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'रोज़गार
और
निर्माण'
के पाठकों
के लिए 'कॅरियर
की राहें'
नाम से
उपयोगी
स्तंभ
लगातार
प्रकाशित
किया जा
रहा है।
युवाओं को
कॅरियर की
विभिन्न
विधाओं से
परिचित
कराने और
कॅरियर के
रास्तों
पर आगे
बढ़ने के
लिए सफल
दिशाएँ
देने वाला
'कॅरियर की
राहें'
स्तंभ
नियमित
रूप से
महीने में
दो बार
कॅरियर
काउंसलर
श्रीमती
मीना
भंडारी
द्वारा
प्रस्तुत
किया जाता
है।
श्रीमती
भंडारी
पिछले 20
सालों से
कॅरियर
विषयों पर
लिख रही
हैं।
इतिहास
यानी बीते
हुए समय की
लंबी
ास्तान और
इसी
इतिहास को
पूरे
विश्व में
विभिन्न
दृष्टिकोणों
के साथ बार-बार
परखा जाता
रहा है।
उनमें से
कई
दृष्टिकोण
ऐसे हैं जो
पूर्वाग्रहों
की
बुनियाद
पर अपनाए
जाते हैं
और फिर
फैक्ट्स
या तथ्यों
को तोड़-मरोड़कर
उनका ऐसा
इंटरप्रेटेशन
किया जाता
है कि झूठ
सच की शक्ल
ले लेता
है। बीते
हुए कल की
व्याख्या
में अक्सर
मतभेद
होते रहे
हैं। इस
समस्या का
एकमात्र
हल है
आकिर्योलॉजी
या
पुरातत्व
विज्ञान
जिसका काम
मौजूदा
साक्ष्यों
के आधार पर
बीते हुए
कल यानी
इतिहास की
सच्चाई
उजागर
करना है।
यह सच
बताने
वाले लोग
विशेष
योग्यता
हासिल
होते हैं
और इसमें
युवाओं के
लिए
कॅरियर की
बहुत
संभावनाएँ
हैं।
गौरतलब
है कि
आकिर्योलॉजी
में
एंथ्रोपोलॉजिकल
अध्ययन
किया जाता
है, जिसके
तहत
प्राचीन
मानव
संस्कृति
को खंगाला
जाता है।
आकिर्योलॉजिस्ट
प्राचीन
मानव के
सांस्कृतिक
आचार
व्यवहार
को
व्याख्यायित
करता है।
इसके लिए
वह पुरानी
सभ्यताओं
द्वारा
छोड़ी गई
चीजों और
खंडहरों,
उनकी
गतिविधियों,
व्यवहार
आदि का
अध्ययन
करता है।
आकिर्योलॉजी
ऐतिहासिक
खोज की वह
शाखा है जो
विशुद्ध
रूप से
वैज्ञानिक
है। इसमें
प्राचीन
अवशेषों
से सामना
पड़ता है।
मसलन
प्राचीन
सिक्के,
बर्तन,
चमड़े की
किताबें,
भोजपत्र
पर लिखित
पुस्तकें,
शिलालेख,
मिट्टी के
नीचे दफन
शहरों के
खंडहर या
फिर
पुराने
किले,
मंदिर,
मस्जिद और
हर प्रकार
के
प्राचीन
अवशेष,
वस्तुओं
आदि का
अध्ययन
आकिर्योलॉजी
के
अंतर्गत
किया जाता
है।
आकिर्योलॉजिकल
मान्यूमेंट्स,
आर्ट्स
एंड
क्राफ्ट्स,
कॉइन, सील,
बीड,
लिट्रेेचर
और नेचुरल
फीचर्स के
संरक्षण
एवं
प्रबंधन
का कार्य
आकिर्योलॉजी
के
अंतर्गत
आता हैै।
आकिर्योलॉजिस्ट
या
पुरातत्ववेत्ता
न केवल इन
चीजों का
ज्ञान
रखता है
बल्कि
उनकी खोज
भी करता
है।
आकिर्योलॉजिस्ट
प्राचीन
भौतिक
अवशेषों
की खोज
करते हैं,
उनका
अध्ययन/परीक्षण
करते हैं
और फिर
अपने
ताकिर्क
निष्कर्ष
के आधार पर
इतिहास की
व्याख्या
प्रस्तुत
करते हैं।
इस
प्रक्रिया
के कारण
जहाँ एक ओर
दुनिया को
इतिहास की
सही सच्ची
जानकारी
प्राप्त
होती है
वहीं
अंधविश्वास
और
गलतफहमियों
का
निपटारा
भी इस
प्रकार की
महत्वपूर्ण
पुरातात्विक
खोजों से
संभव होता
है। समय-समय
पर
पुरातात्विक
दस्तावेज
और
वस्तुएँ
खोजी जाती
रही हैं जो
विगत का
सही-सही
लेखा-जोखा
प्रस्तुत
करने की
दिशा में
महत्वपूर्ण
भूमिका का
निर्वाह
करती हैं
और हमें और
अधिक
वैज्ञानिक
ज्ञान
प्रदान
करती हैं।
आकिर्योलॉजिकल
साइंस
हमें
ऐतिहासिक
अंधविश्वासों
और
पूर्वाग्रहों
से निजात
दिलाकर
वास्तविक
दृष्टिकोण
प्रदान
करता है।
अगर
आप इतिहास
को
खंगालने
के शौकीन
हैं और
इसके जरिए
कई तरह की
नई चीजोंं
का पता
लगाना
चाहते
हैैंं तो
आकिर्योलॉजी
के
क्षेत्र
में आपके
लिए
कॅरियर की
बहुुत
उजली
संभावनाएँ
हैं।
आकिर्योलॉजी
में
कॅरियर
बनाने के
लिए उन
विद्याथिर्यों
को आगे आना
चाहिए जो
लुप्त
समाज,
सभ्यताओं,
उनके
इतिहास
तथा
अवशेषों
के बारे
में रुचि
रखते हैं।
आकिर्योलॉजिस्ट
बनने के
लिए आपको
तीन
वषीर्य
बीए इन
आकिर्योलॉजी
डिग्री
करना होगी,
जिसके लिए
12वीं स्तर
पर एक विषय
के रूप में
इतिहास की
पढ़ाई
जरूरी है।
यदि आगे आप
एमए इन
आकिर्योलॉजी
करना
चाहते हैं
तो इसकी
न्यूनतम
योग्यता
बीए इन
आकिर्योलॉजी
या समकक्ष
है। इस
क्षेत्र
में जाने
के लिए
कम्युनिकेशन
स्किल और
आईटी
स्किल की
भी बहुुत
जरूरत
हैै।
एक
कॅरियर के
रूप में
आकिर्योलॉजी
में उजली
संभावनाएँ
हैं।
आकिर्योलॉजिकल
सर्वे ऑफ
इंडिया के
अलावा देश-विदेश
में ऐसे
बहुत से
पुरातत्व
संबंधी
संस्थान
हैं जहाँ
निदेशक,
शोधकर्ता,
सर्वेक्षक
और
आकिर्योलॉजिस्ट,
असिस्टेंट
आकिर्योलॉजिस्ट
आदि पदों
पर रोजगार
उपलब्ध
हैं।
म्यूजियमों,
आर्ट
गैलरियों,
विदेश
मंत्रालय
के
हिस्टोरिकन
डिवीजन,
शिक्षा
मंत्रालय,
भारतीय
राष्ट्रीय
अभिलेखागार,
विश्वविद्यालयों
आदि में भी
रोजगार के
अच्छे
मौके
मिलते
हैं।
सरकारी
संस्थानों
और शिक्षण
संस्थानों
में नौकरी
करने वाले
पुरातत्वविदों
को बहुत
अच्छे
वेतन पर
नियुक्ति
मिलती है
जिनके समय
और अनुभव
के आधार पर
प्रमोशन
भी होते
हैं।
आकिर्योलॉजी
में
डिग्री
लेने के
बाद शोध
संस्थानों,
ट्रेवल
एंड
टूरिज्म
इंडस्ट्री
आदि जगह भी
रोजगार के
अवसर
उपलब्ध
हैं।
ध्यातव्य
है कि
आकिर्योलॉजी
का कोर्स
करने के
बाद
अभिलेखापाल
के
प्रतिष्ठापूर्ण
पद पर भी
नियुक्त
हुआ जा
सकता है।
अभिलेखपाल
सरकारी
एजेंसियों,
स्थानीय
निकायों,
औद्योगिक
व
वाणिज्यिक
फमोर्ं,
कॉलेजों व
विश्वविद्यालयों,
अस्पतालों,
धर्मादा व
धामिर्क
संस्थानों,
संग्रहालयों,
ऐतिहासिक
सोसाइटियों,
पुस्तकालयों
और
विभिन्न
शैक्षिक
संस्थाओं
की अभिलेख
संबंधी
इकाइयों
जिनमें
हस्तलिखित
पांडुुलिपियाँ,
पत्र,
अखबार,
पुस्तकें
व
मानचित्र
योजनाएँ,
फोटोग्राफ,
डायरियाँ,
कतरनें,
कानूनी
दस्तावेज,
रेेखाओं,
फोटोकॉपी
की गई और
माइक्रो
फिल्म पर
उतारी गई
सामग्री,
वीडियो और
कम्प्यूटर
डिस्क
जैसी
विभिन्न
प्रकार की
सामग्री
शामिल हैं,
का रख-रखाव
करता हैै।
यों तो 1976
में
अभिलेखीय
प्रशिक्षण
संस्थान
की
स्थापना
की गई
जिसका नाम
1980 में
बदलकर
स्कूल ऑफ
आर्काइवल
स्टडीज कर
दिया गया।
आज यह
संस्था
अभिलेखीय
अध्ययन के
क्षेत्र
में न केवल
भारत की
बल्कि
समूचे
अफ्रीका
और एशिया
की अग्रणी
संस्था
हैै।
स्कूल ऑफ
आर्काइवल
स्टडीज
मेंं
अभिलेखागार
और अभिलेख
प्रबंधन
में एक साल
का
डिप्लोमा
पाठ््यक्रम
उपलब्ध
हैै। यह
स्नातक के
बाद किया
जा सकता
हैै तथा
इसको करने
के बाद आप
अभिलेखपाल
के रूप में
कार्य कर
सकते
हैैंं।
आकिर्योलॉजी
के
विभिन्न
कोर्स
संचालित
करने वाले
प्रमुख
संस्थान
इस प्रकार
हैं-
डिप्लोमा
इन
आकिर्योलॉजी
के लिए-
स्नातक
और
स्नातकोत्तर
पाठ्यक्रम
के लिए-
-
डॉ.
हरिसिंह
गौर
विश्वविद्यालय,
सागर -470003।
-
जीवाजी
विश्वविद्यालय,
ग्वालियर-474011
-
रानी
दुर्गावती
विश्वविद्यालय,
जबलपुर-482001।
-
गुजरात
विद्यापीठ,
आश्रम
रोड,
अहमदाबाद
वेबसाइट- www.gujratvidyapaith.ac.in
-
कोलकाता
विश्वविद्यालय,
सीनेट
हाउस, 87
कॉलेज
स्ट्रीट,
कोलकाता-700073।
-
हेमवती
नंदन
बहुगुणा
गढ़वाल
विश्वविद्यालय,
गढ़वाल-उत्तराखंड।
-
पंजाब
विश्वविद्यालय,
चंडीगढ़।
-
कुरुक्षेत्र
विश्वविद्यालय,
कुरुक्षेत्र।
-
गुरुकुल
कांगड़ी
विश्वविद्यालय,
हरिद्वार।
-
महाराजा
सयाजी
विश्वविद्यालय,
बडोदरा।
-
दिल्ली
इंस्टीट्यूट
ऑफ
हेरिटेज
रिसर्च
एंड
मैनेजमेंट,
नई
दिल्ली।
-
महषिर्
दयानंद
सरस्वती
विश्वविद्यालय,
अजमेर।
-
बनारस
हिन्दू
विश्वविद्यालय,
वाराणसी
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