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एक
अप्रैल 2007
से
प्रारंभ
हुई
लाड़ली
लक्ष्मी
योजना से
अब तक
प्रदेश की
तकरीबन
चार लाख
बालिकाओं
को
लाभान्वित
किया जा
चुका है।
इसके तहत
अब तक तीन
लाख 96 हजार 508
बालिकाओं
को लाभ
पहुंचाया
गया। सबसे
अधिक 95
हजार 184
बालिकाएं
जबलपुर
संभाग में
लाभान्वित
हुई हैं।
इन्दौर
संभाग में
66 हजार 506,
उज्जैन
संभाग में
42 हजार 670,
सागर
संभाग में
41 हजार 435,
भोपाल
संभाग में
41 हजार 238,
ग्वालियर
संभाग में
26 हजार 391,
रीवा
संभाग में
25 हजार 638,
नर्मदापुरम
संभाग में
21 हजार 113,
चम्बल
संभाग में
19 हजार 259 और
शहडोल
संभाग में
17 हजार 674
बालिकाएं
योजना का
लाभ लेकर
अब लखपति
बनेंगी।
राज्य
सरकार ने
लाड़ली
लक्ष्मी
योजना के
महत्व को
देखते हुए
गत वर्ष
इसके
नियमों को
और सरल बना
दिया था।
अब अप्रैल
2008 के बाद
जन्मी
पहली
बालिका को
उसके माता-पिता
परिवार
नियोजन न
भी करायें
तो भी उसे
योजना का
लाभ दिया
जा रहा है।
बालिका
दिवस से
जुड़ी इस
महत्वाकांक्षी
योजना से
परिवार
कल्याण
कार्यक्रम
अपनाने के
प्रति भी
लोगों का
रुझान
निरंतर
बढ़ा है।
अप्रैल 2008
के बाद
जन्मी
पहली
बालिका के
साथ ही अब
जुड़वा
बालिकाओं
एवं ऐसी
हितग्राही
जिनके
माता-पिता
की मृत्यु
हो चुकी है,
उन्हें भी
योजना का
लाभ मिल
रहा है।
उल्लेखनीय
है राज्य
सरकार
द्वारा
बालिका
जन्म के
प्रति
जनता में
सकरात्मक
सोच, लिंग
अनुपात
में सुधार,
बालिकाओं
के
शैक्षणिक
स्तर तथा
स्वास्थ्य
की स्थिति
में सुधार
तथा उनके
अच्छे
भविष्य की
आधारशिला
रखने के
उद्देश्य
से लाड़ली
लक्ष्मी
योजना
वर्ष 2007 से
चलाई जा
रही है।
योजना का
लाभ ऐसी
बालिकाओं
को दिया जा
रहा है,
जिनके
माता-पिता
मध्यप्रदेश
के मूल
निवासी
हों, जो
आयकर दाता
न हो,
जिनकी दो
या दो से
कम संतान
हो तथा
बालिका
राज्य के
किसी भी
आगंनवाड़ी
केन्द्र
में
पंजीकृत
हो।
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