|
हाल
के शोध से
पता चला है
कि हमारे
शरीर में
कुछ ऐसी
तंत्रिकाएं
होती हैं
जो दर्द को
देर तक बने
रहने में
भूमिका
निभाती
हैं।
कैलिफोर्निया
विश्वविद्यालय
के रॉबर्ट
एडर्वड्स
और एलन
बासबौम ने
पता लगाया
है कि शरीर
में ये
तंत्रिकाएं
एक ऐसे
संप्रेषण
मार्ग के
जरिए काम
करती हैं
जिसका पता
अभी तक
नहीं था।
आमतौर पर
ऐसा देखा
गया है कि
जब
व्यक्ति
को कोई चोट
लगी होती
है तो
हल्का-सा
दर्द भी
बहुत तीखा
महसूस
होता है।
जैसे यदि
चमड़ी
झुलसी हो
तो गर्म
पानी
दर्दनाक
रूप से
गर्म लगता
है। या यदि
हड्डी में
कोई चोट
लगी हो, तो
हल्की-फुल्की
चहलकदमी
भी
दर्दनाक
होती है।
मगर
यह पता
नहीं था कि
ऐसा क्यों
होता है।
अब लगता है
कि नए
तंत्रिका
संप्रेषण
मार्ग की
खोज से यह
पहेली
सुलझ
जाएगी।
दरअसल इन
तंत्रिकाओं
के
अस्तित्व
का पता एक
दशक पहले
ही लग गया
था मगर
इनका
कार्य पता
नहीं चल
पाया था।
एडर्वड्स
और बासबौम
ने पाया कि
सी-एलटीएमआर
नामक ये
तंत्रिकाएं
आसानी से
उत्तेजित
हो जाती
हैं। मगर
दर्द का
एहसास
कराने
वाली
तंत्रिकाएं
तो तभी
उत्तेजित
होती हैं
जब
संवेदना
काफी
तीव्र हो।
इससे ऐसा
लगता था कि
सी-एलटी
एमआर
तंत्रिकाएं
स्पर्श की
संवेदना
में काम
आती होंगी
मगर हल्के
स्पर्श का
एहसास
कराने मंे
ये कोई
भूमिका
नहीं
निभातीं।
उसके लिए
तो
तंत्रिकाओं
का दूसरा
ही समूह
होता है।
तो फिर ये
तंत्रिकाएं
करती क्या
हैं ?
शोधकर्ताओं
ने इन
तंत्रिकाओं
की भूमिका
की खोज के
लिए चूहों
पर कुछ
प्रयोग
किए हैं।
इन
प्रयोगों
में
उन्हें एक
विशेष
तथ्य से
लाभ मिला।
उन्होंने
पाया कि सी-एलटीएमआर
तंत्रिकाएं
अन्य
तंत्रिकाआंे
से
संप्रेषण
करने में
एक ऐसे
प्रोटीन
का सहारा
लेती हैं
जिसका
उपयोग
अन्य
तंत्रिकाएं
नहीं
करतीं। तो
उन्होंने
कुछ चूहों
को इस तरह
विकसित
किया कि
उनमें सी-एलटीएमआर
के
संप्रेषण
प्रोटीन
का अभाव
था। यानी
अब उनकी सी-एलटीएमआर
तंत्रिकाएं
संदेश
नहीं भेज
सकती थीं।
ऐसा
करने के
बाद भी
हल्के
स्पर्श
तथा दर्द
की
संवेदनाओं
के प्रति
सामान्य
चूहों और
सी-एलटीएमआर
रहित
चूहों की
प्रतिक्रिया
एक-सी रही।
इसके बाद
दोनों तरह
के चूहों
को
चोटग्रस्त
किया गया।
चोट लगने
के बाद
दोनों तरह
के चूहों
में बहुत
अंतर देखा
गया। जहां
हल्के से
दर्द की
संवेदना
के प्रति
सामान्य
चूहे तीखी
प्रतिक्रिया
देते थे
वहीं सी-एलटीएमआर
रहित
चूहों की
प्रतिक्रिया
वैसी ही
रही जैसी
चोट लगने
से पहले
थी। इसका
अर्थ है कि
चोट लगने
के बाद
किसी तरह
से सी-एलटीएमआर
तंत्रिका
मार्ग
दर्द की
अनुभूति
के
संप्रेषण
में शामिल
कर लिया
जाता है।
मगर एक
अपवाद भी
था। सारे
चूहों में
गर्मी के
प्रति
संवेदना
ठीक पहले
जैसी ही
रही। यानी
सी-एलटीएमआर
तंत्रिका
मार्ग
गर्मी की
संवेदना
के
संप्रेषण
में शामिल
नहीं है।
सी-एलटीएमआर
रहित चूहे
सामान्य
चूहों की
अपेक्षा
लंबे समय
तक चलने
वाले दर्द
के प्रति
कम संवेदी
हो गए थे।
शोधकर्ताओं
की राय है
कि इस खोज
के बाद
दर्द में
हस्तक्षेप
के नए
तरीके
हासिल
होने की
संभावना
है।
खासतौर से
यह स्पष्ट
हुआ है कि
चोट हमें
अन्य
संवेदनाओं
के प्रति
अति-संवेदी
क्यों बना
देती है।
|