|
पूरे
देश में
शिक्षित
बेरोजगारों
के लिये
प्रधानमंत्री
रोजगार
योजना
चलायी जा
रही है।
विभिन्न
प्रदेशों
में इस
योजना के
क्रियान्वयन
की
जिम्मेदारी
उद्योग
विभाग को
सौंपी गयी
है। जिलों
में स्थित
जिला
उद्योग
केन्द्र
इस योजना
को
संचालित
कर रहे
हैं। इस
योजना के
तहत
बेरोजगार
युवाओं को
उद्योग
क्षेत्र,
सेवा
क्षेत्र
और
व्यवसाय
क्षेत्र
में
स्वरोजगार
के लिए मदद
दी जाती
है।
उद्योग
क्षेत्र
में
इलेक्ट्रिक
स्विच
बोर्ड, शू
मेकिंग,
बालपेन और
रिफिल
जैसे या इस
जैसे बहुत
से छोटे
उद्योगों
के लिये
मदद दी
जाती है।
सेवा
क्षेत्र
में आटो
रिपेयरिंग,
डी.टी.पी.,
इलेक्ट्रिकल
रिपेयरिंग
और टेंट
हाउस जैसे
काम शुरू
करने के
लिये मदद
की जाती
है। इसी
तरह
व्यवसाय
क्षेत्र
में बुक
स्टाल,
स्पोर्ट्स
शॉप, ग्रेन
मर्चेन्ट
और आयल शॉप
जैसे काम
शुरू करने
के लिये
मदद दी
जाती है।
इस योजना
के तहत यह
प्रयास
किया जाता
है कि हर
जिले में
कम से कम
एक
निश्चित
मात्रा
में
युवाओं को
इस योजना
के तहत मदद
दी जाये।
रोज़गार
और
निर्माण
के पाठकों
के लिये
प्रधानमंत्री
स्वरोजगार
योजना के
तहत
उद्योग,
सेवा और
व्यवसाय
क्षेत्र
से
संबंधित
विभिन्न
तरह की
जानकारी
लगातार
प्रकाशित
की जा रही
है। इसके
तहत इस बार
प्रस्तुत
है
अगरबत्ती
के लिये
बांस की
काड़ी/तीली
बनाने की
इकाई कैसे
लगायें।
मध्यप्रदेश
के
विभिन्न
क्षेत्रों
में
अगरबत्ती
निर्माण
की
इकाईयां
काफी
सफलतापूर्वक
चल रही
हैं। इन
इकाइयों
की प्रमुख
समस्या है
अगरबत्तियों
के
निर्माण
में लगने
वाली
काड़ी
अथवा तीली
की
उपलब्धता
की।
प्रदेश के
अगरबत्ती
उत्पादकों
को या तो
काड़ी
प्रदेश के
बाहर से
मंगवानी
पड़ती है
अथवा
स्थानीय
उत्पादकों
द्वारा
हाथ से
बनाये
जाने के
कारण यह
काफी
महंगी
पड़ती है
तथा इसकी
क्वालिटी
भी वांछित
दर्जे की
नहीं होती,
जबकि
प्रदेश के
विभिन्न
जंगलों
में इतनी
अधिक
मात्रा
में बांस
पाए जाते
हैं जिनसे
न केवल
प्रदेश के
अगरबत्ती
व्यवसाइयों
की मांग की
पूर्ति हो
सकती है
बल्कि
इससे इस
उत्पाद (बांस)
का वेल्यू
एडीशन भी
हो सकता है
तथा इससे
स्थानीय
उद्यमियों
को
स्वरोजगार
का उत्तम
माध्यम तो
मिलेगा
ही।
यद्यपि
काड़ी/तीली
का मुख्य
उपयोग
अगरबत्ती
स्टिक्स
के रूप में
है परन्तु
इसके साथ
इसके
अनेकों
अन्य
उपयोग भी
हैं।
मुख्यतया
बांस की
काड़ी/तीली
निम्नलिखित
कार्यों
के लिये
प्रयुक्त
होती है -
-
अगरबत्ती
स्टिक्स
के रूप
में
-
झाड़ू
बनाने
में
-
कुल्फी
के साथ
-
सुगर
केंडी (बुढ़िया
के बाल)
लपेटने
में
-
इसके
अतिरिक्त
इसके कई
अन्य
उपयोग भी
हो सकते
हैं।
जिन्हें
खोजना
उद्यमी
की
सृजनात्मकता
पर
निर्भर
करता है।
उपरोक्त
समस्त
उद्योग/क्रियाकलाप
(अगरबत्ती/झाड़ू/सुगर
कैंडी
निर्माण)
देश/प्रदेश
के
विभिन्न
भागों में
फलफूल रहे
हैं जिनके
लिए काफी
अधिक
मात्रा
में काड़ी/तीली
की निरंतर
आवश्यकता
बनी रहती
है तथा
जिसकी
पूर्ति
हाथ से
तीली/काड़ी
बनाकर
नहीं की जा
सकती। अत:
यदि
प्रदेश के
विभिन्न
भागों में
मशीनों का
उपयोग
करके उच्च
गुणवत्तापूर्ण
काड़ी/तीली
के
निर्माण
की
इकाईयां
स्थापित
की जायें
तो ऐसी
इकाईयां
काफी सफल
सिद्ध हो
सकती हैं।
प्रदेश के
साथ-साथ
उद्यमियों
को इन
उत्पादों
के लिये
देश के
अन्य
भागों से
भी बाजार
प्राप्त
हो सकता है
- यही
प्रस्ताव
इस योजना
में
प्रस्तुत
किया गया
है।
उत्पादन
क्षमता
इकाई
में वर्ष
में कुल 972
क्विंटल
तीलियां/काड़ियां
बनाऐ जाने
का लक्ष्य
है। ये
तीलियां/काड़ियां
विभिन्न
साईजों की
होंगी तथा
औसतन 700
रुपये
प्रति
क्विंटल
की बिक्री
दर से वर्ष
में इनकी
बिक्री से
कुल रु. 680400
रुपये की
प्राप्तियां
होंगी।
इकाई
के
वित्तीय
पहलू
1.
कार्यस्थल
की
आवश्यकता
इकाई
की
स्थापना
हेतु लगभग
800 वर्गफीट
के
निर्मित
क्षेत्र
तथा कुछ
खुले
क्षेत्र
की
आवश्यकता
होगी।
2.
मशीनरी
तथा
उपकरणों
का विवरण
इकाई
में लगने
वाले
प्रमुख
मशीनरी
तथा उपकरण
निम्नानुसार
होंगे।
|
क्र. |
उत्पाद |
संख्या |
दर
(रु.) |
कुल
मूल्य (रु.
में) |
|
1. |
बांस
काटने की
मशीन (Bamboo
cross Cutting M/C)
1 हा.पा.
मोटर
सहित |
1 |
20000/- |
20000/- |
|
2.
|
काड़ी/तीली
बनाने की
मशीन (Bamboo
forming machine)
3 हा.पा.
मोटर
सहित |
1 |
30000/- |
30000/- |
|
3. |
अन्य
सहायक
उपकरण जैसे
आरी,
रंदा आदि
तथा
हस्त
औजार |
1
|
|
5000/- |
|
4. |
स्थापना
व्यय (10%) |
.
|
.
|
5500/- |
|
.
|
.
|
योग |
= |
60500 |
3.
कच्चे माल
की लागत (प्रतिमाह)
इस
इकाई में
लगने वाला
प्रमुख
कच्चा माल
तथा उस पर
आने वाली
अनुमानित
लागत का
विवरण
निम्नानुसार
है -
|
क्र. |
कच्चे
माल का
विवरण |
मात्रा |
दर
(रु. में) |
कुल
लागत (रुपये
में) |
|
1. |
साफ
किए हुये
सूखे
बांस (विभिन्न
क्वालिटी
के) |
900
बांस |
35 |
31500/- |
|
2. |
अन्य
सामान्य
कच्चा माल,
पैकिंग
माल तथा
कंज्यूमेबल्स |
-
|
- |
3500 |
|
.
|
.
|
योग |
= |
35000/- |
(अनुमानत:
एक बांस से
7 से 9
किलोग्राम
तक काड़ी
निकलेगी)।
4.
वेतन तथा
पारिश्रमिक
(प्रतिमाह)
इकाई
के संचालन
हेतु
आवश्यक
कर्मचारी
तथा
श्रमिक
तथा उनको
प्रतिमाह
देय वेतन/पारिश्रमिक
का विवरण
निम्नानुसार
है
|
क्र. |
विवरण |
संख्या |
प्रतिमाह
देय
वेतन |
कुल
वेतन (रु.
में) |
|
1. |
प्रबंधक |
1 |
2000/- |
2000/- |
|
2. |
कुशल
कारीगर |
1 |
1500/- |
1500/- |
|
3. |
अकुशल
कारीगर |
3 |
1000/- |
3000/- |
|
.
|
.
|
.
|
योग |
6500/- |
5.
उपयोगिता
व्यय (प्रतिमाह)
इकाई
में
प्रयुक्त
होने वाली
प्रमुख
उपयोगिता
विद्युत
की है।
इकाई में
मशीनों के
संचालन
हेतु 5
हा.पा.
विद्युत
कनेक्शन
की
आवश्यकता
होगी जिस
पर 2500 रुपये
की लागत का
अनुमान
है।
6.
विविध
व्यय (प्रतिमाह)
|
क.
बीमा
किश्त |
100/- |
|
ख.
रखरखाव
तथा
मेंटेनेन्स
पर व्यय |
300/- |
|
ग.
यात्रा/परिवहन
पर व्यय |
500/- |
|
घ.
पोस्टेज
तथा
स्टेशनरी
व्यय |
200/- |
|
घ.
विक्रय
प्रोत्साहन
आदि पर
व्यय |
500/- |
|
च.
अन्य
व्यय |
400/- |
|
योग |
2000/- |
7.
कार्यशील
पूंजी (प्रतिमाह)
|
1.
कच्चे
माल की
लागत |
35000/- |
|
2.
वेतन/पारिश्रमिक
पर खर्च |
6500/- |
|
3.
उपयोगिताओं
पर व्यय |
2500/- |
|
4.
विविध
खर्चे |
2000/- |
|
5.
कार्यस्थल
का
किराया |
1000/- |
|
योग |
47000/- |
8.
कुल
परियोजना
लागत
|
1.
मशीनरी
तथा
उपकरणों
की लागत |
60500/- |
|
2.
विविध
स्थायी
परिसंपत्तियाँ |
10500/- |
|
3.
कार्यशील
पंूजी की
लागत
(दो माह
हेतु) |
94000/- |
|
योग |
165000/- |
9.
वित्तीय
स्त्रोत
प्रधानमंत्री
रोजगार
योजनान्तर्गत
वित्तीय
स्रोत
निम्नानुसार
होंगे :
|
मद |
व्यय
रु. |
|
1.
उद्यमी
से
अपेक्षित
मार्जिन
मनी |
25500/- |
|
2.
बैंक ऋण |
139500/- |
|
योग |
165000/- |
10.
उत्पादन
लागत (वार्षिक)
|
1.
कार्यशील
पूंजी की
लागत |
564000/- |
|
2.
मशीनरी/उपकरणों
पर मूल्य
ह्रास
(10%
वार्षिक
की दर से) |
6100/- |
|
3.
प्रस्तावित
बैंक ऋण
पर ब्याज
(14%
वार्षिक
की दर से) |
19350/- |
|
योग |
589450/- |
11.
इकाई की
लाभप्रदता
इकाई
में वर्ष
भर में
उत्पादित
की जाने
वाली 972
क्विंटल
तीली/काड़ी
की 700 रुपये
प्रति
क्विंटल
की दर से
बिक्री से
वर्ष में
680400/- रुपये
की
प्राप्तियां
होंगी।
इससे इकाई
की
लाभप्रदता
निम्नानुसार
रहेगी।
| 1.
वार्षिक
लाभ |
90950/- |
| 2.
मासिक
लाभ |
7579/- |
कच्चे
माल के
प्रदायकर्ता
इस
इकाई में
लगने वाला
प्रमुख
कच्चा माल
जो कि वन
विभाग से व
बांस-बल्ली
स्थानीय
प्रदायकर्ताओं
से
प्राप्त
किया जा
सकता है।
नोट
: आलेख में
दी गयी
राशि
उदाहरण के
लिए
प्रस्तुत
की गई है।
वर्तमान
में ऊपर
दिये गये
पारिश्रमिक,
पदार्थों
और सामान
के मूल्य
में
परिवर्तन
संभव है।
|
1.
मार्गदर्शन/आवेदन
पत्र
प्राप्ति
और जमा
करने का
पूरा पता
-
नोडल
एजेन्सी:-
महाप्रबंधक,
जिला
व्यापार
एवं
उद्योग
केन्द्र
-
विकासखण्ड
स्तर पर
उद्योग
विभाग
के
प्रबंधक/सहायक
प्रबंधक
से
संपर्क
किया जा
सकता
है। (उपरोक्त
अधिकारी
विकासखण्ड
कार्यालय
में
उपस्थित
रहते
हैं।)
-
मध्यप्रदेश
के सभी
जिलों
में
स्थित
सभी
राष्ट्रीयकृत
बैंकों
से भी इस
संबंध
में
जानकारी
ली जा
सकती
है।
2.
पात्रता
- सभी
वर्गों
के आवेदक
इसके
लिये
पात्र
हैं।
3.
शैक्षणिक
योग्यता -
कम से कम
आठवीं
कक्षा
उत्तीर्ण।
4.
आयु
सीमा -
सामान्य
वर्ग के
उम्मीदवार
की आयु 18
से 35 वर्ष
के बीच
होना
चाहिए।
अनुसूचित
जाति,
अनुसूचित
जनजाति
एवं
महिलाओं
के लिये
आयु सीमा
में 10
वर्ष की
छूट है।
5.
वार्षिक
आय -
समस्त
स्रोतों
से
परिवार
की
वार्षिक
आय 1.00 लाख
रुपये से
अधिक
नहीं
होनी
चाहिए।
6.
ऋण सीमा:- (अ)
व्यवसाय
एवं सेवा
कार्य
हेतु- 2.00
लाख
रुपये
तक। (ब)
उद्योग
हेतु- 5.00
लाख
रुपये
तक।
7.
मार्जिन
मनी - 5%
से लेकर 16.25%
तक।
जिससे
अनुदान
राशि और
मार्जिन
मनी का
योग
स्वीकृत
ऋण राशि
के 20%
के बराबर
हो जाये।
8.
अनुदान
की
पात्रता - 15%
तक।
अधिकतम 12,500/-
रुपये
प्रति
हितग्राही।
9.
आवेदन
के साथ
लगाये
जाने
वाले
सहपत्र -
10.
ऋण कहां
से
मिलेगा -
जिलों
में काम
कर रही
सभी
राष्ट्रीयकृत
बैंकों
की
शाखाओं
के जरिए। |
|