|
इस
बात में 30
साल लगे
हैं, लेकिन
अब अंतत:
दुनिया की
सबसे पहली
संकर
फलीदार
फसल आने
वाली है।
दावा है कि
इससे
उत्पादन
में 40
प्रतिशत
तक वृद्धि
होगी।
दुनिया भर
में
करोड़ों
लोगों के
लिए
फलियां
प्रोटीन
का सस्ता
और बढ़िया
स्रोत
होती हैं।
खास तौर से
अफ्रीका
और एशिया
के लोगों
के लिए ये
प्रोटीन
का बहुत
महत्वपूर्ण
स्रोत
हैं।
लिहाजा
अधिक उपज
वाली फसल
अत्यधिक
लाभदायक
हो सकती
है। लेकिन
फलीदार
फसलें आम
तौर पर पर
स्व-परागित
होती हैं।
अर्थात
इनमें एक
ही फूल के
पराग कण
उसी फूल के
अण्डाणुओं
का निषेचन
कर देते
हैं। यह
बात संकर
किस्में
तैयार
करने में
बाधक होती
है
क्योंकि
संकरण के
लिए पर-परागण
आवश्यक
होता है।
हाल
ही में
आंध्रप्रदेश
के
पटनचेरू
में स्थित
इंटरनेशनल
क्रॉप
रिसर्च
इंस्टीट्यूट
फॉर दी
सेमी-एरिड
ट्रॉपिक्स
(ICRISAT)
के
कुलभूषण
सक्सेना
और उनके
साथियों
ने तुअर की
संकर
किस्म
बनाने में
सफलता
प्राप्त
की है।
इसको
बनाने के
लिए जरूरी
था कि तुअर
की एक ऐसी
किस्म
तैयार की
जाए जिसके
नर अंग
अनुर्वर
हों ताकि
इनके
अण्डाणुओं
का निषेचन
अन्य
किस्मों
के पराग
कणों से
करवाया जा
सके और
अधिक उपज
वाली व
प्रोटीन
से भरपूर
किस्म
तैयार हो
सके।
ICRISAT
ने पुष्कल
नामक पहली
संकर
किस्म को
हाल ही में
बाजार में
उतारा है।
संस्थान
के
प्रबंधक
विलियम
डार का
कहना है कि
"पुष्कल
एक जादुई
तुअर है।"
|