आकिर्विस्ट
के रूप
में
सरकारी
संस्थाओं
के
आर्काइवल
विभागों
में,
निजी
संस्थाओं
जैसे
टाटा,
डीसीएम
आदि,
इंडस्ट्रियल
एवं
कमशिर्यल
फमोर्ं,
विश्वविद्यालयों
और
शैक्षणिक
संस्थाओं
में
नियुक्त
हुआ जा
सकता
है।
आकिर्विस्ट
का
कोर्स
कराने
वाले
प्रमुख
संस्थान
इस
प्रकार
हैं-
-
नेशनल
आर्काइव्स
ऑफ
इंडिया,
जनपथ,
नई
दिल्ली।
-
गुजरात
विद्यापीठ,
आश्रम
रोड,
अहमदाबाद।
-
अन्नामलाई
विश्वविद्यालय,
साउथ
एकॉट
वल्लार,
अन्नामलाई
नगर।
-
महर्षि
दयानंद
सरस्वती
विश्वविद्यालय,
अजमेर।
|
|
मैं
भूगर्भ
विज्ञान
के
क्षेत्र
में
कॅरियर
बनाना
चाहता
हूँ।
कृपया
जानकारी
प्रदान
करें?
-
विनोद
जोशी,
राजगढ़ (ब्यावरा),
पंकज
वर्मा,
रायसेन
|
|
|
भूगर्भ
विज्ञान
वह
विज्ञान
है
जिसमें
पृथ्वी,
उसका
इतिहास
पर्यावरण,
खनिज
आदि के
बारे
में
अध्ययन
किया
जाता
है। अब
यह
चट्टानों
और
खनिजों
तक ही
सीमित
नहीं है
बल्कि
विज्ञान,
रसायन
विज्ञान,
धातु
इंजीनियरी
आदि में
भी इसका
उपयोग
होता
है।
भारत
सरकार
ने अर्थ
साइंसेज
नाम से
नया
मंत्रालय
स्थापित
किया है
जिसमें
भू
संरचना,
भूकंप,
खनन, तेल
की खोज
जैसे
विषय आ
गए हैं।
तेल तथा
खनन
क्षेत्रों
में
प्राइवेट
तथा
विदेशी
कंपनियों
के
प्रवेश
से
भूगर्भ
विज्ञान
के
कॅरियर
में चार
चाँद लग
गए हैं।
संघ लोक
सेवा
आयोग
भूगर्भ
विज्ञान
से
जुड़ी
विभिन्न
रिक्तियाँ
भरने के
लिए
परीक्षाएँ
आयोजित
करता
है।
इनमें
जूनियर
जियोलॉजिस्ट
असिस्टेंट
जियोलॉजिस्ट,
जूनियर
हाइड्रो
जियोलॉजिस्ट
आदि के
पद होते
हैं। इस
क्षेत्र
में
प्रायवेट
कंपनियों
में भी
बहुत
अच्छे
अवसर
हैं।
इसी
प्रकार
कोल
इंडिया,
मिनरल
एक्सप्लोरेशन
अथॉरिटी,
ऑयल एंड
नेचुरल
गैस
कॉर्पोरेशन,
हिन्दुस्तान
जिंक
तथा
अन्य कई
संगठन
भूगर्भ
वैज्ञानिकों
की
नियुक्ति
करते
हैं।
भूगर्भ
वैज्ञानिक
बनने के
लिए
विशुद्ध
विज्ञानों
के मूल
सिद्धांतों
की
जानकारी
आवश्यक
है।
भौतिक,
रसायन,
गणित
तथा
जीवविज्ञान
का
अच्छा
ज्ञान
होना
चाहिए
तथा भू
विज्ञानों
में
गहरी
दिलचस्पी
होनी
चाहिए।
भूगर्भ-विज्ञान
का
कोर्स
कराने
वाले
प्रमुख
संस्थान
इस
प्रकार
हैं-
-
नेशनल
जियोग्राफिकल
रिसर्च
इंस्टीट्यूट,
हैदराबाद।
-
सेंट्रल
फ्यूल
रिसर्च
इंस्टीट्यूट,
धनबाद,
झारखंड।
-
बीरबल
साहनी
इंस्टीट्यूट,
लखनऊ।
-
मध्यप्रदेश
के
लगभग
सभी
विश्व-विद्यालयों
में
भूगर्भ
विज्ञान
का
डिग्री
पाठ्यक्रम
उपलब्ध
है।
|
|
मैं
मानवाधिकार
के
क्षेत्र
में
कॅरियर
बनाना
चाहती
हूँ।
कृपया
मुझे यह
बताएँ
कि इस
क्षेत्र
में
रोजगार
के क्या
अवसर
हैं? यह
कोर्स
कहाँ से
किया जा
सकता है?
-
राधिका
पाटिल,
उज्जैन
|
|
|
मानवाधिकार
में
अध्ययन
करने
के लिए
किसी
भी
विषय
में
स्नातक
होना
आवश्यक
है। इस
विषय
का
अध्ययन
करने
वाले
छात्र-छात्राओं
को एन.जी.ओ.,
इंटरनेशनल
कमिशन
ऑफ
ज्यूरिस्ट,
रेडक्रॉस,
डब्ल्यूएचओ
आदि
संस्थानों
में
काम
करने
के
अवसर
प्राप्त
होते
हैं।
इसके
अतिरिक्त
राजनीति
विज्ञान,
अंतर्राष्ट्रीय
संबंध
या
विधि
कॉलेजों
में भी
रोजगार
प्राप्त
कर
सकते
हैं।
मानवाधिकार
से
संबंधित
प्रमुख
कोर्स
एवं
संस्थान
इस
प्रकार
हैं-
-
डिप्लोमा
इन
ह्यूमन
राइट
लॉ,
देवी
अहिल्या
विश्वविद्यालय,
इंदौर।
-
पी.जी.
डिप्लोमा
इन
ह्यूमन
राइट
लॉ,
इंदिरा
गाँधी
राष्ट्रीय
मुक्त
विश्वविद्यालय
नई
दिल्ली।
-
पी.जी.
डिप्लोमा
इन
इंटरनेशनल
ह्यूमिनिटरिज
लॉ,
यूनिवसिर्टी
ऑफ
पुणे,
पुणे।
-
सटिर्फिकेट
कोर्स
इन
ह्यूमन
राइट,
यूनिवसिर्टी
ऑफ
मुंबई,
मुंबई।
|
|
पैरामेडिकल
पाठ्यक्रमों
में
कॅरियर
की क्या
संभावनाएँ
हैं?
पैरामेडिकल
पाठ्यक्रमों
में
प्रवेश
के समय
क्या
ध्यान
में
रखना
चाहिए?
-
विजय
डोडिया,
झाबुआ
|
|
|
पैरामेडिकल
पाठ्यक्रमों
में
कॅरियर
की उजली
संभावनाएँ
हैं।
फिजियोथैरेपी,
रेडियोलॉजी,
मेडिकल
लैब
टेक्नोलॉजी,
कंपाउंडर
कोर्स,
डायटीशियन,
ऑप्थेल्मोलॉजी
आदि
कोर्स
उपयोगी
हैं।
ऐसे
कोर्स
में
प्रवेश
के समय
यह देखा
जाना
चाहिए
कि
संबंधित
संस्थान
मध्यप्रदेश
पैरामेडिकल
काउंसिल
से
संबद्ध
हो और
वहाँ
अध्ययन
की
पर्याप्त
सुविधा
भी हो।
|
|
इंडियन
इंस्टीट्यूट
ऑफ
मैनेजमेंट
में
प्रवेश
की
प्रक्रिया
बताइए।
-
जितेंद्र
भावसार,
आलीराजपुर
|
|
|
इंडियन
इंस्टीट्यूट
ऑफ
मैनेजमेंट
(आईआईएम)
में
प्रवेश
लेने
के लिए
ऑनलाइन
कॉमन
एडमिशन
टेस्ट (केट)
देना
होता
है।
केट
हेतु
किसी
भी
विषय
में
स्नातक
डिग्री
आवश्यक
है।
केट
में
चयनित
होने
के बाद
ग्रुप
डिस्कशन
एवं
इंटरव्यू
में
सफल
होकर
आप
आईआईएम
में
प्रवेश
ले
सकते
हैं।
|
|
टेलीविजन
लेखन
में
पीजी
डिप्लोमा
कोर्स
पत्राचार
माध्यम
से कहाँ
से किया
जा सकता
है?
-
विजेंद्र
चौहान,
उज्जैन
|
|
|
टेलीविजन
लेखन
में
पीजी
डिप्लोमा
पाठ्यक्रम
इंदिरा
गाँधी
राष्ट्रीय
मुक्त
विश्वविद्यालय,
क्षेत्रीय
केंद्र,
तीसरी
मंजिल,
साँची
कॉम्प्लेक्स,
शिवाजी
नगर,
भोपाल
से
पत्राचार
माध्यम
से किया
जा सकता
है।
|
|
|
-
डॉ.
जयंतीलाल
भंडारी
|
|
-
|
|