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कैम्ब्रिज
यूनिवर्सिटी
के बजट में
कटौती के
ब्रिटेन
सरकार के
फैसले के
विरोध में
दुनिया के
मशहूर
वैज्ञानिक
और
भौतिकविद
प्रोफेसर
स्टीफन
हॉकिंग्स
ने
यूनिवर्सिटी
से नाता
तोड़ने और
कनाडा
जाने का मन
बना लिया
है।
कैम्ब्रिज
के घटते
बजट से
प्रोफेसर
हॉकिग्स
काफी
व्यथित
हैं। उनका
मानना है
कि इससे
वैज्ञानिक
खोजों पर
नकारात्मक
असर
पड़ेगा।
मोटर
न्यूरान
की बीमारी
से पीड़ित
हाँकिग्स
चल-फिर या
सामान्य
ढंग से बोल
नहीं सकते
हैं। उनकी
व्हील
चेयर के
साथ एक
विशेष
कम्प्यूटर
और एक
स्पीच
सिंथेसाइजर
लगा है,
जिनकी मदद
से ही बात
कर सकते
हैं।
बीमारी के
बावजूद
उन्होंने
बीसवीं
सदी की
तमाम बड़ी
खोजों पर
अपनी
टिप्पणी
दी है।
उनकी
किताब-ए
ब्रीफ
हिस्ट्री
ऑफ टाइम ने
धूम मचा दी
थी। 68 साल
के इस
वैज्ञानिक
का कहना है
कि ग्रांट
में कटौती
का मतलब है
कि
ब्रिटेन
में अब
इंडस्ट्रियल
रिसर्च पर
जोर है,
जबकि
ज्ञान और
खोज पिछली
पायदान पर
चला गया
है।
हाँकिग्स
के
ग्रेजुएट
असिस्टेंट
सैम
ब्लैकबर्न
ने 3 मार्च
को लंदन
में कहा कि
वह शिफ्ट
होने की
सोच रहे
हैं, लेकिन
यह इस बात
पर निर्भर
करेगा कि
पेरीमीटर
इंस्टीट्यूट
के लिए
उनका
योगदान
लाभदायक
रहेगा या
नहीं।
कैम्ब्रिज
में
हाँकिग्स
के सहयोगी
रहे नील
टरोक ने
कहा कि
पेरीमीटर
इंस्टीट्यूट
के दरवाजे
उनके लिए
खुले हैं।
नील 2008 में
कैम्ब्रिज
छोड़ने के
बाद कनाडा
स्थित इस
इंस्टीट्यूट
के
डायरेक्टर
बन गए थे।
पेरीमीटर
इंस्टीट्यूट
को सात साल
पहले माइक
लजारिडिस
ने शुरू
किया,
जिन्होंने
ब्लैक
बेरी
हैंडसेट
को बनाया
है।
ब्रिटेन
सरकार ने
राजकोषीय
घाटे को कम
करने के
लिए उच्च
शिक्षा के
बजट में
काफी
कटौती की
है। पिछले
तीन सालों
में करीब
एक अरब
पाउंड की
कटौती की
घोषणा की
जा चुकी
है।
अगर
स्टीफन
हाँकिग्स
अपने
फैसले पर
अडिग रहते
हैं तो
यूनिवर्सिटी
के लिए
बड़ा झटका
होगा। वे 1962
से ही इस
यूनिवर्सिटी
से जुड़े
हुए हैं।
हाँकिग्स
इस बार
गर्मी में
दो महीने
कनाडा के
पेरीमीटर
इंस्टीट्यूट
में
रहेंगे।
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